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Home कृषि समाचार

खरीफ किसानों के लिए बड़ी खरीद योजना: यूपी, कर्नाटक और तेलंगाना में ₹5,547.99 करोड़ की MSP खरीद को मंजूरी

Big procurement plan for Kharif farmers: MSP purchase worth ₹5,547.99 crore approved in UP, Karnataka and Telangana

Emran Khan by Emran Khan
October 1, 2026
in कृषि समाचार
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खरीफ किसानों के लिए बड़ी खरीद योजना: यूपी, कर्नाटक और तेलंगाना में ₹5,547.99 करोड़ की MSP खरीद को मंजूरी

खरीफ किसानों के लिए बड़ी खरीद योजना: यूपी, कर्नाटक और तेलंगाना में ₹5,547.99 करोड़ की MSP खरीद को मंजूरी

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खरीफ विपणन सीजन 2026-27 में दलहन और तिलहन उत्पादक किसानों को बाजार में संभावित price fluctuation से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने Price Support Scheme (PSS) के तहत उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में विभिन्न खरीफ फसलों की ₹5,547.99 करोड़ की MSP खरीद को मंजूरी दी है।

इस फैसले के तहत तीनों राज्यों में तुअर, मूंग, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी प्रमुख crops की खरीद निर्धारित Minimum Support Price (MSP) पर की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस procurement से किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने और बाजार कीमतों में गिरावट की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा देने में मदद मिलेगी।

कुल प्रस्तावित खरीद में उत्तर प्रदेश का हिस्सा सबसे बड़ा है। राज्य में ₹3,992.57 करोड़ की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा कर्नाटक में ₹1,107 करोड़ और तेलंगाना में ₹448.42 करोड़ की उपज MSP पर खरीदी जाएगी।

उत्तर प्रदेश में ₹3,992.57 करोड़ की खरीद

तीनों राज्यों में सबसे बड़ा procurement target उत्तर प्रदेश के लिए निर्धारित किया गया है। यहां कुल ₹3,992.57 करोड़ मूल्य की दलहन खरीद को मंजूरी मिली है।

इसमें सबसे बड़ा हिस्सा तुअर यानी अरहर का है। उत्तर प्रदेश में 4,66,000 मीट्रिक टन तुअर की खरीद की जाएगी, जिसका अनुमानित मूल्य ₹3,937.70 करोड़ है।

इसके अलावा 6,250 मीट्रिक टन मूंग की खरीद भी MSP पर की जाएगी। इसकी अनुमानित खरीद राशि ₹54.87 करोड़ है।

इस तरह उत्तर प्रदेश में कुल 4,72,250 मीट्रिक टन तुअर और मूंग की खरीद प्रस्तावित है।

दलहन किसानों के लिए यह procurement इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि harvesting season में यदि market arrivals बढ़ने के कारण prices में गिरावट आती है, तो सरकारी procurement किसानों को MSP के आसपास price support उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।

कर्नाटक में सोयाबीन, मूंग और सूरजमुखी की खरीद

कर्नाटक के किसानों के लिए भी केंद्र सरकार ने बड़ी खरीद योजना को मंजूरी दी है। राज्य में कुल ₹1,107 करोड़ मूल्य की विभिन्न खरीफ crops की procurement होगी।

इसमें सबसे बड़ा हिस्सा सोयाबीन का है। कर्नाटक में 1,15,500 मीट्रिक टन सोयाबीन की खरीद के लिए ₹659.27 करोड़ मंजूर किए गए हैं।

इसके साथ ही 38,250 मीट्रिक टन मूंग की खरीद की जाएगी, जिसका अनुमानित मूल्य ₹335.83 करोड़ है।

राज्य में 13,413 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद भी MSP पर होगी। इसके लिए ₹111.90 करोड़ की राशि निर्धारित की गई है।

इस प्रकार कर्नाटक में soybean, moong और sunflower के किसानों को PSS के तहत assured procurement support देने की व्यवस्था की गई है।

तेलंगाना में ₹448.42 करोड़ की MSP खरीद

तेलंगाना के किसानों के लिए भी केंद्र ने ₹448.42 करोड़ की procurement को मंजूरी दी है।

राज्य में 62,000 मीट्रिक टन सोयाबीन की खरीद की जाएगी। इसकी अनुमानित कीमत ₹353.90 करोड़ है।

इसके अलावा 10,766 मीट्रिक टन मूंग की खरीद के लिए ₹94.52 करोड़ निर्धारित किए गए हैं।

इस तरह तेलंगाना में कुल 72,766 मीट्रिक टन soybean और moong की procurement PSS के तहत की जाएगी।

तीन राज्यों में कौन सी फसल कितनी खरीदी जाएगी?

