खेती में पानी की उपलब्धता और सिंचाई पर होने वाला खर्च किसानों के लिए दो महत्वपूर्ण विषय हैं। कई क्षेत्रों में भूजल का स्तर नीचे जा रहा है, जबकि डीजल, बिजली, मजदूरी और अन्य कृषि लागत बढ़ने से सिंचाई भी महंगी होती जा रही है। ऐसी स्थिति में कम पानी में फसल को जरूरत के अनुसार सिंचाई देना काफी महत्वपूर्ण हो गया है। इसी उद्देश्य के लिए ड्रिप इरिगेशन (Drip Irrigation) या टपक सिंचाई एक उपयोगी आधुनिक सिंचाई तकनीक है।
ड्रिप इरिगेशन में पानी को पूरे खेत में एक साथ बहाने के बजाय पाइप और ड्रिपर की मदद से पौधों के जड़ क्षेत्र तक नियंत्रित मात्रा में पहुंचाया जाता है। इससे पानी का अनावश्यक फैलाव, बहाव और वाष्पीकरण कम किया जा सकता है। सही डिजाइन और उचित प्रबंधन के साथ यह तकनीक पानी के उपयोग को अधिक कुशल बनाने के साथ सिंचाई से जुड़ी कुछ लागतों को भी कम कर सकती है।
लेकिन किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ड्रिप इरिगेशन से पानी और लागत की कितनी बचत हो सकती है? क्या हर फसल में समान बचत होती है? ड्रिप सिस्टम लगाने में कितना खर्च आता है और यह निवेश कब फायदेमंद साबित हो सकता है?
Drip Irrigation क्या है?
ड्रिप इरिगेशन (System) एक ऐसी सिंचाई पद्धति है जिसमें पानी को पाइपलाइन के माध्यम से पौधों तक पहुंचाया जाता है और ड्रिपर या एमिटर के जरिए कम मात्रा में सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र के आसपास छोड़ा जाता है।
पारंपरिक सतही सिंचाई में कई बार खेत के बड़े हिस्से को पानी से भिगोना पड़ता है। इसके विपरीत ड्रिप सिस्टम का उद्देश्य मुख्य रूप से उसी हिस्से में पानी पहुंचाना है जहां पौधे की जड़ें उसका उपयोग कर सकें।
एक सामान्य Drip Irrigation System https://fasalkranti.in/ में मुख्य पाइप, सब-मेन पाइप, लेटरल पाइप, ड्रिपर या एमिटर, फिल्टर, वाल्व, प्रेशर कंट्रोल और जरूरत के अनुसार फर्टिगेशन यूनिट जैसे हिस्से शामिल हो सकते हैं।यही नियंत्रित व्यवस्था ड्रिप इरिगेशन को पानी बचाने वाली तकनीक बनाती है।
Drip Irrigation से कितना पानी बच सकता है?
किसान जब Drip Irrigation Water Saving के बारे में जानकारी लेते हैं तो उनका पहला सवाल अक्सर यही होता है कि वास्तव में इससे कितने प्रतिशत पानी की बचत होती है।इसका कोई एक निश्चित प्रतिशत हर खेत, फसल और क्षेत्र पर लागू नहीं किया जा सकता। पानी की वास्तविक बचत फसल, मिट्टी, जलवायु, खेत की स्थिति, पुराने सिंचाई तरीके, सिस्टम डिजाइन और किसान द्वारा किए जा रहे प्रबंधन पर निर्भर करती है। व्यवहार में अच्छी तरह डिजाइन और संचालित ड्रिप सिंचाई व्यवस्था पारंपरिक सतही सिंचाई की तुलना में पानी के उपयोग को काफी कम कर सकती है। कई परिस्थितियों में लगभग 30 से 60 प्रतिशत तक पानी की बचत देखने को मिल सकती है। कुछ परिस्थितियों में यह अंतर इससे कम या अधिक भी हो सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी फसल में पारंपरिक सिंचाई के दौरान एक निश्चित अवधि में 100 यूनिट पानी इस्तेमाल हो रहा है और ड्रिप सिस्टम अपनाने के बाद वही सिंचाई जरूरत 50 से 70 यूनिट पानी से पूरी हो जाती है, तो लगभग 30 से 50 यूनिट पानी की बचत हो सकती है।
ड्रिप इरिगेशन पानी कैसे बचाता है?
