• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

कसावा से बनेंगे हेल्दी फ्राइड स्नैक्स, ICAR-CTCRI ने Sugam Organics के साथ किया टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग समझौता

Cassava to be used for healthy fried snacks; ICAR-CTCRI signs technology licensing agreement with Sugam Organics

Fiza by Fiza
September 30, 2026
in कृषि समाचार
0
Cassava to be used for healthy fried snacks; ICAR-CTCRI signs technology licensing agreement with Sugam Organics

Cassava to be used for healthy fried snacks; ICAR-CTCRI signs technology licensing agreement with Sugam Organics

0
SHARES
3
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कसावा यानी टैपिओका से मूल्यवर्धित खाद्य उत्पाद तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान (ICAR-CTCRI), तिरुवनंतपुरम ने Sugam Organics के साथ कसावा से फ्राइड स्नैक फूड तैयार करने की तकनीक के लिए टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस समझौते के तहत Sugam Organics को ICAR-CTCRI द्वारा विकसित कसावा आधारित फ्राइड स्नैक उत्पादन तकनीक का इस्तेमाल करने का अधिकार मिलेगा। समझौते पर Sugam Organics की प्रोपराइटर सुश्री सुगंधी ए. और ICAR-CTCRI के निदेशक डॉ. जी. बिजू ने हस्ताक्षर किए।

यह पहल कंद फसलों के मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण और किसानों के लिए बाजार आधारित अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। कसावा से तैयार होने वाले विभिन्न खाद्य उत्पादों के माध्यम से पारंपरिक कंद फसल को एक ऐसे खाद्य उत्पाद में बदला जा सकता है जिसकी उपभोक्ता बाजार में मांग पैदा की जा सके।

कसावा है महत्वपूर्ण उष्णकटिबंधीय कंद फसल

कसावा, जिसे भारत के कई हिस्सों में टैपिओका के नाम से जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण उष्णकटिबंधीय कंद फसल है। कई क्षेत्रों में इसका उपयोग पारंपरिक भोजन के रूप में किया जाता है। यह मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का महत्वपूर्ण स्रोत है और इसमें कैल्शियम, आयरन तथा पोटैशियम जैसे खनिज तत्वों के साथ डायटरी फाइबर भी पाया जाता है।

कसावा की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी बहुउपयोगिता शामिल है। इससे पारंपरिक खाद्य पदार्थों के अलावा विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। यही कारण है कि कंद फसलों के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन पर अनुसंधान संस्थानों द्वारा लगातार ध्यान दिया जा रहा है।

कच्चे कसावा को सीधे बाजार में बेचने के बजाय यदि उससे प्रसंस्कृत और पैकेज्ड खाद्य उत्पाद तैयार किए जाएं, तो कृषि उपज को एक अलग बाजार श्रेणी में पहुंचाने की संभावना बनती है।

ICAR-CTCRI की तकनीक का होगा इस्तेमाल

टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग समझौते के तहत Sugam Organics, ICAR-CTCRI की उस तकनीक का इस्तेमाल करेगी जिसके माध्यम से कसावा से फ्राइड स्नैक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

समझौते के अनुसार कंपनी आवश्यक कसावा कंद की sourcing करेगी और इसके बाद तकनीक के अनुरूप उनका प्रसंस्करण एवं उत्पाद तैयार करेगी।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि कंपनी द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों में कृत्रिम रंगों और अनावश्यक रासायनिक एडिटिव्स को शामिल नहीं करने पर जोर दिया गया है।

इससे कसावा आधारित उत्पादों को ऐसे मूल्यवर्धित खाद्य विकल्प के रूप में विकसित करने की संभावना बनती है, जिसमें कच्चे कृषि उत्पाद की उपयोगिता को बढ़ाकर उपभोक्ता तक तैयार खाद्य उत्पाद पहुंचाया जा सके।

मूल्यवर्धन से बढ़ सकते हैं कृषि उत्पाद के अवसर

कृषि क्षेत्र में मूल्यवर्धन का अर्थ केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। जब किसी कृषि उत्पाद को प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से बाजार के लिए तैयार किया जाता है, तो उसके उपयोग और बाजार अवसरों का विस्तार हो सकता है।

कसावा के मामले में भी यही संभावना है। किसानों द्वारा उत्पादित कंद को सीधे बेचने के साथ-साथ उससे स्नैक्स और अन्य खाद्य उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

ऐसे उत्पादों के लिए प्रसंस्करण इकाइयों, खाद्य उद्यमों और स्थानीय स्तर पर व्यवसायिक गतिविधियों का विकास भी संभव है। इससे कंद फसलों से जुड़े फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है।

