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Home कृषि समाचार

कोरोमंडल इंटरनेशनल का Q2 FY27 वित्तीय परिणाम घोषित, पहली छमाही में 10% बढ़ी आय; कच्चे माल की महंगाई से मुनाफे पर दबाव

Coromandel International announces Q2 FY27 results, revenue up 10% in first half; raw material prices weigh on profitability

Emran Khan by Emran Khan
November 7, 2026
in कृषि समाचार
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कोरोमंडल इंटरनेशनल का Q2 FY27 वित्तीय परिणाम घोषित, पहली छमाही में 10% बढ़ी आय; कच्चे माल की महंगाई से मुनाफे पर दबाव

कोरोमंडल इंटरनेशनल का Q2 FY27 वित्तीय परिणाम घोषित, पहली छमाही में 10% बढ़ी आय; कच्चे माल की महंगाई से मुनाफे पर दबाव

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भारत की प्रमुख कृषि समाधान कंपनियों में शामिल कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड (Coromandel International Limited) ने 30 सितंबर 2026 को समाप्त दूसरी तिमाही (Q2 FY27) और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1 FY27) के वित्तीय परिणाम घोषित कर दिए हैं। कंपनी ने दूसरी तिमाही के दौरान अपने Consolidated Total Income में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जबकि पहली छमाही में कुल आय 10 प्रतिशत बढ़ी है। हालांकि, कच्चे माल की कीमतों में तेजी और उर्वरक कारोबार में मार्जिन पर दबाव के कारण कंपनी के EBITDA और शुद्ध मुनाफे (PAT) में गिरावट दर्ज की गई है।

कंपनी के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई है। इसका प्रभाव उर्वरक कारोबार की लागत पर पड़ा है। वहीं, बढ़ी हुई लागत की पूरी भरपाई Nutrient Based Subsidy (NBS) के माध्यम से नहीं हो पाने के कारण कंपनी के मुनाफे पर दबाव बना है।

इसके बावजूद कोरोमंडल इंटरनेशनल ने Fertilisers, Crop Protection, Bio Products, Specialty Nutrients, Organic Fertilisers और Agri-Retail जैसे प्रमुख कारोबारों में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास जारी रखा है। कंपनी ने कृषि क्षेत्र में Agri-Drone Spraying और Digital Agriculture से जुड़ी पहलों को भी आगे बढ़ाया है। इन पहलों का उद्देश्य किसानों की उत्पादकता बढ़ाने, कृषि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करना है।

Q2 FY27 में कंपनी की आय 6% बढ़ी, मुनाफे में गिरावट

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कोरोमंडल इंटरनेशनल की Consolidated Total Income बढ़कर 10,348 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 9,771 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार कंपनी ने सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

हालांकि, इस दौरान कंपनी का Consolidated EBITDA 18 प्रतिशत घटकर 944 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 1,147 करोड़ रुपये था। इसी तरह Profit Before Tax (PBT) में 33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,059 करोड़ रुपये से घटकर 706 करोड़ रुपये रह गया।

कंपनी का Profit After Tax (PAT) भी 34 प्रतिशत घटकर 523 करोड़ रुपये पर आ गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में यह 793 करोड़ रुपये था।

Standalone आधार पर कंपनी की कुल आय 9,513 करोड़ रुपये से बढ़कर 9,987 करोड़ रुपये हो गई, जो 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। वहीं, EBITDA 1,147 करोड़ रुपये से घटकर 904 करोड़ रुपये रह गया। PBT में 33 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 737 करोड़ रुपये रहा, जबकि PAT 816 करोड़ रुपये से घटकर 548 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Q2 FY27 के वित्तीय परिणाम: एक नजर में

Consolidated Results (करोड़ रुपये में)

वित्तीय मापदंड Q2 FY26 Q2 FY27 बदलाव
Total Income 9,771 10,348 +6%
EBITDA 1,147 944 -18%
PBT 1,059 706 -33%
PAT 793 523 -34%

