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Home कृषि समाचार

कृषि विस्तार सेवाएं कैसे बदल सकती हैं किसानों की तकदीर? प्रशिक्षण, खेतों पर प्रदर्शन और वैज्ञानिक सलाह से बढ़ेगी आय

How can agricultural extension services change farmers' fortunes? Training, on-field demonstrations, and scientific advice can boost incomes.

Emran Khan by Emran Khan
October 28, 2026
in कृषि समाचार
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How can agricultural extension services change farmers' fortunes? Training, on-field demonstrations, and scientific advice can boost incomes.

How can agricultural extension services change farmers' fortunes? Training, on-field demonstrations, and scientific advice can boost incomes.

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भारत में कृषि केवल खाद्यान्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है। खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्नत बीज, आधुनिक मशीनरी, सिंचाई, उर्वरक, जैविक समाधान और डिजिटल तकनीकों का विकास लगातार हो रहा है। लेकिन इन तकनीकों का वास्तविक लाभ किसानों तक तभी पहुंचता है, जब उन्हें सही समय पर इनके उपयोग की जानकारी, व्यावहारिक प्रशिक्षण और भरोसेमंद सलाह मिलती है। इसी प्रक्रिया को Agricultural Extension Services यानी कृषि विस्तार सेवाएं कहा जाता है।

कृषि विस्तार का उद्देश्य केवल किसानों को नई तकनीक के बारे में बताना नहीं, बल्कि कृषि अनुसंधान और खेतों में होने वाली वास्तविक खेती के बीच की दूरी को कम करना है। इसके अंतर्गत किसान प्रशिक्षण (Farmer Training), खेतों पर तकनीकी प्रदर्शन (Demonstrations), कृषि सलाह (Farm Advisory Services), किसान-वैज्ञानिक संवाद, बाजार संबंधी जानकारी और खेती की समस्याओं के समाधान जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

भारत में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra—KVK) इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ICAR के अनुसार, देश में 731 KVK का नेटवर्क है, जो किसानों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकों का परीक्षण, प्रदर्शन और प्रशिक्षण आयोजित करता है। इन केंद्रों का उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान को स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार किसानों तक पहुंचाना है।

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कृषि विस्तार का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि किसी तकनीक का वैज्ञानिक रूप से प्रभावी होना और किसी किसान के खेत में उसका लाभकारी साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। मिट्टी, जलवायु, सिंचाई, खेत का आकार, पूंजी, बाजार तक पहुंच और किसान की जोखिम उठाने की क्षमता उसके निर्णयों को प्रभावित करती है। प्रभावी कृषि विस्तार इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर किसानों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता करता है।

  1. Agricultural Extension क्या है और किसानों की समृद्धि में इसकी भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

Agricultural Extension एक ऐसी ज्ञान-आधारित प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से कृषि वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालयों, सरकारी विभागों, कृषि विशेषज्ञों और किसानों के बीच जानकारी का आदान-प्रदान होता है। इसका मूल उद्देश्य किसानों की तकनीकी क्षमता बढ़ाना, खेती से जुड़े निर्णयों को बेहतर बनाना और कृषि एवं संबद्ध व्यवसायों की उत्पादकता तथा लाभप्रदता में सुधार करना है।

पारंपरिक व्यवस्था में किसान अक्सर अपने अनुभव, स्थानीय परंपराओं और आसपास के किसानों के व्यवहार के आधार पर खेती के निर्णय लेते हैं। अनुभव महत्वपूर्ण है, लेकिन बदलते मौसम, नई बीमारियों, कीटों के प्रकोप, बाजार की अस्थिरता और उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण केवल पुराने अनुभव पर निर्भर रहना कई बार पर्याप्त नहीं होता।

उदाहरण के लिए, किसी किसान को गेहूं की नई किस्म के बारे में जानकारी मिल सकती है, लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि उसकी बुवाई का उपयुक्त समय क्या है, बीज की मात्रा कितनी होनी चाहिए, सिंचाई कब करनी है और स्थानीय परिस्थितियों में उस किस्म का प्रदर्शन कैसा है। इसी तरह, किसान को किसी कीटनाशक का नाम बताने से अधिक उपयोगी यह समझाना है कि कीट की पहचान कैसे करें, आर्थिक नुकसान की सीमा क्या है और सुरक्षित तथा प्रभावी नियंत्रण के लिए कौन-से विकल्प उपलब्ध हैं।