ड्रिप सिंचाई में पानी की बचत केवल कम पानी देने के कारण नहीं होती। इसका मुख्य कारण पानी को अधिक नियंत्रित तरीके से सही स्थान पर पहुंचाना है।
1. पानी सीधे जड़ों के पास पहुंचता है
ड्रिपर से निकलने वाला पानी पौधों के जड़ क्षेत्र के आसपास दिया जाता है। इससे उन जगहों पर पानी देने की जरूरत कम होती है जहां फसल की जड़ें मौजूद नहीं हैं।
2. सतही बहाव कम हो सकता है
खेत में एक साथ बड़ी मात्रा में पानी छोड़ने पर कुछ पानी खेत से बहकर बाहर जा सकता है। ड्रिप सिस्टम में पानी धीरे और नियंत्रित मात्रा में दिया जाता है, जिससे उचित प्रबंधन की स्थिति में सतही बहाव को कम किया जा सकता है।
3. वाष्पीकरण का नुकसान कम किया जा सकता है
पूरे खेत की सतह को बार-बार भिगोने की तुलना में ड्रिप सिस्टम सीमित क्षेत्र को गीला करता है। इससे खुली सतह से होने वाले पानी के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
4. जरूरत के अनुसार सिंचाई
ड्रिप सिस्टम के माध्यम से किसान सिंचाई की अवधि और पानी की मात्रा पर बेहतर नियंत्रण रख सकता है। यदि मिट्टी की नमी और फसल की अवस्था को ध्यान में रखकर सिंचाई की जाए तो जरूरत से अधिक पानी देने से बचा जा सकता है। इसी कारण खेती में पानी बचाने की तकनीक के रूप में ड्रिप इरिगेशन का महत्व बढ़ा है।
पारंपरिक सिंचाई और ड्रिप इरिगेशन में अंतर
पारंपरिक सिंचाई में पानी अक्सर नालियों या खेत की सतह के माध्यम से पहुंचाया जाता है। इसमें पूरे या बड़े क्षेत्र को गीला करना पड़ सकता है। असमान खेत या गलत प्रबंधन होने पर कुछ हिस्सों में जरूरत से ज्यादा और कुछ हिस्सों में कम पानी पहुंच सकता है।दूसरी ओर, Drip Irrigation System में पानी पाइप और एमिटर के जरिए निर्धारित स्थान पर पहुंचाया जाता है। इससे सिंचाई को अधिक नियंत्रित बनाया जा सकता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ड्रिप सिस्टम हर परिस्थिति में अपने आप बेहतर परिणाम देगा। खराब डिजाइन, बंद ड्रिपर, गलत प्रेशर या अनुचित सिंचाई शेड्यूल होने पर इसकी कार्यक्षमता कम हो सकती है।
ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई की लागत कैसे कम हो सकती है?
