भारत का एग्रोकेमिकल उद्योग आज तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। किसानों की बदलती जरूरतें, कृषि उत्पादकता बढ़ाने की चुनौती, नई तकनीकों का विकास, फसल सुरक्षा समाधानों की बढ़ती मांग और वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की बढ़ती भूमिका ने इस क्षेत्र को पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है।
ऐसे माहौल में किसी कंपनी का नेतृत्व केवल कारोबार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहता। इसके लिए बाजार की नब्ज समझना, विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना, गुणवत्ता और नवाचार पर ध्यान देना, वैश्विक अवसरों की पहचान करना और संगठन को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी आवश्यक होता है।
हेरंबा इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर रघुराम के. शेट्टी इसी व्यापक नेतृत्व दृष्टिकोण के साथ कंपनी की विकास यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं।
वर्ष 1994 से हेरंबा से जुड़े शेट्टी ने कंपनी के विकास के कई महत्वपूर्ण चरणों को करीब से देखा और उनमें सक्रिय भूमिका निभाई है। बिजनेस डेवलपमेंट, ऑपरेशंस, वित्तीय रणनीति, मार्केटिंग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेशक संबंधों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनका अनुभव कंपनी की वर्तमान दिशा को मजबूत आधार प्रदान करता है।
उनकी नेतृत्व यात्रा केवल एक कंपनी की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग में बदलते कारोबारी परिदृश्य के साथ स्वयं को विकसित करने की कहानी भी है।
एक विरासत, जिसे नेतृत्व ने नई दिशा दी
हेरंबा इंडस्ट्रीज की कहानी वर्ष 1992 में शुरू हुई। इसके बाद 1994 में टेक्नोक्रेट्स सदाशिव के. शेट्टी और रघुराम के. शेट्टी ने कंपनी की कमान संभाली।
रघुराम के. शेट्टी के लिए हेरंबा से जुड़ाव किसी सामान्य कॉरपोरेट भूमिका से कहीं अधिक रहा है। तीन दशकों से अधिक समय में उन्होंने कंपनी के निर्माण, विस्तार, बाजार विकास और रणनीतिक बदलावों को नजदीक से देखा है।
कंपनी ने शुरुआती वर्षों में एग्रोकेमिकल इंटरमीडिएट्स और टेक्निकल उत्पादों के निर्माण से शुरुआत करते हुए धीरे-धीरे फॉर्मुलेशन, क्रॉप प्रोटेक्शन, पब्लिक हेल्थ पेस्टिसाइड्स और अब क्रॉप न्यूट्रिशन तक अपनी पहुंच बनाई है।
वर्ष 1996 में कंपनी ने इंटरमीडिएट CMAC का निर्माण शुरू किया। इसके बाद 1997 में साइपरमेथ्रिन टेक्निकल के उत्पादन की शुरुआत हुई।
वर्ष 2002 में कंपनी ने विभिन्न टेक्निकल उत्पादों के निर्माण की दिशा में फॉरवर्ड इंटीग्रेशन किया। 2004 में अल्फा साइपरमेथ्रिन टेक्निकल का उत्पादन शुरू हुआ और 2005 में यूनिट III की स्थापना के साथ फॉर्मुलेशन निर्माण की शुरुआत हुई।
ये उपलब्धियां केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के कदम नहीं थे। इनके पीछे एक ऐसे एकीकृत एग्रोकेमिकल कारोबार के निर्माण की सोच थी, जो कच्चे माल से लेकर तकनीकी उत्पाद और फॉर्मुलेशन तक अपनी क्षमताओं को मजबूत कर सके।
विनिर्माण क्षमता से एकीकृत एग्रोकेमिकल कारोबार तक
हेरंबा की विकास यात्रा में वर्टिकल इंटीग्रेशन एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विशेषता रही है।
वर्ष 2017 में कंपनी ने MPBD और MPBAL जैसे प्रमुख कच्चे माल के निर्माण की दिशा में बैकवर्ड इंटीग्रेशन किया। इसका उद्देश्य उत्पादन प्रक्रिया पर बेहतर नियंत्रण, परिचालन दक्षता और कच्चे माल की उपलब्धता को मजबूत करना था।
