CropLife India ने अपने नए नेतृत्व की घोषणा की है। संगठन की 46वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में Rallis India Limited के MD एवं CEO डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला को CropLife India के बोर्ड का नया चेयरमैन चुना गया है। वहीं Bayer Crop Science के Head – Agricultural Affairs & Policy राजवीर राठी और BASF Agricultural Solutions India के Business Director गिरिधर रानुवा को नया वाइस चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह वार्षिक आम बैठक 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई।
नए नेतृत्व ने भारतीय कृषि के सामने मौजूद खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय, जलवायु परिवर्तन और फसल सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान, नवाचार और नई तकनीकों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया है। CropLife India ने कहा है कि वह सरकार, वैज्ञानिक समुदाय और किसानों के साथ मिलकर भारतीय कृषि के लिए सुरक्षित, उत्पादक और टिकाऊ भविष्य बनाने की दिशा में काम करता रहेगा।
डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला बने CropLife India के चेयरमैन
Rallis India Limited के MD एवं CEO डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला को CropLife India के बोर्ड का चेयरमैन चुना गया है। इससे पहले वह अक्टूबर 2025 से संगठन में वाइस चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब वह चेयरमैन के रूप में संगठन का नेतृत्व करेंगे।
डॉ. शुक्ला के पास फसल सुरक्षा और बीज क्षेत्र में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनका अनुभव भारत के अलावा एशिया-प्रशांत और अफ्रीका के कृषि क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
उन्होंने अपने संबोधन में आने वाले दशक में भारत की खाद्य जरूरतों को पूरा करने की चुनौती पर बात की। उनके अनुसार भारत को लगभग समान कृषि भूमि से भविष्य में काफी अधिक खाद्य उत्पादन करना होगा। इसके लिए विज्ञान, नवाचार और नई तकनीकों को बड़े स्तर पर तेजी से अपनाना जरूरी होगा।
डॉ. शुक्ला ने यह भी कहा कि भारत को केवल दुनिया के लिए फसल सुरक्षा तकनीक बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नई तकनीकों के आविष्कार में भी आगे बढ़ना चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसानों को नई तकनीक और उत्पाद तेजी से उपलब्ध हों, इसके लिए नियामकीय व्यवस्था भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पंजीकरण के लिए सुरक्षा और प्रभावशीलता संबंधी आंकड़ों के संरक्षण पर जोर
नए चेयरमैन ने भारत में नए फसल सुरक्षा उत्पादों के पंजीकरण से जुड़े नियामकीय ढांचे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कंपनियों द्वारा नए उत्पादों के पंजीकरण के लिए तैयार किए जाने वाले सुरक्षा और प्रभावशीलता संबंधी डेटा की सुरक्षा जरूरी है।
उन्होंने Pesticides Management Bill, 2025 को इस दिशा में अवसर के रूप में देखा और कहा कि उद्योग सरकार के साथ मिलकर इस क्षेत्र में काम करेगा। यह बयान फसल सुरक्षा उद्योग और नियामकीय व्यवस्था के बीच सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व चेयरमैन अंकुर अग्रवाल, Crystal Crop Protection से जुड़े थे और उन्होंने 2024 से दो कार्यकाल तक संगठन का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल के दौरान CropLife India ने सरकार के साथ Draft Pesticides Management Bill, 2025 को लेकर संवाद किया। संगठन के बोर्ड ने उनके योगदान के साथ-साथ निवर्तमान वाइस चेयरमैन मोहन बाबू बोप्पना के योगदान की भी सराहना की।
राजवीर राठी और गिरिधर रानुवा बने वाइस चेयरमैन
नए नेतृत्व में Bayer Crop Science के राजवीर राठी और BASF Agricultural Solutions India के गिरिधर रानुवा को वाइस चेयरमैन की जिम्मेदारी मिली है।
