• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

भारतीय एग्रोकेमिकल कंपनियों के लिए 7 अरब डॉलर के अवसर, जानें नई रणनीति

पेटेंट समाप्त होने से भारतीय एग्रोकेमिकल कंपनियों के लिए 7 अरब डॉलर के अवसर खुलेंगे। जानें R&D, जैविक उत्पाद, बैकवर्ड इंटीग्रेशन और डिजिटल रणनीति की पूरी जानकारी।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
October 16, 2026
in कृषि समाचार
0
भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग में विकास के नए अवसर
0
SHARES
4
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कृषि रसायन उद्योग में आने वाले वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्ष 2022 से 2031 के बीच जिन सक्रिय कृषि रसायन अवयवों के पेटेंट समाप्त होने वाले हैं, उनका अनुमानित संयुक्त बाजार मूल्य करीब 7 अरब अमेरिकी डॉलर है। इससे जेनेरिक एग्रोकेमिकल निर्माताओं के लिए नए कारोबार के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, भारतीय कंपनियां अब केवल पेटेंट समाप्त होने वाले उत्पादों का निर्माण करने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। वे अपने कारोबार को मजबूत बनाने के लिए नई तकनीकों, अनुसंधान एवं विकास, कच्चे माल के घरेलू उत्पादन, जैविक उत्पादों, फसल पोषण और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी निवेश कर रही हैं।

AgroPages की ओर से भारतीय एग्रोकेमिकल कंपनियों के अधिकारियों के साथ की गई बातचीत से पता चलता है कि उद्योग में विविधीकरण की रणनीति तेजी से बदल रही है। कंपनियां अपने मौजूदा कारोबार को छोड़ने के बजाय उससे जुड़ी नई क्षमताएं विकसित कर रही हैं, ताकि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आयात पर निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना किया जा सके।

नई खोज और पेटेंट से मजबूत होगी कंपनियों की पहचान

भारतीय एग्रोकेमिकल कंपनियों के लिए अब अपने नए अणुओं और तकनीकों का विकास महत्वपूर्ण रणनीति बनता जा रहा है। पीआई इंडस्ट्रीज (PI Industries) इसका प्रमुख उदाहरण है। कंपनी के पायोक्सानिलिप्रोल (Pioxaniliprole) को भारत में खोजे गए पहले ऐसे कृषि रसायन अणु के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसे केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) से पंजीकरण और ISO कॉमन नेम मिला है।

कंपनी के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मयंक सिंघल के अनुसार, यह उपलब्धि कंपनी की अपनी खोज को वैज्ञानिक अनुसंधान से व्यावसायिक स्तर तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कंपनी अपने PREtec प्लेटफॉर्म के माध्यम से फसल सुरक्षा और जैविक समाधानों पर भी काम कर रही है। पीआई इंडस्ट्रीज का उद्देश्य अपने अनुसंधान आधारित उत्पादों और कस्टम सिंथेसिस एवं मैन्युफैक्चरिंग (CSM) कारोबार, दोनों को मजबूत करना है।

इसी तरह, एसएमएल लिमिटेड भी पारंपरिक विनिर्माण कारोबार से आगे बढ़कर नई रासायनिक खोजों पर ध्यान दे रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक बिमल शाह के मुताबिक, मार्च 2026 में फेनार्जिमाइन (Fenargimine) को ISO कॉमन नेम मिलना कंपनी की नई रासायनिक इकाई विकसित करने की यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कंपनी के पास 1,000 से अधिक पेटेंट हैं, जिन्हें विभिन्न बाजारों में व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

विलोवुड केमिकल्स भारत में 48 पेटेंट प्राप्त संयोजन उत्पादों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 14 से अधिक ऐसे उत्पादों के आधार पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत कर रही है। वहीं, परिजात इंडस्ट्रीज के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में उसके घरेलू कारोबार के राजस्व में नवोन्मेषी उत्पादों की हिस्सेदारी 42.91 प्रतिशत रही। कंपनी के पास भारत में 11 उत्पाद पेटेंट और एक प्रक्रिया पेटेंट है, जबकि कई अन्य पेटेंट आवेदन लंबित हैं।

कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश

एग्रोकेमिकल उद्योग में विविधीकरण का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू बैकवर्ड इंटीग्रेशन यानी कच्चे माल और जरूरी मध्यवर्ती रसायनों का उत्पादन खुद करना है। इससे कंपनियों को आयात पर निर्भरता कम करने, आपूर्ति को स्थिर रखने और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव करने में मदद मिल सकती है।

