Cyclone Arnab: ओडिशा में चक्रवात अर्नब और उसके बाद हुई भारी बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद होने, कृषि भूमि में पानी भरने और कई इलाकों में मिट्टी तथा रेत जमा होने से खेती को भारी नुकसान पहुंचा है। इस संकट के बीच ओडिशा सरकार ने प्रभावित किसानों और परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज (Cyclone Relief Package) की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 1 नवंबर 2026 को राहत उपायों का ऐलान करते हुए कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों की सहायता करने के साथ खेती और ग्रामीण आजीविका को दोबारा पटरी पर लाने के लिए कदम उठाएगी।
नई घोषणा के अनुसार, 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान वाले पात्र किसानों को भूमि और फसल की श्रेणी के अनुसार ₹8,500 से ₹22,500 प्रति हेक्टेयर तक Agricultural Input Subsidy दी जाएगी। इसके अतिरिक्त हर प्रभावित परिवार को 50 किलोग्राम चावल और ₹2,500 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा हुई है।
Chief Minister of Odisha+2
चक्रवात अर्नब से ओडिशा में कितना हुआ नुकसान?
चक्रवात अर्नब का प्रभाव विशेष रूप से दक्षिण ओडिशा के गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में देखने को मिला। तेज बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। खेतों में पानी जमा रहने के कारण फसलें खराब हुईं, जबकि कुछ स्थानों पर खेतों की ऊपरी उपजाऊ मिट्टी बहने और रेत जमा होने से अगली बुवाई की तैयारी भी कठिन हो गई है।
एक नवंबर को सामने आई प्रारंभिक सरकारी जानकारी के अनुसार, गंजाम और कंधमाल में कम से कम 1.18 लाख लोग प्रभावित हुए, 75 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर नुकसान दर्ज किया गया और 1,672 मकान क्षतिग्रस्त हुए। हालांकि, अंतिम नुकसान का आकलन अभी जारी है। ऐसे में प्रभावित किसानों की वास्तविक संख्या और सहायता के कुल खर्च में बदलाव हो सकता है।
किसानों के लिए चिंता केवल मौजूदा फसल तक सीमित नहीं है। खरीफ सीजन में नुकसान होने के बाद उन्हें रबी फसल की बुवाई के लिए दोबारा बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री खरीदनी होगी। इसलिए सरकार ने तत्काल राहत के साथ आगामी खेती के लिए भी सहायता देने की योजना बनाई है।
किसानों को कितना मिलेगा मुआवजा? जानिए नई दरें
ओडिशा सरकार ने Crop Damage Compensation के अंतर्गत अलग-अलग कृषि परिस्थितियों के आधार पर सहायता राशि निर्धारित की है। जिन किसानों की फसल को कम से कम 33 प्रतिशत नुकसान हुआ है, उन्हें निर्धारित शर्तों के अनुसार अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र तक सहायता मिल सकेगी।
| कृषि भूमि या फसल की श्रेणी | घोषित सहायता |
|---|---|
| असिंचित या वर्षा आधारित खेती | ₹8,500 प्रति हेक्टेयर |
| सुनिश्चित सिंचाई वाली खेती | ₹17,000 प्रति हेक्टेयर |
| बारहमासी फसलें, जैसे आम और काजू | ₹22,500 प्रति हेक्टेयर |
सरकार ने न्यूनतम कृषि इनपुट सहायता की व्यवस्था भी घोषित की है। असिंचित भूमि के लिए न्यूनतम ₹1,000, सिंचित भूमि के लिए ₹2,000 और बारहमासी फसलों के लिए ₹2,500 की सहायता निर्धारित की गई है। ये भुगतान संबंधित पात्रता और नुकसान के सत्यापन पर निर्भर करेंगे।
