• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

यूरिया की आयात लागत 57% घटी, 406 डॉलर प्रति टन पहुंची कीमत

भारत में यूरिया की आयात लागत मई के 947 डॉलर से घटकर अगस्त में 406 डॉलर प्रति टन रह गई। करीब 57% गिरावट से सरकार के उर्वरक सब्सिडी खर्च को राहत मिल सकती है।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
September 19, 2026
in कृषि समाचार
0
भारत में यूरिया की आयात लागत 57 प्रतिशत घटकर 406 डॉलर प्रति टन
0
SHARES
9
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत के लिए यूरिया के मोर्चे पर अगस्त 2026 में बड़ी राहत सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में नरमी और आयात के स्रोतों में विविधता आने के कारण भारत में आयातित यूरिया की औसत लागत घटकर करीब 406 डॉलर प्रति टन रह गई। मई 2026 में यही लागत करीब 947 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई थी। यानी कुछ ही महीनों में आयात लागत में लगभग 57 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे केंद्र सरकार के उर्वरक सब्सिडी खर्च पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। (The Financial Express)

यूरिया की कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब चालू वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी को लेकर सरकार पर काफी दबाव बना हुआ था। पश्चिम एशिया में पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव के कारण वर्ष के शुरुआती महीनों में यूरिया समेत कई उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल आया था। उस समय भारत को किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए अधिक खर्च करना पड़ा। अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में नरमी आने से सरकार के लिए कुछ राहत की स्थिति बनी है। (Business Standard)

मई में चरम पर पहुंची थी यूरिया की कीमत

2026 की शुरुआत में यूरिया का अंतरराष्ट्रीय बाजार अपेक्षाकृत सामान्य स्थिति में था, लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद आपूर्ति, समुद्री परिवहन और ऊर्जा लागत को लेकर चिंता बढ़ गई। इसका सीधा असर यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ा। मई में यूरिया की कीमत करीब 947 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई थी।

भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए इतनी ऊंची कीमत चिंता का विषय थी। देश में किसानों को यूरिया नियंत्रित कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है और अंतरराष्ट्रीय कीमत तथा किसानों से प्राप्त राशि के बीच का बड़ा अंतर सरकार की ओर से सब्सिडी के माध्यम से पूरा किया जाता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया महंगा होने का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ता है। (Business Standard)

लेकिन मई के बाद स्थिति तेजी से बदली। वैश्विक आपूर्ति में सुधार, कुछ प्रमुख निर्यातक देशों से उपलब्धता बढ़ने और भारत द्वारा आयात के स्रोतों में विविधता लाने से कीमतों में लगातार नरमी आई। अगस्त तक औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत 406 डॉलर प्रति टन रह गई। यह पिछले नौ महीनों में यूरिया का सबसे निचला स्तर बताया गया है। जुलाई के मुकाबले भी अगस्त में कीमत करीब 9.17 प्रतिशत कम रही। (Business Standard)

आयातित यूरिया पर सब्सिडी का दबाव घट सकता है

यूरिया की कीमत में गिरावट का सबसे बड़ा असर सरकार के उर्वरक सब्सिडी खर्च पर पड़ सकता है। भारत में यूरिया की बिक्री किसानों को नियंत्रित कीमत पर की जाती है। सरकार यूरिया निर्माताओं और आयातकों को लागत और निर्धारित बिक्री मूल्य के बीच का अंतर सब्सिडी के रूप में उपलब्ध कराती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमत जितनी कम होगी, आयातित यूरिया पर सरकार का संभावित वित्तीय बोझ भी उतना ही कम हो सकता है। (Press Information Bureau)

वित्त वर्ष 2025-26 में आयातित यूरिया पर सरकार की सब्सिडी करीब 47,956 करोड़ रुपये रही थी, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के लगभग 21,000 करोड़ रुपये से काफी अधिक थी। यह वृद्धि बताती है कि वैश्विक कीमतों में तेजी का सरकारी खर्च पर कितना बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। (India Today)

चालू वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में भी अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के कारण सरकार को उर्वरक सब्सिडी के बजट को लेकर चिंता थी। अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में ही उर्वरक सब्सिडी पर करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। (The Financial Express)

अब यूरिया की कीमत में आई तेज गिरावट सरकार के लिए राहत का कारण बन सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे उर्वरक क्षेत्र का सब्सिडी खर्च उसी अनुपात में कम हो जाएगा।

डीएपी और अन्य उर्वरकों की कीमतें अब भी चुनौती

यूरिया की कीमतों में गिरावट के बावजूद उर्वरक क्षेत्र में पूरी तरह राहत की स्थिति नहीं बनी है। डीएपी, एमओपी और जटिल उर्वरकों से जुड़े कई कच्चे माल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं। अगस्त 2026 में सल्फर की अंतरराष्ट्रीय कीमत पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक रही। अमोनिया की कीमत में भी करीब 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि फॉस्फोरिक एसिड की कीमत करीब 18 प्रतिशत अधिक रही। (Business Standard)

भारत डीएपी और कई अन्य उर्वरकों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। इसलिए यूरिया की सस्ती होती कीमत से जो राहत मिल रही है, उसका एक हिस्सा अन्य उर्वरकों और उनके कच्चे माल की महंगी कीमतों से संतुलित हो सकता है। विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषण में भी यह बात सामने आई है कि यूरिया की कीमतों में गिरावट के बावजूद डीएपी और एमओपी की कीमतों में मजबूती उर्वरक सब्सिडी पर दबाव बनाए रख सकती है। (mint)

