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Home कृषि समाचार

एक पेड़ मां के नाम’ से हरित संदेश, वैज्ञानिकों ने किसानों को सिखाई जलवायु अनुकूल खेती की तकनीक

A green message with 'One Tree for Mother': Scientists teach farmers climate-friendly farming techniques

Emran Khan by Emran Khan
July 18, 2026
in कृषि समाचार
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स्वच्छता अभियान में कांग्रेस घास के दुष्प्रभावों पर जागरूकता

स्वच्छता अभियान में कांग्रेस घास के दुष्प्रभावों पर जागरूकता

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बिहार के मोतिहारी स्थित आईसीएआर–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-MGIFRI) ने पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खेती और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस अवसर पर संस्थान में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत व्यापक पौधरोपण, स्वच्छता अभियान, किसान–वैज्ञानिक संवाद तथा आधुनिक कृषि तकनीकों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, खेत मजदूरों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों को पहुंचाना और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना था।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 262 फलदार पौधों का रोपण

कार्यक्रम की शुरुआत ‘एक पेड़ मां के नाम’ राष्ट्रीय अभियान के तहत पौधरोपण से हुई। संस्थान परिसर और अनुसंधान फार्म में कुल 262 फलदार पौधे लगाए गए, जिनमें 90 रेड लेडी पपीता, 36 अमरपाली आम, 36 एल-49 अमरूद तथा 100 जी-9 केला के पौधे शामिल रहे।

वैज्ञानिकों ने बताया कि फलदार पौधों का रोपण जैव विविधता बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration) को बढ़ावा देने तथा एकीकृत कृषि प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने किसानों से कृषि के साथ बागवानी को जोड़ने की भी अपील की ताकि आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकें।

स्वच्छता अभियान में कांग्रेस घास के दुष्प्रभावों पर जागरूकता

पौधरोपण के बाद संस्थान परिसर, अनुसंधान खेतों और खेत मार्गों पर स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान विशेष रूप से पार्थेनियम (कांग्रेस घास) के नियंत्रण पर जोर दिया गया।

वैज्ञानिकों ने किसानों और कर्मचारियों को बताया कि कांग्रेस घास फसलों की उत्पादकता घटाने के साथ-साथ पशुओं, मानव स्वास्थ्य और जैव विविधता के लिए भी हानिकारक है। उन्होंने इसके नियंत्रण के लिए यांत्रिक विधियों, रोकथाम उपायों और पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन तकनीकों की जानकारी दी।

किसानों ने देखा आईसीएआर मुख्यालय का सीधा प्रसारण

संस्थान के सेमिनार हॉल में आईसीएआर मुख्यालय से आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया। इसमें 62 प्रतिभागियों, जिनमें 38 महिला किसान, आसपास के गांवों के 8 किसान, संस्थान के कर्मचारी और संविदा कर्मी शामिल थे, ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने वैज्ञानिकों से आधुनिक कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं और कृषि अनुसंधान की नई पहलों पर चर्चा की तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

किसान–वैज्ञानिक संवाद में वैज्ञानिक खेती पर विस्तार से चर्चा

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किसान–वैज्ञानिक संवाद में किसानों को मिट्टी परीक्षण, गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती तथा एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System-IFS) की जानकारी दी गई।

किसानों ने मिट्टी की उर्वरता, पोषक तत्वों की कमी, फसल उत्पादकता और टिकाऊ खेती से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका वैज्ञानिकों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समाधान प्रस्तुत किया।

आधुनिक कृषि तकनीकों का दिया प्रशिक्षण

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य आधारित कृषि तकनीकों का विस्तृत प्रदर्शन किया। इसमें मिट्टी परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, ढैंचा (सेसबेनिया) से हरी खाद, ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती, फसल विविधीकरण, जैव उर्वरकों का उपयोग, वर्मी कम्पोस्ट, फसल अवशेष प्रबंधन, संरक्षण कृषि, डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR), लेजर लैंड लेवलिंग, धान की नर्सरी प्रबंधन, समेकित कीट प्रबंधन तथा जलवायु अनुकूल फसल योजना जैसी तकनीकों की जानकारी दी गई।

इसके अलावा उत्तर बिहार के बाढ़ एवं जलभराव प्रभावित क्षेत्रों के लिए फसल, मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी और संसाधन पुनर्चक्रण को जोड़ने वाली एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) को किसानों के लिए अधिक लाभकारी बताया गया।

वैज्ञानिकों ने आम, लीची और पपीता जैसे फलदार बागानों के लिए पोषक तत्व प्रबंधन और वैज्ञानिक बागवानी तकनीकों पर भी विशेष सलाह दी।

वैज्ञानिक नवाचारों को खेत तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध संस्थान

संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने कहा कि आईसीएआर-एमजीआईएफआरआई का लक्ष्य केवल अनुसंधान करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक उपलब्धियों को किसानों के खेतों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कार्यक्रमों, प्रशिक्षण और एकीकृत कृषि मॉडल के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी, विविधीकृत कृषि प्रणाली और प्राकृतिक संसाधनों का कुशल प्रबंधन ही भविष्य की लाभकारी और जलवायु अनुकूल खेती की आधारशिला है।

टिकाऊ कृषि और विकसित भारत के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने कृषि अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण और किसान-केंद्रित तकनीकों के व्यापक प्रसार का सामूहिक संकल्प लिया। वैज्ञानिकों ने कहा कि किसानों तक आधुनिक तकनीकों की पहुंच, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देकर ही टिकाऊ कृषि विकास, पोषण सुरक्षा तथा ‘विकसित भारत @2047′ के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

आईसीएआर-एमजीआईएफआरआई द्वारा आयोजित यह पहल इस बात का उदाहरण है कि अनुसंधान संस्थान केवल नई तकनीकों का विकास ही नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें किसानों तक पहुंचाकर कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में भी प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं

 

Tags: AgricultureFarmingIndian Agriculture
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