तेलहन फसलों, खासकर ऑयलसीड रेप यानी कैनोला और रेपसीड की खेती के लिए एक नई चुनौती सामने आई है। वैज्ञानिकों ने पहली बार दुनिया में Plenodomus biglobosus नामक फफूंद रोगजनक में एक प्रमुख समूह के फंगीसाइड के खिलाफ प्रतिरोध की पुष्टि की है। यह रोगजनक फोमा स्टेम कैंकर बीमारी का कारण बनता है, जो ऑयलसीड रेप की फसल में उत्पादन को काफी प्रभावित कर सकती है।
यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यदि फंगीसाइड के प्रति प्रतिरोधी रोगजनक खेतों में तेजी से फैलते हैं, तो फोमा स्टेम कैंकर का रासायनिक नियंत्रण आने वाले समय में अधिक कठिन हो सकता है। वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में ब्रिटेन और पोलैंड से लिए गए Plenodomus biglobosus के नमूनों की जांच की और दोनों देशों की रोगजनक आबादी में फंगीसाइड संवेदनशीलता में बड़ा अंतर पाया।
यह शोध ब्रिटेन के Rothamsted Research के वैज्ञानिकों ने किया है और इसके परिणाम Pest Management Science में प्रकाशित हुए हैं।
फोमा स्टेम कैंकर क्या है?
फोमा स्टेम कैंकर ऑयलसीड रेप की प्रमुख बीमारियों में से एक है। यह रोग पौधे के तने और अन्य हिस्सों को प्रभावित करता है और गंभीर संक्रमण की स्थिति में फसल की उपज में उल्लेखनीय कमी हो सकती है।
इस बीमारी के लिए दो संबंधित फफूंद रोगजनक प्रमुख रूप से जिम्मेदार माने जाते हैं। इनमें Plenodomus lingam और Plenodomus biglobosus शामिल हैं। लंबे समय तक वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों का अधिक ध्यान P. lingam पर रहा, लेकिन पिछले कुछ समय में P. biglobosus का महत्व भी ब्रिटेन और यूरोप की ऑयलसीड रेप फसलों में बढ़ा है।
यही वजह है कि P. biglobosus में फंगीसाइड प्रतिरोध की नई खोज को फसल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
SDHI फंगीसाइड के खिलाफ मिला प्रतिरोध
Rothamsted Research के वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन और पोलैंड से Plenodomus biglobosus के अलग-अलग आइसोलेट यानी रोगजनक नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को प्रयोगशाला में प्रमुख फंगीसाइड समूह SDHI यानी Succinate Dehydrogenase Inhibitor के प्रति उनकी संवेदनशीलता जांचने के लिए परीक्षण किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि ब्रिटेन से लिए गए लगभग 95 प्रतिशत आइसोलेट बोसकैलिड और फ्लक्सापायरोक्साड के प्रति प्रतिरोधी थे। इसके मुकाबले पोलैंड से लिए गए नमूनों में केवल लगभग 6 प्रतिशत में ऐसा प्रतिरोध पाया गया।
यह अंतर वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे पता चलता है कि कुछ क्षेत्रों में रोगजनक आबादी के बीच SDHI फंगीसाइड के खिलाफ प्रतिरोध काफी व्यापक हो चुका है।
कुछ रोगजनकों में 500 गुना तक कम हुआ असर
अध्ययन में सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई कि कुछ ब्रिटिश आइसोलेट पर प्रयोगशाला परिस्थितियों में फंगीसाइड की प्रभावशीलता में 500 गुना तक की कमी देखी गई।
इसका मतलब यह नहीं है कि खेत में फंगीसाइड का असर हर स्थिति में 500 गुना कम हो जाएगा। यह आंकड़ा प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों से संबंधित है। खेत की परिस्थितियों में तापमान, नमी, रोग का दबाव, फंगीसाइड की मात्रा, छिड़काव का समय और अन्य कृषि प्रबंधन कारक परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
फिर भी यह परिणाम इस बात का मजबूत संकेत देता है कि कुछ रोगजनक आबादियों में SDHI फंगीसाइड के खिलाफ प्रतिरोध काफी मजबूत हो सकता है।
रोगजनक के जीन में बदलाव से जुड़ा प्रतिरोध
वैज्ञानिकों ने यह भी जांच की कि P. biglobosus में फंगीसाइड प्रतिरोध पैदा होने के पीछे कौन-सा जैविक तंत्र काम कर रहा है। अध्ययन में पाया गया कि प्रतिरोध succinate dehydrogenase यानी SDH एंजाइम से जुड़े जीन में मौजूद म्यूटेशन से संबंधित था।
SDHI फंगीसाइड इसी एंजाइम को अपना लक्ष्य बनाते हैं। जब रोगजनक के जीन में कुछ बदलाव हो जाते हैं और लक्ष्य प्रोटीन की संरचना या कार्य में परिवर्तन आता है, तो फंगीसाइड के लिए उस पर प्रभाव डालना कठिन हो सकता है।
इस तरह के बदलाव रोगजनक को फंगीसाइड के खिलाफ जीवित रहने में मदद कर सकते हैं। समय के साथ यदि ऐसे प्रतिरोधी रोगजनक खेतों में बढ़ते और फैलते हैं, तो किसी विशेष फंगीसाइड समूह की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
प्रतिरोधी फफूंद की फिटनेस पर कम असर
इस शोध का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि वैज्ञानिकों को अभी तक इस बात के बहुत कम प्रमाण मिले कि इन म्यूटेशन के कारण रोगजनक की फिटनेस यानी सामान्य रूप से जीवित रहने और फैलने की क्षमता में बड़ी कमी आती है।