अगस्त में करीब 7 लाख टन यूरिया का आयात

कम कीमत का फायदा केवल भविष्य की खरीद में ही नहीं, बल्कि वास्तविक आयात में भी दिखाई दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अगस्त 2026 में करीब 0.70 मिलियन टन यानी लगभग 7 लाख टन यूरिया का आयात किया। इस दौरान औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत 406 डॉलर प्रति टन रही। (Business Standard)

इससे यह संकेत मिलता है कि भारत ने वैश्विक बाजार में कीमतों में आई नरमी का लाभ उठाने की कोशिश की है। इससे खरीफ सीजन के दौरान आपूर्ति बनाए रखने और आगामी रबी सीजन के लिए पर्याप्त भंडार तैयार करने में भी मदद मिल सकती है।

अगस्त में इससे पहले भी भारतीय कंपनियों द्वारा कम कीमत पर यूरिया खरीदने की खबरें सामने आई थीं। जुलाई में जारी एक निविदा के बाद करीब 17 लाख टन यूरिया की खरीद लगभग 390.25 से 393.65 डॉलर प्रति टन की दरों पर किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह दर मई में देखी गई ऊंची कीमतों की तुलना में काफी कम थी। (NDTV Profit)

किसानों को कीमत में तुरंत राहत क्यों नहीं दिखेगी?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत कम होने का लाभ किसानों को सीधे खुदरा कीमत में दिखाई देना जरूरी नहीं है। भारत में यूरिया की कीमत सरकार द्वारा नियंत्रित है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने पर भी किसान को बाजार के हिसाब से कीमत नहीं चुकानी पड़ती और कीमत घटने पर भी खुदरा कीमत स्वतः उसी अनुपात में कम नहीं होती।

इसका मुख्य लाभ सरकार के सब्सिडी खर्च और उर्वरक कंपनियों की लागत के स्तर पर दिखाई देता है। यदि आयात लागत लंबे समय तक कम बनी रहती है तो सरकार को प्रति टन यूरिया पर अपेक्षाकृत कम सब्सिडी देनी पड़ सकती है। इससे भविष्य में उर्वरक बजट पर दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

यूरिया की कीमत में आगे क्या होगा?

अगले कुछ महीनों में यूरिया की कीमत का रुख वैश्विक आपूर्ति, प्राकृतिक गैस की कीमत, समुद्री परिवहन, प्रमुख निर्यातक देशों की नीतियों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर निर्भर करेगा। यूरिया उत्पादन में प्राकृतिक गैस की लागत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए ऊर्जा बाजार में अचानक तेजी आने पर यूरिया की कीमत फिर बढ़ सकती है। (Business Standard)

दूसरी ओर, यदि वैश्विक आपूर्ति सामान्य रहती है और प्रमुख निर्यातक देशों से पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध होती रहती है तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। भारत के लिए यह स्थिति आयात लागत को नियंत्रित रखने में मददगार होगी।

सरकार के लिए राहत, लेकिन सतर्कता जरूरी

यूरिया की आयात लागत का 947 डॉलर से घटकर 406 डॉलर प्रति टन होना निश्चित रूप से भारतीय उर्वरक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। करीब 57 प्रतिशत की गिरावट से आयातित यूरिया की लागत में बड़ा अंतर आया है और इससे सरकार के सब्सिडी खर्च के अनुमान को संशोधित करने की गुंजाइश बन सकती है। (The Financial Express)

फिर भी सरकार के सामने चुनौती केवल यूरिया की कीमत तक सीमित नहीं है। डीएपी, एमओपी, एनपीके और इनके कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी उर्वरक सब्सिडी के कुल खर्च को प्रभावित करती हैं। इसलिए आने वाले महीनों में उर्वरक बाजार की दिशा कई अलग-अलग वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी।

फिलहाल यूरिया की कीमतों में आई गिरावट ने सरकार को उस समय कुछ राहत दी है, जब उर्वरक सब्सिडी पर पहले से ही दबाव था। यदि यह नरमी आगे भी बनी रहती है तो इससे आयात लागत, सरकारी सब्सिडी और देश में उर्वरक उपलब्धता—तीनों मोर्चों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन वैश्विक बाजार में किसी नए भू-राजनीतिक संकट या ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल से यह स्थिति फिर बदल भी सकती है। इसलिए आने वाले महीनों में यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमत और भारत की आयात नीति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

 

Tags: अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजारउर्वरकउर्वरक सब्सिडीकिसानकृषि समाचारखादभारत में यूरियायूरियायूरिया आयातयूरिया कीमत
Previous Post

Cotton Pest Management: कपास के प्रमुख कीटों की पहचान और Integrated Pest Management की पूरी जानकारी

Next Post

रबी सीजन 2026 के लिए उर्वरक उपलब्धता पर सरकार का जोर, राज्यों के साथ बनेगी योजना

Next Post
रबी सीजन के लिए उर्वरक और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी

रबी सीजन 2026 के लिए उर्वरक उपलब्धता पर सरकार का जोर, राज्यों के साथ बनेगी योजना

Recent Posts

  • Groundnut Farming: मूंगफली की बंपर पैदावार चाहिए? बुवाई से कटाई तक इन बातों का रखें ध्यान
  • रबी सीजन 2026 के लिए उर्वरक उपलब्धता पर सरकार का जोर, राज्यों के साथ बनेगी योजना
  • यूरिया की आयात लागत 57% घटी, 406 डॉलर प्रति टन पहुंची कीमत
  • Cotton Pest Management: कपास के प्रमुख कीटों की पहचान और Integrated Pest Management की पूरी जानकारी
  • Sugarcane Farming: गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए अपनाएं ये बेहतरीन तरीके

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.