Standalone Results (करोड़ रुपये में)

वित्तीय मापदंड Q2 FY26 Q2 FY27 बदलाव
Total Income 9,513 9,987 +5%
EBITDA 1,147 904 -21%
PBT 1,092 737 -33%
PAT 816 548 -33%

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कंपनी के कारोबार में आय के स्तर पर वृद्धि जारी रही, लेकिन लागत में बढ़ोतरी के कारण परिचालन लाभ और शुद्ध मुनाफे में कमी आई है। विशेष रूप से उर्वरक कारोबार में कच्चे माल की कीमतों का असर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर दिखाई दिया।

पहली छमाही में Consolidated Income 18,563 करोड़ रुपये पहुंची

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1 FY27) में कोरोमंडल इंटरनेशनल ने अपनी आय में बेहतर वृद्धि दर्ज की। कंपनी की Consolidated Total Income 16,897 करोड़ रुपये से बढ़कर 18,563 करोड़ रुपये हो गई। इस प्रकार इसमें सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

हालांकि, पहली छमाही के दौरान कंपनी का Consolidated EBITDA 12 प्रतिशत घटकर 1,705 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 1,929 करोड़ रुपये था।

इसी तरह PBT में 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,737 करोड़ रुपये से घटकर 1,220 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी का Consolidated PAT भी 30 प्रतिशत घटकर 905 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि H1 FY26 में यह 1,295 करोड़ रुपये था।

Standalone आधार पर पहली छमाही में कंपनी की कुल आय 16,596 करोड़ रुपये से बढ़कर 17,779 करोड़ रुपये हो गई, जो 7 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं, EBITDA 1,885 करोड़ रुपये से घटकर 1,530 करोड़ रुपये रह गया। PBT में 30 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 1,242 करोड़ रुपये और PAT भी 30 प्रतिशत घटकर 925 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

H1 FY27 के वित्तीय परिणाम: एक नजर में

Consolidated Results (करोड़ रुपये में)

वित्तीय मापदंड H1 FY26 H1 FY27 बदलाव
Total Income 16,897 18,563 +10%
EBITDA 1,929 1,705 -12%
PBT 1,737 1,220 -30%
PAT 1,295 905 -30%

Standalone Results (करोड़ रुपये में)

वित्तीय मापदंड H1 FY26 H1 FY27 बदलाव
Total Income 16,596 17,779 +7%
EBITDA 1,885 1,530 -19%
PBT 1,777 1,242 -30%
PAT 1,325 925 -30%

इन परिणामों से पता चलता है कि कंपनी ने पहली छमाही में कारोबार का विस्तार किया है, लेकिन बढ़ती लागत और उर्वरक कारोबार में मार्जिन संबंधी चुनौतियों के कारण लाभप्रदता प्रभावित हुई है।

मध्य पूर्व संकट और कच्चे माल की महंगाई से उर्वरक कारोबार प्रभावित

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर सबसे अधिक दबाव Fertiliser Business में देखने को मिला। कोरोमंडल इंटरनेशनल के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई है। इसके साथ ही खरीफ सीजन के दौरान Nutrient Based Subsidy (NBS) की अपेक्षाकृत कम दरों ने NP और NPK उर्वरकों की बिक्री तथा मार्जिन को प्रभावित किया।

उर्वरक उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिलने वाले प्रमुख कच्चे माल पर निर्भर करता है। फॉस्फेटिक उर्वरकों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ता है। जब कच्चे माल की कीमतें बढ़ती हैं और सब्सिडी में उसके अनुरूप बदलाव नहीं होता, तो कंपनियों के लिए लागत और बिक्री मूल्य के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

कंपनी ने बताया कि इन परिस्थितियों के बावजूद उसने किसानों को उर्वरकों की आपूर्ति जारी रखी। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कोरोमंडल ने करीब 33 लाख टन उर्वरकों की आपूर्ति की।

