India Weather Update Today: देश के अलग-अलग हिस्सों में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम का मिजाज बदलता दिखाई दे रहा है। एक ओर उत्तर अंडमान सागर और म्यांमार तट के आसपास विकसित हुई शक्तिशाली मौसम प्रणाली का असर समुद्री इलाकों पर बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी India Meteorological Department (IMD) की 28 सितंबर को जारी अंडमान-निकोबार चेतावनी के अनुसार 29 सितंबर को द्वीपसमूह में Thunderstorm, Lightning और Squall की चेतावनी जारी है। यही स्थिति 30 सितंबर, 1 अक्टूबर और 2 अक्टूबर तक कुछ हद तक जारी रहने का पूर्वानुमान दिया गया है। 28 सितंबर के लिए भारी बारिश की चेतावनी भी दी गई थी।
समुद्री मौसम भी फिलहाल पूरी तरह शांत नहीं है। IMD के तटीय बुलेटिन के अनुसार उत्तर अंडमान सागर के ऊपर दक्षिण से दक्षिण-पश्चिम दिशा की हवा लगभग 20-25 नॉट की रफ्तार से चलने और झोंकों में 30 नॉट तक पहुंचने की संभावना जताई गई। उत्तर अंडमान सागर में समुद्र की स्थिति moderate to rough, कुछ समय के लिए very rough होने का अनुमान भी दिया गया हैऐसे में आज का मौसम अपडेट (India Weather Update Today) केवल बारिश तक सीमित नहीं है। कुछ क्षेत्रों में तेज हवा, बिजली गिरने और समुद्र में ऊंची लहरों जैसी स्थितियों पर भी नजर रखना जरूरी है।
अंडमान और निकोबार में क्यों जारी है आंधी-तूफान का अलर्ट?
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में बनने वाली मौसम प्रणालियों का असर यहां जल्दी दिखाई देता है। इस समय उत्तर अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार क्षेत्र में विकसित हुए कम दबाव के सिस्टम ने मौसम को प्रभावित किया है।
IMD के अनुसार 28 सितंबर को उत्तर अंडमान सागर और म्यांमार तट के पास बनी प्रणाली मजबूत होकर Deep Depression में बदल गई थी। यह उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ी और म्यांमार तट की ओर पहुंची। 28 सितंबर की शाम इसका केंद्र म्यांमार तट के बेहद करीब था।हालांकि यह सिस्टम भारत में सीधे किसी चक्रवाती तूफान के रूप में प्रवेश करने की स्थिति में नहीं बताया गया, लेकिन इसके प्रभाव से अंडमान सागर में हवा, बारिश और समुद्री परिस्थितियां खराब रह सकती हैं।इसी वजह से Andaman Weather Alert के तहत लोगों, मछुआरों और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए मौसम संबंधी चेतावनियां महत्वपूर्ण हो गई हैं।
अंडमान सागर में लहरें और तेज हवाएं बढ़ा सकती हैं परेशानी
IMD के तटीय पूर्वानुमान के अनुसार अंडमान और निकोबार तट पर कई जगह बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। उत्तर अंडमान सागर में तेज बारिश या गरज के दौरान विजिबिलिटी कम होने की आशंका भी जताई गई है। 29 सितंबर की रात तक कुछ क्षेत्रों में लंबी अवधि की swell waves यानी समुद्री उभार वाली लहरों की संभावना भी बताई गई है। ऐसे में छोटी नावों और मनोरंजक समुद्री गतिविधियों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
स्थानीय निवासियों के लिए इसका मतलब यह नहीं है कि हर जगह लगातार तूफानी स्थिति बनी रहेगी। मौसम में तेजी से बदलाव हो सकता है। किसी जगह कुछ समय तक मौसम सामान्य रह सकता है और उसके बाद अचानक गरज-चमक, बारिश और हवा तेज हो सकती है।
क्या अंडमान में चक्रवात आने वाला है?
