पंजाब में Paddy Straw Management और Crop Residue Burning की समस्या को कम करने के लिए पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) की ओर से किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में PAU के RAWE Students ने लुधियाना के गांव पामल में Crop Residue Management Awareness Camp का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को धान की पराली के Sustainable Management के बारे में जानकारी देना और Crop Residue Burning से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करने के लिए व्यावहारिक विकल्पों से परिचित कराना था।
यह Awareness Camp डॉ. लोपामुद्रा महापात्रा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में Agricultural Development Officer (ADO) सुश्री वीरपाल ने भी सहयोग किया और किसानों को Crop Residue Management Machinery की खरीद के लिए उपलब्ध Government Schemes तथा Financial Subsidies की जानकारी दी।
कैंप में किसानों को यह समझाने पर विशेष जोर दिया गया कि Paddy Straw केवल खेत में जलाने वाला Waste नहीं है, बल्कि उचित Technology और Management Practices के माध्यम से इसे एक Valuable Resource में बदला जा सकता है। किसानों को In-situ और Ex-situ दोनों तरह के Residue Management Options के बारे में विस्तार से बताया गया।
पराली प्रबंधन को लेकर किसानों को किया जागरूक
धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले Crop Residue को लेकर पंजाब और उत्तर भारत के कई कृषि क्षेत्रों में हर साल चर्चा होती है। किसानों के लिए कम समय में खेत तैयार करना एक महत्वपूर्ण चुनौती होती है। Paddy Harvesting के बाद गेहूं की बुवाई के लिए किसानों के पास सीमित समय होता है। ऐसे में कुछ किसान पराली को खेत में ही जलाने का रास्ता अपनाते हैं।
Crop Residue Burning से जहां मिट्टी और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है, वहीं Air Quality से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इसी कारण Sustainable Agriculture के तहत किसानों को ऐसे विकल्पों की जानकारी देना महत्वपूर्ण है, जिनसे खेत की तैयारी समय पर हो और Residue का बेहतर उपयोग भी किया जा सके।
पामल गांव में आयोजित Awareness Camp में RAWE Students ने किसानों से संवाद करते हुए बताया कि वैज्ञानिक तरीके से Crop Residue Management अपनाकर पराली को खेत में ही Manage किया जा सकता है या फिर उसे विभिन्न उपयोगी Products के लिए Raw Material के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
PAU की Technologies और Machinery की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान RAWE Students ने पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित और सुझाई गई विभिन्न Technologies तथा Farm Machinery के बारे में किसानों को जानकारी दी। विशेष रूप से Smart Seeder, Super Seeder, Happy Seeder और PAU Super SMS Combine जैसी मशीनों के Operational Benefits समझाए गए।
इन Machines का उद्देश्य धान की कटाई के बाद बचे Crop Residue को बेहतर तरीके से Manage करना है। किसानों को बताया गया कि Mechanised Residue Management से खेत में पराली जलाने की जरूरत को कम किया जा सकता है और उपलब्ध संसाधनों का अधिक Sustainable तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।
Smart Seeder से Residue Management
Smart Seeder जैसी Technology किसानों को Paddy Residue के बीच अगली फसल की बुवाई में मदद कर सकती है। ऐसी तकनीकों का महत्व खास तौर पर उन क्षेत्रों में बढ़ जाता है जहां Paddy-Wheat Cropping System प्रमुख है।
कैंप में किसानों को मशीनों की Working और उनके Practical Applications के बारे में बताया गया, ताकि किसान अपनी Farm Conditions और Cropping System के अनुसार उपयुक्त विकल्प का चुनाव कर सकें।
Super Seeder और Happy Seeder का उपयोग
Awareness Camp में Super Seeder और Happy Seeder के बारे में भी जानकारी दी गई। इन मशीनों का उपयोग Crop Residue Management के साथ Wheat Sowing जैसे Farm Operations में किया जाता है।
किसानों को यह समझाया गया कि आधुनिक Farm Machinery का इस्तेमाल करने से Paddy Straw को खुले में जलाने की आवश्यकता को कम किया जा सकता है। साथ ही खेत में उपलब्ध Residue को Agricultural Production System का हिस्सा बनाया जा सकता है।
यह Approach Conservation Agriculture और Sustainable Farming की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां Soil Health, Water Management और Residue Management को एक साथ ध्यान में रखा जाता है।
PAU Super SMS Combine की भी दी जानकारी
किसानों को PAU Super SMS Combine के बारे में भी जानकारी दी गई। Combine Harvesting के दौरान Crop Residue Management की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में ऐसी Technology की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
कैंप में किसानों को यह समझाया गया कि Harvesting के बाद खेत में बचे Straw को सही तरीके से Manage करने के लिए Harvesting और Sowing Operations के बीच बेहतर Coordination जरूरी है।
इस तरह की Technologies किसानों को Residue Burning के Alternative उपलब्ध कराने के साथ Farm Operations को अधिक Efficient बनाने में भी मदद कर सकती हैं।
In-situ Management को बताया उपयोगी विकल्प
कार्यक्रम में In-situ Crop Residue Management पर विशेष जोर दिया गया। In-situ Management का अर्थ है खेत से Crop Residue को बाहर ले जाने के बजाय उसे खेत में ही उचित तरीके से Manage करना।
