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Home कृषि समाचार

रबी 2026-27 में 381 लाख टन खाद की जरूरत, यूरिया की मांग 199 लाख टन

रबी 2026-27 में देश को 381 लाख टन उर्वरक की जरूरत का अनुमान है। इसमें यूरिया 199 लाख टन, NPK 79 लाख टन और DAP 55 लाख टन शामिल है।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
October 3, 2026
in कृषि समाचार
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रबी 2026-27 में 381 लाख टन उर्वरक की जरूरत
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रबी 2026-27 सीजन में देश में उर्वरकों की कुल जरूरत 381 लाख टन रहने का अनुमान है। केंद्र सरकार के आकलन के अनुसार इस कुल जरूरत में यूरिया की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। रबी सीजन के दौरान किसानों को कुल 199 लाख टन यूरिया की जरूरत होगी। इसके बाद एनपीके उर्वरक की जरूरत 79 लाख टन, डीएपी की 55 लाख टन, एसएसपी की 31 लाख टन और एमओपी की 16 लाख टन रहने का अनुमान है।

रबी सीजन में गेहूं, चना, सरसों और अन्य प्रमुख फसलों की खेती बड़े क्षेत्र में होती है। इन फसलों के लिए समय पर उर्वरकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में केंद्र की ओर से रबी 2026-27 के लिए उर्वरकों की जरूरत का आकलन किया गया है, ताकि सीजन के दौरान किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में तैयारी की जा सके।

कुल 381 लाख टन उर्वरक की जरूरत

केंद्र के आकलन के मुताबिक रबी 2026-27 में देश में सभी प्रमुख उर्वरकों की कुल जरूरत 381 लाख टन रहने का अनुमान है। इस अनुमान में अलग-अलग उर्वरकों की मांग को शामिल किया गया है।

कुल जरूरत में सबसे बड़ा हिस्सा यूरिया का है। रबी सीजन के लिए 199 लाख टन यूरिया की आवश्यकता आंकी गई है। इसके अलावा 79 लाख टन एनपीके, 55 लाख टन डीएपी, 31 लाख टन एसएसपी और 16 लाख टन एमओपी की जरूरत बताई गई है।

इस आंकड़े से साफ है कि रबी सीजन में यूरिया की मांग अन्य प्रमुख उर्वरकों की तुलना में काफी अधिक रहने वाली है। इसलिए यूरिया की समय पर उपलब्धता रबी सीजन की उर्वरक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

यूरिया की जरूरत 199 लाख टन

रबी 2026-27 में यूरिया की अनुमानित जरूरत 199 लाख टन है। कुल 381 लाख टन की उर्वरक जरूरत में यूरिया का हिस्सा सबसे ज्यादा है।

यूरिया किसानों के बीच व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला नाइट्रोजन उर्वरक है। रबी फसलों की खेती के दौरान इसकी मांग बनी रहती है। इसलिए सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।

रबी सीजन के दौरान किसानों को फसल की आवश्यकता के अनुसार खाद की जरूरत होती है। यदि किसी क्षेत्र में समय पर यूरिया उपलब्ध नहीं होता है, तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से कुल अनुमानित मांग के आधार पर पहले से आपूर्ति की तैयारी की जाती है।

DAP की जरूरत 55 लाख टन

रबी 2026-27 के लिए डीएपी की कुल जरूरत 55 लाख टन रहने का अनुमान है। डीएपी किसानों के बीच इस्तेमाल होने वाला प्रमुख फॉस्फेटिक उर्वरक है।

केंद्र के आकलन में डीएपी की मांग यूरिया के मुकाबले कम है, लेकिन रबी सीजन में इसकी उपलब्धता भी महत्वपूर्ण रहेगी। उर्वरक व्यवस्था में केवल यूरिया की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत के अनुसार डीएपी और अन्य उर्वरकों की आपूर्ति भी जरूरी होती है।

इसलिए रबी सीजन के लिए 55 लाख टन डीएपी की अनुमानित जरूरत को पूरा करने के लिए समय पर उपलब्धता पर ध्यान देना होगा।