अंडमान के मौसम को लेकर अक्सर सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या किसी कम दबाव या डिप्रेशन का मतलब चक्रवात आने वाला है।मौजूदा स्थिति में ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। 28 सितंबर को उत्तर अंडमान सागर और म्यांमार तट के पास बना सिस्टम Deep Depression में बदला था और म्यांमार तट की ओर बढ़ रहा था। उपलब्ध IMD जानकारी में इसके भारतीय तट पर किसी नए चक्रवाती तूफान के रूप में आने का संकेत नहीं दिया गया था। इसलिए सोशल मीडिया पर चलने वाले किसी भी अनधिकृत Cyclone Alert पर भरोसा करने के बजाय IMD के आधिकारिक बुलेटिन को प्राथमिकता देना बेहतर है।
कई राज्यों में भारी बारिश का अनुमान
IMD Weather Update के अनुसार मौसम की गतिविधियां केवल अंडमान तक सीमित नहीं हैं। 30 सितंबर के आसपास पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
ताजा उपलब्ध पूर्वानुमान में असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, केरल और माहे, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बताई गई है। कई क्षेत्रों में गरज, बिजली और तेज झोंकेदार हवाएं भी मौसम का हिस्सा रह सकती हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि Heavy Rain Alert का अर्थ पूरे राज्य में एक जैसी बारिश नहीं होता। चेतावनी अक्सर किसी राज्य के चुनिंदा जिलों या अलग-अलग स्थानों के लिए जारी होती है।
पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?
पूर्वोत्तर भारत में सितंबर के अंतिम दिनों में मौसम एक बार फिर सक्रिय दिखाई दे सकता है। असम और मेघालय से लेकर नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा तक कई क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियों के बने रहने का अनुमान है।
पर्वतीय और ढलान वाले इलाकों में लगातार या तेज बारिश होने पर स्थानीय स्तर पर जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए यात्रियों को सड़क की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए।
पूर्वोत्तर में बारिश अक्सर बहुत स्थानीय होती है। एक जिले में तेज बारिश होने के बावजूद पास के दूसरे जिले में हल्की बारिश या बादल छाए रह सकते हैं। इसी वजह से Northeast India Weather Forecast देखते समय जिला स्तर का अपडेट अधिक उपयोगी रहता है।
असम और मेघालय में भारी बारिश की संभावना
असम और मेघालय उन राज्यों में शामिल हैं जहां आगामी मौसम पूर्वानुमान में अलग-अलग जगह भारी बारिश की संभावना बताई गई है। इन क्षेत्रों में नदियों और पहाड़ी जलधाराओं के आसपास रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। बहुत कम समय में ज्यादा बारिश होने से स्थानीय जलस्तर तेजी से बदल सकता है। शहरी इलाकों में भारी बारिश का सबसे सीधा असर यातायात और जलभराव पर दिखाई दे सकता है।
नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा का मौसम
नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के लिए भी बारिश का दौर जारी रहने के संकेत हैं। कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक हो सकती है।aपहाड़ी सड़कों पर यात्रा करने वालों को विशेष रूप से मौसम अपडेट देखते रहना चाहिए। बारिश के दौरान दृश्यता कम हो सकती है और सड़क पर मिट्टी या मलबा आने का जोखिम बढ़ सकता है।
दक्षिण भारत में बारिश फिर बढ़ेगी?
दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। South India Weather Update के मुताबिक केरल, तमिलनाडु, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक तथा पुडुचेरी और कराईकल के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है।इसका असर कई बड़े और छोटे शहरों में अलग-अलग तरीके से देखने को मिल सकता है। कहीं शाम या रात में तेज बारिश हो सकती है, तो कहीं दिन के दौरान बादल और कुछ दौर की बारिश हो सकती है।
केरल में बारिश का अलर्ट
केरल में मानसूनी नमी की मौजूदगी के कारण अलग-अलग स्थानों पर बारिश की संभावना बनी हुई है। आगामी अवधि के लिए केरल और माहे के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा का पूर्वानुमान भी सामने आया है। पहाड़ी जिलों में रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय district weather alert देखना महत्वपूर्ण है। तटीय इलाकों में समुद्र की स्थिति से संबंधित चेतावनी भी अलग से जांचनी चाहिए।
कर्नाटक का मौसम: बेंगलुरु में भी बारिश के आसार
कर्नाटक में भी मौसम सक्रिय बना हुआ है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में बारिश की संभावना है, जबकि बेंगलुरु सहित कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं।29 सितंबर को प्रकाशित क्षेत्रीय मौसम रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में मंगलवार से गुरुवार तक बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। कुछ क्षेत्रों में गरज और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाएं चल सकती हैं, जो कुछ समय के लिए लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। इसलिए Bengaluru Weather Today और Karnataka Rain Alert जैसे अपडेट देखने वालों के लिए आने वाले दो-तीन दिन अहम रह सकते हैं।
तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी बारिश संभव
तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल भी उन क्षेत्रों में शामिल हैं जहां आगामी 24 घंटे के आसपास अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। The Times of Indiaचेन्नई सहित तटीय तमिलनाडु में मौसम बहुत स्थानीय हो सकता है। शहर के एक हिस्से में तेज बारिश और दूसरे हिस्से में केवल बादल जैसी स्थिति संभव है। इसलिए बड़े राज्य-स्तरीय पूर्वानुमान के साथ शहर और जिले का local weather forecast देखना उपयोगी रहेगा।
उत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?