राजवीर राठी के पास नियामकीय मामलों और सरकारी मामलों में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। वह CropLife India की Advocacy & Communications Committee का नेतृत्व इसकी स्थापना के समय से कर रहे हैं।
राठी ने फसल सुरक्षा उत्पादों की सुरक्षित बिक्री और उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को गांव के डीलर से लेकर मोबाइल ऐप तक किसी भी माध्यम से फसल सुरक्षा उत्पाद खरीदते समय यह भरोसा होना चाहिए कि उत्पाद वास्तविक और ट्रेसेबल है।
उनके अनुसार खेत में सुरक्षित उपयोग ही खाद्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और जिम्मेदार उपयोग से जुड़े सिद्धांत CropLife India के दृष्टिकोण का हिस्सा रहेंगे और संगठन नियामकों के साथ मिलकर सभी बिक्री चैनलों में इस तरह के भरोसे को मानक बनाने की दिशा में काम करेगा।
जलवायु परिवर्तन से बदल रहा है कीटों का व्यवहार
BASF Agricultural Solutions India के Business Director और नए वाइस चेयरमैन गिरिधर रानुवा ने कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कीटों के प्रकोप का समय और क्षेत्र बदल रहा है। उनके अनुसार आने वाले समय में कुछ कीट पहले दिखाई दे सकते हैं, लंबे समय तक मौजूद रह सकते हैं और उन क्षेत्रों में भी दिखाई दे सकते हैं जहां पहले उनका प्रकोप नहीं देखा जाता था।
रानुवा ने भविष्य की कृषि में रसायन, जैविक उत्पाद, ड्रोन और डिजिटल कृषि सलाह जैसी तकनीकों को एक साथ इस्तेमाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि किसानों को फसल पर कीटों के दबाव के प्रति तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम होना होगा।
उन्होंने छोटे किसानों के संदर्भ में कहा कि यदि किसान समय पर फसल की सुरक्षा कर पाता है और उसके पास प्रभावी कृषि इनपुट की व्यापक उपलब्धता होती है, तो इससे फसल बचाने और आय को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही उन्होंने मिट्टी और पानी के स्वास्थ्य को अगली पीढ़ी के लिए बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
CropLife India में 17 R&D आधारित कंपनियां
CropLife India के अनुसार संगठन फसल सुरक्षा क्षेत्र में काम करने वाली 17 R&D आधारित कंपनियों का उद्योग संगठन है। प्रेस रिलीज में संगठन ने बताया कि उसके सदस्य घरेलू फसल सुरक्षा बाजार के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से का संयुक्त रूप से प्रतिनिधित्व करते हैं और भारत में पेश किए गए फसल सुरक्षा अणुओं में करीब 95 प्रतिशत के लिए सदस्य कंपनियां जिम्मेदार हैं।
हालांकि संगठन के प्रेस रिलीज के ‘About CropLife India’ खंड में बाजार प्रतिनिधित्व लगभग 70 प्रतिशत बताया गया है। इसलिए दोनों आंकड़ों में अंतर मौजूद है और इसे संगठन के अलग-अलग हिस्सों में दिए गए आंकड़ों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
संगठन के अनुसार उसकी सदस्य कंपनियां वैश्विक स्तर पर हर वर्ष लगभग 6 अरब अमेरिकी डॉलर R&D पर खर्च करती हैं। CropLife India ने कृषि समुदाय के साथ जुड़कर सुरक्षित और भरोसेमंद खाद्य आपूर्ति को सक्षम बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
खेती में तकनीक और नवाचार की बढ़ती भूमिका
CropLife India के नए नेतृत्व के बयानों में कृषि क्षेत्र में तकनीक और नवाचार की भूमिका को प्रमुखता दी गई है। भारत के सामने एक तरफ बढ़ती खाद्य जरूरतों को पूरा करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर कृषि भूमि, पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भी बना हुआ है।
