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Home कृषि समाचार

चाय में 2 कीटनाशकों की अवशेष सीमा तय करने की तैयारी, FSSAI ने जारी किया मसौदा

FSSAI ने चाय में एसिटामिप्रिड के लिए 20 और इमिडाक्लोप्रिड के लिए 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम MRL प्रस्तावित किया है। जानें नए मसौदे की पूरी जानकारी।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
October 19, 2026
in कृषि समाचार
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चाय में एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड की प्रस्तावित अवशेष सीमा
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भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय में दो कीटनाशकों एसिटामिप्रिड (Acetamiprid) और इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) के अधिकतम अवशेष स्तर (Maximum Residue Limits यानी MRLs) निर्धारित करने के लिए नए नियमों का मसौदा अधिसूचित किया है। इस प्रस्ताव के तहत चाय में एसिटामिप्रिड की अधिकतम अवशेष सीमा 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम और इमिडाक्लोप्रिड की सीमा 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम निर्धारित करने का प्रस्ताव है।

इस पहल का उद्देश्य चाय में कीटनाशकों के अवशेषों को लेकर स्पष्ट नियामक मानक स्थापित करना है, ताकि खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन, उत्पादों की जांच और निगरानी की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सके। हालांकि, फिलहाल ये प्रस्तावित सीमाएं हैं। इन्हें अंतिम नियमों के रूप में लागू करने से पहले मसौदे की नियामक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

FSSAI ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संदूषक, विषाक्त पदार्थ और अवशेष) संशोधन विनियम, 2026 के मसौदे के तहत यह प्रस्ताव रखा है। इस कदम को खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों के नियमन और कृषि उत्पादन में कीट नियंत्रण की जरूरतों के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।

चाय में एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड की प्रस्तावित सीमा

FSSAI के मसौदे में दोनों कीटनाशकों के लिए अलग-अलग अधिकतम अवशेष स्तर प्रस्तावित किए गए हैं। एसिटामिप्रिड के लिए यह सीमा 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम, जबकि इमिडाक्लोप्रिड के लिए 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम रखी गई है।

कीटनाशक का नाम प्रस्तावित अधिकतम अवशेष सीमा
एसिटामिप्रिड 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम
इमिडाक्लोप्रिड 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम

ये सीमाएं चाय में संबंधित कीटनाशकों के अवशेषों के नियमन के लिए प्रस्तावित मानक हैं। इनका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी पक्षों के लिए स्पष्ट नियामक आधार उपलब्ध कराना है।

किसी खाद्य पदार्थ में कीटनाशक अवशेषों की जांच के दौरान निर्धारित मानकों का उपयोग यह आकलन करने के लिए किया जाता है कि नमूने में संबंधित रसायन का अवशेष नियामक सीमा के अनुरूप है या नहीं। स्पष्ट मानक होने से परीक्षण प्रयोगशालाओं और निगरानी करने वाली एजेंसियों को भी अपने काम में एक समान आधार मिलता है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि अधिकतम अवशेष सीमा का निर्धारण किसी कीटनाशक के असीमित इस्तेमाल की अनुमति नहीं है। कीटनाशकों का उपयोग संबंधित कृषि और नियामक निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

क्या होता है अधिकतम अवशेष स्तर यानी MRL?

अधिकतम अवशेष स्तर किसी खाद्य पदार्थ में कीटनाशक के अवशेष की वह अधिकतम कानूनी रूप से अनुमत सांद्रता है, जिसे निर्धारित नियामक मानकों के तहत स्वीकार किया जाता है। इसे अंग्रेजी में मैक्सिमम रेजिड्यू लिमिट या MRL कहा जाता है।

कृषि उत्पादन में कीटनाशकों का इस्तेमाल फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और अन्य हानिकारक जीवों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इनके उपयोग के बाद फसल या कृषि उत्पाद में रसायन के कुछ अवशेष रह सकते हैं। इन अवशेषों की मात्रा कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें इस्तेमाल किए गए रसायन की प्रकृति, उसकी मात्रा, छिड़काव का समय और फसल की स्थिति शामिल हैं।

MRL निर्धारित करने की प्रक्रिया में अवशेषों से संबंधित आंकड़ों, वैज्ञानिक आकलन, आहार के माध्यम से संभावित संपर्क और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। इसके साथ ही संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानकों और कृषि उत्पादन की व्यावहारिक जरूरतों पर भी विचार किया जा सकता है।

इस तरह के मानक खाद्य पदार्थों की नियमित जांच और बाजार में नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। हालांकि, किसी कीटनाशक की MRL और उसके उपयोग की अनुमति दो अलग-अलग नियामक विषय हैं। किसी खाद्य पदार्थ के लिए अवशेष सीमा प्रस्तावित होने का अर्थ यह नहीं है कि उस रसायन का हर फसल पर उपयोग स्वतः अधिकृत हो गया है।

वैज्ञानिक आकलन और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर जोर

FSSAI का यह प्रस्ताव कीटनाशक अवशेषों से संबंधित मानकों की समीक्षा की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। खाद्य सुरक्षा नियमों को समय-समय पर वैज्ञानिक आकलन, उपलब्ध अवशेष आंकड़ों, अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं और देश की कृषि संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर अद्यतन करने की जरूरत होती है।