उत्तर भारत में पिछले कुछ दिनों में मौसम ने कई जगह करवट ली है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पिछले दौर में तेज बारिश दर्ज की गई और 27 सितंबर के लिए उत्तराखंड तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। अब मौसम प्रणाली कमजोर होने और आगे बढ़ने के साथ बारिश की तीव्रता सभी जगह एक जैसी रहने की उम्मीद नहीं है।इसके बावजूद मानसून की वापसी के दौर में स्थानीय गरज-चमक और अचानक बारिश से इनकार नहीं किया जा सकता। सितंबर के अंतिम दिनों में North India Weather Update तेजी से बदल सकता है।
दिल्ली-NCR का मौसम कैसा रहेगा?
दिल्ली-NCR में हाल में बादल और कुछ इलाकों में बारिश ने गर्मी से राहत दिलाई है। 28 सितंबर को दिल्ली-NCR में बादल, अपेक्षाकृत सुहावना मौसम और अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना दर्ज की गई थी।29 सितंबर के दौरान भी आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। हालांकि दिल्ली के लिए भारी बारिश की व्यापक चेतावनी को पूरे क्षेत्र पर लागू मानना उचित नहीं होगा।दिल्ली में बारिश का वितरण अक्सर असमान रहता है। नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में वर्षा की मात्रा काफी अलग हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के बाद हालात
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले दिनों तेज बारिश का असर देखने को मिला है। एक मजबूत मौसम प्रणाली के कारण पूर्व में व्यापक वर्षा हुई थी। 27 सितंबर के IMD अपडेट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई थी। India Meteorological Department ऐसे क्षेत्रों में अगले दौर की बारिश भले ही कम हो, लेकिन जमीन में पहले से मौजूद नमी और जलभराव के कारण लोगों को सावधानी बनाए रखने की जरूरत होती है। निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वालों को स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सूचना पर ध्यान देना चाहिए।
उत्तराखंड और हिमालयी इलाकों में सावधानी जरूरी
पर्वतीय इलाकों में मौसम का खतरा केवल बारिश की मात्रा से तय नहीं होता। थोड़े समय की तेज वर्षा भी ढलानों को अस्थिर कर सकती है।उत्तराखंड में पिछले दिनों भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी के बाद यात्रियों को पहाड़ी मार्गों पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी। यदि आप पहाड़ी यात्रा पर हैं तो किसी भी सड़क मार्ग पर निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन, यातायात पुलिस और मौसम विभाग का अपडेट जरूर देखें।
पश्चिम बंगाल में कैसा रहेगा मौसम?
पश्चिम बंगाल में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग रह सकता है। उपलब्ध ताजा क्षेत्रीय रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण बंगाल में अगले कुछ दिनों के दौरान व्यापक भारी बारिश की आशंका कम बताई गई है, हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की बारिश संभव है। उत्तर बंगाल के पहाड़ी और तराई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसलिए पूरे पश्चिम बंगाल को एक समान भारी बारिश वाले क्षेत्र के रूप में देखना सही नहीं होगा। तटीय मौसम बुलेटिन में पश्चिम बंगाल तट पर एक-दो स्थानों पर बारिश या गरज के साथ बौछारों की संभावना भी बताई गई थी।
ओडिशा और मध्य भारत में पिछले सिस्टम का असर
सितंबर के अंतिम सप्ताह में ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों को एक अलग डिप्रेशन ने प्रभावित किया था। 25 सितंबर को IMD ने दक्षिण छत्तीसगढ़ और दक्षिण आंतरिक ओडिशा के आसपास बनी प्रणाली के असर से छत्तीसगढ़ तथा मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बहुत तेज बारिश की संभावना जताई थी। इसके बाद सिस्टम उत्तर और उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के मौसम को भी प्रभावित करता रहा।इसका मतलब यह है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में देश के मौसम पर एक साथ कई अलग-अलग प्रणालियों का असर रहा है।
मानसून की वापसी के समय क्यों बदलता रहता है मौसम?
