Punjab Agricultural University (पीएयू), लुधियाना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक ने पंजाब की कृषि को नई दिशा देने की मजबूत नींव रखी। CropLife India के साथ हुए इस संवाद में अकादमिक जगत और उद्योग के प्रतिनिधियों ने मिलकर राज्य की कृषि को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने पर विचार-विमर्श किया।
बैठक की अध्यक्षता पीएयू के कुलपति Dr. Satbir Singh Gosal ने की, जिसमें विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देश की प्रमुख एग्री-इनपुट कंपनियों—Syngenta India Pvt. Ltd., Bayer, Corteva Agriscience, Dhanuka Agritech Ltd., Rallis India Ltd., Bharat Certis Agriscience Ltd. और Godrej Agrovet Ltd. के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस संवाद का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना और फसल सुरक्षा उद्योग की भूमिका को और प्रभावी बनाना था। साथ ही, पीएयू में चल रहे पीएम फेलोशिप कार्यक्रमों को और सक्रिय करने पर भी जोर दिया गया, ताकि शोध कार्यों को किसानों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जा सके।
डॉ. गोसल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि पीएयू अब तक 970 से अधिक फसल किस्में और हाइब्रिड विकसित कर चुका है, जिनमें से 225 से अधिक राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण साबित हुई हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि अनुसंधान को नवाचार, जलवायु अनुकूलता और बाजार की मांग के अनुरूप आगे बढ़ाया जाए।
बैठक में केवल विचारों का आदान-प्रदान ही नहीं हुआ, बल्कि कई ठोस कदमों पर भी चर्चा की गई। इसमें अगली पीढ़ी की फसल सुधार तकनीकों, फसल विविधीकरण, और किसानों के लिए बाजार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने की बात सामने आई। विशेषज्ञों ने ऐसे बीज विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया जो कम अवधि में तैयार हों, सूखा सहन कर सकें और बदलते जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप हों।
इसके अलावा, रोग पूर्वानुमान प्रणाली (Disease Forecasting Systems) विकसित करने, निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन प्रणाली बनाने और विशेष गुणों वाली फसलों के विकास पर भी चर्चा हुई। यह कदम किसानों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के रूप में पंजाब को “सीड हब” के रूप में विकसित करने का विचार सामने आया, जिसे बैठक में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसके साथ ही, बासमती चावल के लिए एक विशेष “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया, जिससे गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सके।
उद्योग प्रतिनिधियों ने पीएयू के साथ और अधिक संगठित और दीर्घकालिक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने माना कि विश्वविद्यालय का किसानों के बीच मजबूत नेटवर्क और वैज्ञानिक विश्वसनीयता इसे देश का एक अग्रणी संस्थान बनाती है। ऐसे में उद्योग और अकादमिक सहयोग से कृषि क्षेत्र में तेजी से बदलाव लाया जा सकता है।
बैठक का संचालन डॉ. विशाल बेक्टर ने किया, जिन्होंने पूरे सत्र को समाधान-आधारित और केंद्रित बनाए रखा। सभी प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना की और भविष्य में ऐसे संवाद नियमित रूप से आयोजित करने की इच्छा जताई।
अंत में, सभी पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि यह संवाद केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे ठोस कार्य योजनाओं में बदला जाएगा। इस साझेदारी के माध्यम से पंजाब को टिकाऊ, नवाचार-आधारित और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कृषि मॉडल के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

