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Home कृषि समाचार

फर्टीलाइज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया का वार्षिक सेमिनार- 2024 स्थायी उर्वरक और कृषि पर आधारित

Fiza by Fiza
December 3, 2024
in कृषि समाचार
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फर्टीलाइज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया का वार्षिक सेमिनार- 2024 स्थायी उर्वरक और कृषि पर आधारित
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ֆ:श्री जगत प्रकाश नड्डा जी, केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने 4 दिसम्बर 2024 को होटल अंदाज़ दिल्ली में 1430 बजे सेमिनार के उद्घाटन हेतु हमारा अनुरोध स्वीकार किया है।
मिस अनुप्रिया पटेल जी, राज्य की माननीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री भी माननीय अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगी। साथ ही रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से उर्वरक विभाग के सचिव श्री रजत कुमार मिश्रा भी इस अवसर पर विशेष अतिथि होंगे। माननीय मंत्री जी उद्घाटन समारोह के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता पुरस्कारों का वितरण करेंगे। इस अवसर पर कंपनी एवं व्यक्तिगत स्तर पर 40 पुरस्कार दिए जाएंगे। ये पुरस्कार यूरिया, फॉस्फोरिक एसिड, एनपी/एनपीके कॉम्पलेक्स और एसएसपी प्लांट्स में उत्पादन में अच्छे परफोर्मेन्स, सुरक्षा, टेकनिकल इनोवेशन, पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए जाएंगे। इसके अलावा कृषि अनुसंधान विकास, पोषक तत्वों के प्रभावी उपयोग तथा जैव-उर्वरकों के ओर्गेनिक उर्वरकों, सिटी कम्पोस्ट सूक्ष्म-पोषक आदि के उत्पादन, प्रोमोशन एवं मार्केटिंग के लिए भी पुरस्कार दिए जाएंगे। इनमें यूएस अवस्थी इफको अवॉर्ड और कोरोमंडल प्लांट न्यूट्रिशन अवॉर्ड भी शामिल होंगे।

§ֆ:अगले दो दिनों यानि 5 और 6 दिसम्बर 2024 को, 4 टेकनिकल सत्रों का आयोजन होगा। देश-विदेश के प्रवक्ता कई महत्वपूर्ण विषयों पर 17 प्रस्तुतियां देंगे। जैसे भारतीय उर्वरक क्षेत्र में सुधार; विश्वस्तरीय उवर्रक बाज़ार एवं भावी संभावनाएं; कृषि एवं उर्वरक में इनोवेशन; डिजिटल कृषि; स्थायी खेती के लिए बायो एवं ओर्गेनिक उर्वरक। उर्वरक सेक्टर में हरित अमोनिया के उपयोग की संभावनाओं, पुराने प्लांट्स में उर्जा में सुधार के प्रयासों तथा कॉम्पलेक्स उर्वरक प्लांट्स में स्थायी समाधानों पर भी चर्चा होगी। बदलते वातावरण में उर्वरकों की मार्केटिंग की रणनीतियां; नैनो फर्टीलाइज़र की संभावनाओं तथा कृषि-इनपुट डिजिटल मार्केटिंग में मौजूदा संभावनाओं और चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

§֍:2. उर्वरकों की स्थिति§ֆ:2.1.1 उर्वरकों का आयात और मुख्य उर्वरकों की डीबीटी सेल्स
2.1.1 उत्पादनः एनपी/एनपीके कॉम्पलेक्स उर्वरकों और एसएसपी ने अप्रैल/ अक्टूबर 2023 की तुलना में अप्रैल/ अक्टूबर 2024 में क्रमशः 10.9 फीसदी और 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है। हालांकि इसी अवधि के दौरान यूरिया और डीएपी के उत्पादन में क्रमशः 1.3 फीसदी और 7.4 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है।
2.1.2 आयातः इसी अवधि के दौरान यूरिया, डीएपी, एनपी/एनपीके कॉम्पलेक्स उर्वरको और एमओपी के आयात में क्रमशः 34.7 फीसदी, 29.8 फीसदी, 9.9 फीसदी और 4.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
2.1.3 अप्रैल/ अक्टूबर 2024 के दौरान यूरिया की डीबीटी बिक्री 21.23 मिलियन एमटी, एनपी/एनपीके कॉम्पलेक्स उर्वरक की बिक्री 8.72 मिलियन एमटी, तथा एमओपी की 1.16 मिलियन एमटी रही। इस तरह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में क्रमशः 2.3 फीसदी, 23.5 फीसदी और 24.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि डीएपी की बिक्री 5.69 मिलियन एमटी और एसएसपी की बिक्री 2.94 मिलियन एमटी रही, इसमें क्रमशः 25.4 फीसदी और 11.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। सभी उर्वरकों की कुल बिक्री अप्रैल/ अक्टूबर 2024 के दौरान 39.75 मिलियन एमटी रही, इस तरह अप्रैल/ अक्टूबर 2023 की तुलना में इसमें 0.1 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी हुई है।
2.1.4 2021-22 और 2022-23 के दौरान पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पोटाश की खपत में 19.8 फीसदी और 32.2 फीसदी की ज़बरदस्त गिरावट दर्ज की गई। ऐसा पोटाश की उंची इंटरनेशनल कीमतों की वजह से हुआ है। ओओपी की एमआरपी कथित अवधि के दौरान डीएपी से अधिक रही, आमतौर पर ऐसा नहीं होता था। इससे पोटाश की खपत और एनपीके के इस्तेमाल के अनुपात पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जो पहले से असंतुलित हो चुका था। 2023-24 के दौरान पोटाश की खपत 9.5 फीसदी बढ़कर 1.88 मिलियन एमटी पर पहुंच गई जो 2022-23 के दौरान 1.72 मिलियन एमटी थी। हालांकि पोटाश की खपत की बात करें तो 2020-21 की तुलना में यह कम 40.4 फीसदी कम हो गई है, जब इसकी खपत 31.5 मिलियन एमटी थी। मौजूदा वर्ष खरीफ 2024 के दौरान पोटाश की बिक्री खरीफ 2023 की तुलना में 19.8 फीसदी बढ़ गई है।