सितंबर का आखिरी सप्ताह दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए संक्रमण का समय होता है। उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी शुरू होने लगती है, लेकिन बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में नमी तथा कम दबाव की प्रणालियां अभी भी बारिश करा सकती हैं।इसी कारण देश के एक हिस्से में मौसम साफ होने लगता है जबकि दूसरे हिस्से में तेज बारिश शुरू हो सकती है।बंगाल की खाड़ी में बनने वाला Low Pressure Area, Depression या Deep Depression पूर्वी, मध्य और कभी-कभी उत्तर भारत तक बड़ी मात्रा में नमी पहुंचा सकता है।वहीं अंडमान सागर में बनने वाली प्रणाली का असर अंडमान-निकोबार, पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी और म्यांमार-बांग्लादेश क्षेत्र में ज्यादा दिखाई दे सकता है।
Depression और Deep Depression में क्या अंतर है?
मौसम से जुड़े अपडेट में अक्सर Low Pressure Area, Depression, Deep Depression और Cyclonic Storm जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं।Low Pressure Area यानी कम दबाव का क्षेत्र मौसम प्रणाली का शुरुआती रूप हो सकता है। यदि हवा की रफ्तार और परिसंचरण बढ़ता है तो यह Depression में बदल सकता है। इसके और मजबूत होने पर इसे Deep Depression कहा जाता है।हर Deep Depression का Cyclone बनना जरूरी नहीं है।यही वजह है कि केवल किसी डिप्रेशन की खबर देखकर चक्रवात आने का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। मौसम विभाग समुद्र की सतह के तापमान, हवा की गति, दिशा, नमी और वायुमंडलीय परिस्थितियों को देखकर इसकी आगे की तीव्रता का अनुमान लगाता है।
Thunderstorm Alert का क्या मतलब होता है?
Thunderstorm Alert का मतलब गरज वाले बादलों के विकसित होने की संभावना है। इनके साथ बिजली चमक सकती है, तेज बारिश हो सकती है और अचानक तेज हवा चल सकती है।कुछ स्थितियों में Squall यानी थोड़े समय के लिए अचानक तेज हवा भी चल सकती है।अंडमान-निकोबार के लिए 29 सितंबर के IMD warning में Thunderstorm, Lightning और Squall शामिल हैं। बिजली चमकने या गरज सुनाई देने पर खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों के नीचे और समुद्र किनारे खुले स्थानों पर रुकना उचित नहीं होता।
मछुआरों के लिए मौसम क्यों महत्वपूर्ण?
समुद्र में हवा की रफ्तार और लहरों की ऊंचाई जमीन के मौसम से बिल्कुल अलग हो सकती है। इसलिए तटीय शहर में मौसम सामान्य दिखने के बावजूद समुद्र में परिस्थिति खराब हो सकती है।उत्तर अंडमान सागर में समुद्र को moderate से rough और कुछ समय के लिए very rough बताया गया है। तेज बारिश के दौरान दृश्यता भी कम हो सकती है। India Meteorological Department इसीलिए मछुआरों और छोटी नावों के संचालकों को सामान्य मोबाइल मौसम ऐप की बजाय आधिकारिक Marine Weather Forecast और स्थानीय प्रशासन की चेतावनी देखनी चाहिए।
भारी बारिश में आम लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
भारी बारिश और गरज-चमक वाले मौसम में कुछ साधारण सावधानियां नुकसान का खतरा कम कर सकती हैं।
जलभराव वाली सड़क पर गहराई का अंदाजा लगाए बिना वाहन न ले जाएं। बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। तेज हवा के दौरान कमजोर पेड़ों, होर्डिंग या अस्थायी संरचनाओं से दूरी रखें।पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना समझदारी हो सकती है, खासकर जहां स्थानीय प्रशासन ने भूस्खलन या सड़क बंद होने की चेतावनी जारी की हो।समुद्री इलाकों में स्थानीय प्रशासन और Coast Guard से संबंधित आधिकारिक निर्देशों का पालन करना चाहिए।
किसानों के लिए मौसम अपडेट क्यों जरूरी?
सितंबर का अंतिम चरण खरीफ फसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है। बहुत तेज बारिश तैयार फसल को प्रभावित कर सकती है, जबकि लंबे समय की नमी कटाई, भंडारण और परिवहन में समस्या पैदा कर सकती है।किसानों के लिए केवल पूरे राज्य का मौसम पूर्वानुमान देखने के बजाय District Level Weather Forecast और कृषि मौसम सलाह देखना अधिक उपयोगी होता है।यदि भारी बारिश की चेतावनी हो तो खेत में सिंचाई, कीटनाशक छिड़काव और कटी हुई फसल को खुले में रखने जैसे फैसले स्थानीय सलाह के अनुसार किए जाने चाहिए।
अगले 24 से 48 घंटे में कहां ज्यादा नजर रखने की जरूरत?
