मोटे अनाज यानी मिलेट्स को खेत से सीधे बाजार तक पहुंचाने और किसानों को स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन का अवसर देने की दिशा में कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। Durgada Millets Farmer Producer Company Ltd. ने 8 टन प्रतिदिन क्षमता वाली मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की है। इस किसान उत्पादक कंपनी से 1,334 किसान सदस्य जुड़े हुए हैं।
यह पहल विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मिलेट्स का उत्पादन करने वाले किसानों के लिए केवल खेती ही नहीं, बल्कि सफाई, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच भी आय और व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग सुविधा उपलब्ध होने से उत्पाद को कच्चे अनाज के बजाय मूल्यवर्धित उत्पादों के रूप में बाजार तक पहुंचाने के अवसर बढ़ सकते हैं।
Durgada Millets Farmer Producer Company Ltd. को चित्रदुर्ग के PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana (PM-DDKY) से जुड़े कृषि विकास प्रयासों के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। चित्रदुर्ग PM-DDKY के 100 चयनित जिलों में शामिल है। आधिकारिक PM-DDKY जानकारी के अनुसार इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित करना, कटाई के बाद की भंडारण एवं प्रसंस्करण सुविधाओं को मजबूत करना, सिंचाई सुधारना तथा कृषि ऋण तक पहुंच बढ़ाना है।
1,334 किसान सदस्यों की FPO ने उठाया कदम
Durgada Millets Farmer Producer Company Ltd. से 1,334 किसान जुड़े हैं। किसान उत्पादक संगठन यानी FPO (Farmer Producer Organisation) का मूल उद्देश्य किसानों को सामूहिक रूप से उत्पादन, इनपुट खरीद, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ना है।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए अकेले बड़े बाजार तक पहुंच बनाना कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है। FPO के माध्यम से किसान सामूहिक रूप से अपनी उपज का प्रबंधन कर सकते हैं और प्रसंस्करण जैसी सुविधाओं का उपयोग साझा स्तर पर कर सकते हैं।
चित्रदुर्ग में स्थापित मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट इसी सामूहिक व्यवस्था को आगे बढ़ाती है। 8 टन प्रतिदिन की क्षमता वाली इकाई किसानों की उपज को स्थानीय स्तर पर प्रोसेस करने के लिए आधारभूत सुविधा उपलब्ध कराती है।
8 टन प्रतिदिन की प्रोसेसिंग क्षमता
इस पहल की प्रमुख विशेषता इसकी 8 टन प्रतिदिन की प्रसंस्करण क्षमता है। इसका अर्थ है कि यूनिट प्रतिदिन मिलेट की पर्याप्त मात्रा को प्रसंस्करण के लिए संभालने में सक्षम है।
मिलेट्स की कटाई के बाद कई तरह की प्रक्रियाओं की आवश्यकता हो सकती है। इनमें सफाई, छंटाई, ग्रेडिंग, डी-हस्किंग और अन्य प्रसंस्करण गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। उत्पाद के स्वरूप और बाजार की मांग के आधार पर आगे पैकेजिंग और मूल्यवर्धन भी किया जा सकता है।
स्थानीय प्रोसेसिंग यूनिट होने से किसानों को अपनी उपज के लिए केवल प्राथमिक बाजार पर निर्भर रहने के बजाय प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से जुड़े बाजार अवसरों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
कच्चे मिलेट से मूल्यवर्धित उत्पाद तक
मिलेट्स को सामान्य रूप से पोषक अनाज के रूप में जाना जाता है, लेकिन किसानों के लिए इसका आर्थिक महत्व तब और बढ़ सकता है जब इसे बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादों में बदला जाए।
मिलेट्स की सफाई और प्रोसेसिंग के बाद उन्हें उपभोक्ता बाजार के लिए पैक किया जा सकता है। इसके अलावा मांग के अनुसार विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
ऐसी व्यवस्था में किसान उत्पादक कंपनी केवल अनाज बेचने वाली संस्था न रहकर उत्पादन से लेकर बाजार तक की मूल्य श्रृंखला में अधिक भूमिका निभा सकती है।