मेघमनी ऑर्गेनिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकित पटेल के अनुसार, कंपनी महत्वपूर्ण कच्चे माल और मध्यवर्ती रसायनों का उत्पादन अपने स्तर पर करने के लिए लगातार निवेश कर रही है। वैश्विक मांग में कमजोरी, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और शिपिंग लागत में वृद्धि ने कंपनियों के लिए लागत प्रबंधन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

हेरंबा इंडस्ट्रीज भी अपने मौजूदा तकनीकी उत्पादों और मध्यवर्ती रसायनों के कारोबार में आयात निर्भरता और कीमतों की अस्थिरता कम करने के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन को प्राथमिकता दे रही है।

हालांकि, इस रणनीति में चुनौतियां भी हैं। विलोवुड केमिकल्स ने 2023 में आयातित सक्रिय अवयवों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से तकनीकी उत्पादन संयंत्र स्थापित किया था। लेकिन कोविड के बाद कमजोर मांग, अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और चीन से कम कीमतों पर तकनीकी रसायनों की आपूर्ति ने उद्योग की लाभप्रदता पर दबाव डाला।

कंपनी के ग्रुप सीओओ जितेंद्र मोहन के अनुसार, कंपनी ने अपनी रणनीति नहीं बदली है, बल्कि निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की गति को बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप करने पर जोर दिया है। इससे स्पष्ट है कि केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; कंपनियों को मांग, लागत और बाजार की वास्तविक स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा।

जैविक उत्पाद और फसल पोषण बन रहे विकास के नए आधार

पारंपरिक रासायनिक उत्पादों के साथ जैविक कृषि समाधान और फसल पोषण उत्पाद भी कंपनियों की विकास रणनीति का हिस्सा बन रहे हैं।

पीआई इंडस्ट्रीज का मानना है कि भविष्य की खेती में रसायन और जैविक तकनीकें एक-दूसरे की पूरक होंगी। कंपनी अपने PREtec प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस क्षेत्र में क्षमताएं विकसित कर रही है।

मेघमनी ऑर्गेनिक्स ने नैनो डीएपी, नैनो एनपीके और नैनो जिंक जैसे उत्पाद पेश किए हैं। कंपनी के अनुसार, इन उत्पादों के लिए उसने साणंद स्थित मौजूदा संयंत्र का इस्तेमाल किया और अतिरिक्त पूंजीगत निवेश की जरूरत नहीं पड़ी। कंपनी अब फसल पोषण उत्पादों की व्यापक श्रृंखला तैयार करने पर काम कर रही है।

कृषि रसायन क्षेत्र में सक्रिय कृषि रसायन कंपनी कृषिरसायन ग्रुप भी जैविक उत्पादों और बायोस्टिमुलेंट्स को दीर्घकालिक विकास का आधार मानती है। कंपनी ने स्पेन की किमिटेक ग्रुप के साथ संयुक्त उद्यम और अल्गाएनर्जी के साथ साझेदारी के माध्यम से इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।

कंपनी के निदेशक अतुल चुरिवाल के अनुसार, जैविक उत्पाद अब सीमित बाजार तक सिमटने के बजाय आधुनिक फसल प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। कंपनी इन्हें अल्पकालिक विस्तार के बजाय अगले दशक के लिए रणनीतिक विकास स्तंभ के रूप में देख रही है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से किसानों तक सीधी पहुंच

एग्रोकेमिकल कंपनियां अब केवल नए उत्पादों और संयंत्रों में निवेश नहीं कर रही हैं, बल्कि किसानों और खुदरा विक्रेताओं तक पहुंचने के तरीके भी बदल रही हैं।

परिजात इंडस्ट्रीज ने एचईएलएम (HELM) के साथ मिलकर खुदरा विक्रेताओं के लिए डिजिटल कॉमर्स प्लेटफॉर्म और प्लांटिक्स (Plantix) के माध्यम से किसानों तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम किया है। इसका उद्देश्य डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके उत्पादों के विपणन और वितरण को अधिक प्रभावी बनाना है।

कृषिरसायन ग्रुप ने भी KRISHAJ और Bandhan नाम से दो डिजिटल ऐप विकसित किए हैं। कंपनी के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म पर एक लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं और किसानों का डेटा उपलब्ध है। इनके माध्यम से आपूर्ति शृंखला की निगरानी, बिक्री की जानकारी और बिल अपलोड करके सीधे पुरस्कार प्राप्त करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

इन डिजिटल पहलों का उद्देश्य पारंपरिक वितरण व्यवस्था को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रभावी बनाना है। इससे कंपनियों को बाजार की जरूरतों को समझने और किसानों के साथ संपर्क मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