यह कंपनी के वितरण नेटवर्क और कृषि बाजार में उसकी मजबूत मौजूदगी को दर्शाता है।

फॉस्फेटिक उर्वरक बाजार में हिस्सेदारी 17% से बढ़कर 19% हुई

उर्वरक कारोबार में लागत संबंधी चुनौतियों के बावजूद कोरोमंडल इंटरनेशनल ने फॉस्फेटिक उर्वरक (Phosphatic Fertiliser) बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की है।

कंपनी के अनुसार, फॉस्फेटिक उर्वरक बाजार में उसकी हिस्सेदारी पिछले वर्ष के 17 प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई है। यह दो प्रतिशत अंकों की वृद्धि है।

भारत में DAP, NPK और अन्य फॉस्फेट आधारित उर्वरक फसल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों का संतुलित इस्तेमाल फसल की वृद्धि और उत्पादकता के लिए जरूरी है।

कंपनी का कहना है कि वह किसानों को उर्वरकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और फॉस्फेटिक सेगमेंट में अपनी नेतृत्व स्थिति मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।

काकीनाडा प्लांट से कच्चे माल की आपूर्ति में मिलेगी मजबूती

कंपनी ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में नए Phosphoric Acid और Sulphuric Acid Plant को चालू किया है। इस संयंत्र से कंपनी को बाहरी आपूर्ति में आने वाली बाधाओं के प्रभाव को कम करने और उत्पादन प्रक्रिया को मजबूत बनाने में मदद मिल रही है।

फॉस्फोरिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड फॉस्फेटिक उर्वरकों के निर्माण में महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चे माल हैं। इनकी उपलब्धता उत्पादन क्षमता और लागत प्रबंधन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

काकीनाडा संयंत्र के शुरू होने से कंपनी को अपनी आपूर्ति व्यवस्था पर बेहतर नियंत्रण बनाने और समय पर उत्पादन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल सकती है।

कंपनी ने बताया कि सरकार की ओर से समय पर मिले सहयोग ने इस संयंत्र के माध्यम से Value Accretion में भी योगदान दिया है।

आगे कंपनी को उम्मीद है कि रबी सीजन के लिए घोषित होने वाली NBS दरों में कच्चे माल की कीमतों में हुए बदलाव को उचित रूप से ध्यान में रखा जाएगा। इससे संतुलित पोषण आधारित उर्वरकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और उद्योग की लागत संबंधी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

Crop Protection कारोबार में 22% की वृद्धि

उर्वरक कारोबार में दबाव के बीच कंपनी के Crop Protection Business ने दूसरी तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है। इस कारोबार में कंपनी ने 22 प्रतिशत की Revenue Growth दर्ज की।

कंपनी के अनुसार, इस वृद्धि में Export Markets का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर प्रदर्शन से Crop Protection कारोबार को मजबूती मिली।

वहीं, घरेलू बाजार में खपत की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रहने के बावजूद कंपनी ने अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को मजबूत करने पर ध्यान दिया। इसके तहत Differentiated Products और Unique Combination Products को प्राथमिकता दी गई।

फसल सुरक्षा क्षेत्र में कीटनाशक, फफूंदनाशक, खरपतवारनाशक और अन्य Crop Protection Formulations किसानों को फसलों को कीटों एवं रोगों से बचाने में मदद करते हैं।

कंपनी का उद्देश्य किसानों को ऐसे उत्पाद उपलब्ध कराना है, जो फसल सुरक्षा की जरूरतों के अनुरूप हों और कृषि उत्पादकता को बेहतर बनाने में योगदान दें।

रिटेल नेटवर्क में करीब 100 नए स्टोर जुड़े

Coromandel International ने अपने Agri-Retail Business का भी विस्तार जारी रखा है। कंपनी ने दूसरी तिमाही के दौरान करीब 100 नए रिटेल स्टोर खोले हैं। इसके साथ ही कंपनी के रिटेल नेटवर्क में स्टोर की संख्या बढ़कर 1,300 से अधिक हो गई है।