पानी की बचत के साथ किसानों के लिए ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई खर्च में बचत भी महत्वपूर्ण है। सिंचाई की लागत में केवल पानी शामिल नहीं होता। पानी पंप करने के लिए बिजली या डीजल, मजदूरी, खाद देने की प्रक्रिया और अन्य प्रबंधन लागत भी जुड़ी होती है।
पंपिंग खर्च में संभावित कमी
यदि कम मात्रा में पानी पंप करना पड़े तो मोटर या पंप को कम समय चलाने की आवश्यकता हो सकती है। इससे बिजली या डीजल की खपत कम हो सकती है।मान लीजिए कि किसी खेत में पारंपरिक सिंचाई के लिए मोटर को एक सिंचाई चक्र में 10 घंटे चलाना पड़ता है। यदि उचित ड्रिप सिस्टम और सिंचाई प्रबंधन के बाद आवश्यक पानी कम हो जाता है और पंपिंग अवधि घटती है, तो ऊर्जा खर्च भी कम हो सकता है।हालांकि वास्तविक बचत पंप की क्षमता, पानी की गहराई, बिजली दर, डीजल की कीमत, सिस्टम प्रेशर और सिंचाई की अवधि पर निर्भर करेगी।
मजदूरी खर्च में बचत
पारंपरिक सिंचाई में खेत की नालियां खोलने-बंद करने, पानी की दिशा बदलने और सिंचाई की निगरानी के लिए अधिक श्रम की जरूरत पड़ सकती है।ड्रिप सिस्टम स्थापित होने के बाद कई कार्य वाल्व खोलकर या नियंत्रित सिंचाई प्रणाली के माध्यम से किए जा सकते हैं। इससे कुछ परिस्थितियों में सिंचाई के लिए आवश्यक मजदूरी कम हो सकती है।बड़े बागों और नियमित सिंचाई वाली फसलों में यह लाभ अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
फर्टिगेशन से खाद के बेहतर उपयोग की संभावना
ड्रिप इरिगेशन का एक बड़ा फायदा Fertigation की सुविधा है। फर्टिगेशन का अर्थ सिंचाई के पानी के साथ घुलनशील उर्वरक देना है।इसके माध्यम से खाद को पौधों के जड़ क्षेत्र तक नियंत्रित मात्रा में पहुंचाया जा सकता है। इससे किसान फसल की अवस्था और जरूरत के अनुसार पोषक तत्व दे सकता है।
सही फर्टिगेशन प्रबंधन से उर्वरकों के उपयोग की दक्षता बेहतर हो सकती है और अनावश्यक नुकसान को कम किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए सही उर्वरक, मात्रा, पानी की गुणवत्ता और तकनीकी जानकारी जरूरी है।
खरपतवार प्रबंधन में संभावित फायदा
पारंपरिक सिंचाई में खेत का बड़ा हिस्सा गीला होने के कारण कई जगह खरपतवार को भी नमी मिल जाती है। ड्रिप सिस्टम में मुख्य रूप से पौधों के आसपास का क्षेत्र गीला किया जाता है।इससे कुछ परिस्थितियों में पौधों की कतारों के बीच खरपतवार का दबाव कम हो सकता है। यदि खरपतवार कम होते हैं तो निराई-गुड़ाई पर होने वाले खर्च में भी कमी की संभावना रहती है।यह लाभ फसल, मौसम और खेत में पहले से मौजूद खरपतवारों की स्थिति पर निर्भर करता है।
Drip Irrigation Cost per Acre कितना हो सकता है?
ड्रिप इरिगेशन लगाने की लागत किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती खर्च है। Drip Irrigation Cost per Acre का कोई एक निश्चित आंकड़ा नहीं होता क्योंकि सिस्टम की कीमत कई चीजों पर निर्भर करती है।
लागत पर फसल की दूरी, पौधों की संख्या, पाइप की गुणवत्ता, लेटरल की लंबाई, फिल्टर का प्रकार, पानी का स्रोत, खेत का आकार, जमीन की ढाल, ऑटोमेशन और फर्टिगेशन उपकरण जैसी चीजों का प्रभाव पड़ता है।सब्जियों जैसी कम दूरी वाली फसलों में लेटरल और ड्रिपर की जरूरत अधिक हो सकती है, जबकि अधिक दूरी पर लगाए गए कुछ फलदार पौधों में सिस्टम डिजाइन अलग होगा।इसलिए किसान को केवल “प्रति एकड़ ड्रिप सिस्टम की कीमत” देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। सिस्टम की गुणवत्ता, वारंटी, सर्विस, डिजाइन और बाद में उपलब्ध स्पेयर पार्ट्स को भी देखना जरूरी है।
ड्रिप इरिगेशन की लागत कितने समय में निकल सकती है?