नए प्रतिस्पर्धियों को लेकर कंपनियों की अलग–अलग सोच

भारतीय एग्रोकेमिकल बाजार में नए ब्रांड और स्टार्टअप भी प्रवेश कर रहे हैं। स्थापित कंपनियां इसे अलग-अलग नजरिए से देखती हैं।

मेघमनी ऑर्गेनिक्स के अनुसार, नए उद्यम मुख्य रूप से खुदरा वितरण और ब्रांड निर्माण पर ध्यान देते हैं। ऐसे कारोबारों को तकनीकी रसायनों और फॉर्मूलेशन की आपूर्ति के लिए भरोसेमंद विनिर्माण साझेदारों की जरूरत होती है। इसलिए नए ब्रांडों का विस्तार स्थापित निर्माताओं के लिए अतिरिक्त बाजार भी पैदा कर सकता है।

दूसरी ओर, पीआई इंडस्ट्रीज का मानना है कि केवल पूंजी और उत्पादन क्षमता से लंबे समय तक बाजार में नेतृत्व कायम नहीं रखा जा सकता। इसके लिए अनुसंधान, गुणवत्ता, कृषि संबंधी ज्ञान और किसानों एवं वितरण साझेदारों के साथ भरोसेमंद संबंध भी जरूरी हैं।

रैलिस इंडिया, महामाया लाइफसाइंसेज और एसएमएल लिमिटेड जैसी कंपनियां भी अनुसंधान, अधिग्रहण, पंजीकरण, विनिर्माण और वैश्विक विस्तार को एक-दूसरे का पूरक मानती हैं। महामाया लाइफसाइंसेज के प्रबंधन के अनुसार, इन सभी क्षेत्रों में निवेश के लिए पूंजी और प्रबंधन संसाधनों की प्राथमिकता तय करना जरूरी है, लेकिन रणनीतिक रूप से ये पहल एक-दूसरे को मजबूत कर सकती हैं।

निष्कर्ष: विविधीकरण से मजबूत होगा उद्योग

वर्ष 2022 से 2031 के बीच समाप्त होने वाले पेटेंट से करीब 7 अरब डॉलर के संभावित बाजार का अवसर भारतीय जेनेरिक एग्रोकेमिकल कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस अवसर का लाभ उठाने के लिए केवल पेटेंट-मुक्त उत्पादों का निर्माण करना पर्याप्त नहीं होगा।

नई रासायनिक खोज, अपने पेटेंट, कच्चे माल का घरेलू उत्पादन, जैविक समाधान, फसल पोषण और डिजिटल वितरण जैसे क्षेत्रों में निवेश कंपनियों को अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी बना सकता है। वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव, चीन से प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति शृंखला की अनिश्चितताओं के बीच यही रणनीति भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग के लिए दीर्घकालिक विकास का आधार बन सकती है।

 

Tags: agrochemical marketKrishi RasayanMeghmani OrganicsPI IndustriesSML Limitedएग्रोकेमिकल उद्योगकृषि तकनीककृषि रसायनजैविक कृषिपेटेंट एक्सपायरीफसल सुरक्षाभारतीय एग्रोकेमिकल कंपनियां
Previous Post

Maharashtra Fodder Crisis: एक ट्रक भरने के लिए कई गांवों में तलाश, पशुपालकों के सामने बड़ी चुनौती

Next Post

कृषिरसायन ग्रुप का 2030 तक 1 अरब डॉलर का लक्ष्य, बायोलॉजिकल उत्पादों और निर्यात पर बढ़ेगा फोकस

Next Post
कृषिरसायन ग्रुप का 2030 तक वैश्विक विस्तार

कृषिरसायन ग्रुप का 2030 तक 1 अरब डॉलर का लक्ष्य, बायोलॉजिकल उत्पादों और निर्यात पर बढ़ेगा फोकस

Recent Posts

  • गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों पर सख्ती, किसानों की बढ़ सकती है परेशानी
  • हरित अमोनिया से घटेगी उर्वरक उद्योग की आयात निर्भरता
  • रबी सीजन में खाद की कमी नहीं, यूरिया-DAP पर सरकार का भरोसा
  • भारत के 15 उर्वरक जहाज होर्मुज से सुरक्षित निकले
  • कृषिरसायन ग्रुप का 2030 तक 1 अरब डॉलर का लक्ष्य, बायोलॉजिकल उत्पादों और निर्यात पर बढ़ेगा फोकस

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.

Go to mobile version