कंपनी का ग्रामीण रिटेल कारोबार किसानों को केवल कृषि इनपुट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से किसानों को फसल सलाह, मिट्टी परीक्षण, कृषि मशीनीकरण और अन्य कृषि सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के रिटेल नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि किसान एक ही स्थान पर बीज, उर्वरक, कीटनाशक, विशेष पोषक तत्व और कृषि संबंधी सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

कंपनी अपने रिटेल नेटवर्क के माध्यम से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र सहित प्रमुख कृषि बाजारों में किसानों तक पहुंच बना रही है।

Specialty Nutrients और Biological Products में बढ़ी मांग

कंपनी के Specialty Nutrients, Organic Fertilisers और Bio Products कारोबार ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है। कंपनी के अनुसार, इन क्षेत्रों में किसानों द्वारा Differentiated और Sustainable Crop Solutions को अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

Specialty Nutrients कारोबार के तहत Water Soluble Fertilisers, Secondary Nutrients, Micronutrients और Nano Fertilisers जैसे उत्पाद शामिल हैं।

इन उत्पादों का उद्देश्य फसलों को उनकी जरूरत के अनुसार पोषक तत्व उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने और फसल पोषण प्रबंधन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

वहीं, Organic Fertilisers और Biological Products का इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में किया जा रहा है।

कंपनी का मानना है कि किसानों के बीच इन उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता भविष्य में कृषि क्षेत्र में अधिक टिकाऊ और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन को बढ़ावा दे सकती है।

नए NPK प्लांट और Crop Protection क्षमता का विस्तार

कोरोमंडल इंटरनेशनल ने बताया कि उसकी दीर्घकालिक रणनीतिक परियोजनाएं निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ रही हैं।

कंपनी की नई NPK Fertiliser Manufacturing Capacity पर काम तेजी से जारी है और इसे वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही (Q4 FY27) तक पूरा करने की उम्मीद है।

इस क्षमता विस्तार से कंपनी को NPK उर्वरकों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में सहायता मिल सकती है।

इसके अलावा Crop Protection कारोबार में कंपनी के एक प्रमुख Molecule के उत्पादन के लिए अतिरिक्त क्षमता विकसित की जा रही है। इसके Q3 FY27 के दौरान शुरू होने की उम्मीद है।

कंपनी Fluoro Intermediates के लिए एक Launch Plant स्थापित करने की भी योजना बना रही है। इस परियोजना का उद्देश्य Research and Development से Commercial Production तक उत्पादों के विकास की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना और Speciality Chemistry के क्षेत्र में कंपनी की क्षमता मजबूत करना है।

इन पहलों से कंपनी को भविष्य में नए उत्पाद विकसित करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कृषि रसायन बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

MD एवं CEO एस. शंकरसुब्रमण्यम बोले- चुनौतीपूर्ण माहौल में भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत

Coromandel International Limited के Managing Director एवं CEO एस. शंकरसुब्रमण्यम ने वित्तीय परिणामों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दूसरी तिमाही के दौरान चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल के बावजूद कंपनी ने संतुलित प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा कि कंपनी के विविधीकृत उत्पाद पोर्टफोलियो, ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध और भारतीय एवं वैश्विक बाजारों में मौजूदगी ने इस दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि कंपनी ने Nutrients और Crop Protection कारोबार में दूसरी तिमाही के दौरान 10 नए उत्पाद लॉन्च किए हैं। कंपनी का ध्यान Differentiated Offerings और किसानों को बेहतर कृषि समाधान उपलब्ध कराने पर बना हुआ है।