इसके बाद 2019 में गुजरात के सारिगाम में पूरी तरह स्वचालित फॉर्मुलेशन यूनिट स्थापित की गई। इसी वर्ष कंपनी ने 1,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर का महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया।
यह उपलब्धि हेरंबा की तेजी से बढ़ती कारोबारी क्षमता और बाजार में उसकी मजबूत होती स्थिति को दर्शाती है।
रघुराम के. शेट्टी के नेतृत्व में कंपनी की रणनीति केवल मौजूदा कारोबार को बढ़ाने तक सीमित नहीं रही। इसके साथ उत्पादन क्षमता, उत्पाद पोर्टफोलियो और बाजार पहुंच को समानांतर रूप से विकसित करने पर भी ध्यान दिया गया।
कॉरपोरेट विस्तार और नई व्यावसायिक दिशा
हेरंबा की विकास यात्रा में वर्ष 2021 एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया। कंपनी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध हुई।
इसी वर्ष गुजरात के सायखा में एग्रोकेमिकल विनिर्माण के लिए दो औद्योगिक प्लॉट भी हासिल किए गए।
किसी कंपनी का सूचीबद्ध होना उसके विकास के साथ-साथ कॉरपोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और निवेशकों के प्रति जवाबदेही की नई जिम्मेदारियां भी लेकर आता है।
रघुराम के. शेट्टी की नेतृत्व भूमिका में इन सभी पहलुओं के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण रहा है।
इसके बाद कंपनी ने अपने कारोबार को नए क्षेत्रों में विस्तार देना शुरू किया।
वर्ष 2022 में B2C सेगमेंट को ध्यान में रखते हुए माइकुसु इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई। यह कदम कंपनी को पारंपरिक B2B कारोबार के साथ सीधे उपभोक्ता बाजार की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण था।
वर्ष 2024 में हेरंबा ने Daikaffil Chemicals India Limited का रणनीतिक अधिग्रहण किया। इस कदम से कंपनी की स्पेशलिटी केमिकल्स और R&D क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में नया आधार तैयार हुआ।
इसी अवधि में सारिगाम और सायखा में विनिर्माण गतिविधियों को आगे बढ़ाया गया।
इन पहलों से स्पष्ट होता है कि हेरंबा का कारोबार अब केवल पारंपरिक फसल सुरक्षा उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी व्यापक कृषि और रासायनिक समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
बिजनेस डेवलपमेंट में व्यापक अनुभव
रघुराम के. शेट्टी की नेतृत्व क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिजनेस डेवलपमेंट से जुड़ा है।
एग्रोकेमिकल उद्योग में बिजनेस डेवलपमेंट का अर्थ केवल बिक्री बढ़ाना नहीं है। इसमें नए बाजारों की पहचान, ग्राहक संबंधों का विकास, उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार, नए व्यावसायिक अवसरों का मूल्यांकन और कंपनी की क्षमताओं के अनुरूप दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना शामिल है।
तीन दशकों से अधिक का एग्रोकेमिकल अनुभव शेट्टी को इस क्षेत्र की जटिलताओं को समझने का व्यापक आधार देता है।
उनकी जिम्मेदारियों में ऑपरेशंस और मार्केटिंग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी शामिल है।
यह अनुभव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हेरंबा का वैश्विक कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है। कंपनी के अनुसार, उसके क्रॉप प्रोटेक्शन और न्यूट्रिशन उत्पाद 85 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं।
किसी एग्रोकेमिकल कंपनी को इतने बड़े वैश्विक बाजार में स्थापित करने के लिए गुणवत्ता, नियामकीय आवश्यकताओं, ग्राहक अपेक्षाओं, आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों की गहरी समझ जरूरी होती है।
भारत से दुनिया तक हेरंबा का विस्तार
