पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से Punjab Agricultural University (पीएयू), लुधियाना के मृदा विज्ञान विभाग द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए और हमारे भविष्य के लिए” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के प्रति जागरूकता पैदा करना था।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयासों पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि Dr. G.P.S. Sodi, अतिरिक्त निदेशक (विस्तार शिक्षा), ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन जैसी चुनौतियां मानव सभ्यता के सामने गंभीर संकट के रूप में उभर रही हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व बनता है कि वह पर्यावरण को बचाने और मृदा स्वास्थ्य को संरक्षित रखने में सक्रिय भूमिका निभाए।
उन्होंने विद्यार्थियों और युवा वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे टिकाऊ कृषि प्रणालियों को अपनाने तथा पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के प्रसार में योगदान दें। उनका कहना था कि स्वस्थ मिट्टी ही सुरक्षित खाद्य उत्पादन और भावी पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
पीएफएएस और पर्यावरण पर विशेषज्ञ व्याख्यान
कार्यक्रम के दौरान विशेष अतिथि वक्ता Amod Prakash Yadav, रीजनल मैनेजर, वाटर्स ने “पीएफएएस (PFAS) एवं पर्यावरण” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि पीएफएएस ऐसे रसायन हैं जो लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
उन्होंने प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग और उससे उत्पन्न होने वाले प्रदूषण पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार प्लास्टिक कचरा न केवल मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित करता है, बल्कि खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मानव शरीर तक भी पहुंच सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को एकल-उपयोग प्लास्टिक से बचने और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने की सलाह दी।
विभागाध्यक्ष ने साझा किए महत्वपूर्ण विचार
मृदा विज्ञान विभाग के प्रमुख Dr. Rajeev Sikka ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान और नवाचार के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य सुधार, जैविक पदार्थों के उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
वरिष्ठ वैज्ञानिकों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर Dr. O.P. Choudhary, Dr. Dhanwinder Singh तथा Dr. B.S. Sekhon भी मौजूद रहे। इन वरिष्ठ विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में बढ़ते रासायनिक उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने टिकाऊ खेती, जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण को भविष्य की कृषि के लिए महत्वपूर्ण बताया।
पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मकता
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विभाग द्वारा पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने प्रकृति संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन, वृक्षारोपण तथा स्वच्छ पर्यावरण जैसे विषयों पर आकर्षक और संदेशपूर्ण पोस्टर तैयार किए।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के पोस्टरों ने पर्यावरणीय समस्याओं और उनके समाधान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की कल्पनाशीलता, संदेश की स्पष्टता और प्रस्तुति शैली की सराहना की।
प्रतियोगिता में राजनेश चौधरी (पीएच.डी. द्वितीय वर्ष) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। नेहा कुमावत (पीएच.डी. द्वितीय वर्ष) को द्वितीय स्थान तथा नैना शर्मा (पीएच.डी. तृतीय वर्ष) को तृतीय स्थान से सम्मानित किया गया। विजेताओं को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के प्रयासों के लिए बधाई दी गई।
वृक्षारोपण कर दिया हरित भविष्य का संदेश
कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने विभाग परिसर में वृक्षारोपण भी किया। इस पहल का उद्देश्य हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देना था।
विशेषज्ञों ने कहा कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन प्रदान नहीं करते, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, जैव विविधता को संरक्षित रखने और मृदा संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वृक्षारोपण गतिविधि ने कार्यक्रम को और अधिक सार्थक बना दिया तथा उपस्थित लोगों को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए युवाओं की भूमिका अहम
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि युवा वर्ग पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बने और अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव अपनाए, तो बड़े स्तर पर परिवर्तन संभव है।
प्लास्टिक का कम उपयोग, जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, वृक्षारोपण और स्वच्छता जैसी गतिविधियां पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं। विद्यार्थियों को पर्यावरणीय जागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में मृदा क्लब के अध्यक्ष Dr. Vivek Sharma ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों को प्रकृति के संरक्षण तथा सतत विकास के लिए मिलकर कार्य करने की प्रेरणा भी प्रदान कर गया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा संस्थान पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान और हरित भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