मौजूदा India Rain Forecast में तीन क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।पहला, अंडमान और निकोबार, जहां गरज-चमक, Squall और समुद्री मौसम पर नजर बनी हुई है। दूसरा, पूर्वोत्तर भारत, जहां असम, मेघालय और आसपास के राज्यों में भारी बारिश की संभावना है। तीसरा, दक्षिण भारत, जहां केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के सक्रिय दौर का अनुमान है। हालांकि इन चेतावनियों का असर जिले-दर-जिले बदल सकता है।
क्या 30 सितंबर के बाद भी अंडमान में खराब मौसम रहेगा?
28 सितंबर को जारी IMD के सात दिन के warning schedule के मुताबिक अंडमान-निकोबार में 29 सितंबर, 30 सितंबर, 1 अक्टूबर और 2 अक्टूबर तक गरज-चमक और Squall की चेतावनी दिखाई गई है। 3 और 4 अक्टूबर के लिए उस बुलेटिन में कोई चेतावनी नहीं थी।लेकिन मौसम पूर्वानुमान समय के साथ अपडेट होता रहता है। इसलिए बाद में जारी होने वाला नया बुलेटिन पुराने अनुमान में बदलाव कर सकता है।
Weather Alert के रंगों का क्या मतलब है?
IMD मौसम के संभावित प्रभाव के आधार पर अलग-अलग रंगों की चेतावनी जारी करता है।Green Alert का सामान्य अर्थ महत्वपूर्ण चेतावनी नहीं होना है। Yellow Alert लोगों को अपडेट रहने के लिए कहता है। Orange Alert अधिक गंभीर मौसम की संभावना में तैयारी रखने का संकेत देता है, जबकि Red Alert अत्यधिक गंभीर मौसम की स्थिति में कार्रवाई की जरूरत दिखाता है।हालांकि किसी भी अलर्ट का वास्तविक अर्थ संबंधित बुलेटिन में दिए गए खतरे और स्थान के साथ देखना चाहिए।
सोशल मीडिया के Weather Updates पर कितना भरोसा करें?
तेज बारिश या चक्रवात की आशंका होते ही सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और पुराने मौसम मानचित्र अक्सर दोबारा वायरल होने लगते हैं।किसी पोस्ट में केवल “Cyclone coming”, “Red Alert” या “100 kmph winds” लिखा होने से वह जानकारी आधिकारिक नहीं हो जाती।सबसे विश्वसनीय अपडेट के लिए IMD, राज्य मौसम केंद्र और स्थानीय आपदा प्रबंधन विभाग की ताजा सूचना देखनी चाहिए।विशेष रूप से अंडमान सागर जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में सिस्टम की दिशा और तीव्रता कुछ घंटों में बदल सकती है।
आज के मौसम की बड़ी बातें एक नजर में
29 सितंबर 2026 के उपलब्ध मौसम अपडेट में अंडमान-निकोबार में गरज-चमक, तेज हवा और Squall की चेतावनी प्रमुख है। उत्तर अंडमान सागर में समुद्र moderate से rough रहने और कई स्थानों पर बारिश या thundershower की संभावना बताई गई है।
इसके साथ ही पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में आगामी अवधि में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इनमें असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल शामिल हैं। कर्नाटक में भी कई क्षेत्रों में बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवा चल सकती है।
India Weather Update Today की बात करें तो देश में फिलहाल एक जैसा मौसम नहीं है। अंडमान-निकोबार में समुद्री मौसम और गरज-चमक मुख्य चिंता बने हुए हैं, जबकि पूर्वोत्तर तथा दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना है।
अंडमान सागर के पास बना Deep Depression म्यांमार की ओर बढ़ चुका है, लेकिन इससे जुड़े बादल और समुद्री प्रभाव क्षेत्र के मौसम को प्रभावित कर रहे हैं। अंडमान-निकोबार के लिए 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक अलग-अलग दिनों में Thunderstorm, Lightning और Squall की चेतावनी जारी की गई है।
दूसरी ओर असम, मेघालय और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के साथ केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश पर नजर रखने की जरूरत है। मौसम की स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए किसी भी यात्रा, समुद्री गतिविधि या स्थानीय योजना से पहले अपने जिले का ताजा IMD forecast देखना सबसे उपयोगी रहेगा।