उर्वरक कारोबार के संबंध में उन्होंने कहा कि कम वर्षा, कच्चे माल की ऊंची कीमतों और खरीफ सीजन के लिए कम NBS दरों के कारण NP/NPK सेगमेंट की बिक्री और मार्जिन प्रभावित हुए। इसके बावजूद कंपनी ने पहली छमाही में करीब 33 लाख टन उर्वरकों की आपूर्ति करके किसानों की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया।

उन्होंने फॉस्फेटिक उर्वरक बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत होने को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

Crop Protection कारोबार में 22 प्रतिशत की वृद्धि, रिटेल नेटवर्क का विस्तार और Specialty Nutrients एवं Biological Products में बेहतर प्रदर्शन को कंपनी की विविधीकृत कारोबारी रणनीति का परिणाम बताया।

कृषि क्षेत्र में तकनीक और टिकाऊ समाधान पर बढ़ रहा फोकस

Coromandel International अपने पारंपरिक उर्वरक कारोबार के साथ कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और टिकाऊ समाधानों पर भी निवेश कर रही है। कंपनी के पास वर्तमान में 8 Research and Development Centres और एक मजबूत Regulatory Setup है, जो नए उत्पादों के विकास तथा उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं।

इसके अतिरिक्त कंपनी के देशभर में 21 Manufacturing Facilities हैं, जहां Nutrient और Crop Protection Products का उत्पादन किया जाता है।

कंपनी Agri-Drone Spraying और Digital Initiatives को भी आगे बढ़ा रही है। कृषि ड्रोन के माध्यम से फसलों पर कीटनाशकों और अन्य कृषि इनपुट का छिड़काव अधिक व्यवस्थित तरीके से करने की संभावनाएं हैं। इससे कृषि कार्यों में तकनीक के इस्तेमाल और किसानों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, Q2 FY27 में कोरोमंडल इंटरनेशनल का प्रदर्शन एक ओर बढ़ती आय और बाजार विस्तार को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर कच्चे माल की महंगाई और सब्सिडी संबंधी चुनौतियों का असर कंपनी की लाभप्रदता पर भी दिखाई देता है। आने वाले समय में नई उत्पादन क्षमता, Crop Protection कारोबार की वृद्धि, रिटेल नेटवर्क के विस्तार और विशेष पोषक तत्वों की बढ़ती मांग कंपनी के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

Coromandel International Limited भारत की प्रमुख कृषि समाधान कंपनियों में से एक है। कंपनी कृषि मूल्य श्रृंखला में उर्वरक, Crop Protection, Bio Products, Specialty Nutrients और Organic Fertilisers सहित विभिन्न उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराती है।

कंपनी भारत में फॉस्फेटिक उर्वरकों की दूसरी सबसे बड़ी निर्माता और विपणन कंपनियों में शामिल है। इसका Crop Protection कारोबार भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सक्रिय है और किसानों को विभिन्न Technical और Formulation Products उपलब्ध कराता है।

कंपनी का Specialty Nutrients Business Water Soluble Fertilisers, Secondary and Micronutrients तथा Nano Fertilisers पर केंद्रित है। वहीं, Organic Fertilisers कारोबार में भी कंपनी की मजबूत बाजार मौजूदगी है। Bio Products Business के अंतर्गत विभिन्न कृषि उपयोगों के लिए Plant Extractions विकसित किए जाते हैं।

कंपनी के पास 1,200 से अधिक ग्रामीण रिटेल आउटलेट का नेटवर्क है, जो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में फैला हुआ है। इन केंद्रों के माध्यम से कंपनी लगभग 30 लाख किसानों को कृषि इनपुट और सेवाएं उपलब्ध कराती है। इनमें Crop Advisory, Soil Testing और Farm Mechanisation जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 31,827 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया था। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कंपनी के प्रयासों को UNDP जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मान्यता मिली है। इसके अलावा TERI द्वारा इसे भारत की दस सबसे हरित कंपनियों में भी शामिल किया गया है।

Tags: AgricultureCoromandelFarmingIndian arming
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