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जूलॉजी विभाग का दौरा करने पहुंचे एआईएनपी-वीपीएम के नेटवर्क कोऑर्डिनेटर, अनुसंधान कार्यों की समीक्षा

Fiza by Fiza
March 13, 2026
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जूलॉजी विभाग का दौरा करने पहुंचे एआईएनपी-वीपीएम के नेटवर्क कोऑर्डिनेटर, अनुसंधान कार्यों की समीक्षा
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कृषि में कशेरुकी कीट प्रबंधन से जुड़े शोध कार्यों की समीक्षा के लिए Punjab Agricultural University (PAU) के जूलॉजी विभाग का तीन दिवसीय दौरा किया गया। यह दौरा 9 से 11 मार्च 2026 के बीच Dr. Vipin Chaudhary, नेटवर्क कोऑर्डिनेटर, All India Network Project on Vertebrate Pest Management (AINP-VPM), तथा Central Arid Zone Research Institute (CAZRI), जोधपुर के प्रतिनिधिमंडल द्वारा किया गया। उनके साथ एसीटीओ Surjit Singh भी शामिल थे।

दौरे के दौरान टीम ने पीएयू के जूलॉजी विभाग के प्रमुख वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर विश्वविद्यालय केंद्र की प्रगति और शोध गतिविधियों की समीक्षा की। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष एवं प्रिंसिपल ऑर्निथोलॉजिस्ट Dr. Tejdeep Kaur, प्रिंसिपल जूलॉजिस्ट (रोडेंट्स) Dr. Neena Singla, प्रिंसिपल जूलॉजिस्ट Dr. B. K. Babbar तथा सीनियर ऑर्निथोलॉजिस्ट Dr. Manoj Kumar के साथ विस्तृत चर्चा की गई।

प्रयोगशालाओं और शोध सुविधाओं का निरीक्षण

10 मार्च को टीम ने पीएयू के जूलॉजी विभाग की Rodent Research Laboratories और Ornithology Laboratory का दौरा किया। यहां वैज्ञानिकों और पीजी विद्यार्थियों के साथ बातचीत कर चूहों की मॉलिक्यूलर पहचान, उनकी जीवविज्ञान तथा प्रबंधन से जुड़े चल रहे शोध कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई।

इसके बाद टीम ने विभाग के Experimental Rattery का भी निरीक्षण किया, जहां चूहों के व्यवहार का वास्तविक समय में प्रदर्शन किया गया। विभागीय कार्यालय में भी वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के साथ बैठक हुई, जिसमें शोध परियोजनाओं के संचालन और टीमवर्क की सराहना की गई।

खेतों में फसल नुकसान रोकने के उपायों की समीक्षा

दौरे के दौरान विशेषज्ञ टीम ने लुधियाना जिले के गांव राजापुर और गोरसियां के किसानों से भी बातचीत की। यहां उन्होंने जंगली सूअर से फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए अपनाए जा रहे उपायों—जैसे इलेक्ट्रिक फेंसिंग, पॉलीनेट और घ्राण प्रतिरोधक (olfactory repellent)—का निरीक्षण किया। ये प्रयोग गेहूं और पॉपलर आधारित एग्रोफॉरेस्ट्री प्रणाली में किए जा रहे हैं।

टीम ने सतलुज नदी के कैचमेंट क्षेत्रों के आसपास आवास-विशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों पर भी चर्चा की।

अन्य अनुसंधान केंद्रों का दौरा

विशेषज्ञों ने Borlaug Institute for South Asia (BISA) के खेतों का भी निरीक्षण किया, जहां चूहों से संबंधित प्रयोगात्मक अनुसंधान चल रहा है। इसके अलावा Krishi Vigyan Kendra Langroya के वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों के साथ मिलकर मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई।

टीम ने शहीद भगत सिंह नगर जिले के गांवों में गेहूं, गन्ना, मक्का, आड़ू और प्लम के बागानों, साइलिज यूनिट और बेलर यूनिट का भी निरीक्षण किया, जहां वन्यजीवों और अन्य कशेरुकी जीवों से होने वाले नुकसान को रोकने के उपायों का आकलन किया गया।

भविष्य की रणनीति पर चर्चा

11 मार्च को प्रतिनिधिमंडल ने पीएयू के अनुसंधान निदेशक से शिष्टाचार मुलाकात कर परियोजना के तहत चल रहे शोध कार्यों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की। इसके साथ ही वित्तीय प्रबंधन और बजट उपयोग की समीक्षा के लिए विश्वविद्यालय के नियंत्रक कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बैठक की गई।

टीम ने एसएएस नगर जिले के डेरा बस्सी ब्लॉक के गांव हसनपुर और चंडियाला का भी दौरा किया, जहां पिछले दो वर्षों से नीलगाय और चूहों के एकीकृत प्रबंधन से संबंधित फील्ड ट्रायल किए जा रहे हैं।

दौरे के समापन पर समीक्षा दल ने पीएयू के जूलॉजी विभाग के वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि किसानों की सक्रिय भागीदारी और वैज्ञानिकों की प्रतिबद्धता से कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में सतत कशेरुकी कीट प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।

 

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