यही कारण है कि कृषि क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को महत्व दिया जा रहा है। PM-DDKY के आधिकारिक उद्देश्यों में भी पोस्ट-हार्वेस्ट स्टोरेज क्षमता बढ़ाना और कृषि उत्पादों के लिए आधारभूत ढांचे को मजबूत करना शामिल है।
चित्रदुर्ग में मिलेट्स की खेती का महत्व
कर्नाटक लंबे समय से मिलेट्स उत्पादन और उपयोग से जुड़ा प्रमुख राज्य रहा है। चित्रदुर्ग जिले में भी कृषि और वर्षा आधारित खेती की महत्वपूर्ण भूमिका है। NABARD की चित्रदुर्ग के लिए 2026-27 की जिला योजना में PM-DDKY के संदर्भ में रागी, मक्का, ज्वार, मूंगफली, दलहन और अन्य फसलों का उल्लेख किया गया है तथा फसल विविधीकरण और पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया है।
ऐसे कृषि क्षेत्र में मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक अतिरिक्त मूल्य श्रृंखला तैयार कर सकती है।
किसानों की उपज स्थानीय स्तर पर प्रोसेस होने से परिवहन, प्राथमिक प्रसंस्करण और बाजार से जुड़े कुछ चरणों को एक संगठित ढांचे में लाने का अवसर मिलता है।
किसानों के लिए स्थानीय मूल्यवर्धन का अवसर
कृषि उपज का मूल्य केवल उत्पादन तक सीमित नहीं होता। फसल की सफाई, ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच जैसे चरण भी उसकी आर्थिक क्षमता को प्रभावित करते हैं।
यदि किसान या किसान उत्पादक संगठन इन चरणों में अधिक भागीदारी करते हैं, तो कृषि मूल्य श्रृंखला में उनका प्रत्यक्ष जुड़ाव बढ़ता है।
Durgada Millets Farmer Producer Company Ltd. की प्रोसेसिंग यूनिट इसी मॉडल का उदाहरण प्रस्तुत करती है। यहां किसान समूह के स्तर पर मिलेट्स की प्रोसेसिंग के लिए आधारभूत सुविधा तैयार की गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
रोजगार और ग्रामीण आजीविका की संभावनाएं
कृषि आधारित प्रोसेसिंग यूनिट केवल किसानों की उपज के लिए बाजार सुविधा नहीं होती, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकती है।
प्रोसेसिंग यूनिट के संचालन में मशीन संचालन, सफाई, पैकेजिंग, गुणवत्ता जांच, भंडारण, परिवहन, बिक्री और प्रशासन जैसे विभिन्न कार्यों की आवश्यकता हो सकती है। इससे आसपास के क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आजीविका के अवसर बन सकते हैं।
PM-DDKY के आधिकारिक दस्तावेज में भी योजना के अपेक्षित परिणामों में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में value addition और local livelihood creation को शामिल किया गया है।
बाजार से सीधा जुड़ाव
Durgada Millets Farmer Producer Company Ltd. की ओर से उपभोक्ताओं को FPO से सीधे उत्पाद खरीदने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। साझा जानकारी में FPO के संपर्क के लिए श्री गिरिश का मोबाइल नंबर 9686779685 दिया गया है।
इसके अलावा FPO के उत्पादों को ऑनलाइन बाजार के माध्यम से बेचने का विकल्प भी साझा किया गया है। इससे किसान उत्पादक संगठन को स्थानीय बाजार से आगे उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।
आज के समय में कृषि उत्पादों के लिए बाजार केवल स्थानीय मंडी तक सीमित नहीं है। डिजिटल कॉमर्स, किसान उत्पादक संगठनों के अपने ब्रांड और ऑनलाइन बिक्री चैनल किसानों को नए उपभोक्ता समूहों से जोड़ सकते हैं।
PM-DDKY में पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) को केंद्र सरकार ने 2025-26 से छह वर्षों के लिए 100 जिलों को कवर करने के उद्देश्य से मंजूर किया था। आधिकारिक योजना दस्तावेज के अनुसार इसके प्रमुख उद्देश्यों में कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर पोस्ट-हार्वेस्ट स्टोरेज क्षमता बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और अल्प एवं दीर्घकालिक कृषि ऋण की उपलब्धता बढ़ाना शामिल है।