ड्रिप सिस्टम में शुरुआती निवेश होता है, इसलिए किसान के लिए Payback Period of Drip Irrigation समझना जरूरी है।मान लीजिए किसी किसान ने ड्रिप सिस्टम पर कुल 60,000 रुपये खर्च किए। सिस्टम लगाने के बाद बिजली या डीजल, मजदूरी और अन्य सिंचाई संबंधित मदों में सालाना 15,000 रुपये की शुद्ध बचत होती है।साधारण गणना के अनुसार:
निवेश वापसी अवधि = कुल निवेश ÷ सालाना शुद्ध बचत
60,000 ÷ 15,000 = 4 वर्ष
इस उदाहरण में निवेश की साधारण वापसी अवधि लगभग चार वर्ष होगी।यह केवल समझाने के लिए उदाहरण है। वास्तविक स्थिति में सिस्टम की मरम्मत, फिल्टर सफाई, लेटरल बदलने की जरूरत, फसल उत्पादन में बदलाव, सब्सिडी और अन्य खर्च भी गणना में शामिल किए जाने चाहिए।
एक एकड़ खेत में पानी की बचत का उदाहरण
मान लीजिए एक किसान एक एकड़ सब्जी की खेती करता है और पारंपरिक सिंचाई में पूरे सीजन के दौरान 10 लाख लीटर पानी इस्तेमाल करता है।यदि ड्रिप इरिगेशन अपनाने के बाद उसी फसल की सिंचाई 6 लाख लीटर पानी में प्रभावी रूप से हो जाती है, तो:
कुल पानी की बचत = 10 लाख – 6 लाख = 4 लाख लीटर
यानी इस काल्पनिक उदाहरण में पानी की खपत लगभग 40 प्रतिशत कम हुई।यदि पानी को पंप करने के लिए बिजली या डीजल का उपयोग किया जाता है, तो पानी की मात्रा कम होने से पंपिंग खर्च में भी कमी आ सकती है। इसी तरह किसान अपने खेत का वास्तविक डेटा लिखकर Drip Irrigation Water Saving Calculation कर सकता है।
किन फसलों में ड्रिप इरिगेशन उपयोगी हो सकता है?
ड्रिप इरिगेशन कई प्रकार की फसलों में इस्तेमाल किया जाता है। विशेष रूप से बागवानी और कतारों में उगाई जाने वाली फसलों में इसका उपयोग काफी आम है।टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा, तरबूज, खरबूजा, प्याज जैसी सब्जियों में ड्रिप सिस्टम उपयोगी हो सकता है। इसी तरह अंगूर, अनार, केला, आम, अमरूद, पपीता और साइट्रस जैसी बागवानी फसलों में भी ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल किया जाता है।गन्ना, कपास और कुछ अन्य कतार वाली फसलों में भी स्थानीय परिस्थितियों और कृषि सिफारिशों के अनुसार ड्रिप सिस्टम अपनाया जा सकता है।फसल का चयन करते समय किसान को अपने क्षेत्र की मिट्टी, पानी की उपलब्धता, बाजार मूल्य और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह को ध्यान में रखना चाहिए।
रेतीली और भारी मिट्टी में ड्रिप इरिगेशन
मिट्टी का प्रकार ड्रिप सिस्टम के संचालन को प्रभावित करता है।रेतीली मिट्टी में पानी तेजी से नीचे जा सकता है। इसलिए ऐसी मिट्टी में कम मात्रा में लेकिन अपेक्षाकृत अधिक बार सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है।भारी या चिकनी मिट्टी में पानी धीरे-धीरे फैलता और नीचे जाता है। ऐसे खेतों में बहुत अधिक पानी एक साथ देने से जड़ क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा नमी की समस्या हो सकती है। इसलिए Drip Irrigation Scheduling मिट्टी के प्रकार के अनुसार किया जाना चाहिए।
ड्रिप इरिगेशन से फसल उत्पादन पर क्या असर पड़ सकता है?
सही सिंचाई फसल उत्पादन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पौधों को जरूरत के समय पर्याप्त नमी मिलने से पानी की कमी के कारण होने वाले तनाव को कम किया जा सकता है।ड्रिप सिस्टम में किसान अपेक्षाकृत नियमित अंतराल पर पानी दे सकता है। यदि इसके साथ पोषक तत्वों और अन्य कृषि प्रबंधन को भी सही रखा जाए तो कई फसलों में उत्पादन और गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि केवल ड्रिप लगाने से उत्पादन बढ़ने की गारंटी नहीं होती। बीज या पौध सामग्री, मिट्टी की उर्वरता, रोग और कीट प्रबंधन, मौसम तथा खेती की अन्य तकनीकों का भी उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है।
ड्रिप सिस्टम की देखभाल क्यों जरूरी है?