सरकार की मंजूरी के अनुसार खरीफ विपणन सीजन 2026-27 में प्रस्तावित procurement का राज्यवार विवरण इस प्रकार है:

राज्य फसल प्रस्तावित खरीद अनुमानित मूल्य
उत्तर प्रदेश तुअर 4,66,000 MT ₹3,937.70 करोड़
उत्तर प्रदेश मूंग 6,250 MT ₹54.87 करोड़
कर्नाटक सोयाबीन 1,15,500 MT ₹659.27 करोड़
कर्नाटक मूंग 38,250 MT ₹335.83 करोड़
कर्नाटक सूरजमुखी 13,413 MT ₹111.90 करोड़
तेलंगाना सोयाबीन 62,000 MT ₹353.90 करोड़
तेलंगाना मूंग 10,766 MT ₹94.52 करोड़

कुल मिलाकर तीनों राज्यों में दलहन और तिलहन की बड़ी मात्रा में procurement को मंजूरी दी गई है।

PSS क्या है और किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

Price Support Scheme यानी PSS कृषि उपज की कीमतों में गिरावट के दौरान किसानों को price support देने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य खास तौर पर उन agricultural commodities के उत्पादकों को राहत देना है जिनके बाजार भाव MSP से नीचे जाने की स्थिति में किसानों को नुकसान हो सकता है।

दलहन और तिलहन जैसी crops में market volatility कई बार किसानों के लिए चुनौती बनती है। जब harvesting के समय बड़ी मात्रा में produce बाजार में आता है, तो supply बढ़ने से prices पर दबाव बन सकता है।

ऐसी स्थिति में MSP-based procurement किसानों को alternative market channel उपलब्ध करा सकती है।

इस procurement framework का एक अन्य उद्देश्य किसानों को ऐसी crops की cultivation के लिए प्रोत्साहित करना भी है जिनका देश की food security, nutrition security और edible oil security में महत्वपूर्ण योगदान है।

दलहन किसानों को मिलेगा बाजार भाव में गिरावट से सुरक्षा कवच

उत्तर प्रदेश में बड़ी मात्रा में तुअर और मूंग की procurement को मंजूरी दी गई है। देश में pulses की घरेलू मांग को देखते हुए इन crops का उत्पादन बढ़ाना कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

अगर किसानों को harvesting period में उचित price realization मिलता है, तो वे अगले season में भी pulses cultivation जारी रखने के लिए अधिक प्रोत्साहित हो सकते हैं।

सरकारी procurement किसानों के लिए एक तरह का price protection mechanism तैयार कर सकती है। हालांकि इसका प्रभाव procurement centres की उपलब्धता, registration process, quality standards और payment system के प्रभावी संचालन पर भी निर्भर करता है।

सोयाबीन किसानों के लिए भी अहम फैसला

कर्नाटक और तेलंगाना में बड़ी मात्रा में soybean procurement को मंजूरी दी गई है। दोनों राज्यों को मिलाकर 1,77,500 मीट्रिक टन सोयाबीन की खरीद प्रस्तावित है।

सोयाबीन भारत की प्रमुख oilseed crops में शामिल है। इससे edible oil production के साथ-साथ soybean meal और livestock feed industry को भी raw material मिलता है।

देश में edible oil imports को कम करने के लिए domestic oilseed production बढ़ाना महत्वपूर्ण है। ऐसे में soybean farmers के लिए MSP-based procurement को broader oilseed self-reliance strategy के संदर्भ में देखा जा सकता है।

सूरजमुखी की खरीद से तेलहन किसानों को समर्थन

कर्नाटक में 13,413 मीट्रिक टन sunflower की procurement को भी मंजूरी दी गई है।

सूरजमुखी एक महत्वपूर्ण oilseed crop है और इससे edible oil का उत्पादन होता है। देश में oilseed acreage और productivity बढ़ाने के प्रयासों के बीच sunflower जैसे crops की procurement किसानों के लिए market assurance उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।

किसानों के लिए केवल production बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें harvested produce का उचित market price मिलना भी उतना ही जरूरी है। MSP procurement इसी gap को कम करने का एक mechanism है।

किसानों को सीधे बैंक खाते में भुगतान

केंद्र सरकार ने कहा है कि procurement centres पर खरीद की व्यवस्था transparent रखी जाएगी और किसानों को उनकी उपज की राशि का भुगतान Direct Bank Transfer (DBT) के माध्यम से समयबद्ध तरीके से किया जाएगा।

Direct payment system किसानों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे procurement के बाद payment process को अधिक transparent बनाया जा सकता है।

किसानों को समय पर भुगतान मिलने से अगली crop cycle के लिए seed, fertilizer, irrigation और अन्य farm inputs की खरीद में भी liquidity support मिल सकता है।