NITI Aayog के PM-DDKY पोर्टल के अनुसार योजना 100 लक्षित जिलों में कृषि परिवर्तन के लिए विभिन्न योजनाओं के convergence पर आधारित है।
चित्रदुर्ग इस योजना के तहत चयनित जिलों में शामिल है।
मिलेट्स की मूल्य श्रृंखला मजबूत करने की जरूरत
मिलेट्स की खेती को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए उत्पादन के साथ-साथ पूरी मूल्य श्रृंखला पर ध्यान देना जरूरी है। किसान को बीज और तकनीक उपलब्ध कराने के बाद उसकी उपज की सफाई, भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
यदि किसी क्षेत्र में मिलेट प्रोसेसिंग की सुविधा उपलब्ध हो, तो किसान स्थानीय स्तर पर अपनी उपज का प्राथमिक मूल्यवर्धन कर सकते हैं। इससे FPO को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग पर काम करने का अवसर भी मिलता है।
आगे चलकर ऐसे संगठन अपने क्षेत्र की विशिष्ट मिलेट फसलों के आधार पर ब्रांड विकसित कर सकते हैं और खुदरा बाजार, संस्थागत खरीदारों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं।
किसानों की सामूहिक ताकत का उदाहरण
1,334 किसानों का एक FPO के साथ जुड़ना सामूहिक कृषि व्यवसाय मॉडल की क्षमता को दर्शाता है। अलग-अलग किसान छोटे स्तर पर उत्पादन करते हैं, लेकिन जब वे एक संगठन के माध्यम से जुड़ते हैं तो सामूहिक खरीद, प्रसंस्करण और बिक्री जैसी गतिविधियों को व्यवस्थित करना संभव हो सकता है।
FPO मॉडल में किसानों की भूमिका केवल उत्पादक तक सीमित नहीं रहती। संगठन के स्तर पर बाजार की मांग समझना, उत्पाद तैयार करना, पैकेजिंग करना और ग्राहकों तक पहुंच बनाना भी संभव होता है।
मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक भौतिक ढांचा उपलब्ध कराती है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा
किसी कृषि उत्पाद की प्रोसेसिंग यदि उसी क्षेत्र के आसपास होती है, तो उससे स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था में कई गतिविधियां जुड़ सकती हैं। किसान अपनी उपज स्थानीय प्रोसेसिंग व्यवस्था में ला सकते हैं, स्थानीय श्रमिकों को काम मिल सकता है और उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय व्यवसाय विकसित हो सकते हैं।
मिलेट आधारित उत्पादों की मांग में बदलाव के साथ ऐसे FPO स्थानीय उपभोक्ताओं के साथ-साथ दूसरे बाजारों को भी लक्षित कर सकते हैं।
इस तरह खेती से लेकर बाजार तक एक स्थानीय मूल्य श्रृंखला विकसित करने की संभावना बनती है।
मिलेट्स से बाजार तक नई दिशा
Durgada Millets Farmer Producer Company Ltd. द्वारा स्थापित 8 टन प्रतिदिन क्षमता वाली प्रोसेसिंग यूनिट चित्रदुर्ग में मिलेट्स के स्थानीय मूल्यवर्धन और बाजार संपर्क की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल है। 1,334 किसान सदस्यों वाला यह FPO उत्पादन को प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।
PM-DDKY का आधिकारिक ढांचा भी उत्पादकता, फसल विविधीकरण, पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई और ऋण पहुंच जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।
मिलेट्स की स्थानीय प्रोसेसिंग के माध्यम से किसानों को अपनी उपज को केवल कच्चे अनाज के रूप में बेचने के बजाय मूल्यवर्धित उत्पादों के रूप में बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है। साथ ही इससे ग्रामीण स्तर पर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, बिक्री और अन्य संबद्ध गतिविधियों के विकास की संभावना भी बनती है।
‘फार्म से मार्केट’ तक की यह व्यवस्था मिलेट किसानों को उत्पादन के साथ-साथ मूल्य श्रृंखला में अधिक सक्रिय भागीदारी का अवसर देती है। आने वाले समय में FPO आधारित प्रोसेसिंग मॉडल स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए बाजार संपर्क और ग्रामीण आजीविका के विस्तार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

