ֆ:सम्मेलन में मुख्य रूप से कृषि शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा हुई। इसी दौरान -छात्रों का कृषि को करियर के रूप में चुनने में घटती रुचि, विश्वविद्यालयों और संस्थानों को मिलने वाले वित्तीय संसाधनों की कमी। शिक्षकों और शोधकर्ताओं को समय पर उचित प्रशिक्षण न मिल पाना। मानव संसाधन प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां। शोध और मार्केटिंग के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की कमी आदि मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई।
इस अवसर पर BAERC के अध्यक्ष श्री प्रमोद चौधरी, उपाध्यक्ष एडवोकेट विलास सोनवाने और सचिव डॉ. ए. ए. मुर्कुटे भी मौजूद रहे। उपाध्यक्ष, डॉ. एस. के. दुबे ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और सम्मेलन के दो प्रमुख सत्र – कृषि शिक्षा और कृषि अनुसंधान – का संचालन किया। इस सम्मेलन ने देशभर के कृषि शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े प्रमुख लोगों को एक मंच पर आकर विचार-विमर्श करने और इन क्षेत्रों को मजबूत करने की रणनीतियों पर काम करने का अवसर दिया।
§ֆ:सम्मेलन में 15 विश्वविद्यालयों के कुलपति और 20 निदेशकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान ASRB के सदस्य डॉ. बी. एस. द्विवेदी, शिक्षा के उपमहानिदेशक (DDG) डॉ. आर. सी. अग्रवाल, विस्तार के उपमहानिदेशक डॉ. यू. एस. गौतम और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) के उपमहानिदेशक डॉ. एस. के. चौधरी भी उपस्थित रहें।§नई दिल्ली- भारतीय कृषि-अर्थशास्त्र अनुसंधान केंद्र (BAERC) ने 25 सितंबर 2024 को दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि शिक्षा और अनुसंधान प्रबंधक सम्मेलन आयोजित किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि, माननीय श्री भगीरथ चौधरी, राज्य कृषि मंत्री, भारत सरकार, ने किसानों के स्थायी विकास के लिए एक ठोस नीति पर संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री, श्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि सार्वजनिक वित्त पोषित संस्थानों, जैसे विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्रों की नीतियों की समीक्षा न होने के कारण वर्तमान समय में उनकी प्रगति बाधित हो रही है। कार्यक्रम के समापन सत्र में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह-सारकार्यवाह, डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि कृषि उत्पाद की कीमतों को मुद्रास्फीति से अलग कर किसानों के लिए उन्हें लाभकारी बनाना जरूरी है।