हेरंबा की विकास कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू उसका अंतरराष्ट्रीय विस्तार है।
कंपनी आज एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका सहित विभिन्न वैश्विक बाजारों में अपने उत्पाद पहुंचा रही है।
कंपनी के पोर्टफोलियो में कीटनाशक, खरपतवारनाशी, फफूंदनाशी, पब्लिक हेल्थ पेस्टिसाइड्स और क्रॉप न्यूट्रिशन उत्पाद शामिल हैं।
वैश्विक बाजार में सफलता के लिए केवल उत्पाद उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होता। निरंतर गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता, समय पर आपूर्ति, नियामकीय अनुपालन और ग्राहकों का भरोसा लंबे समय तक बनाए रखना आवश्यक होता है।
हेरंबा का 4-Star Export House के रूप में मान्यता प्राप्त करना और CHEMEXCIL सहित विभिन्न संस्थाओं से निर्यात प्रदर्शन के लिए मिले सम्मान कंपनी की अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक दिशा को रेखांकित करते हैं।
इस वैश्विक विस्तार के पीछे कंपनी की उत्पादन क्षमता और नेतृत्व की रणनीतिक दृष्टि दोनों महत्वपूर्ण हैं।
पारंपरिक क्रॉप प्रोटेक्शन से क्रॉप न्यूट्रिशन तक
हेरंबा की नई दिशा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा क्रॉप न्यूट्रिशन में प्रवेश है।
वर्ष 2026 में कंपनी ने अपनी क्रॉप न्यूट्रिशन उत्पाद श्रृंखला शुरू की। कृषि में अब फसल सुरक्षा के साथ-साथ पोषण प्रबंधन को भी उत्पादकता और फसल गुणवत्ता के महत्वपूर्ण घटक के रूप में देखा जा रहा है।
ऐसे में क्रॉप प्रोटेक्शन और क्रॉप न्यूट्रिशन को एक व्यापक कृषि समाधान के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
रघुराम के. शेट्टी के नेतृत्व में कंपनी का यह विस्तार बदलते कृषि बाजारों को समझने और नए कारोबारी अवसरों को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एक अनुभवी नेतृत्वकर्ता के लिए चुनौती केवल वर्तमान कारोबार को संभालना नहीं होती, बल्कि भविष्य के बाजारों के लिए समय रहते संगठन को तैयार करना भी होती है।
हेरंबा का क्रॉप न्यूट्रिशन में प्रवेश इसी व्यापक रणनीतिक सोच का हिस्सा माना जा सकता है।
विनिर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निरंतर निवेश
किसी एग्रोकेमिकल कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का एक बड़ा आधार उसका विनिर्माण इंफ्रास्ट्रक्चर होता है।
हेरंबा का मुख्यालय गुजरात के वापी में है। इसके अलावा सारिगाम में विनिर्माण सुविधाएं हैं और सायखा में नई ग्रीनफील्ड परियोजना विकसित की जा रही है। कंपनी का कॉरपोरेट कार्यालय मुंबई में स्थित है।
ये सुविधाएं कंपनी के घरेलू और वैश्विक कारोबार को सपोर्ट करने वाली महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना का हिस्सा हैं।
हेरंबा ने गुणवत्ता प्रबंधन, पर्यावरण प्रबंधन, गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज और परीक्षण क्षमताओं से संबंधित विभिन्न प्रमाणन भी हासिल किए हैं।
कंपनी के वापी और सारिगाम संयंत्रों के लिए ISO 9001:2015, वापी सुविधा के लिए ISO 14001:2015, सक्रिय सामग्री के लिए GMP और वापी की टेस्टिंग लैब के लिए NABL मान्यता सहित विभिन्न प्रमाणन सूचीबद्ध हैं।
बढ़ते वैश्विक कारोबार के लिए ऐसी गुणवत्ता और प्रक्रिया प्रणालियां कंपनी की दीर्घकालिक विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण आधार बनती हैं।
अनुभव और शिक्षा का मजबूत संयोजन
रघुराम के. शेट्टी का नेतृत्व केवल उनके उद्योग अनुभव पर आधारित नहीं है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी उनके व्यावसायिक दृष्टिकोण को मजबूत करती है।
उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर से इकोनॉमिक्स में स्नातक डिग्री प्राप्त की है। इसके अलावा उनके पास गवर्नमेंट कमर्शियल डिप्लोमा और एक्सपोर्ट एंड इंपोर्ट मैनेजमेंट में डिप्लोमा भी है।
अर्थशास्त्र, वाणिज्य और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की यह पृष्ठभूमि एग्रोकेमिकल उद्योग के व्यावहारिक अनुभव के साथ मिलकर एक व्यापक कॉरपोरेट दृष्टिकोण तैयार करती है।
तीन दशकों से अधिक के अनुभव में उन्होंने उद्योग के कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं—स्थानीय विनिर्माण के विस्तार से लेकर वैश्विक निर्यात, नए उत्पादों, बदलते नियामकीय वातावरण और कृषि में उभरती तकनीकों तक।
यही लंबा अनुभव उनकी वर्तमान नेतृत्व भूमिका को मजबूत बनाता है।
गुणवत्ता और जिम्मेदार विकास पर जोर
आज एग्रोकेमिकल उद्योग में विकास का अर्थ केवल उत्पादन और बिक्री बढ़ाना नहीं है। पर्यावरण संरक्षण, कार्यस्थल सुरक्षा, अपशिष्ट प्रबंधन और गुणवत्ता भी उतने ही महत्वपूर्ण विषय हैं।
हेरंबा ने पर्यावरण संरक्षण, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट, खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन और कार्यस्थल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
कंपनी की घोषित दृष्टि विश्वस्तरीय विनिर्माण प्रक्रियाओं और आधुनिक अनुसंधान के माध्यम से एक वैश्विक, नवोन्मेषी क्रॉप प्रोटेक्शन और न्यूट्रिशन कंपनी बनने की है।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विकास के साथ जिम्मेदार विनिर्माण प्रणालियों को मजबूत करना आवश्यक है।
रघुराम के. शेट्टी की नेतृत्व भूमिका इसी व्यापक विकास दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है—जहां कारोबारी विस्तार के साथ गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता पर भी ध्यान दिया जाता है।
संगठन की ताकत हैं लोग
किसी भी तेजी से बढ़ते संगठन की वास्तविक ताकत केवल उसकी मशीनरी, उत्पाद या तकनीक नहीं होती। उसके पीछे काम करने वाली टीम भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
हेरंबा अपने कर्मचारियों को संगठन की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है और रचनात्मकता, सहयोग, विकास और मेरिटोक्रेसी पर जोर देता है।
एग्रोकेमिकल उद्योग में विनिर्माण, R&D, बिक्री, वितरण और अंतरराष्ट्रीय कारोबार जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली टीमों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होता है।
हेरंबा का 12,000 से अधिक डीलरों वाला पैन-इंडिया नेटवर्क और 85 से अधिक देशों में निर्यात बाजार संगठनात्मक क्षमता के बड़े पैमाने को दर्शाता है।
ऐसे संगठन को आगे बढ़ाने के लिए नेतृत्व को केवल रणनीति तय करने से आगे बढ़कर लोगों और टीमों को उस रणनीति के साथ जोड़ना पड़ता है।
हेरंबा के अगले अध्याय की तैयारी
हेरंबा की हाल की गतिविधियां कंपनी के विकास के एक नए चरण की ओर संकेत करती हैं।
नई विनिर्माण क्षमताओं का विकास, क्रॉप न्यूट्रिशन में प्रवेश, माइकुसु इंडिया के माध्यम से B2C कारोबार का विस्तार और Daikaffil Chemicals का रणनीतिक अधिग्रहण कंपनी के व्यापक विस्तार की दिशा को दर्शाते हैं।
हेरंबा अब केवल पारंपरिक क्रॉप प्रोटेक्शन निर्माता के रूप में सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी का पोर्टफोलियो क्रॉप प्रोटेक्शन, क्रॉप न्यूट्रिशन, स्पेशलिटी केमिकल्स और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की ओर विस्तार कर रहा है।
इस बदलाव के केंद्र में एक ऐसी नेतृत्व दृष्टि की आवश्यकता है जो कंपनी की मौजूदा ताकत को बनाए रखते हुए नए अवसरों को पहचान सके।