2.1.5 देश के लिए औसत एनपीके उपयोग का अनुपात 4:2:1 रहा। यह अनुपात 2009-10 के तकरीबन बराबर था जब यह आंकड़ा 4.3:2:1 रहा था। इसी तरह 2012-13 में यह 8.2:3.2:1 दर्ज किया गया था। यह 2020-21 में सुधर कर 6.5:2.8:1 हो गया। हालांकि 2021-22 में 7.7:3.1:1 तथा 2022-23 में 11.8:4.6 तथा 2023-24 में 10.9:4.4:1 रहा। खरीफ़ 2024 में एनपीके के उपयोग का अनुपात मामूली सुधार के साथ 9.8:7:1 पर पहुंच गया, जबकि यह खरीफ़ 2023 में 10.9:4.9:1 था।

§֍:3. अंतर्राष्ट्रीय कीमतें§ֆ:अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में काफी उतार-चढ़ाव आ रहे हैं। पिछले 4 सालों में उर्वरकों, उर्वरकों के कच्चे माल तथा प्राकृतिक गैस/ एलएनजी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव आए हैं। यूरिया के उत्पादन के लिए 80 फीसदी फीडस्टॉक यानि प्राकृतिक गैस को आयात किया जाता है। फॉस्फेटिक उर्वरक की 90 फीसदी ज़रूरत आयात से ही पूरी होती है तथा एमओपी की 100 फीसदी मांग भी आयात से पूरी होती हैं
3.2 डीएपी की इंटरनेशनल कीमतें सितम्बर 2020 में 359 यूएस डॉलर प्रति एमटी थी, जो जुलाई 2022 में बढ़कर 945 यूएस डॉलर प्रति एमटी पर पहुंच गईं। इसके बाद की अवधि में कई उतार-चढ़ाव आए और सित्मबर 2024 मेंडीएपी की कीमत 632 यूएस डॉलर प्रति एमटी हो गई। इसी तरह फॉस्फोरिक एसिड की कीमतें सितम्बर 2020 में 641 यूएस डॉलर प्रति एमटी थी जो जुलाई 2022 में 948 यूएस डॉलर प्रति एमटी हो गईं। ऐसा ही कुछ यूरिया, एमओपी, अमोरिया और रॉक फॉस्फेट एवं सल्फर के मामले में भी देखा गया। नवम्बर 2024 में गैस की अनुमानित पूल कीमत रु 1338 प्रति एमएमबीटीयू थी। अप्रैल से नवम्बर 2024 के दौरान यह रु 1416 के आकड़े पर रही। उम्मीद है कि 2024-25 के दौरान यह इसी स्तर पर तकरीबन स्थिर बनी रहेगी।


§֍:4. उर्वरक उद्योग §ֆ:4.1 यूरिया सेक्टर
4.1.1 2002-03 के बाद से स्थिर लगात में संशोधन न होने से यूरिया उद्योग पर प्रभाव पड़ता है, हालांकि 2014 के बाद से संशोधित एनपीएस-3 नीति के तहत मामूली बढ़ोतरी देखी गई है। तब से लागत बढ़ी है, किंतु नीतिगत ढांचे को समायोजित नहीं किया गया है, जिसके चलते यूरिया के उत्पादक उंची कीमतों से जूझ रहे हैं। इसी तरह उर्जा की खपत के नियमों में 2015 की तुलना में 2018 में सुधार किया गया, जिसका असर कई युरिया युनिट्स की व्यवहारिकता पर पड़ा। यूरिया उद्योग में संशोधित एनपीएस 3 नीति के तहत नियमित रूप से स्थिर लागत के संशोधन किए गए हैं और 2025 के बाद भी इसी तरह के रूझान जारी रहने की उम्मीद है। मौजूदा स्थितियों में संचालित यूरिया प्लांट्स को सुरक्षा एवं विश्वसनीयता में सुधार लाने के लिए निरंतर पूंजी की आवश्यकता है। इसी तरह उद्योग जगत में स्थिरता बनाए रखने के लिए मुद्रास्फीती और आर्थिक बदलावों हेतु नियमित नीतिगत अपडेट्स की आवश्यकता है।