यहीं कृषि विस्तार सेवाओं की वास्तविक भूमिका सामने आती है। एक प्रभावी Extension System किसान को केवल सूचना प्राप्त करने वाला व्यक्ति नहीं मानता, बल्कि उसे निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाता है।

कृषि विस्तार का प्रभाव पांच प्रमुख क्षेत्रों में देखा जा सकता है। पहला, किसानों के ज्ञान और कौशल में वृद्धि। दूसरा, वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की क्षमता। तीसरा, उत्पादन एवं संसाधनों के उपयोग में सुधार। चौथा, खेती की लागत और जोखिम को बेहतर ढंग से प्रबंधित करना। पांचवां, बाजार, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त करना।

हालांकि, इन सेवाओं से आय में वृद्धि अपने आप सुनिश्चित नहीं होती। अंतिम परिणाम इस बात पर भी निर्भर करता है कि किसान को समय पर आवश्यक संसाधन मिलते हैं या नहीं, बाजार में उपज का उचित मूल्य मिलता है या नहीं और मौसम तथा अन्य जोखिम कितने अनुकूल रहते हैं।

  1. भारत में कृषि विस्तार का संस्थागत नेटवर्क: आंकड़े क्या बताते हैं?

भारत में कृषि विस्तार व्यवस्था कई संस्थानों और योजनाओं के माध्यम से काम करती है। इसमें ICAR के KVK, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विभाग, ATMA, किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी संस्थाएं और निजी क्षेत्र के कृषि सलाहकार शामिल हैं।

ICAR की कृषि विस्तार शाखा के अनुसार, देश में 11 Agricultural Technology Application Research Institutes (ATARIs) और 731 KVK का नेटवर्क तकनीक के आकलन, प्रदर्शन और क्षमता निर्माण में भूमिका निभाता है। ATARI क्षेत्रीय स्तर पर तकनीक के प्रसार और विस्तार कार्यक्रमों के समन्वय में मदद करते हैं, जबकि KVK जिला स्तर पर किसानों के साथ सीधे काम करते हैं।

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सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि इन संस्थानों के माध्यम से बड़े पैमाने पर किसानों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया गया है।

भारत में कृषि विस्तार सेवाएं: प्रमुख आंकड़े

KVK नेटवर्क

731

कृषि विज्ञान केंद्र

KVK प्रशिक्षण

58.02 लाख

2021–22 से 2023–24 के बीच प्रशिक्षित किसान

ATMA प्रशिक्षण

1.27 करोड़

2021 से जनवरी 2025 तक लगभग प्रशिक्षित किसान

कृषि तकनीक प्रदर्शन

34.36%

2024–25 में दालों के Cluster FLD में दर्ज औसत उपज वृद्धि

स्रोत: ICAR, कृषि विस्तार प्रभाग की उपलब्धियां एवं भारत सरकार की PIB Factsheet. ये अलग-अलग अवधियों और कार्यक्रमों के आंकड़े हैं; इन्हें जोड़कर कुल लाभार्थियों की संख्या नहीं मानना चाहिए।

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भारत सरकार की PIB Factsheet के अनुसार, KVK के माध्यम से 2021–22 से 2023–24 के दौरान 58.02 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2024–25 के पहले दस महीनों में 18.56 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया गया था।

इसी तरह, Agricultural Technology Management Agency (ATMA) के तहत 2021–22 में 32.38 लाख, 2022–23 में 40.11 लाख और 2023–24 में 36.60 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। जनवरी 2025 तक इस योजना के तहत लगभग 1.27 करोड़ किसानों को प्रशिक्षण दिए जाने की सूचना PIB ने प्रकाशित की थी।