ऐसे में फसल सुरक्षा, बेहतर कृषि इनपुट, डिजिटल सलाह, जैविक समाधान और ड्रोन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कृषि उत्पादन प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डॉ. शुक्ला ने विज्ञान और नवाचार को बड़े स्तर पर अपनाने की आवश्यकता बताई, जबकि रानुवा ने रसायन, जैविक उत्पाद, ड्रोन और डिजिटल सलाह को एक साथ उपयोग करने की बात कही। इन बयानों से नए नेतृत्व के एजेंडे में तकनीकी नवाचार और किसान तक तकनीक की पहुंच को महत्व मिलने का संकेत मिलता है।
किसान तक प्रमाणिक उत्पाद पहुंचाना भी चुनौती
फसल सुरक्षा क्षेत्र में केवल नए उत्पाद विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है। किसानों तक सही और प्रमाणिक उत्पाद पहुंचना भी महत्वपूर्ण है।
राजवीर राठी ने इसी विषय पर जोर देते हुए कहा कि किसान को यह भरोसा होना चाहिए कि वह जो उत्पाद खरीद रहा है वह वास्तविक है और उसका स्रोत फैक्ट्री से खेत तक ट्रेस किया जा सकता है। उन्होंने यह बात पारंपरिक ग्रामीण डीलर नेटवर्क और डिजिटल माध्यमों, दोनों के संदर्भ में कही।
कृषि इनपुट की बिक्री में डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के बीच उत्पाद की प्रमाणिकता और ट्रेसबिलिटी से जुड़े सवालों का महत्व भी बढ़ रहा है। संगठन ने अपने नए एजेंडे में सुरक्षित उपयोग और जिम्मेदार कृषि इनपुट प्रबंधन को प्रमुखता दी है।
जलवायु अनुकूल खेती पर फोकस
जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि में मौसम और कीटों से जुड़ी अनिश्चितताएं बढ़ सकती हैं। CropLife India के नए नेतृत्व ने जलवायु अनुकूल कृषि को अपने प्रमुख विषयों में शामिल किया है।
रानुवा के अनुसार कीटों के आने का समय और उनका भौगोलिक विस्तार बदल सकता है। ऐसी स्थिति में किसानों को समय पर जानकारी और प्रभावी प्रबंधन विकल्प उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने डिजिटल सलाह और ड्रोन जैसी तकनीकों को भी भविष्य के कृषि प्रबंधन का हिस्सा बताया।
इस संदर्भ में मौसम आधारित फसल सलाह, कीट निगरानी, डिजिटल कृषि सेवाएं और समय पर कृषि इनपुट की उपलब्धता किसानों के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
सरकार और वैज्ञानिक समुदाय के साथ साझेदारी पर जोर
CropLife India ने नए नेतृत्व के साथ सरकार, वैज्ञानिक समुदाय और किसानों के साथ साझेदारी जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। संगठन के अनुसार उसका उद्देश्य भारतीय कृषि के लिए सुरक्षित, उत्पादक और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में योगदान देना है।
नए नेतृत्व के सामने फसल सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दे हैं, जिनमें नियामकीय व्यवस्था, नई तकनीकों का विकास और उनका तेजी से प्रसार, सुरक्षित कृषि रसायन उपयोग, प्रमाणिक उत्पादों की उपलब्धता तथा जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते कीट दबाव जैसे विषय शामिल हैं।
आगे की दिशा पर टिकी नजर
CropLife India में नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय हुआ है जब भारतीय कृषि उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ खेती को अधिक टिकाऊ और जलवायु अनुकूल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। नए चेयरमैन डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला के नेतृत्व में संगठन ने विज्ञान और नवाचार को कृषि विकास के केंद्र में रखने की बात कही है।
वहीं वाइस चेयरमैन राजवीर राठी ने सुरक्षित और प्रमाणिक फसल सुरक्षा उत्पादों की उपलब्धता तथा जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया है। गिरिधर रानुवा ने जलवायु परिवर्तन के बीच कीट प्रबंधन के लिए रसायन, जैविक उत्पाद, ड्रोन और डिजिटल सलाह के संयोजन की आवश्यकता बताई है।
अब CropLife India की घोषित प्राथमिकताओं का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि उद्योग, सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के बीच सहयोग किस तरह आगे बढ़ता है और नई तकनीकें तथा फसल सुरक्षा समाधान किसानों तक कितनी तेजी से और सुरक्षित तरीके से पहुंचते हैं।