हालांकि, वास्तविक आर्थिक लाभ उत्पादन लागत, कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार मांग, प्रसंस्करण क्षमता, पैकेजिंग, वितरण और उत्पाद की बिक्री जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

Sugam Organics तैयार करेगी कसावा आधारित स्नैक

समझौते के तहत Sugam Organics आवश्यक कसावा कंद की व्यवस्था करेगी और ICAR-CTCRI से लाइसेंस प्राप्त तकनीक के अनुसार उनका प्रसंस्करण करेगी।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य कसावा को एक तैयार फ्राइड स्नैक उत्पाद में बदलना है। इससे उपभोक्ताओं के लिए कसावा आधारित खाद्य उत्पाद का एक नया विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

कंपनी ने कंद फसलों के लाभों को ध्यान में रखते हुए स्वादिष्ट और स्वास्थ्यपरक उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया है। उत्पादों में कृत्रिम रंग और अनावश्यक रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल से बचने की बात भी संस्थान द्वारा जारी जानकारी में कही गई है।

यह दृष्टिकोण उपभोक्ताओं के बीच ऐसे खाद्य उत्पादों की बढ़ती रुचि के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनमें सामग्री और प्रसंस्करण को लेकर अधिक पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है।

किसानों के लिए भी बन सकता है नया बाजार

कसावा आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों के विस्तार से इस फसल के लिए नए बाजार अवसर विकसित होने की संभावना है। यदि प्रसंस्करण इकाइयों की मांग बढ़ती है, तो गुणवत्तापूर्ण कसावा कंद की नियमित आपूर्ति की आवश्यकता भी बढ़ सकती है।

इससे उत्पादन और प्रसंस्करण के बीच बेहतर संबंध विकसित किया जा सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण क्षमता और बाजार की मांग के विकास पर निर्भर करेगा।

कृषि क्षेत्र में ऐसी तकनीकों का व्यावसायीकरण अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्यमों के बीच सहयोग का एक उदाहरण भी है। वैज्ञानिक संस्थान तकनीक विकसित करते हैं, जबकि निजी उद्यम उन्हें व्यावसायिक उत्पादन और बाजार तक पहुंचाने का काम कर सकते हैं।

कंद फसलों में प्रसंस्करण की बड़ी संभावनाएं

भारत में कंद फसलों का उपयोग पारंपरिक भोजन के साथ-साथ स्टार्च, आटा और विभिन्न खाद्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। लेकिन कई क्षेत्रों में इन फसलों के मूल्यवर्धन की संभावनाओं का अभी भी व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाना बाकी है।

कंद फसलों में आलू, शकरकंद, कसावा, अरबी और अन्य फसलें शामिल हैं, जिनसे अलग-अलग प्रकार के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं।

कसावा से फ्राइड स्नैक तैयार करने की तकनीक इसी दिशा में एक उदाहरण है। इससे कच्चे कंद को सीधे खाद्य उत्पाद में बदलने की प्रक्रिया विकसित होती है, जिससे फसल का उपयोग केवल पारंपरिक भोजन तक सीमित नहीं रहता।

बिना कृत्रिम रंग के उत्पाद पर जोर

इस तकनीकी समझौते की एक प्रमुख विशेषता उत्पादों में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल न करने पर दिया गया जोर है।

आज उपभोक्ता खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, एडिटिव्स और प्रसंस्करण प्रक्रिया को लेकर अधिक जानकारी चाहते हैं। ऐसे में खाद्य उत्पादों के निर्माण में अनावश्यक एडिटिव्स से बचने की कोशिश एक अलग बाजार पहचान बनाने में मदद कर सकती है।

हालांकि किसी खाद्य उत्पाद को ‘स्वास्थ्यवर्धक’ मानने के लिए उसके संपूर्ण पोषण प्रोफाइल, तेल की मात्रा, नमक, ऊर्जा और अन्य सामग्री का भी मूल्यांकन आवश्यक होता है। इसलिए बिना कृत्रिम रंग या अनावश्यक रसायनों के तैयार उत्पाद होना अपने आप में संपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी दावा नहीं माना जाना चाहिए।

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से अनुसंधान का व्यावसायीकरण

ICAR संस्थानों द्वारा विकसित तकनीकों का निजी उद्यमों को लाइसेंस देना अनुसंधान के व्यावसायीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकें जब उद्योग या उद्यमों तक पहुंचती हैं, तो उनके आधार पर बाजार के लिए वास्तविक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इससे शोध और व्यवसाय के बीच की दूरी कम करने में मदद मिलती है।

ICAR-CTCRI लंबे समय से कंद फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से जुड़े अनुसंधान पर काम कर रहा है। इस प्रकार के तकनीकी समझौते संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों को व्यावसायिक क्षेत्र में उपयोग करने का माध्यम प्रदान करते हैं।