रघुराम के. शेट्टी का लंबा उद्योग अनुभव इस परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
किसी भी तेजी से बढ़ती एग्रोकेमिकल कंपनी के लिए विस्तार और गुणवत्ता, नवाचार और नियामकीय अनुशासन तथा तेजी और स्थायी विकास के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण चुनौती होती है।
उनका अनुभव इन विभिन्न प्राथमिकताओं को एक साथ साधने में उपयोगी आधार बनता है।
एक नेतृत्वकर्ता, जो विरासत को आगे बढ़ा रहा है
रघुराम के. शेट्टी की कहानी हेरंबा इंडस्ट्रीज की कहानी से गहराई से जुड़ी हुई है।
1994 से कंपनी के साथ जुड़े शेट्टी ने हेरंबा के विकास के लगभग हर महत्वपूर्ण चरण को देखा है—टेक्निकल उत्पादों के निर्माण से लेकर फॉर्मुलेशन, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग, वैश्विक निर्यात, स्टॉक एक्सचेंज लिस्टिंग और नए कृषि एवं रासायनिक क्षेत्रों में विस्तार तक।
इस लंबे जुड़ाव ने उन्हें कंपनी के कारोबार, बाजार, विनिर्माण क्षमताओं और भविष्य की संभावनाओं की गहरी समझ दी है।
आज मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में वह हेरंबा को ऐसे समय में आगे बढ़ा रहे हैं जब एग्रोकेमिकल उद्योग स्वयं परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर में है।
कृषि को अधिक उत्पादकता, बेहतर संसाधन दक्षता और अधिक प्रभावी कृषि समाधानों की आवश्यकता है। वहीं वैश्विक बाजार गुणवत्ता, सुरक्षा, स्थिरता और जिम्मेदार विनिर्माण पर पहले से अधिक ध्यान दे रहे हैं।
ऐसे वातावरण में हेरंबा की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपनी विनिर्माण शक्ति को नवाचार, बाजार की समझ और अनुशासित क्रियान्वयन के साथ कितनी प्रभावी ढंग से जोड़ पाती है।
रघुराम के. शेट्टी की नेतृत्व यात्रा इस दिशा में एक मजबूत आधार प्रस्तुत करती है।
विरासत से भविष्य की ओर
रघुराम के. शेट्टी का नेतृत्व अनुभव, निरंतरता और रणनीतिक विकास की ऐसी यात्रा है, जिसने हेरंबा इंडस्ट्रीज की विकास कहानी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
तीन दशकों से अधिक के एग्रोकेमिकल अनुभव और 1994 से हेरंबा के साथ लंबे जुड़ाव ने उन्हें विनिर्माण, बिजनेस डेवलपमेंट, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मार्केटिंग, वित्तीय रणनीति और कॉरपोरेट संचालन की व्यापक समझ दी है।
उनके नेतृत्व में हेरंबा ने अपनी विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार किया, उत्पाद पोर्टफोलियो को व्यापक बनाया और वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत की।
भारत में एग्रोकेमिकल निर्माण से शुरू हुई हेरंबा की यात्रा आज 85 से अधिक देशों तक पहुंच चुकी है। क्रॉप न्यूट्रिशन में प्रवेश, B2C कारोबार का विस्तार, Daikaffil Chemicals का अधिग्रहण और नई विनिर्माण सुविधाओं का विकास कंपनी के अगले चरण की दिशा तय कर रहे हैं।
इस पूरी यात्रा की खासियत यह है कि यहां विरासत और भविष्य को एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि एक-दूसरे की ताकत के रूप में देखा जा रहा है।
रघुराम के. शेट्टी की भूमिका इसी सोच को आगे बढ़ाने की है—हेरंबा की मजबूत नींव को बनाए रखते हुए कंपनी को नई तकनीकों, नए बाजारों और नए कृषि समाधानों की ओर ले जाना।
भारतीय कृषि और एग्रोकेमिकल उद्योग के बदलते परिदृश्य में उनका अनुभव और नेतृत्व हेरंबा के लिए एक महत्वपूर्ण पूंजी है।
विरासत को संभालते हुए भविष्य का निर्माण—यही रघुराम के. शेट्टी के नेतृत्व में हेरंबा की अगली विकास यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण पहचान बनती दिखाई देती है।