चाय जैसे कृषि उत्पादों के मामले में यह विषय विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इनके उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़े कई पक्षों को नियामक मानकों का पालन करना पड़ता है। चाय उत्पादकों के अलावा प्रसंस्करण इकाइयों, खाद्य कारोबारियों, जांच प्रयोगशालाओं और प्रवर्तन एजेंसियों को भी अवशेष मानकों की जानकारी होना जरूरी है।

प्रस्तावित सीमाओं के अंतिम रूप से लागू होने के बाद संबंधित पक्षों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि चाय में इन दोनों कीटनाशकों के अवशेषों के लिए कौन-से मानक लागू होंगे। इससे नमूनों की जांच, गुणवत्ता नियंत्रण और नियामक अनुपालन की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट आधार मिल सकता है।

हालांकि, मसौदे में प्रस्तावित मानकों को अंतिम नियम मानकर नहीं चलना चाहिए। अंतिम प्रावधानों और उनके लागू होने की स्थिति की पुष्टि संबंधित आधिकारिक अधिसूचना से की जानी होगी।

भारत में कीटनाशकों के इस्तेमाल का स्तर

प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, कृषि मंत्रालय ने भारत में कीटनाशकों के औसत इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए बताया है कि देश में इनका उपयोग प्रति हेक्टेयर 0.5 किलोग्राम से कम है। इसके मुकाबले वैश्विक औसत 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बताया गया है।

उपलब्ध आंकड़ों में भारत का औसत इस्तेमाल कोलंबिया, ब्राजील और अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों की तुलना में भी कम बताया गया है।

ये आंकड़े कृषि उत्पादन में कीटनाशकों के उपयोग की मात्रा को लेकर अंतरराष्ट्रीय तुलना प्रस्तुत करते हैं। हालांकि, केवल प्रति हेक्टेयर इस्तेमाल की मात्रा के आधार पर खाद्य सुरक्षा या पर्यावरणीय प्रभाव का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता। इसके लिए इस्तेमाल किए गए रसायनों के प्रकार, उनकी विषाक्तता, फसल पर उपयोग की पद्धति, अवशेषों की मात्रा और संपर्क के स्तर जैसे पहलुओं पर भी विचार करना आवश्यक होता है।

इसलिए कीटनाशकों के कुल उपयोग के आंकड़ों के साथ-साथ खाद्य पदार्थों में उनके अवशेषों की निगरानी भी महत्वपूर्ण है। FSSAI का प्रस्ताव इसी नियामक संदर्भ में चाय में दो कीटनाशकों के अवशेषों के लिए स्पष्ट सीमा निर्धारित करने से जुड़ा है।

चाय उद्योग और किसानों के लिए क्या होगा महत्व?

चाय में एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड की प्रस्तावित MRLs से चाय उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और खाद्य कारोबारियों को इन कीटनाशकों के अवशेषों के संबंध में नियामक स्पष्टता मिल सकती है।

चाय उत्पादकों के लिए यह जरूरी होगा कि वे कीट नियंत्रण के दौरान लागू कृषि निर्देशों का पालन करें और कीटनाशकों का इस्तेमाल निर्धारित तरीके से करें। प्रसंस्करण इकाइयों तथा कारोबारियों के लिए उत्पादों की गुणवत्ता जांच और नियामक अनुपालन की व्यवस्था महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए स्पष्ट अवशेष मानक नमूनों की जांच और परिणामों के मूल्यांकन में उपयोगी हो सकते हैं। वहीं, प्रवर्तन एजेंसियों को खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन की निगरानी करने में मदद मिल सकती है।

चाय उद्योग के लिए नियामक स्पष्टता का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि उत्पादन से लेकर अंतिम उत्पाद के विपणन तक कई चरणों में गुणवत्ता नियंत्रण की जरूरत होती है। हालांकि, इन प्रस्तावित सीमाओं का वास्तविक प्रभाव अंतिम नियमों, उनके लागू होने की तारीख और संबंधित नियामक निर्देशों पर निर्भर करेगा।

अंतिम अधिसूचना पर रहेगी नजर

FSSAI द्वारा जारी मसौदे में चाय के लिए एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड की अधिकतम अवशेष सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत क्रमशः 20 और 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम की सीमाएं प्रस्तावित हैं।

यह पहल खाद्य सुरक्षा मानकों की समीक्षा, कीटनाशक अवशेषों की निगरानी और कृषि उत्पादन की आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। स्पष्ट मानक चाय उद्योग से जुड़े पक्षों को नियामक अनुपालन समझने और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

फिलहाल ये प्रस्तावित सीमाएं हैं। इनके अंतिम स्वरूप, लागू होने की तारीख और अन्य संबंधित प्रावधानों के लिए FSSAI की अंतिम अधिसूचना महत्वपूर्ण होगी। चाय उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और खाद्य कारोबारियों को आगे जारी होने वाले आधिकारिक निर्देशों पर नजर रखनी चाहिए।

 

Tags: FSSAIMRLइमिडाक्लोप्रिडएसिटामिप्रिडकीटनाशककीटनाशक अवशेषकृषि समाचारखाद्य सुरक्षाचायचाय उद्योग
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