ड्रिप इरिगेशन से अपेक्षित पानी और लागत बचत तभी मिल सकती है जब सिस्टम ठीक तरीके से काम करे।ड्रिपर के छोटे छिद्र पानी में मौजूद मिट्टी, लवण या अन्य पदार्थों के कारण बंद हो सकते हैं। इसलिए फिल्टर की नियमित सफाई जरूरी है।समय-समय पर लेटरल पाइप और मुख्य लाइन की जांच करनी चाहिए। कहीं पाइप से पानी लीक हो रहा हो तो उसे ठीक करना चाहिए।सिस्टम में सही प्रेशर भी जरूरी है। बहुत कम प्रेशर होने पर अंतिम हिस्से के पौधों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच सकता, जबकि जरूरत से ज्यादा प्रेशर सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। Drip Irrigation Maintenance को नजरअंदाज करने से पानी की बचत कम होने के साथ फसल की सिंचाई भी असमान हो सकती है।
ड्रिप इरिगेशन के मुख्य फायदे
Drip Irrigation Benefits for Farmers केवल पानी की बचत तक सीमित नहीं हैं। सही परिस्थितियों में किसान को कई स्तरों पर लाभ मिल सकते हैं।पानी का अधिक नियंत्रित उपयोग, पंपिंग समय में संभावित कमी, सिंचाई में मजदूरी की बचत, फर्टिगेशन की सुविधा और खरपतवार प्रबंधन में संभावित मदद इसके प्रमुख फायदे हैं।पानी की कमी वाले क्षेत्रों में इसका सबसे बड़ा लाभ यह हो सकता है कि उपलब्ध सीमित जल संसाधन का अधिक कुशल तरीके से उपयोग किया जाए।
ड्रिप इरिगेशन की सीमाएं भी समझें
ड्रिप इरिगेशन के फायदे हैं, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं।सबसे पहले सिस्टम लगाने के लिए शुरुआती निवेश करना पड़ता है। छोटे किसानों के लिए यह खर्च महत्वपूर्ण हो सकता है।दूसरा, खराब पानी की गुणवत्ता होने पर ड्रिपर बंद होने की समस्या आ सकती है। इसलिए सही फिल्ट्रेशन और रखरखाव जरूरी है।तीसरा, खेत और फसल के अनुसार गलत डिजाइन किया गया सिस्टम अपेक्षित परिणाम नहीं देगा। केवल सस्ता सिस्टम खरीदना हमेशा बेहतर विकल्प नहीं होता।इसके अलावा पाइप या लेटरल को खेत में मशीन, पशु या अन्य गतिविधियों से नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए नियमित निरीक्षण जरूरी है।
सरकारी सब्सिडी से लागत कम हो सकती है
भारत में सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर समय-समय पर योजनाएं चलाई जाती हैं। इनके अंतर्गत पात्र किसानों को ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने के लिए वित्तीय सहायता मिल सकती है।
सब्सिडी की राशि, पात्रता, फसल, भूमि सीमा और आवेदन प्रक्रिया राज्य तथा योजना के अनुसार बदल सकती है। इसलिए किसान को सिस्टम खरीदने से पहले अपने राज्य के कृषि या उद्यान विभाग से वर्तमान नियमों की जानकारी लेनी चाहिए।
यदि किसान को पात्र योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता मिलती है, तो उसकी अपनी शुरुआती निवेश लागत कम हो सकती है। इससे Drip Irrigation Cost for Farmers अधिक किफायती हो सकती है।
ड्रिप सिस्टम लगाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
ड्रिप इरिगेशन में निवेश करने से पहले किसान को अपने खेत का सही आकलन करना चाहिए।सबसे पहले पानी के स्रोत और उसकी गुणवत्ता की जांच उपयोगी है। पानी में मिट्टी, लवण या अन्य अशुद्धियां अधिक होने पर उचित फिल्टर की आवश्यकता होगी।
इसके बाद खेत का क्षेत्रफल, फसल की दूरी, पौधों की संख्या, जमीन की ढाल और पानी के दबाव के अनुसार सिस्टम डिजाइन होना चाहिए।
किसान को ऐसी कंपनी या आपूर्तिकर्ता का चयन करना चाहिए जो इंस्टॉलेशन के साथ तकनीकी सहायता और बिक्री के बाद सर्विस भी दे सके।
सिर्फ शुरुआती कीमत के आधार पर निर्णय लेने की बजाय सिस्टम की अनुमानित उम्र और रखरखाव खर्च भी देखना चाहिए।
पानी और लागत की वास्तविक बचत कैसे पता करें?