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इन आंकड़ों से कृषि विस्तार कार्यक्रमों की व्यापक पहुंच का पता चलता है। लेकिन केवल प्रशिक्षित किसानों की संख्या से यह साबित नहीं होता कि सभी किसानों की आय बढ़ी या सभी ने नई तकनीक अपनाई। इसके लिए प्रशिक्षण के बाद तकनीक अपनाने, उत्पादन लागत, उपज, बिक्री मूल्य और शुद्ध आय जैसे संकेतकों का भी आकलन आवश्यक है।

यही कारण है कि कृषि विस्तार के मूल्यांकन में Reach से आगे बढ़कर Adoption और Farmer Income Outcomes पर ध्यान देना जरूरी है।

  1. किसान प्रशिक्षण (Farmer Training): ज्ञान को व्यावहारिक कौशल में बदलने का माध्यम

कृषि प्रशिक्षण का वास्तविक उद्देश्य किसानों को केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें खेत पर सही तकनीक लागू करने योग्य बनाना है। खेती में कई बार छोटी-सी गलती भी उत्पादन, लागत और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रशिक्षण में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ Practical Demonstration और Hands-on Learning को शामिल करना जरूरी है।

उदाहरण के लिए, यदि किसानों को Soil Health Management का प्रशिक्षण दिया जाता है, तो उन्हें केवल मिट्टी में पोषक तत्वों की भूमिका नहीं समझानी चाहिए। उन्हें मिट्टी का नमूना लेने की सही विधि, Soil Testing Report पढ़ने, पोषक तत्वों की कमी पहचानने और संतुलित उर्वरक प्रबंधन की जानकारी भी दी जानी चाहिए।

इसी तरह, Integrated Pest Management (IPM) प्रशिक्षण में कीटों की पहचान, खेत की नियमित निगरानी, जैविक एवं अन्य उपयुक्त नियंत्रण उपायों, आर्थिक क्षति स्तर और सुरक्षित कीटनाशक उपयोग पर व्यावहारिक मार्गदर्शन आवश्यक है।

ICAR के कृषि विस्तार कार्यक्रमों में Crop Management, Horticulture, Livestock, Farm Mechanization और ग्रामीण उद्यमिता जैसे विषय शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, KVK ने 65,235 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें 20 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। इनमें किसानों और महिला किसानों के लिए 49,534 पाठ्यक्रम शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, इन पाठ्यक्रमों में भाग लेने वालों में 36.17 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों से थे।

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यह आंकड़ा प्रशिक्षण के व्यापक दायरे को दर्शाता है। लेकिन प्रशिक्षण की गुणवत्ता का मूल्यांकन इस आधार पर भी होना चाहिए कि किसान ने क्या सीखा, क्या उसे अपने खेत में लागू किया और उससे उसके उत्पादन या लागत पर क्या प्रभाव पड़ा।

प्रशिक्षण से आय बढ़ने का रास्ता कैसे बनता है?

मान लीजिए कि किसी किसान को उर्वरकों के संतुलित उपयोग का प्रशिक्षण मिलता है। यदि वह मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरक की मात्रा तय करता है, तो अनावश्यक इनपुट खर्च कम करने का अवसर पैदा हो सकता है। इसी प्रकार, सिंचाई का समय और मात्रा सुधारने से पानी, बिजली और श्रम का अधिक कुशल उपयोग संभव है।

फल एवं सब्जी उत्पादकों के लिए Grading, Packaging, Storage और Post-harvest Management का प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण है। सही कटाई, छंटाई और पैकेजिंग से बाजार तक पहुंचने वाली उपज की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

पशुपालकों के लिए पशु पोषण, संतुलित आहार, टीकाकरण, रोग की शुरुआती पहचान और दूध की स्वच्छता संबंधी प्रशिक्षण उपयोगी है। ग्रामीण युवाओं के लिए Mushroom Cultivation, Beekeeping, Nursery Management और Food Processing जैसे कौशल कृषि आधारित अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।

इस प्रकार, प्रशिक्षण का प्रभाव केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहता। यह खेती की लागत, उत्पाद की गुणवत्ता, पशुधन उत्पादकता और कृषि आधारित उद्यमिता को भी प्रभावित कर सकता है।

  1. खेतों पर प्रदर्शन (Demonstration): नई तकनीक पर किसान का भरोसा कैसे बढ़ता है?