उदाहरण के लिए, किसी पात्र किसान की दो हेक्टेयर सिंचित भूमि पर निर्धारित सीमा के अनुसार नुकसान हुआ है, तो ₹17,000 प्रति हेक्टेयर की दर से उसकी सहायता राशि ₹34,000 बन सकती है। हालांकि, वास्तविक भुगतान प्रशासनिक सत्यापन और लागू नियमों के अनुसार ही होगा।
खेतों में जमा रेत हटाने के लिए भी आर्थिक मदद
चक्रवात के बाद किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक खेतों को फिर से खेती योग्य बनाना है। बाढ़ के पानी के साथ आई रेत और गाद (Sand and Silt) मिट्टी की सतह को ढक सकती है। इससे खेत की तैयारी, पानी की निकासी और बुवाई के काम में परेशानी होती है। इस समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रभावित कृषि भूमि से रेत और गाद हटाने के लिए ₹18,000 प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता की घोषणा की है। इस मद में न्यूनतम ₹2,200 प्रति किसान सहायता का प्रावधान बताया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को खेतों की सफाई और सुधार में होने वाले अतिरिक्त खर्च से राहत देना है।
कृषि विशेषज्ञों के सामान्य सुझावों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित खेतों में अगली फसल लगाने से पहले जल निकासी, मिट्टी की स्थिति और आवश्यकतानुसार Soil Testing पर ध्यान देना उपयोगी होगा। इससे किसान यह समझ सकेंगे कि खेत में दोबारा बुवाई के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है।
रबी सीजन के लिए 1.75 लाख मुफ्त Seed Kits
सरकार ने केवल आर्थिक मुआवजा देने के बजाय अगली फसल की तैयारी में भी किसानों का सहयोग करने का फैसला किया है। इसके लिए कुल 1.75 लाख कृषि बीज मिनीकिट वितरित करने की घोषणा की गई है। इनमें 1.20 लाख दलहन बीज किट, 5,000 तिलहन बीज किट और 50,000 सब्जी बीज किट शामिल हैं। इन किटों से प्रभावित किसान आगामी Rabi Season 2026-27 में खेती दोबारा शुरू करने की तैयारी कर सकेंगे।
इसके अलावा रबी सीजन के दौरान कीटनाशकों और Bio-Pesticides पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की भी घोषणा की गई है। इससे पात्र किसानों को फसल सुरक्षा पर होने वाले खर्च में सहायता मिल सकती है।
गन्ना उत्पादकों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। स्पेस ट्रांसप्लांटिंग पद्धति के प्रदर्शन के लिए ₹27,500 प्रति हेक्टेयर और फसल प्रबंधन सहायता के लिए ₹12,500 प्रति हेक्टेयर की दर घोषित की गई है। इन योजनाओं का लाभ संबंधित कार्यक्रम की शर्तों के अनुसार मिलेगा।
फसल खराब होने पर कृषि कर्ज में भी राहत
चक्रवात से प्रभावित कई किसानों के सामने अब Crop Loan चुकाने की चुनौती खड़ी हो सकती है। फसल बिकने से पहले ही नुकसान हो जाने पर किसानों की आय प्रभावित होती है और अगली खेती के लिए पूंजी जुटाना मुश्किल हो जाता है।
इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने पात्र किसानों के अल्पकालिक खरीफ कृषि ऋण (Short-Term Kharif Loan) को मध्यम अवधि के ऋण (Medium-Term Loan) में बदलने का प्रावधान घोषित किया है। इससे पात्र किसानों को कर्ज भुगतान के लिए अधिक समय मिल सकता है।
बटाईदारों, भूमिहीन किसानों और मौखिक समझौते पर खेती करने वाले कृषकों की सहायता के लिए Joint Liability Groups के माध्यम से रबी ऋण उपलब्ध कराने की योजना भी बताई गई है। हालांकि, ऋण पुनर्गठन का अर्थ कर्ज माफी नहीं है। किसानों को बैंक और संबंधित विभाग से इसकी शर्तें समझनी होंगी।
पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को भी सहायता