Paddy Straw को Soil में Incorporate करने या खेत में ही Manage करने से Crop Residue को Waste के बजाय Agricultural Resource के रूप में देखा जा सकता है। इससे खेत में Organic Matter Management और Soil Health से जुड़े लाभ भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
किसानों को बताया गया कि In-situ Management के लिए उपयुक्त Farm Machinery और सही Operational Practices का इस्तेमाल जरूरी है। इससे खेत में उपलब्ध Residue को अगली Crop Cycle का हिस्सा बनाया जा सकता है।
पराली सिर्फ Waste नहीं, Valuable Resource भी
Awareness Camp का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Ex-situ Crop Residue Management रहा। RAWE Students ने किसानों को बताया कि Paddy Straw को खेत में जलाने के बजाय विभिन्न Industries और Rural Enterprises में Raw Material के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
यदि Paddy Straw को एक Resource के रूप में देखा जाए, तो इससे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। कार्यक्रम में किसानों को कई ऐसे संभावित उपयोगों की जानकारी दी गई, जिनमें Crop Residue को Value-added Products में बदलने की संभावना है।
इनमें Bioethanol Production, Biogas Production, Straw-based Water Geysers, Mushroom Cultivation और Briquette Preparation प्रमुख रहे।
Bioethanol और Biogas Production में हो सकता है उपयोग
Paddy Straw को Bioenergy Sector में भी उपयोग किया जा सकता है। कैंप में किसानों को बताया गया कि Crop Residue का इस्तेमाल Bioethanol और Biogas Production के लिए किया जा सकता है।
आज Renewable Energy और Circular Economy को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच Agricultural Residue का Energy Resource के रूप में उपयोग महत्वपूर्ण हो सकता है।
धान की पराली को जलाने के बजाय उसे Bioenergy Production के लिए इस्तेमाल करने से एक ओर Residue Burning को कम करने में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर Biomass आधारित Energy Ecosystem को भी बढ़ावा मिल सकता है।
इस तरह Crop Residue Management को केवल Agricultural Issue के बजाय Energy, Environment और Rural Economy से जुड़े विषय के रूप में भी देखा जा सकता है।
Mushroom Cultivation में भी पराली का इस्तेमाल
कैंप में किसानों को Mushroom Cultivation के बारे में भी बताया गया। Paddy Straw कई परिस्थितियों में Mushroom Production के लिए उपयोगी Substrate के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में Mushroom Cultivation एक संभावित Value Addition Activity हो सकती है। यदि किसान या Rural Entrepreneurs उपलब्ध Agricultural Residue का उपयोग Mushroom Production में करते हैं, तो Crop Residue को एक अतिरिक्त Economic Resource में बदला जा सकता है।
इससे Crop Waste Management और Rural Enterprise Development को एक साथ जोड़ा जा सकता है।
Briquette Preparation से Energy का विकल्प
किसानों को Paddy Straw से Briquettes तैयार करने की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। Briquettes को Biomass Fuel के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
Agricultural Residue आधारित Briquette Production ग्रामीण और Industrial Energy Requirements के लिए एक वैकल्पिक रास्ता हो सकता है। इसके माध्यम से Paddy Straw को खुले में जलाने के बजाय एक Usable Fuel Product में बदला जा सकता है।
कैंप में इन सभी विकल्पों का उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि किसानों को यह समझाया गया कि Crop Residue के लिए केवल एक ही Management Solution नहीं है। खेत, उपलब्ध Machinery, स्थानीय Infrastructure और Market Linkages के आधार पर अलग-अलग विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
Government Schemes और Subsidy की जानकारी
Awareness Camp में Agricultural Development Officer (ADO) सुश्री वीरपाल ने किसानों को Crop Residue Management Machinery की खरीद के लिए उपलब्ध Government Schemes और Financial Subsidies की जानकारी दी।
उन्होंने किसानों को इन Government Provisions का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। Farm Machinery की Cost कई किसानों के लिए एक चुनौती हो सकती है। ऐसे में Subsidy और Government Support Mechanisms किसानों के लिए आधुनिक Crop Residue Management Technologies को अपनाना आसान बना सकते हैं।
किसानों को सलाह दी गई कि वे उपलब्ध Government Schemes की Eligibility, Application Process और Subsidy Provisions की जानकारी लेकर अपने लिए उपयुक्त Machinery का चयन करें।
Farmer Awareness के साथ Technology Adoption पर जोर
Crop Residue Management की समस्या का स्थायी समाधान केवल Awareness Campaigns से नहीं बल्कि Technology Adoption और Farmer Participation से संभव है। किसानों को ऐसी Technology की जानकारी देना जरूरी है जो उनके खेत की वास्तविक परिस्थितियों में काम कर सके।
पामल गांव में आयोजित कार्यक्रम की खास बात यही रही कि यहां किसानों को केवल पराली न जलाने की सलाह नहीं दी गई, बल्कि इसके बदले Practical Solutions भी बताए गए।
Smart Seeder, Super Seeder, Happy Seeder और PAU Super SMS Combine जैसी Technologies के साथ Bioenergy, Mushroom Cultivation और Briquette जैसे Ex-situ Options की जानकारी किसानों को दी गई।
