देश में दाल उत्पादन को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से Ministry of Agriculture & Farmers Welfare ने एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता Sanjay Kumar Agarwal, संयुक्त सचिव एवं राष्ट्रीय मिशन निदेशक (दलहन मिशन) ने की, जिसमें देशभर में स्थापित सीड हब्स की कार्यप्रणाली और प्रगति का मूल्यांकन किया गया।
बैठक का मुख्य फोकस सीड हब्स के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और दलहन उत्पादन को बढ़ावा देना था। अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा में यह सामने आया कि बीज हब्स किसानों तक उन्नत और प्रमाणित बीज पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता और फसल की गुणवत्ता दोनों में सुधार हो रहा है।
इस दौरान ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत दलहन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बीज उपयोग (Seed Utilisation) की प्रभावी रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बीजों का सही वितरण, समय पर उपलब्धता और किसानों तक उनकी आसान पहुंच सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और डिजिटल निगरानी प्रणाली को और सुदृढ़ बनाने की जरूरत बताई गई।
संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि भारत में दालों की बढ़ती मांग को देखते हुए घरेलू उत्पादन को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के बिना उत्पादन लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है। इसलिए सीड हब्स को और अधिक प्रभावी बनाना, उनकी क्षमता बढ़ाना और किसानों के साथ उनका सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि सीड हब्स के माध्यम से विकसित नई किस्मों के बीजों का अधिकतम उपयोग कैसे सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को बेहतर उपज और रोग प्रतिरोधी फसलें मिल सकें। इसके साथ ही, बीज उत्पादन, भंडारण और वितरण की पूरी प्रक्रिया को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर भी बल दिया गया।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि किसानों को उन्नत बीजों के उपयोग के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाए जाएं। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय में भी सुधार होगा।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि दालों की आत्मनिर्भरता केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (supply chain), प्रभावी विपणन व्यवस्था और मूल्य समर्थन प्रणाली का होना भी आवश्यक है।
अंत में, संयुक्त सचिव ने सभी संबंधित एजेंसियों और राज्यों को निर्देश दिया कि वे मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समन्वित प्रयास करें और तय समयसीमा में योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से भारत जल्द ही दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा।
यह पहल देश के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत करती है, जहां गुणवत्ता, नवाचार और समन्वय के माध्यम से किसानों की समृद्धि और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

