भारतीय कृषि रसायन उद्योग में सुधार के संकेतों के बीच कृषिरसायन ग्रुप अपने कारोबार को नई दिशा देने में जुटा है। कंपनी की रणनीति में निर्यात विस्तार, जैविक कृषि उत्पाद, पेटेंट वाले नए फॉर्मूलेशन और कच्चे माल के घरेलू उत्पादन को मजबूत करना शामिल है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 1 अरब अमेरिकी डॉलर की वैश्विक कृषि-इनपुट कंपनी बनना है। कृषिरसायन ग्रुप के निदेशक अतुल चुरिवाल के मुताबिक, कंपनी आक्रामक विस्तार के बजाय टिकाऊ विकास, बेहतर गुणवत्ता और कारोबार में विविधता पर जोर दे रही है।
अतुल चुरिवाल ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय कृषि रसायन बाजार की स्थिति, अमेरिकी टैरिफ में बदलाव, जैविक उत्पादों की संभावनाओं, ग्रीनकेम ऑर्गेनिक्स के अधिग्रहण और ब्राजील में विस्तार की योजनाओं पर चर्चा की।
कृषि रसायन बाजार में सुधार के संकेत
अतुल चुरिवाल के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 भारतीय कृषि रसायन उद्योग के लिए सुधार और बदलाव का वर्ष रहा। इससे पहले दो वर्षों तक कंपनियों को वितरकों के पास अधिक स्टॉक, कमजोर मांग और उत्पादों की बिक्री से मिलने वाले मूल्य पर दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। अब बाजार में स्थिरता के संकेत दिखाई देने लगे हैं।
घरेलू बाजार में मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी रही, हालांकि कुछ क्षेत्रों में लंबे समय तक मानसून रहने से फसल सुरक्षा उत्पादों के इस्तेमाल का समय प्रभावित हुआ। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पुराने स्टॉक का दबाव कम होने और मांग में सुधार से भारतीय कंपनियों के निर्यात को सहारा मिला।
चुरिवाल का मानना है कि फसल सघनता में वृद्धि, कृषि मजदूरी की बढ़ती लागत, मशीनीकरण और सटीक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से आने वाले वर्षों में फसल सुरक्षा उत्पादों की मांग को समर्थन मिल सकता है। उनके अनुसार, भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक भरोसेमंद विनिर्माण केंद्र बन रहा है। चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय खरीदार वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाश रहे हैं।
अमेरिकी टैरिफ में राहत से निर्यात को उम्मीद
अमेरिकी बाजार भारतीय कृषि रसायन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। अतुल चुरिवाल के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता कम होने से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति में सुधार हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार व्यवस्था में बदलाव को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।
उनके मुताबिक, केवल टैरिफ ही किसी उत्पाद की प्रतिस्पर्धात्मकता निर्धारित नहीं करता। उत्पाद की गुणवत्ता, पंजीकरण, समय पर आपूर्ति, लागत और ग्राहकों का भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कंपनी को अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों और साझेदारों के साथ बातचीत में सुधार के संकेत मिले हैं। कृषिरसायन ग्रुप को उम्मीद है कि व्यापारिक परिस्थितियां अधिक स्पष्ट होने के साथ अमेरिकी बाजार में कारोबार धीरे-धीरे बढ़ सकता है। कंपनी का दीर्घकालिक उद्देश्य भारत को वैश्विक कृषि रसायन आपूर्ति शृंखला का विश्वसनीय हिस्सा बनाना है।
जैविक उत्पादों को अगले दशक का विकास स्तंभ बनाने की तैयारी
कृषिरसायन ग्रुप की रणनीति में जैविक उत्पादों और बायोस्टिमुलेंट्स की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। चुरिवाल के अनुसार, ये उत्पाद अब सीमित बाजार तक सिमटने के बजाय आधुनिक फसल प्रबंधन का अहम हिस्सा बन रहे हैं।
हालांकि, इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है। किसानों को खेतों में लगातार और भरोसेमंद परिणाम मिलने चाहिए। वैज्ञानिक परीक्षण, उत्पाद की गुणवत्ता और अलग-अलग परिस्थितियों में उसके प्रदर्शन की पुष्टि से ही किसानों का विश्वास मजबूत होगा।
कंपनी के पोर्टफोलियो में बायोस्टिमुलेंट्स, माइकोराइजा, सूक्ष्मजीव आधारित उत्पाद और समुद्री शैवाल से बने उत्पाद शामिल हैं। कंपनी का मानना है कि भविष्य की खेती में रासायनिक फसल सुरक्षा, जैविक उत्पाद, फसल पोषण और सटीक कृषि तकनीकें एक-दूसरे की पूरक बनेंगी।
चुरिवाल ने स्पष्ट किया कि कृषिरसायन ग्रुप के लिए जैविक उत्पाद अल्पकालिक विविधीकरण नहीं हैं, बल्कि अगले दशक के लिए रणनीतिक विकास का महत्वपूर्ण आधार हैं।
ग्रीनकेम ऑर्गेनिक्स से मजबूत होगी विनिर्माण क्षमता