इससे किसानों को Crop Residue Management को एक व्यापक Agricultural Practice के रूप में समझने का अवसर मिला।
RAWE Students ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस कार्यक्रम में PAU के RAWE Students की भूमिका महत्वपूर्ण रही। RAWE यानी Rural Agricultural Work Experience के तहत कृषि विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर किसानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद करते हैं और Agricultural Knowledge को Ground Level तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
किसानों और कृषि विद्यार्थियों के बीच इस तरह का Direct Interaction Agricultural Research और Field-level Adoption के बीच की दूरी को कम करने में मदद कर सकता है।
किसानों को स्थानीय परिस्थितियों से जुड़े प्रश्न पूछने और Technologies के Practical Benefits समझने का अवसर मिलता है। वहीं Students को भी Ground Reality, Farmers’ Challenges और Local Agricultural Practices को समझने का अनुभव प्राप्त होता है।
Research से Farmer तक Knowledge Transfer जरूरी
डॉ. लोपामुद्रा महापात्रा ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की Grassroots-level Initiatives Agricultural Research और Farmers के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कृषि क्षेत्र में Universities और Research Institutions लगातार नई Technologies, Machinery और Management Practices पर काम करते हैं। लेकिन इन Innovations का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है जब वे किसानों तक पहुंचें और किसान उन्हें अपनी Farming Practices में अपनाएं।
इसलिए Extension Activities, Demonstration, Awareness Camps और Farmer Training Programs का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
किसानों ने जताई सराहना
गांव पामल के किसानों ने RAWE Students और University Experts की ओर से दी गई जानकारी की सराहना की। किसानों को Crop Residue Management से जुड़े विभिन्न विकल्पों की Practical Information प्राप्त हुई।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को यह समझने का अवसर मिला कि Paddy Straw को केवल खेत से हटाने वाली सामग्री के रूप में देखने के बजाय इसे Soil Management, Bioenergy और Rural Enterprise के लिए Resource के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
किसानों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पराली प्रबंधन में सामूहिक प्रयास की जरूरत
Crop Residue Management एक ऐसा विषय है जिसमें Farmers, Agricultural Universities, Government Departments, Machinery Manufacturers और Rural Enterprises सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।
किसानों को सही Technology और Affordable Machinery उपलब्ध कराना, Government Subsidy की जानकारी देना, Local Demonstrations आयोजित करना और Crop Residue से जुड़े Alternative Markets विकसित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
साथ ही किसानों की Practical Difficulties को समझना भी जरूरी है। प्रत्येक किसान के पास एक जैसी Land Holding, Machinery Access, Labour Availability या Financial Capacity नहीं होती। इसलिए Crop Residue Management के लिए Local Conditions के अनुसार Multiple Solutions उपलब्ध कराना जरूरी है।
Sustainable Agriculture की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
पामल में आयोजित यह Awareness Camp केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि Sustainable Agriculture को लेकर Farmer-level Awareness बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
Crop Residue Burning को कम करने के लिए किसानों को केवल पर्यावरणीय नुकसान बताना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसे Cost-effective, Practical और Technology-based Alternatives भी उपलब्ध कराने होंगे, जो खेती की लागत, समय और Labour Requirements को ध्यान में रखते हों।
PAU द्वारा विकसित Technologies और Machinery के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ Paddy Straw के Bioethanol, Biogas, Mushroom Cultivation और Briquette जैसे उपयोगों की जानकारी किसानों को Crop Residue के व्यापक Economic Potential से परिचित कराती है।
आने वाले समय में यदि ऐसे Awareness Camps, Field Demonstrations और Farmer Training Programs को और मजबूत किया जाता है, तो Crop Residue Management को लेकर किसानों के बीच Technology Adoption बढ़ाया जा सकता है।
पामल में आयोजित कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि धान की पराली को जलाने के बजाय उसे खेत की Soil Health, Renewable Energy और Rural Economy के लिए उपयोगी Resource में बदला जा सकता है। इसके लिए वैज्ञानिक सलाह, उपयुक्त Farm Machinery, Government Support और किसानों की सक्रिय भागीदारी—चारों का समन्वय जरूरी है।
कार्यक्रम के अंत में RAWE Students ने Agricultural Development Officer सुश्री वीरपाल और गांव पामल के किसानों का सक्रिय सहयोग और भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि Research, Technology और Farmer Participation को एक साथ जोड़कर ही Sustainable Crop Residue Management को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाया जा सकता है।

