पोल्ट्री सेक्टर इस समय एक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है, जिसकी मुख्य वजह अंडों के निर्यात में आई भारी गिरावट है। ऑल इंडिया पोल्ट्री एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप और राहत की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि अंडों की ढुलाई लागत में करीब पांच गुना तक इजाफा हो गया है, जिससे निर्यात लगभग ठप हो गया है और इसका सीधा असर देशभर के पोल्ट्री किसानों पर पड़ रहा है।
एसोसिएशन के सचिव वलसन परमेश्वरन के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री शिपिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। खासकर खाड़ी देशों में अंडों का निर्यात लगभग बंद हो चुका है। पहले भारत से रोजाना 80 लाख से लेकर एक करोड़ अंडों का निर्यात होता था, लेकिन अब यह संख्या घटकर केवल एक-दो कंटेनर तक सीमित रह गई है। इससे देश के भीतर अंडों का स्टॉक तेजी से बढ़ गया है, जिससे बाजार में असंतुलन पैदा हो गया है।
घरेलू बाजार में इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। पहले जहां 100 अंडों की कीमत करीब 540 रुपये तक पहुंच जाती थी, वहीं अब यह घटकर 430 रुपये या उससे भी कम हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा कीमतें उत्पादन लागत से भी नीचे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनुमान है कि केवल दक्षिण भारत के पोल्ट्री किसानों को ही रोजाना करीब 5 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
स्थिति को और जटिल बनाती है अंडों की सीमित शेल्फ लाइफ। एक अंडा अधिकतम 90 दिनों तक ही सुरक्षित रह सकता है, लेकिन मौजूदा हालात में कई खेप रास्ते में ही अटक गई हैं और उनकी आधी शेल्फ लाइफ खत्म हो चुकी है। यदि ये अंडे समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचे, तो उनके खराब होने की आशंका बढ़ जाएगी, जिससे नुकसान और गहरा सकता है।
फिलहाल 125 कंटेनरों में से लगभग 90-95 कंटेनर अपने गंतव्य तक पहुंच चुके हैं, जिससे कुछ राहत जरूर मिली है। हालांकि अभी भी 5-10 कंटेनर मुंबई के जेएनपीटी पोर्ट पर फंसे हुए हैं, जबकि करीब 30 कंटेनर दम्माम के पास एक जहाज में अटके हुए हैं। हाल ही में घोषित सीजफायर के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इन कंटेनरों की आवाजाही सामान्य हो सकेगी।
इस संकट का एक बड़ा कारण ढुलाई लागत में अप्रत्याशित वृद्धि भी है। पहले एक कंटेनर की लागत करीब 1800 डॉलर होती थी, जो अब बढ़कर 9500 से 10500 डॉलर तक पहुंच गई है। इससे निर्यातकों का मुनाफा लगभग खत्म हो गया है। हालांकि एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वह मौजूदा संकट के मुकाबले काफी कम है।
ऐसे में पोल्ट्री एक्सपोर्टर्स ने सरकार से मांग की है कि अंडों की ढुलाई पर सब्सिडी दी जाए और पोल्ट्री उत्पादों के लिए शिपिंग सेवाओं की संख्या बढ़ाई जाए। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट लंबे समय तक पोल्ट्री सेक्टर को प्रभावित कर सकता है और किसानों की आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो सकती है।

