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Home कृषि समाचार

पंजाब में अवैध उर्वरक कारोबार पर बड़ी कार्रवाई, बठिंडा में 140 क्विंटल खाद जब्त, कंपनी समेत कई लोगों पर मामला दर्ज

Big crackdown on illegal fertilizer trade in Punjab, 140 quintals of fertilizer seized in Bathinda, case registered against several people including company

Emran Khan by Emran Khan
June 12, 2026
in कृषि समाचार
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पंजाब में अवैध उर्वरक कारोबार पर बड़ी कार्रवाई, बठिंडा में 140 क्विंटल खाद जब्त, कंपनी समेत कई लोगों पर मामला दर्ज
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पंजाब सरकार ने नकली और अवैध कृषि उत्पादों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बठिंडा जिले से लगभग 140 क्विंटल संदिग्ध उर्वरक जब्त किया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई में उर्वरकों के अवैध भंडारण और बिक्री से जुड़े मामले का खुलासा हुआ है। अधिकारियों ने संबंधित कंपनी और उससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

राज्य सरकार का कहना है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है और खेती में इस्तेमाल होने वाले बीज, उर्वरक तथा कीटनाशकों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। विभाग की इस कार्रवाई को किसानों के हितों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गुप्त सूचना के आधार पर हुई छापेमारी

कृषि विभाग को बठिंडा के मलोट रोड स्थित गणपति कॉम्प्लेक्स में संचालित एक गोदाम में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। सूचना के आधार पर विभागीय अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच के दौरान गोदाम में बड़ी मात्रा में उर्वरक का भंडारण पाया गया।

अधिकारियों ने दस्तावेजों और लाइसेंस संबंधी रिकॉर्ड की जांच की तो कई अनियमितताएं सामने आईं। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि संबंधित फर्म के पास उर्वरकों के व्यापार के लिए आवश्यक लाइसेंस उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद वहां उर्वरकों की बिक्री और वितरण की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

लाइसेंस नियमों के उल्लंघन का आरोप

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित संस्था को कीटनाशकों के कारोबार की अनुमति प्राप्त थी, लेकिन कथित रूप से उसी लाइसेंस का उपयोग उर्वरकों के व्यापार के लिए किया जा रहा था। कृषि विभाग के अनुसार यह नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

अधिकारियों ने जब गोदाम में रखे गए उत्पादों के नमूनों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया तो पाया कि कई उत्पाद उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ) के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे। इसके बाद विभाग ने पूरे स्टॉक को अपने कब्जे में लेकर जब्त कर लिया।

140 क्विंटल उर्वरक किया गया जब्त

छापेमारी के दौरान लगभग 140 क्विंटल उर्वरक बरामद किया गया। कृषि विभाग का मानना है कि यदि यह सामग्री बाजार के माध्यम से किसानों तक पहुंच जाती तो खेती को गंभीर नुकसान हो सकता था। विशेषज्ञों का कहना है कि निम्न गुणवत्ता या मानकों से बाहर उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है, मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

विभाग ने जब्त किए गए उर्वरकों के नमूनों को आगे की जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि उनकी गुणवत्ता और संरचना की विस्तृत जांच की जा सके।

कंपनी और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर

मामले की गंभीरता को देखते हुए बठिंडा के थर्मल पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत की गई है।

जांच एजेंसियों ने मामले में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से जुड़े कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं को भी नामजद किया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि अवैध उर्वरकों की आपूर्ति किन-किन क्षेत्रों में की जा रही थी।

पुलिस और कृषि विभाग संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं। दस्तावेजों, परिवहन रिकॉर्ड और बिक्री संबंधी विवरणों की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।

किसानों के हितों से समझौता नहीं होगा

पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि खेती में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता सीधे किसानों की आय और उत्पादन से जुड़ी होती है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में जब्त किया गया संदिग्ध उर्वरक खेतों तक पहुंच जाता, तो सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता था। इससे किसानों को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ती। इसलिए सरकार ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। नकली, मिलावटी और अवैध कृषि उत्पादों के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

किसानों से की गई विशेष अपील

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरक, बीज और अन्य कृषि सामग्री केवल अधिकृत एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही खरीदें। विभाग का कहना है कि खरीदारी करते समय हमेशा पक्का बिल या रसीद अवश्य लें ताकि किसी समस्या की स्थिति में उचित कार्रवाई की जा सके।

अधिकारियों ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि यदि उन्हें बाजार में किसी उत्पाद की गुणवत्ता संदिग्ध लगे या किसी दुकान पर अवैध रूप से कृषि सामग्री बेची जा रही हो, तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी कृषि कार्यालय को दें। किसानों की सतर्कता ऐसे मामलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

नकली कृषि उत्पादों पर लगातार निगरानी

पंजाब सरकार पिछले कुछ समय से कृषि क्षेत्र में नकली और अवैध उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए विशेष अभियान चला रही है। विभाग द्वारा समय-समय पर उर्वरक, बीज और कीटनाशक विक्रेताओं की जांच की जाती है। इसके अलावा विभिन्न जिलों में निगरानी टीमें गठित की गई हैं जो बाजार में उपलब्ध कृषि उत्पादों की गुणवत्ता पर नजर रखती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण किसानों के हितों की रक्षा के लिए बेहद आवश्यक है। नकली या घटिया उत्पाद न केवल फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि किसानों के निवेश और मेहनत को भी प्रभावित करते हैं।

जांच जारी, और खुलासे संभव

कृषि विभाग और पुलिस की प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है। आने वाले दिनों में सप्लाई चेन, वितरण नेटवर्क और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर और भी जानकारियां सामने आ सकती हैं।

सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जब्त किए गए उर्वरकों की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट और पुलिस जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है।

राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

 

Tags: Fake FertilizerFarmingPunjab
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