Banana Development Scheme: भारत दुनिया के प्रमुख केला उत्पादक देशों में शामिल है। किसानों के लिए केला केवल एक फल की फसल नहीं, बल्कि सही तकनीक, बेहतर Planting Material, सिंचाई और बाजार की सुविधा मिलने पर अच्छी आमदनी देने वाली Commercial Horticulture Crop भी बन सकती है। यही वजह है कि केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारें केला उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अलग-अलग Horticulture Schemes के माध्यम से सहायता देती हैं।
आम बोलचाल में इन्हें केला विकास योजना (Banana Development Scheme) कहा जाता है। हालांकि किसान को यह समझना जरूरी है कि पूरे देश में “केला विकास योजना” नाम से एक समान योजना लागू नहीं है। केंद्र सरकार की Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) के तहत केला सहित विभिन्न बागवानी फसलों के विकास के लिए सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा बिहार, तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्य अपने बजट और Annual Action Plan के अनुसार केला उत्पादन, Area Expansion, Tissue Culture Plants और दूसरी गतिविधियों के लिए सहायता उपलब्ध करा सकते हैं। (MIDH)
क्या है केला विकास योजना?
केला विकास से जुड़ी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसानों को परंपरागत खेती के साथ Commercial Banana Farming और आधुनिक बागवानी की तरफ प्रोत्साहित करना है। इन योजनाओं में राज्य के अनुसार किसानों को केला का क्षेत्र बढ़ाने, Quality Planting Material, Tissue Culture Banana Plants, सिंचाई, आधुनिक उत्पादन तकनीक और अन्य अनुमोदित Horticulture Components के लिए आर्थिक या तकनीकी सहायता मिल सकती है।
केंद्र सरकार का Mission for Integrated Development of Horticulture यानी MIDH देश में fruits, vegetables, root and tuber crops, mushrooms, spices, flowers, aromatic plants, coconut, cashew, cocoa और bamboo सहित बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए चलाया जा रहा Centrally Sponsored Scheme है। (MIDH)
इसलिए किसी किसान को केवल “केला विकास योजना” नाम खोजने के बजाय अपने राज्य के Horticulture Department में Banana, Tissue Culture Banana, Fruit Area Expansion, MIDH या Horticulture Subsidy के नाम से चल रहे संबंधित component की जानकारी भी देखनी चाहिए।
किसानों को केला विकास से जुड़ी योजनाओं से क्या फायदा मिलता है?
केला लगाने में शुरुआती स्तर पर पौधे, खेत की तैयारी, सिंचाई, खाद और Crop Management पर खर्च आता है। सरकारी सहायता मिलने से किसान पर शुरुआती लागत का बोझ कम हो सकता है। योजनाओं का दूसरा महत्वपूर्ण फायदा Quality Planting Material तक किसानों की पहुंच बढ़ाना है। खासकर Tissue Culture Banana के इस्तेमाल से एक समान और गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है।
तीसरा फायदा खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। Horticulture programmes के माध्यम से किसानों को उत्पादन बढ़ाने, पानी के बेहतर उपयोग और आधुनिक cultivation practices अपनाने में मदद मिल सकती है।
चौथा फायदा Area Expansion है। सरकार का उद्देश्य ऐसे किसानों को भी बागवानी से जोड़ना है जो परंपरागत फसलों के अलावा अधिक मूल्य वाली horticulture crops अपनाना चाहते हैं। इससे किसान अपनी Crop Diversification strategy बेहतर कर सकते हैं और केवल एक तरह की फसल पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
केंद्र सरकार की MIDH योजना और केला
MIDH के तहत बागवानी विकास का ढांचा लगभग पूरे देश को कवर करता है। इसके अंतर्गत अलग-अलग sub-schemes निर्धारित हैं।
National Horticulture Mission (NHM) उत्तर-पूर्व और हिमालयी क्षेत्र को छोड़कर अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए है, जबकि Horticulture Mission for North East and Himalayan States (HMNEH) उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए है।
MIDH की आधिकारिक जानकारी के अनुसार सामान्य राज्यों में developmental programmes के कुल outlay में केंद्र सरकार का हिस्सा 60 प्रतिशत और राज्य सरकार का 40 प्रतिशत होता है। North Eastern और Himalayan States के मामले में केंद्र का योगदान 90 प्रतिशत है। इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक किसान को सीधे इसी प्रतिशत में subsidy मिलेगी। किसान को मिलने वाली वास्तविक सहायता संबंधित component, cost norm, राज्य की कार्ययोजना और स्वीकृति पर निर्भर करती है। (MIDH)
किन राज्यों में मिल सकता है लाभ?