कच्चे माल के लिए बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना कंपनी की दूसरी प्रमुख प्राथमिकता है। इसी दिशा में ग्रीनकेम ऑर्गेनिक्स का अधिग्रहण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुजरात के पानोली स्थित संयंत्र से कंपनी को अपने तकनीकी उत्पादों और मध्यवर्ती रसायनों के विनिर्माण को मजबूत करने का अवसर मिला है।
कंपनी की योजना चरणबद्ध तरीके से इस सुविधा की क्षमता को लगभग 10,000 टन तक बढ़ाने की है। चुरिवाल के अनुसार, कंपनी केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बजाय तकनीकी रूप से दक्ष और आर्थिक रूप से उपयोगी विनिर्माण व्यवस्था तैयार करना चाहती है।
उन्होंने क्लेथोडिम और ग्लूफोसिनेट सहित विभिन्न उत्पादों के विकास का उल्लेख किया। इस विस्तार का उद्देश्य आंतरिक आपूर्ति बढ़ाना, उत्पादन लागत को प्रतिस्पर्धी बनाना और घरेलू फॉर्मूलेशन तथा निर्यात कारोबार के लिए कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
बैकवर्ड इंटीग्रेशन से कंपनी को वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संबंधी बाधाओं का सामना करने में मदद मिल सकती है।
पेटेंट उत्पादों और नए फॉर्मूलेशन पर जोर
कृषिरसायन ग्रुप अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में अधिक मूल्यवर्धित और अलग पहचान वाले उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है। कंपनी ने पहले तीन कीटनाशकों, दो फफूंदनाशकों और एक खरपतवारनाशक सहित छह पेटेंट वाले उत्पादों को पंजीकरण प्रक्रिया में होने की जानकारी दी थी।
चुरिवाल के अनुसार, कंपनी इन उत्पादों के लिए नियामकीय प्रक्रिया, वैज्ञानिक आंकड़ों और व्यावसायीकरण की तैयारी पर काम कर रही है। कंपनी का उद्देश्य केवल पंजीकरण हासिल करना नहीं, बल्कि उत्पादों के लिए विनिर्माण, खेतों में प्रदर्शन, नियामकीय अनुपालन और विपणन की आवश्यक व्यवस्था भी तैयार करना है।
उन्होंने भारत में पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार की दिशा को सकारात्मक बताया, लेकिन उनके अनुसार प्रक्रिया की समय-सीमा और आंकड़ों से जुड़ी आवश्यकताओं में अधिक स्पष्टता की गुंजाइश अभी भी है।
कंपनी ने धान में ब्लास्ट और शीथ ब्लाइट रोगों के प्रबंधन के लिए एजोक्सीस्ट्रोबिन 5%, आइसोप्रोथियोलेन 18% और वैलिडामाइसिन 3.5% WDG के संयोजन को भी अपनी नवाचार संबंधी उपलब्धियों में शामिल किया।
ब्राजील और वैश्विक बाजारों में विस्तार
कृषिरसायन ग्रुप ब्राजील को अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए महत्वपूर्ण बाजार मानता है। वहां कंपनी तकनीकी उत्पादों, फॉर्मूलेशन और माइकोराइजा जैसे जैविक उत्पादों के पंजीकरण पर काम कर रही है।
चुरिवाल के अनुसार, ब्राजील में नियामकीय प्रक्रिया विस्तृत है और इसमें समय लगता है। इसलिए कंपनी वहां केवल निर्यात के अवसर तलाशने के बजाय स्थानीय मौजूदगी, ग्राहक संबंध और दीर्घकालिक बाजार विकास पर ध्यान दे रही है।
कंपनी को उम्मीद है कि समय के साथ ब्राजील उसके अंतरराष्ट्रीय कारोबार में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इसके अलावा, लैटिन अमेरिका के दूसरे बाजारों में भी भारतीय कृषि रसायन निर्माताओं के लिए संभावनाएं देखी जा रही हैं।
2030 तक 1 अरब डॉलर की कंपनी बनने का लक्ष्य
कृषिरसायन ग्रुप का 1 अरब अमेरिकी डॉलर की बिक्री वाली कंपनी बनने का लक्ष्य केवल राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कंपनी खुद को एक विविधीकृत वैश्विक कृषि-इनपुट मंच के रूप में विकसित करना चाहती है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए घरेलू फसल सुरक्षा कारोबार, निर्यात, बैकवर्ड इंटीग्रेशन, पेटेंट उत्पादों, जैविक समाधानों और बायोस्टिमुलेंट्स पर एक साथ काम किया जा रहा है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी की प्रमुख प्राथमिकताओं में अंतरराष्ट्रीय बाजारों का विस्तार, नए उत्पादों का व्यावसायीकरण, विनिर्माण क्षमता मजबूत करना और जैविक उत्पादों के कारोबार को बढ़ाना शामिल है।
हालांकि, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रा विनिमय दरों और नियामकीय बदलावों को कंपनी प्रमुख जोखिम मानती है। चुरिवाल के अनुसार, कई उत्पादों, बाजारों, विनिर्माण क्षमताओं और तकनीकों पर आधारित कारोबार किसी एक उत्पाद या बाजार पर निर्भर कंपनी की तुलना में अधिक लचीला हो सकता है।
कंपनी की रणनीति का मुख्य संदेश स्पष्ट है—तेजी से विस्तार करने के बजाय ऐसा कारोबार विकसित करना, जो बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भी प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बना रहे।