4.2 पी एण्ड के सेक्टर

4.2.1 2010 में पोषक आधारित सब्सिडी (एनबीएस) पॉलिसी का स्वागत किया गया। हालांकि इस सब्सिडी के नियम कई चुनौतियां लेकर आए। खरीफ 2024 और रबी 20224-25 के लिए एनबीएस की दरों में बदलाव का प्रभाव एनपी/एनपीके ग्रेड्स की व्यवहारिकता पर पड़ा है। डीएपी पर दी गई अतिरिक्त सब्सिडरी एनपी/एनपीके ग्रेड्स पर लागू होगी। एमओपी पर सब्सिडी में कमी फसलों में के (पोटाश) के विकास पर बुरा प्रभाव उत्पन्न कर सकती है, जिससे एनपीके उपयोग का अनुपात बढ़ेगा। इसका बुरा प्रभाव मिट्टी के स्वास्थ्य पर होगा। पोटाश् के उपयोग से मौसम संबंधी विपरीत प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है। यूरिया और पी एण्ड के उर्वरकों की एमआरपी में असमानता को एनबीएस के दायरे में लाया जाना चाहिए।

4.2.2 आयातित कच्चे माल जैसे फॉस्फोरिक एसिड एवं अमोनिया पर 5 फीसदी कस्टम ड्यूटी तथा रॉक फॉस्फेट और सल्फर पर 2.5 फीसदी कस्टम ड्यूटी का असर पी एण्ड के उवर्रक निर्माण और आयात पर पड़ रहा है। डोमेस्टिक एवं आयातित पी एण्ड के उर्वरकों के लिए सब्सिडी की दर समान है। कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी में छूट दी जानी चाहिए या मात्र 1 फीसदी की मामूली कस्टम ड्यूटी लगाई जानी चाहिए। पी एण्ड के उर्वरकों के लिए कस्टम ड्यूटी की दरों को अनुपात में लाने की ज़रूरी है।

4.2.3 अमोनिया और सल्फयुरिक एसिड पर जीएसटी ड्यूटी 18 फीसदी है, जो उर्वरकों पर 5 फीसदी है, इसके अलावा इनपुट टैक्स क्रेडिट पर समयबद्ध रीफंड की सुविधा नहीं है, इसके अलावा इनपुट सर्विसेज़ पर जीएसटी पर रीफंड न मिलने से भी पी एण्ड के उर्वरकों की लागत बढ़ जाती है। जीएसटी कानून के तहत उर्वरकों के लिए आईटीसी के रीफंड को निर्यात की तरह समयबद्ध बनाना चाहिए।

§ֆ:5. उपरोक्त मुद्दों के समाधान से उद्योग जगत की व्यवहारिकता बढ़ेगी और उर्जा कटौती परियोजनाओं में निवेश के लिए फंड्स उत्पन्न होंगे, साथ ही आधुनिक उर्वरकों जैसे नैनो यूरिया, नैनो डीएपी आदि के विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे उद्योग जगत किसानों की शिक्षा तथा उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए निवेश करेगा। §ֆ:6. उद्योग जगत सरकार के साथ मिलकर काम करते हुए किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता को सुनिश्चित करने हेतू प्रयासरत है। यह सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने तथा जटिल उर्वरकों के निर्माण में हरित अमोनिया के इस्तेमाल को अनुकूलित करने के लिए भी कार्यरत है। शुरूआत में 14 कॉम्प्लेक्स उर्वरक प्लांट्स द्वारा 7.39 लाख एमटी हरित अमोनिया का उत्पादन किया जाएगा। हालांकि, ग्रे अमोनिया की तुलना में हरित अमोनिया की उंची लागत को कम करने के लिए सरकार की ओर से वित्तपोषण के अंतर को दूर करना होगा।




§उर्वरक एवं कृषि क्षेत्र आर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है और जीडीपी में तकरीबन 18 फीसदी योगदान देता है। इसी तरह उर्वरक देश-विदेश में कृषि के विकास का अभिन्न हिस्सा हैं। भारत इन दोनों क्षेत्रों में तेज़ी से प्रगति कर रहा है। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों की बात करें तो हाल ही में, कोमोडिटी एवं अनाज की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। भौगोलिक-आर्थिक परिस्थितियों के चलते भी तैयार उर्वरकों एवं कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे स्थायी कृषि के लिए चुनौती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक उर्वरक एवं कृषि विषय पर
फर्टीलाइज़र एसोसिएशन ऑफ (एफएआई, न्यू दिल्ली) के वार्षिक सेमिनार 2024 का आयोजन किया जा रहा है।

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