यहां दो स्तरों को अलग-अलग समझना जरूरी है। पहला, MIDH का horticulture framework व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध है। NHM सामान्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में तथा HMNEH उत्तर-पूर्व एवं हिमालयी राज्यों में लागू होता है। HMNEH की आधिकारिक सूची में Arunachal Pradesh, Assam, Himachal Pradesh, Jammu & Kashmir, Ladakh, Manipur, Meghalaya, Mizoram, Nagaland, Sikkim, Tripura और Uttarakhand शामिल हैं। (MIDH) दूसरा, किसी विशेष वर्ष में Banana Component वास्तव में किन जिलों में खुला है, कितना target है और आवेदन लिए जा रहे हैं या नहीं, यह राज्य की Annual Action Plan और Horticulture Department की notification पर निर्भर करता है। यही कारण है कि किसान को अपने राज्य के उद्यान विभाग से वर्तमान वित्तीय वर्ष की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
बिहार में किसानों के लिए बड़ी सुविधा
बिहार में केला किसानों के लिए स्पष्ट ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध है। बिहार उद्यान निदेशालय के पोर्टल पर 2025-26 में MIDH के अंतर्गत Tissue Culture Banana के Area Expansion के लिए आवेदन की जानकारी उपलब्ध है।
विभाग की जानकारी के मुताबिक यह कार्यक्रम बिहार के सभी 38 जिलों में लागू है। इसके अंतर्गत केला component का लाभ न्यूनतम 0.25 acre यानी 0.1 hectare से अधिकतम 5 acre यानी 2 hectare तक दिया जा सकता है। (Bihar Horticulture)
योजना में Quality Planting Materials की उपलब्धता विभागीय nursery, कृषि विश्वविद्यालय के अधीन nursery, NHB Accredited Nursery, Centre of Excellence और अन्य चयनित agencies के माध्यम से सुनिश्चित करने की व्यवस्था बताई गई है। (Bihar Horticulture) बिहार सरकार के पोर्टल के अनुसार इस MIDH component में प्रति hectare केला खेती के लिए पहले वर्ष ₹42,000 और दूसरे वर्ष ₹28,000 अनुदान देय बताया गया है। यानी निर्धारित शर्तों के अनुसार कुल सहायता ₹70,000 प्रति hectare तक हो सकती है। (Bihar Horticulture) यह राशि और नियम वित्तीय वर्ष तथा component के साथ बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले current notification जरूर जांचें।
रैयत ही नहीं, गैर-रैयत किसान भी पात्र
बिहार की Tissue Culture Banana योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें रैयत और गैर-रैयत दोनों प्रकार के किसान लाभ ले सकते हैं। रैयत किसान जमीन के दस्तावेज के आधार पर आवेदन कर सकते हैं। गैर-रैयत किसान निर्धारित agreement के आधार पर आवेदन कर सकते हैं। यदि आवेदक का नाम land ownership या revenue receipt में स्पष्ट नहीं है, तो संबंधित दस्तावेज के साथ वंशावली लगाने की आवश्यकता बताई गई है। (Bihar Horticulture) आवेदन से पहले किसान को अपने DBT registered bank account की जानकारी भी जांच लेने की सलाह दी गई है।
बिहार की राज्य योजना वाली Banana Development Scheme
बिहार में MIDH component के अलावा राज्य योजना के तहत भी केला विकास योजना चलाई गई है। उद्यान निदेशालय के उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार 2025-26 की राज्य स्वीकृत मद वाली केला विकास योजना में Tissue Culture Banana Area Expansion की unit cost ₹1.25 लाख प्रति hectare निर्धारित की गई और सहायता का मानक 50 प्रतिशत, यानी ₹62,500 प्रति hectare रखा गया। हालांकि संबंधित वित्तीय वर्ष में भुगतान का चरण और निर्धारित हिस्सेदारी अलग हो सकती है। (Bihar Horticulture) इसीलिए किसान को MIDH वाली Tissue Culture Banana योजना और State Plan वाली Banana Development Scheme को एक ही योजना समझकर subsidy की राशि नहीं माननी चाहिए।
दूसरे राज्यों में क्या स्थिति है?