यदि किसी रोगजनक में फंगीसाइड प्रतिरोध पैदा होने के बाद उसकी जीवित रहने या संक्रमण फैलाने की क्षमता काफी कम हो जाए, तो समय के साथ ऐसे प्रतिरोधी रोगजनकों की संख्या घट सकती है।
लेकिन यदि प्रतिरोध के बावजूद रोगजनक सामान्य रूप से जीवित और सक्रिय रह सकता है, तो प्रतिरोधी आबादी खेतों में बनी रह सकती है। यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने भविष्य में खेत स्तर पर इस प्रतिरोध के प्रभाव को समझने के लिए और अधिक शोध की जरूरत बताई है।
दुनिया में पहली बार पुष्टि
Rothamsted Research के वैज्ञानिकों के अनुसार यह Plenodomus biglobosus में SDHI फंगीसाइड प्रतिरोध की दुनिया में पहली पुष्टि है।
शोध का नेतृत्व करने वाले Rothamsted के डॉ. केविन किंग ने प्रतिरोध के स्तर को उल्लेखनीय बताया है। उनके अनुसार अब यह पता लगाने के लिए आगे अध्ययन की आवश्यकता है कि प्रयोगशाला में दिखाई दिया यह प्रतिरोध वास्तविक खेत परिस्थितियों में फोमा रोग नियंत्रण को किस स्तर तक प्रभावित करता है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रयोगशाला परीक्षण किसी रोगजनक की फंगीसाइड संवेदनशीलता का संकेत देते हैं, लेकिन खेत में बीमारी का नियंत्रण कई कारकों पर निर्भर करता है।
यूरोप में फंगीसाइड प्रतिरोध की बढ़ती चिंता
- biglobosus में SDHI प्रतिरोध की यह खोज अकेली चिंता नहीं है। Rothamsted Research के वैज्ञानिक पहले भी यूरोप में फोमा स्टेम कैंकर के दोनों प्रमुख रोगजनकों में एजोल फंगीसाइड के प्रति संवेदनशीलता में कमी की रिपोर्ट कर चुके हैं।
इससे संकेत मिलता है कि फोमा रोग के नियंत्रण में फंगीसाइड प्रतिरोध की निगरानी को और गंभीरता से लेने की जरूरत है।
ऑयलसीड रेप जैसी फसलों में यदि अलग-अलग फंगीसाइड समूहों के प्रति रोगजनकों की संवेदनशीलता कम होती जाती है, तो किसानों के लिए प्रभावी रोग प्रबंधन अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में P. lingam में भी मिला SDHI प्रतिरोध
शोधकर्ताओं ने यह भी उल्लेख किया है कि हाल में Plenodomus lingam में SDHI प्रतिरोध ऑस्ट्रेलिया में पाया गया है। हालांकि यूरोप में P. lingam में SDHI प्रतिरोध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यह स्थिति दोनों Phoma रोगजनकों की नियमित निगरानी की आवश्यकता को और बढ़ाती है। केवल एक रोगजनक पर नजर रखने के बजाय वैज्ञानिकों का कहना है कि दोनों प्रमुख रोगजनकों की फंगीसाइड संवेदनशीलता की निगरानी जरूरी है।
किसानों के लिए क्या है संदेश?
इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि फंगीसाइड का इस्तेमाल केवल बीमारी दिखाई देने के बाद बार-बार एक ही रसायन के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। फंगीसाइड प्रतिरोध को रोकने के लिए एकीकृत रोग प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसमें रोग की नियमित निगरानी, सही समय पर फंगीसाइड का उपयोग, अलग-अलग प्रभावकारी समूहों की रणनीतिक रोटेशन और कृषि विशेषज्ञों की सलाह जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। हालांकि किसी फंगीसाइड के इस्तेमाल की वास्तविक रणनीति संबंधित फसल, रोग, स्थानीय पंजीकरण और उत्पाद के लेबल निर्देशों के अनुसार तय की जानी चाहिए।
Rothamsted Research के सह-लेखक प्रोफेसर जॉन वेस्ट ने भी लगातार निगरानी को महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार फंगीसाइड प्रतिरोध की शुरुआती पहचान से उभरते खतरे की जानकारी समय रहते मिल सकती है और फंगीसाइड की प्रभावशीलता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
फोमा रोग नियंत्रण के लिए निगरानी जरूरी
Plenodomus biglobosus में SDHI प्रतिरोध की पहली पुष्टि कृषि वैज्ञानिकों और फसल सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ब्रिटेन में प्रयोगशाला में पाया गया प्रतिरोध खेतों में बीमारी नियंत्रण को किस स्तर तक प्रभावित करता है। इसके लिए आगे क्षेत्रीय परीक्षण और व्यापक निगरानी की जरूरत होगी।
फिर भी अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि फंगीसाइड प्रतिरोध अब केवल एक संभावित भविष्य की समस्या नहीं है। अलग-अलग रोगजनकों में विभिन्न फंगीसाइड समूहों के प्रति संवेदनशीलता में बदलाव सामने आ रहे हैं। इसलिए रोगजनकों की नियमित निगरानी, प्रतिरोध की शुरुआती पहचान और एकीकृत रोग प्रबंधन रणनीति भविष्य में ऑयलसीड रेप जैसी महत्वपूर्ण तेलहन फसलों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकती है।
स्रोत: Rothamsted Research; Pest Management Science, “Discovery and characterisation of succinate dehydrogenase inhibitor resistance”, DOI: 10.1002/ps.71339.

