देश में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और जलीय जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईसीएआर-केन्द्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (ICAR-CIFE), कोलकाता केंद्र में राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। यह दिवस वर्ष 1957 में विकसित प्रेरित प्रजनन (Induced Breeding Technology) तकनीक की ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जिसने भारत में मत्स्य पालन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, मत्स्य विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, मत्स्य किसानों और उद्यमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मछली किसानों के योगदान को सम्मान देना तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाना था।
वैज्ञानिक तकनीक किसानों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल सरकार के मत्स्य विभाग के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री श्री राजेश महाता ने कहा कि देश में मत्स्य क्षेत्र की निरंतर प्रगति में मछली किसानों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने किसानों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि बढ़ती आबादी के लिए पौष्टिक प्रोटीन उपलब्ध कराने, रोजगार सृजन और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मत्स्य पालन की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अनुसंधान संस्थानों में विकसित वैज्ञानिक तकनीकों को तेजी से किसानों के खेतों और तालाबों तक पहुंचाया जाना चाहिए। इसके लिए वैज्ञानिकों, सरकारी विभागों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, ताकि आधुनिक तकनीकों का लाभ सीधे मत्स्य उत्पादकों को मिल सके और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो।
जैव विविधता संरक्षण का भी दिया संदेश
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आईसीएआर-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (ATARI), कोलकाता के निदेशक डॉ. प्रदीप डे ने राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत आज विश्व के अग्रणी मत्स्य उत्पादक देशों में शामिल है, जिसका श्रेय लाखों मत्स्य किसानों और वैज्ञानिकों को जाता है।
उन्होंने किसानों से पारंपरिक एवं लघु देशी मछली प्रजातियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उनके अनुसार ये प्रजातियां न केवल जैव विविधता को संरक्षित करती हैं, बल्कि पोषण सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को भी मजबूत बनाती हैं।
प्रगतिशील मत्स्य किसानों और उद्यमियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के मत्स्य निदेशक श्री सुप्रिया घोषाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने मत्स्य क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर मत्स्य पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले छह प्रगतिशील मत्स्य किसानों एवं उद्यमियों को राज्य मंत्री श्री राजेश महाता द्वारा सम्मानित किया गया। इन किसानों ने आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और अन्य किसानों को प्रेरित करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
महिला स्वयं सहायता समूह को मिली सजावटी मछलियों की सौगात
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में कार्यक्रम के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले के एक महिला स्वयं सहायता समूह को आईसीएआर-सीआईएफई केंद्र में विकसित उच्च मूल्य वाली सजावटी मछलियों (ऑर्नामेंटल फिश) के बीज वितरित किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सजावटी मछलियों का व्यवसाय ग्रामीण महिलाओं के लिए कम लागत में अधिक आय देने वाला एक उभरता हुआ उद्यम बन सकता है।
स्थानीय भाषा में जारी किए गए तकनीकी प्रकाशन
मत्स्य किसानों को वैज्ञानिक जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कार्यक्रम के दौरान स्थानीय भाषा में तैयार किए गए कई विस्तार पुस्तिकाओं (Extension Leaflets) का भी विमोचन किया गया।
इन प्रकाशनों में आधुनिक मत्स्य पालन, रोग प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, पोषण प्रबंधन और बेहतर उत्पादन तकनीकों से संबंधित उपयोगी जानकारी शामिल है।
हितधारक बैठक में उभरे कई महत्वपूर्ण मुद्दे
उद्घाटन सत्र के बाद वैज्ञानिकों, मत्स्य विशेषज्ञों और किसानों की उपस्थिति में एक हितधारक बैठक (Stakeholders Meet) आयोजित की गई। इसमें मत्स्य पालन से जुड़े कई समसामयिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में जलवायु परिवर्तन का मत्स्य पालन पर प्रभाव, गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता, रोग प्रबंधन, बाजार संपर्क, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग जैसे विषय प्रमुख रूप से चर्चा में रहे।
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि अनुसंधान संस्थान, राज्य सरकारें और किसान मिलकर कार्य करें, तो भारत का मत्स्य क्षेत्र और अधिक तेजी से आगे बढ़ सकता है।
प्रदर्शनी में दिखी आधुनिक तकनीकों की झलक
कार्यक्रम के दौरान एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें मत्स्य पालन से जुड़ी विभिन्न इनपुट सप्लाई कंपनियों और आईसीएआर-सीआईएफई ने अपने नवीनतम उत्पादों, तकनीकों और सेवाओं का प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनी में किसानों को आधुनिक उपकरणों, उन्नत मत्स्य आहार, जल गुणवत्ता प्रबंधन, सजावटी मछली पालन और वैज्ञानिक उत्पादन प्रणालियों की जानकारी दी गई।
पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों ने भी लिया भाग
राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस समारोह में पश्चिम बंगाल तथा पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 60 मत्स्य किसान और उद्यमियों ने भाग लिया।
प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं पर चर्चा की तथा नई तकनीकों को अपनाने के प्रति उत्साह व्यक्त किया।
वैज्ञानिक मत्स्य पालन से बढ़ेगी किसानों की आय
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में मत्स्य क्षेत्र कृषि अर्थव्यवस्था का तेजी से विकसित होता हुआ क्षेत्र है। आधुनिक तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और बाजार से सीधी कनेक्टिविटी के माध्यम से मत्स्य किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
आईसीएआर-सीआईएफई, कोलकाता केंद्र द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस का यह आयोजन न केवल किसानों के योगदान को सम्मानित करने का अवसर बना, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और व्यावहारिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। इससे “आत्मनिर्भर भारत” और “ब्लू इकोनॉमी” के लक्ष्य को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।

