दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब विशाखापत्तनम से आ रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 579 में तकनीकी खराबी की सूचना मिली। विमान के इंजन में गड़बड़ी की आशंका जताई गई, जिसके बाद एयरपोर्ट प्रशासन ने तुरंत ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित कर दी। हालांकि राहत की बात यह रही कि करीब 11 बजे विमान सुरक्षित रूप से रनवे पर उतर गया और एक बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 10:50 बजे जब बोइंग 737-800 विमान दिल्ली के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर रहा था, तभी पायलट को इंजन में गंभीर तकनीकी समस्या का संकेत मिला। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पायलट ने बिना समय गंवाए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को अलर्ट कर दिया। महज तीन मिनट के भीतर, 10:53 बजे एयरपोर्ट पर ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित कर दी गई और रनवे नंबर 28 को हाई अलर्ट पर रखा गया।
इमरजेंसी घोषित होते ही एयरपोर्ट पर सुरक्षा और राहत एजेंसियां सक्रिय हो गईं। दमकल की गाड़ियां, एंबुलेंस और रेस्क्यू टीमें रनवे के आसपास तैनात कर दी गईं। हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई थी। यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, लैंडिंग किसी भी उड़ान का सबसे संवेदनशील और जोखिम भरा चरण होता है। खासकर तब, जब विमान पहले से ही तकनीकी खराबी से जूझ रहा हो। इस मामले में भी तीन बड़े खतरे सामने थे। पहला, लैंडिंग के दौरान विमान की गति पहले से ही कम होती है, ऐसे में यदि इंजन पूरी तरह बंद हो जाए तो पायलट के पास विमान को नियंत्रित करने के लिए बहुत कम समय बचता है।
दूसरा, तकनीकी खराबी के कारण विमान का संतुलन प्रभावित हो सकता है। यदि टचडाउन के समय विमान का संतुलन बिगड़ जाता, तो वह रनवे से फिसल सकता था या पलट भी सकता था। तीसरा बड़ा खतरा आग लगने का था। इंजन में खराबी अक्सर घर्षण या किसी तरह के रिसाव से जुड़ी होती है। ऐसे में लैंडिंग के दौरान टायर और रनवे के संपर्क से निकलने वाली चिंगारी आग का कारण बन सकती थी। इसी आशंका को देखते हुए दमकल की टीमें पहले से मुस्तैद थीं।
हालांकि, पायलट की सूझबूझ और त्वरित निर्णय ने स्थिति को संभाल लिया। विमान को सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतार लिया गया, जिससे सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स की जान बच गई। घटना के बाद विमान की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है, ताकि खराबी के असली कारण का पता लगाया जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई और समन्वय कितना महत्वपूर्ण होता है। साथ ही, पायलट और ग्राउंड स्टाफ की पेशेवर दक्षता ने एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया।