यदि किसान यह जानना चाहता है कि उसके खेत में Water and Cost Savings with Drip Irrigation वास्तव में कितनी है, तो उसे रिकॉर्ड रखना चाहिए।ड्रिप सिस्टम लगाने से पहले एक फसल सीजन में सिंचाई के घंटे, बिजली या डीजल खर्च, मजदूरी खर्च और अनुमानित पानी की खपत नोट करें।ड्रिप सिस्टम लगाने के बाद उसी प्रकार रिकॉर्ड रखें।इसके बाद दोनों आंकड़ों की तुलना करें।उदाहरण के लिए यदि पहले सिंचाई पर 30,000 रुपये सालाना खर्च हो रहे थे और ड्रिप के बाद समान क्षेत्र और तुलनीय परिस्थितियों में खर्च 20,000 रुपये रह गया, तो प्रत्यक्ष सिंचाई खर्च में 10,000 रुपये की कमी हुई।लेकिन सही आर्थिक विश्लेषण के लिए ड्रिप सिस्टम के सालाना रखरखाव और उपकरण बदलने की लागत भी घटानी चाहिए।
क्या हर किसान के लिए ड्रिप इरिगेशन फायदेमंद है?
ड्रिप इरिगेशन एक प्रभावी तकनीक हो सकती है, लेकिन इसका आर्थिक लाभ हर किसान के लिए समान नहीं होगा।जहां पानी की कमी है, पानी पंप करने की लागत अधिक है, उच्च मूल्य वाली बागवानी या सब्जी फसलें उगाई जाती हैं और नियमित सिंचाई की जरूरत होती है, वहां ड्रिप सिस्टम का आर्थिक महत्व अधिक हो सकता है।वहीं कुछ फसलों, छोटे सिंचाई क्षेत्र या बहुत कम पंपिंग लागत वाली परिस्थितियों में निवेश की वापसी में अधिक समय लग सकता है।इसलिए किसान को अपने खेत के आंकड़ों के आधार पर लागत और संभावित बचत की गणना करनी चाहिए।
ड्रिप इरिगेशन से पानी और लागत की बचत आधुनिक खेती में जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण विषय है। सही डिजाइन, उचित सिंचाई शेड्यूल और नियमित रखरखाव के साथ ड्रिप इरिगेशन पारंपरिक सतही सिंचाई की तुलना में पानी के उपयोग को काफी कम कर सकता है। कई परिस्थितियों में पानी की बचत लगभग 30 से 60 प्रतिशत के दायरे में हो सकती है, हालांकि वास्तविक परिणाम फसल, मिट्टी, मौसम और पुराने सिंचाई तरीके पर निर्भर करेंगे।
पानी की कम जरूरत के कारण पंपिंग पर खर्च होने वाली बिजली या डीजल में भी बचत संभव है। इसके अलावा मजदूरी, फर्टिगेशन और खरपतवार प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी आर्थिक लाभ मिल सकता है।
हालांकि ड्रिप सिस्टम में शुरुआती निवेश और नियमित रखरखाव की जरूरत होती है। इसलिए केवल संभावित बचत का प्रतिशत देखकर फैसला करने के बजाय किसान को Drip Irrigation Cost per Acre, सालाना परिचालन खर्च, उपलब्ध सब्सिडी, फसल का मूल्य और सिस्टम की अनुमानित आयु को ध्यान में रखना चाहिए।
अंततः, ड्रिप इरिगेशन का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल “कम पानी देना” नहीं बल्कि सही मात्रा में, सही समय पर और सही जगह पानी पहुंचाना है। यही तरीका उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और खेती की लागत को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

