Biofertilizer Promotion Scheme: भारत में कृषि क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पिछले कुछ दशकों में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता, जैविक कार्बन और सूक्ष्म पोषक तत्वों में कमी देखने को मिली है। यही कारण है कि केंद्र सरकार अब किसानों को जैव उर्वरकों (Biofertilizers) और जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित कर रही है। इसी दिशा में विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से “जैव उर्वरक प्रोत्साहन योजना” को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें और मिट्टी की सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकें।
क्या है Biofertilizer Promotion Scheme?
जैव उर्वरक ऐसे सूक्ष्म जीवों से तैयार किए जाते हैं जो मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाते हैं। ये पौधों की जड़ों के आसपास सक्रिय होकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण, फॉस्फोरस घुलनशीलता और अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता में मदद करते हैं।
जैव उर्वरकों के प्रमुख प्रकार हैं:
- राइजोबियम (Rhizobium)
- एजोटोबैक्टर (Azotobacter)
- एजोस्पिरिलम (Azospirillum)
- फॉस्फेट सॉल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया (PSB)
- जिंक सॉल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया (ZSB)
- माइकोराइजा (Mycorrhiza)
इनका उपयोग बीज उपचार, पौध उपचार और मिट्टी में सीधे प्रयोग के रूप में किया जाता है।
Biofertilizer Promotion Scheme योजना का उद्देश्य
सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करना है।
इस योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं:
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना
- रासायनिक उर्वरकों की खपत कम करना
- खेती की लागत घटाना
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना
- किसानों की आय में वृद्धि करना
- जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना
सरकार का मानना है कि जैव उर्वरकों के उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है और लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
किसानों के लिए यह योजना कैसे काम करती है?
जैव उर्वरक प्रोत्साहन के लिए केंद्र सरकार कई योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराती है।
1. परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY)
यह केंद्र सरकार की प्रमुख जैविक खेती योजना है। इसके अंतर्गत किसानों को जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक इनपुट खरीदने के लिए सहायता दी जाती है।
योजना के तहत:
- 3 वर्षों के लिए प्रति हेक्टेयर ₹50,000 तक सहायता
- इसमें से ₹31,000 सीधे किसानों को इनपुट खरीदने के लिए
- क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा
2. मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्ट (MOVCDNER)
पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए यह योजना चलाई जा रही है।
इसके तहत:
- किसानों को जैविक इनपुट और बीजों के लिए सहायता
- जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा
- उत्पादन से विपणन तक सहयोग
3. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM)
NFSM के अंतर्गत किसानों को जैव उर्वरकों के उपयोग पर सहायता प्रदान की जाती है।
- जैव उर्वरकों पर 50 प्रतिशत तक सहायता
- अधिकतम ₹300 प्रति हेक्टेयर
4. राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयल पाम मिशन (NMOOP)
इस योजना के तहत राइजोबियम, PSB, ZSB और माइकोराइजा जैसे जैव उर्वरकों के लिए सहायता दी जाती है।
5. पीएम-प्रणाम योजना (PM-PRANAM)
सरकार ने राज्यों को रासायनिक उर्वरकों की खपत कम करने और जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था शुरू की है।
इस योजना का उद्देश्य:
- रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करना
- जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना
- मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करना
किन राज्यों में लागू है योजना?
जैव उर्वरक प्रोत्साहन किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार की योजनाएं देशभर में लागू हैं।
इनमें प्रमुख राज्य शामिल हैं:
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- राजस्थान
- मध्य प्रदेश
- महाराष्ट्र
- गुजरात
- पंजाब
- हरियाणा
- उत्तराखंड
- हिमाचल प्रदेश
- तमिलनाडु
- कर्नाटक
- तेलंगाना
- आंध्र प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
- असम
- मेघालय
- त्रिपुरा
- केरल
इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में MOVCDNER के माध्यम से विशेष रूप से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जैव उर्वरकों के उपयोग से किसानों को क्या लाभ मिलते हैं?
उत्पादन लागत में कमी
जैव उर्वरक रासायनिक खादों की आवश्यकता कम करते हैं, जिससे किसानों का खर्च घटता है।
मिट्टी की सेहत में सुधार
ये मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाते हैं और जैविक कार्बन को बनाए रखने में मदद करते हैं।
पर्यावरण संरक्षण
जैव उर्वरकों से जल, मिट्टी और वायु प्रदूषण कम होता है।
बेहतर फसल गुणवत्ता
कई मामलों में जैव उर्वरकों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता और पोषण स्तर बेहतर पाया गया है।
दीर्घकालिक लाभ
मिट्टी की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जैव उर्वरकों का संतुलित उपयोग कई फसलों में 10 से 25 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि में मदद कर सकता है।
किसान कैसे करें आवेदन?
ऑफलाइन आवेदन
- अपने जिले के कृषि विभाग कार्यालय में संपर्क करें।
- कृषि अधिकारी से संबंधित योजना की जानकारी प्राप्त करें।
- आवेदन फॉर्म भरें।
- आवश्यक दस्तावेज जमा करें।
- सत्यापन के बाद योजना का लाभ प्राप्त करें।
ऑनलाइन आवेदन
कई राज्यों ने ऑनलाइन पोर्टल शुरू किए हैं जहां किसान आवेदन कर सकते हैं।
सामान्य प्रक्रिया:
- राज्य कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाएं।
- किसान पंजीकरण करें।
- संबंधित योजना चुनें।
- दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन जमा करें।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
- आधार कार्ड
- किसान पंजीकरण संख्या
- भूमि संबंधी दस्तावेज
- बैंक पासबुक
- मोबाइल नंबर
- पासपोर्ट साइज फोटो
प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम
सरकार किसानों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं देती बल्कि प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराती है।
इन संस्थानों द्वारा प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं:
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
- राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र (NCOF)
- राज्य कृषि विश्वविद्यालय
इन कार्यक्रमों में किसानों को जैव उर्वरकों के सही उपयोग, मात्रा और तकनीक की जानकारी दी जाती है।
भविष्य में क्यों बढ़ेगा जैव उर्वरकों का महत्व?
बढ़ती उत्पादन लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता और पर्यावरणीय चुनौतियों के कारण जैव उर्वरकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में:
- जैविक खेती का क्षेत्र बढ़ेगा
- जैव उर्वरकों की मांग बढ़ेगी
- किसानों की लागत कम होगी
- टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित होगी
सरकार भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में निवेश और प्रोत्साहन बढ़ा रही है।
निष्कर्ष
जैव उर्वरक प्रोत्साहन योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। यह न केवल खेती की लागत कम करने में मदद करती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। केंद्र सरकार की PKVY, NFSM, NMOOP, MOVCDNER और PM-PRANAM जैसी योजनाएं किसानों को जैव उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। यदि किसान इन योजनाओं का लाभ उठाकर संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाते हैं तो वे बेहतर उत्पादन के साथ टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।