ग्रामीण उद्यमिता के लिए भी अवसर

कसावा आधारित स्नैक जैसे उत्पादों के निर्माण में छोटे और मध्यम स्तर के खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के लिए भी संभावनाएं बन सकती हैं।

यदि स्थानीय स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार संपर्क उपलब्ध हो, तो कंद फसलों पर आधारित छोटे खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय विकसित किए जा सकते हैं।

ऐसे व्यवसाय स्थानीय कृषि उत्पादों को स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्कृत करके बाजार तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। इससे परिवहन और कच्चे उत्पाद की बिक्री पर निर्भरता कम करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

हालांकि किसी भी खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय की सफलता के लिए खाद्य सुरक्षा मानकों, लाइसेंसिंग, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ, बाजार मांग और लागत प्रबंधन का ध्यान रखना आवश्यक होगा।

ICAR-CTCRI और निजी क्षेत्र की साझेदारी

यह समझौता सार्वजनिक कृषि अनुसंधान संस्थान और निजी खाद्य उद्यम के बीच तकनीकी साझेदारी का उदाहरण है। एक ओर ICAR-CTCRI द्वारा विकसित तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है, वहीं दूसरी ओर Sugam Organics इस तकनीक के आधार पर बाजार के लिए उत्पाद तैयार करेगी।

ऐसी साझेदारी से कृषि अनुसंधान के परिणामों को व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। विशेष रूप से मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के मामले में यह मॉडल किसानों, प्रसंस्करण उद्योग और उपभोक्ताओं के बीच एक नई मूल्य श्रृंखला विकसित करने में सहायक हो सकता है।

कंद फसलों को मिल सकती है नई पहचान

कसावा आमतौर पर कई क्षेत्रों में पारंपरिक खाद्य फसल के रूप में जाना जाता है। लेकिन इससे तैयार होने वाले मूल्यवर्धित खाद्य उत्पाद इसे आधुनिक खाद्य बाजार में एक अलग पहचान दिला सकते हैं।

फ्राइड स्नैक के रूप में कसावा के इस्तेमाल से उपभोक्ताओं के सामने इस फसल का एक नया उपयोग सामने आएगा। यदि ऐसे उत्पादों को गुणवत्ता, स्वाद, सुरक्षित प्रसंस्करण और उचित पैकेजिंग के साथ बाजार में विकसित किया जाता है, तो कसावा आधारित खाद्य उत्पादों की एक नई श्रेणी तैयार हो सकती है।

समझौते से आगे बढ़ेगा मूल्यवर्धन का प्रयास

28 सितंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में हुए इस टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग एग्रीमेंट के माध्यम से ICAR-CTCRI और Sugam Organics ने कसावा आधारित फ्राइड स्नैक उत्पादन की दिशा में सहयोग शुरू किया है।

समझौते पर Sugam Organics की प्रोपराइटर सुश्री सुगंधी ए. और ICAR-CTCRI के निदेशक डॉ. जी. बिजू ने हस्ताक्षर किए।

यह पहल कंद फसलों में मूल्यवर्धन और प्रसंस्करण की संभावनाओं को सामने लाती है। कसावा से तैयार होने वाले फ्राइड स्नैक जैसे उत्पादों के माध्यम से पारंपरिक कृषि उपज को आधुनिक खाद्य बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

आने वाले समय में ऐसे तकनीकी हस्तांतरण और उद्योग-संस्थान सहयोग से कंद फसलों पर आधारित नए खाद्य उत्पाद विकसित करने, प्रसंस्करण को बढ़ावा देने और कृषि उपज के मूल्यवर्धन के अवसर बढ़ाने की संभावना है।

Tags: AgricultureFarmingFarming NewsICAR
Previous Post

मुरैरा गांव में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश, ICAR-IISWC ने चलाया विशेष जागरूकता अभियान

Next Post

Contract Farming Model क्या है? किसान कैसे बढ़ाएं अपनी आय

Next Post
Contract Farming Model

Contract Farming Model क्या है? किसान कैसे बढ़ाएं अपनी आय

Recent Posts

  • रबी से पहले खाद बिक्री में गिरावट, 25 सितंबर तक यूरिया-DAP की बिक्री अनुमान से कम
  • रबी 2026-27 में 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य, El Niño पर नजर
  • पंजाब में DAP-यूरिया की मांग बढ़ी, रबी बुवाई से पहले समय पर आपूर्ति की मांग
  • Rajasthan Farmer ID: 90.19 लाख किसानों की डिजिटल पहचान, उत्तर भारत में बना नंबर-1 राज्य
  • रबी 2026-27 में खाद का रिकॉर्ड स्टॉक, 1.70 करोड़ टन पहुंचा भंडार

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.

Go to mobile version