राज्यों में केला सहायता का स्वरूप अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए तमिलनाडु के सरकारी horticulture information में banana suckers से संबंधित horticultural crop demonstration पर ₹26,250 प्रति hectare back-ended subsidy का उल्लेख मिलता है। वहां किसान Uzhavan App, संबंधित web portal या Assistant Director of Horticulture के माध्यम से schemes में enrollment कर सकते हैं। (Coimbatore District) इससे साफ है कि Subsidy Amount, Eligibility, Area Limit और Application Process राज्य-दर-राज्य बदल सकता है। इसलिए किसी दूसरे राज्य की subsidy देखकर अपने राज्य में वही राशि मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
कौन किसान आवेदन कर सकते हैं?
Exact Eligibility राज्य की notification से तय होगी, लेकिन आम तौर पर आवेदन के लिए किसान के पास कृषि भूमि या मान्य lease/agreement, पहचान संबंधी दस्तावेज, bank account और संबंधित land records होने की आवश्यकता पड़ सकती है। कुछ राज्यों में assured irrigation भी Area Expansion जैसे components के लिए जरूरी हो सकती है।
तमिलनाडु के सरकारी horticulture guidelines में उदाहरण के तौर पर Aadhaar, land records, bank passbook, photographs और कुछ cultivation components में soil तथा water test report जैसे documents मांगे जाते हैं। Lease farmers से registered lease agreement भी मांगा जा सकता है। इसलिए दस्तावेजों की अंतिम सूची संबंधित राज्य की current notification से ही लें।
आवेदन के लिए जरूरी Documents
राज्य के हिसाब से दस्तावेज अलग हो सकते हैं, लेकिन किसान पहले से कुछ सामान्य documents तैयार रख सकते हैं:
- Aadhaar Card या निर्धारित Identity Proof
- किसान पंजीकरण/DBT Registration, जहां लागू हो
- Bank Account और Passbook
- Land Record/Revenue Receipt
- Lease या Agreement, यदि गैर-रैयत/पट्टेदार किसान के लिए अनुमति हो
- Passport Size Photograph
- Mobile Number
- संबंधित category certificate, जहां आवश्यक हो
- Soil/Water Test Report, यदि संबंधित component में मांगी गई हो
- राज्य सरकार द्वारा मांगे गए अन्य supporting documents
बैंक खाता active और किसान की सही जानकारी से जुड़ा होना चाहिए, ताकि DBT आधारित भुगतान में समस्या न आए।
केला विकास योजना में आवेदन कैसे करें?
