• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
Advertisement
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

केवीके बागपत में हो रही ड्रैगनफ्रूट की खेती, वैज्ञानिक ने दी महत्वपूर्ण जानकारी!

Fiza by Fiza
September 11, 2024
in कृषि समाचार
0
केवीके बागपत में हो रही ड्रैगनफ्रूट की खेती, वैज्ञानिक ने दी महत्वपूर्ण जानकारी!
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

֍:ड्रैगनफ्रूट की केती में क्या समस्या आती हैं और इसका निवारण कैसे किया जाए?§ֆ:ड्रैगनफ्रूट हमारे क्षेत्र के लिए नया फल है। हमारे क्षेत्रों में आम, अमरूद जैसे फलों की भारी मात्रा में खेती की जा रही है। अब धीरे-धीरे किसान नई फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में ड्रैगनफ्रूट भी किसानों के बीच तेजी से बढ़ने वाला है, क्योंकि इसकी डिमांड ही तेजी की वजह है। हमारे केंद्र में ड्रैगनफ्रूट की लाल गूदे वाले किस्म लगी हुई है, जो कि रोग प्रतिरोधक क्षमता में काफी ज्यादा आगे है। इसको लगाने का तरीका और जलवायु दोनों इस फल के अनुकूल है। हमारे यहां के कई किसानों ने ड्रैगनफ्रूट की खेती भी शुरु कर दी है। अभी तक के अनुभव में किसानों को ड्रैगनफ्रूट की खेती करने में कोई दिक्कत नहीं आई है। §֍:ड्रैगनफ्रूट की खेती किस तरह से की जाती है?§ֆ:इसकी खेती करने के लिए हम सात फुट का सीमेंट से बना पोल लेते हैं। इस पोल को 1.5 फीट जमीन में गाढ़ा जाता है और बाकी 5.5 फीट जमीन से ऊपर रहता है। इसमें हम एक पोल पर चार पौधे लगाते हैं। इसका पौधा आप किसी भी नर्सरी से ले सकते हैं। अगर नर्सरीमें उपलब्ध नहीं है तो ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं। एक बीघा में ड्रैगनफ्रूट के लगभग 200 पोल लग जाते हैं। दूरी की बात करें तो इनके बीच में दो से 2.5 मीटर की दूरी रहती हैं। वहीं, लाइन में इसकी दूरी 10-12 फीट तक होती है। इतना ज्यादा दूरी के कारण ट्रैक्टर जैसी चीजों को खेत में लाने में कोई दिक्कत नहीं आती। खपतवारोंको हम जुताई के माध्य से कम कर सकते हैं। एक और महत्वपूर्ण बात कि इसका चुनाव करते समय हमें ऐसे स्थान का चयन करना है जहां पानी न ठहरे, क्योंकि इसके पौधे को नमी चाहिए, पानी नहीं। अगर इसे पानी दिया जाए तो फल सड़ सकता है क्योंकि ये कैक्टस की प्रजाति है। ये ऐसे क्षेत्रों का है जहां पानी कम चाहते हैं। ये केवल नमी में ही उगजाता है। तो अगर हमारा कोई ऐसा क्षेत्र है जहां पानी लंबे समय तक ठहरता हो ऐसी जगह का हमें चयन नहीं कना है। मिट्टी की बात करें तो बलुई या दोमट मिट्टी इसके लिए अच्छी रहती है। दूसरी चीज, जब हम इसके पोल को लगाएं तो वहां खेत को 9 इंच ऊंचा कर दें, क्योंकि बरसात के दिनों में कब पानी बरस जाए उसका अंदाजा नहीं होता । खेत को ऊंचा करने का केवल यही उद्देश्य है। हमारे किसान भाई अगर इसका पौधा लगाते हैं तो ऊंचा करके लगाएं। लगाते समय मिट्टी में गोबर की अच्छी सड़ी हुई खाद के साथ डीएपी और फंजीसाइड को डालें। फंजीसाइड में आप कॉपरऑक्सीक्लोराइड को भी ले सकते हैं। एक पोल की बात करें तो एक पोल में 4-5 किलो ग्राम अच्छी सड़ी हुई खाद की जरूरत होती है। साथ ही 40-50 ग्राम डीएपी और 4-5 ग्राम कारबन डाइजीम या कॉपरऑक्सीक्लोराइड को पौधे के पास की मिट्टी में मिला दें। उसके बाद पौधे की रोपाई कर दें। रोपाई के वक्त किसान पॉलीथीन को निकालकर ली लगाएं। पॉलीथीन न हटानेके कारण पौधे अच्छे से बढ़ नहीं पाता। पौधे की रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई कर दें। पानी उतना ही डालें कि 1-1.5 घंटे में जमीन उसे सोख ले नहीं तो पौधे में सड़न आ जाएगी। §भारत की जनसंख्या में 49 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है। जिसमें 195 मिलियन हेक्टेयर में की जाती है। इसमें बागवानी का भी काफी योगदान है। ये एक उभरता हुआ कृषि व्यवसाय है, जिसमें मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, फूलों और फलों की खेती, चाय बागान आदि की खेती की जाती है। इसी के चलते उत्तर प्रदेश के बागपत में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. अनंत कुमार से फसल क्रांति ने ड्रैगनफ्रूट की खेती पर बातचीत के पेश हैं मुख्य अंश…

Previous Post

दिल्ली में आया 5.8 तीव्रता का भूकंप, पाकिस्तान में बना केंद्र

Next Post

देशभर के किसानों ने प्रधानमंत्री मोदी से जीएम फसलों की शुरूआत के लिए आग्रह किया

Next Post
देशभर के किसानों ने प्रधानमंत्री मोदी से जीएम फसलों की शुरूआत के लिए आग्रह किया

देशभर के किसानों ने प्रधानमंत्री मोदी से जीएम फसलों की शुरूआत के लिए आग्रह किया

Recent Posts

  • PM Kisan 23वीं किस्त का इंतजार! इन छोटी गलतियों से अटक सकता है पैसा, ऐसे करें तुरंत सुधार
  • सेब पर सियासत तेज: ‘आयात शुल्क कटौती से बागवानों पर संकट’, कुलदीप राठौर का केंद्र पर बड़ा हमला
  • कारगिल में डेयरी क्रांति की नींव: अमित शाह ने रखा 10,000 लीटर क्षमता वाले प्लांट का शिलान्यास
  • ओडिशा को मिली विकास की बड़ी सौगात, PMGSY-IV से 827 सड़कें, आवास-रोजगार योजनाओं को भी बढ़ावा
  • आत्मनिर्भर पंचायत की दिशा में बड़ा कदम, हैदराबाद में 2 मई को जागरूकता कार्यशाला

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.