NPK की मांग 79 लाख टन

रबी 2026-27 में एनपीके उर्वरकों की अनुमानित जरूरत 79 लाख टन बताई गई है। यह मात्रा डीएपी की अनुमानित जरूरत से अधिक है और यूरिया के बाद प्रमुख उर्वरक जरूरतों में शामिल है।

एनपीके उर्वरकों में अलग-अलग पोषक तत्वों का संयोजन होता है। किसानों की फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार इनका इस्तेमाल किया जाता है।

कुल 381 लाख टन की अनुमानित जरूरत में 79 लाख टन एनपीके की मांग यह बताती है कि रबी सीजन के दौरान किसानों के लिए विभिन्न प्रकार के उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखना जरूरी होगा।

SSP की जरूरत 31 लाख टन

केंद्र के आकलन के अनुसार रबी 2026-27 में एसएसपी की जरूरत 31 लाख टन रहने का अनुमान है। एसएसपी भी कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख उर्वरकों में शामिल है।

रबी सीजन की उर्वरक जरूरत में एसएसपी की मात्रा यूरिया, एनपीके और डीएपी से कम है, लेकिन कुल मांग में इसका भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इसलिए रबी की तैयारी में विभिन्न उर्वरकों की मांग के अनुसार आपूर्ति की योजना बनाना आवश्यक होगा। किसानों की जरूरत के मुताबिक अलग-अलग उर्वरकों की उपलब्धता बनी रहने से खाद वितरण व्यवस्था को सुचारू रखने में मदद मिल सकती है।

MOP की अनुमानित जरूरत 16 लाख टन

रबी 2026-27 में एमओपी की जरूरत 16 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह पांच प्रमुख उर्वरकों में सबसे कम अनुमानित मात्रा है।

हालांकि मात्रा कम है, लेकिन रबी सीजन की कुल उर्वरक जरूरत में एमओपी भी शामिल है। इससे पता चलता है कि उर्वरक प्रबंधन में अलग-अलग पोषक तत्वों वाले उर्वरकों की उपलब्धता पर ध्यान देना जरूरी है।

समय पर खाद उपलब्ध कराना चुनौती

रबी सीजन के लिए कुल 381 लाख टन उर्वरक की जरूरत का अनुमान सामने आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण विषय इसकी समय पर उपलब्धता का होगा। किसानों को फसल की जरूरत के समय खाद मिलना जरूरी है।

रबी फसलों की बुवाई और शुरुआती विकास के दौरान उर्वरकों की मांग बढ़ सकती है। ऐसे में केवल कुल मात्रा का पर्याप्त होना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों तक उर्वरकों की समय पर पहुंच भी महत्वपूर्ण होगी।

यूरिया की सबसे अधिक अनुमानित जरूरत होने के कारण इसकी आपूर्ति पर विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी की मांग को भी निर्धारित मात्रा के अनुसार पूरा करना जरूरी होगा।

उर्वरक मांग का आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण

रबी सीजन के लिए 381 लाख टन की कुल उर्वरक जरूरत का अनुमान सरकार को आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने में आधार प्रदान करता है। अलग-अलग उर्वरकों की अनुमानित मांग के आधार पर उपलब्धता और वितरण की योजना बनाई जा सकती है।

कुल आंकड़े में यूरिया की जरूरत 199 लाख टन है, जबकि एनपीके 79 लाख टन, डीएपी 55 लाख टन, एसएसपी 31 लाख टन और एमओपी 16 लाख टन है। इस तरह रबी सीजन में सबसे बड़ी जरूरत यूरिया की रहने वाली है।

कुल मिलाकर, रबी 2026-27 में देश की उर्वरक जरूरत 381 लाख टन आंकी गई है। इसमें यूरिया 199 लाख टन के साथ सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखता है। इसके बाद एनपीके 79 लाख टन, डीएपी 55 लाख टन, एसएसपी 31 लाख टन और एमओपी 16 लाख टन की जरूरत है। अब रबी सीजन के दौरान किसानों तक इन उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना उर्वरक आपूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

 

Tags: उर्वरकउर्वरक उपलब्धताएनपीकेएमओपीएसएसपीकिसानकृषि समाचारखादखाद की मांगडीएपीयूरियारबी 2026-27
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