Application Process हर राज्य में अलग हो सकता है। सामान्य तौर पर सबसे पहले किसान को अपने राज्य के Department of Horticulture/उद्यान विभाग की official website पर जाना चाहिए।
इसके बाद current financial year की scheme list में Banana, Tissue Culture Banana, Fruit Development, Area Expansion या MIDH component देखें। यदि online application उपलब्ध है तो किसान registration number/DBT details के माध्यम से application भर सकता है। भूमि का क्षेत्र, बैंक की जानकारी और दूसरे आवश्यक विवरण दर्ज करने के बाद documents upload करने पड़ सकते हैं।
आवेदन submit करने के बाद विभाग eligibility और land details का verification कर सकता है। चयन और स्वीकृति के बाद ही किसान को योजना के नियमों के अनुसार लाभ मिलता है। जहां online सुविधा उपलब्ध न हो, वहां जिला या block level Horticulture Office/Assistant Director of Horticulture से संपर्क किया जा सकता है। बिहार के किसानों के लिए संबंधित ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था उद्यान निदेशालय के portal पर उपलब्ध है। (Bihar Horticulture)
आवेदन करते समय किसान इन बातों का रखें ध्यान
किसान किसी भी nursery या seller से पौधे खरीदने से पहले scheme guidelines पढ़ें। कई योजनाओं में approved/authorized source से Quality Planting Material लेने की शर्त हो सकती है।
दूसरा, subsidy को पहले से मिलने वाली नकद राशि न मानें। कई components में सहायता verification, plantation, survival, bill/document verification या दूसरे निर्धारित चरण पूरे होने के बाद जारी होती है। तीसरा, आवेदन में खेत का area, bank account और land record की जानकारी बिल्कुल सही भरें। चौथा, आवेदन की acknowledgement/registration number सुरक्षित रखें। और सबसे महत्वपूर्ण बात, WhatsApp या किसी गैर-सरकारी संदेश में बताई गई subsidy के बजाय संबंधित Official Horticulture Portal की current notification को अंतिम आधार मानें।
Commercial Banana Farming के लिए NHB से भी सहायता
बड़े स्तर पर commercial horticulture project लगाने वाले किसानों या entrepreneurs के लिए National Horticulture Board (NHB) की योजनाएं भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। NHB की commercial horticulture scheme में open-field commercial horticulture projects के तहत planting material, plantation, irrigation, fertigation, mechanization, precision farming और कुछ Post-Harvest Management components को शामिल किया जा सकता है। यह सामान्य छोटे Area Expansion subsidy programme से अलग project-based assistance है। (National Horticulture Board) इसलिए बड़े banana plantation, integrated project या post-harvest infrastructure की योजना बनाने वाले किसान को NHB की current guidelines भी देखनी चाहिए।
किसानों की आमदनी बढ़ाने में कैसे मददगार?
केला एक high-value horticulture crop है। यदि किसान सही variety, disease-free planting material, उचित irrigation, nutrient management और market linkage के साथ खेती करें तो यह crop diversification का अच्छा विकल्प बन सकती है।
सरकारी सहायता से शुरुआती Input Cost का कुछ हिस्सा कम होने से किसान के लिए आधुनिक खेती अपनाना आसान होता है।
Quality Planting Material से plantation की uniformity बेहतर करने में मदद मिल सकती है। Micro Irrigation और बेहतर crop management से resources का उपयोग अधिक कुशल बनाया जा सकता है।
इसके अलावा Farmer Producer Organization यानी FPO, grading, packaging, storage, processing और बेहतर market linkage से किसान केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि Banana Value Chain में भी बेहतर हिस्सेदारी हासिल कर सकते हैं।
Bottom Line
केला विकास योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य किसान को Traditional Farming से Modern Horticulture की ओर बढ़ने में मदद करना है। लेकिन देशभर में इसकी एक समान subsidy या एक समान आवेदन प्रक्रिया नहीं है। केंद्र स्तर पर MIDH horticulture development का बड़ा framework उपलब्ध कराता है, जबकि राज्यों की सरकारें अपनी Annual Action Plan, budget और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार Banana Area Expansion, Tissue Culture Banana और दूसरी योजनाएं लागू करती हैं। (MIDH)
बिहार में 2025-26 के लिए MIDH के अंतर्गत Tissue Culture Banana Area Expansion सभी 38 जिलों के लिए उपलब्ध दिखाया गया है और निर्धारित सीमा के भीतर किसानों को प्रति hectare पहले वर्ष ₹42,000 तथा दूसरे वर्ष ₹28,000 सहायता का प्रावधान बताया गया है। (Bihar Horticulture)
इसलिए केला लगाने की तैयारी कर रहे किसान सबसे पहले अपने राज्य के Horticulture Department की current scheme और target की जांच करें, उसके बाद ही पौध सामग्री खरीदें या बड़ा निवेश करें।
सही Government Subsidy + Quality Planting Material + Modern Farming Technology + Market Linkage का इस्तेमाल केला खेती को किसानों के लिए अधिक टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय बनाने में मदद कर सकता है।