चक्रवात अर्नब राहत पैकेज में खेती के अलावा पशुपालन, आवास और अन्य ग्रामीण रोजगार को भी शामिल किया गया है।सरकार ने पात्र पशुपालकों को दुधारू गाय या भैंस की मृत्यु पर ₹37,500 प्रति पशु और भेड़, बकरी या सूअर के नुकसान पर ₹4,000 प्रति पशु तक सहायता देने की घोषणा की है। पशुपालन से जुड़े अन्य नुकसान के लिए भी निर्धारित प्रावधान हैं।
जिन परिवारों के मकान पूरी तरह या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पहाड़ी क्षेत्रों में ₹1.30 लाख तक आवास सहायता देने की घोषणा हुई है।
इसके अतिरिक्त मत्स्यपालकों, महिला स्वयं सहायता समूहों, बुनकरों, कारीगरों और छोटे दुकानदारों के लिए भी अलग-अलग पुनर्वास सहायता की व्यवस्था की गई है।
केंद्रीय टीम करेगी नुकसान का आकलन, आगे मिल सकती है अतिरिक्त मदद
ओडिशा सरकार की घोषणा के बाद केंद्र सरकार की आठ सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी टीम (Inter-Ministerial Central Team) का 2 से 4 नवंबर 2026 के बीच प्रभावित क्षेत्रों का दौरा निर्धारित किया गया है। यह टीम गंजाम, गजपति और कंधमाल सहित प्रभावित इलाकों में फसलों, मकानों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को हुए नुकसान की स्थिति का आकलन करेगी। टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक केंद्रीय सहायता पर विचार किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने संकेत दिया है कि नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद राहत व्यवस्था की फिर समीक्षा की जा सकती है। इसलिए किसानों के लिए घोषित मौजूदा सहायता को अंतिम संभावित राहत राशि मानना उचित नहीं होगा।
मुआवजा पाने के लिए किसानों को क्या करना चाहिए?
सरकार की राहत घोषणा के बाद किसानों के लिए सबसे जरूरी काम अपने नुकसान का सही आकलन और प्रशासनिक सत्यापन सुनिश्चित करना है। अभी उपलब्ध घोषणा में सभी किसानों के लिए किसी एक नए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल या अंतिम आवेदन तारीख की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
ऐसे में प्रभावित किसान अपने क्षेत्र के कृषि विभाग, राजस्व अधिकारियों या स्थानीय प्रशासन से सर्वे की स्थिति और आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त करें। जमीन के रिकॉर्ड, बैंक खाते का विवरण, पहचान संबंधी दस्तावेज और फसल नुकसान के उपलब्ध प्रमाण सुरक्षित रखना उपयोगी होगा।
यदि किसान ने फसल बीमा (Crop Insurance) लिया है, तो उसे अपनी बीमा कंपनी या संबंधित बैंक से नुकसान की सूचना देने की समयसीमा भी जांचनी चाहिए। बीमा दावा और सरकारी Input Subsidy अलग व्यवस्थाएं हैं। दोनों का लाभ संबंधित नियमों के अनुसार ही निर्धारित होगा।
राहत के साथ खेती की बहाली भी जरूरी
चक्रवात अर्नब से प्रभावित ओडिशा के किसानों के लिए सरकार का नया राहत पैकेज महत्वपूर्ण कदम है। ₹22,500 प्रति हेक्टेयर तक कृषि सहायता, खेतों से गाद हटाने के लिए आर्थिक मदद, मुफ्त बीज किट और कृषि ऋण में राहत जैसे उपाय किसानों को खेती दोबारा शुरू करने में सहयोग दे सकते हैं।
फिलहाल किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नुकसान का सही सर्वे हो, पात्र परिवारों की पहचान समय पर पूरी की जाए और सहायता वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। आने वाले दिनों में केंद्रीय टीम की रिपोर्ट और राज्य सरकार के विस्तृत निर्देशों से राहत वितरण की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