खरीद केंद्रों पर पारदर्शिता पर जोर

PSS procurement के सफल implementation के लिए केवल financial approval पर्याप्त नहीं है। किसानों को procurement centres की जानकारी, registration process, quality requirements और payment status की स्पष्ट जानकारी मिलना भी जरूरी है।

केंद्र सरकार ने खरीद व्यवस्था को transparent और accessible बनाने पर जोर दिया है। इससे किसानों को सरकारी procurement system से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

Digital platforms और direct payment systems के विस्तार के साथ procurement operations को अधिक efficient बनाने की कोशिश की जा रही है।

दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने की रणनीति

इस फैसले का एक व्यापक policy objective crop diversification भी है। भारत में कुछ प्रमुख crops की तुलना में pulses और oilseeds की domestic supply को बढ़ाने की आवश्यकता लंबे समय से कृषि नीति का हिस्सा रही है।

तुअर, मूंग, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी फसलों की MSP procurement से किसानों को इन crops की खेती के लिए बेहतर market assurance मिल सकता है।

अगर किसानों को उचित price और timely procurement उपलब्ध होती है, तो crop planning में diversification को बढ़ावा मिल सकता है।

इसका लाभ केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता। Domestic production बढ़ने से pulses और edible oils की supply chain मजबूत हो सकती है और import dependence कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।

तीन राज्यों में खरीद से कितना उत्पादन बाजार से उठेगा?

प्रस्तावित procurement आंकड़ों को जोड़ने पर तीनों राज्यों में तुअर, मूंग, सोयाबीन और सूरजमुखी की कुल लगभग 6.05 लाख मीट्रिक टन उपज की खरीद का प्रस्ताव बनता है।

इसमें उत्तर प्रदेश की तुअर procurement सबसे बड़ा component है, जबकि कर्नाटक और तेलंगाना में soybean procurement का बड़ा हिस्सा है।

इस procurement से संबंधित किसानों को सीधे market support मिलने के साथ local mandis में supply pressure को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

हालांकि वास्तविक procurement की मात्रा किसानों की उपलब्ध उपज, procurement operations और निर्धारित conditions के अनुसार बदल सकती है।

किसानों की आय और कृषि बाजार पर संभावित असर

MSP procurement का सबसे सीधा उद्देश्य किसानों को price crash से सुरक्षा देना है। यदि बाजार में किसी crop का भाव MSP से नीचे चला जाता है, तो सरकारी खरीद किसानों के लिए एक वैकल्पिक selling channel उपलब्ध करा सकती है।

इससे farm income stability को support मिल सकता है। साथ ही किसानों को अगले season के लिए crop selection में अधिक confidence मिल सकता है।

लेकिन किसानों की कुल आय पर असर केवल MSP से निर्धारित नहीं होता। Yield, input cost, irrigation, labour cost, weather conditions और local market prices भी महत्वपूर्ण factors हैं।

इसलिए procurement support के साथ productivity improvement और post-harvest infrastructure को मजबूत करना भी जरूरी है।

कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम

सरकार के अनुसार PSS के तहत यह procurement केवल तत्काल price support देने का फैसला नहीं है, बल्कि देश में pulses और oilseeds का production बढ़ाने की व्यापक strategy का हिस्सा भी है।

भारत में दालों और edible oils की demand बड़ी है। Domestic production बढ़ाने के लिए किसानों को technology, quality seeds, irrigation support, extension services और बेहतर market access के साथ assured price environment भी आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश में तुअर और मूंग, कर्नाटक में soybean, मूंग और sunflower तथा तेलंगाना में soybean और मूंग की procurement इसी broader agricultural strategy से जुड़ी हुई है।

खरीफ 2026-27 में किसानों के लिए क्या बदलेगा?

खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए स्वीकृत ₹5,547.99 करोड़ की procurement योजना से तीन राज्यों के किसानों को अपनी उपज के लिए MSP-based market support उपलब्ध होगा।

उत्तर प्रदेश में ₹3,992.57 करोड़, कर्नाटक में ₹1,107 करोड़ और तेलंगाना में ₹448.42 करोड़ की खरीद को मंजूरी दी गई है।

इस फैसले में pulses और oilseeds दोनों को शामिल किया गया है। इससे एक तरफ किसानों को market price गिरने की स्थिति में support मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर सरकार की crop diversification और self-reliance की रणनीति को भी बढ़ावा मिल सकता है।

अब procurement का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि खरीद केंद्रों पर operations कितनी तेजी से शुरू होते हैं, कितने किसान procurement system से जुड़ते हैं और उन्हें MSP payment कितनी जल्दी प्राप्त होता है।

केंद्र सरकार ने कहा है कि किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। खरीफ 2026-27 के लिए PSS के तहत मंजूर यह ₹5,547.99 करोड़ की खरीद योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण procurement initiative है।

 

Tags: AgricultureFarmingIndian Farming News MSPPUSA
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