किसानों के लिए किसी तकनीक को अपनाने से पहले उसका व्यावहारिक परिणाम देखना महत्वपूर्ण होता है। केवल विज्ञापन, प्रचार सामग्री या व्याख्यान के आधार पर किसान हमेशा अपनी खेती में बदलाव करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए गलत निर्णय का आर्थिक नुकसान गंभीर हो सकता है।

इसी समस्या का समाधान Frontline Demonstrations (FLD) और On-Farm Trials (OFT) के माध्यम से किया जाता है।

On-Farm Trials में किसी तकनीक, किस्म या कृषि पद्धति का अलग-अलग स्थानीय परिस्थितियों में परीक्षण किया जाता है। Frontline Demonstrations में किसानों के खेतों पर तकनीक के संभावित प्रदर्शन को दिखाया जाता है, ताकि किसान पारंपरिक पद्धति और बेहतर विकल्पों के बीच अंतर समझ सकें।

ICAR की 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, दालों के लिए Cluster Frontline Demonstrations में 20,206.84 हेक्टेयर और तिलहनी फसलों में 26,220 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल किया गया। इन प्रदर्शनों में दालों की उपज में 34.36 प्रतिशत और तिलहनी फसलों की उपज में 29.40 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।

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ये आंकड़े कृषि तकनीकों के प्रदर्शन की उपयोगिता का महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। हालांकि, इन्हें हर किसान या हर क्षेत्र के लिए समान उपज वृद्धि की गारंटी नहीं मानना चाहिए। वास्तविक परिणाम फसल, मौसम, मिट्टी, तकनीक, प्रबंधन और तुलना के आधार पर अलग हो सकते हैं।

प्रदर्शन का वैज्ञानिक तरीका क्या होना चाहिए?

एक अच्छे प्रदर्शन में तकनीक अपनाने वाले खेत की तुलना समान परिस्थितियों वाले पारंपरिक खेत से की जानी चाहिए। जहां संभव हो, दोनों खेतों में मिट्टी, बुवाई का समय और अन्य प्रमुख परिस्थितियां तुलनीय रखी जानी चाहिए।

केवल उत्पादन की मात्रा दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। बीज, उर्वरक, सिंचाई, मशीनरी, श्रम और अन्य इनपुट की लागत भी दर्ज की जानी चाहिए। इससे पता चलता है कि अधिक उत्पादन के साथ किसान का वास्तविक लाभ भी बढ़ा या नहीं।

उदाहरण के लिए, यदि नई तकनीक से प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ती है, लेकिन अतिरिक्त लागत भी बहुत अधिक हो जाती है, तो किसान के लिए उसका आर्थिक लाभ सीमित हो सकता है। दूसरी ओर, यदि समान उपज कम लागत में प्राप्त होती है, तो तकनीक कम संसाधन वाले किसानों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।

इसलिए प्रभावी Demonstration में तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं—वैज्ञानिक तुलना, वास्तविक लागत का रिकॉर्ड और परिणामों की पारदर्शी जानकारी।

  1. कृषि सलाह (Farm Advisory Services): सही समय पर सही जानकारी

कृषि में सलाह का महत्व केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि जानकारी सही है या नहीं। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि जानकारी किसान तक किस समय पहुंचती है।

यदि किसान को कीट नियंत्रण की सलाह फसल को गंभीर नुकसान होने के बाद मिलती है, तो उसका लाभ सीमित हो सकता है। इसी तरह, मौसम आधारित सिंचाई सलाह, बुवाई के समय बीज चयन और रोग प्रबंधन की जानकारी समय पर मिलने से निर्णय बेहतर हो सकते हैं।

Farm Advisory Services के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसल चयन, मौसम, मिट्टी, पोषण प्रबंधन, कीट-रोग, सिंचाई, पशुपालन और बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराते हैं। ये सेवाएं व्यक्तिगत सलाह, किसान गोष्ठियों, फोन कॉल, मोबाइल संदेश, डिजिटल प्लेटफॉर्म और खेत पर निरीक्षण के माध्यम से दी जा सकती हैं।

ICAR के KVK को कृषि तकनीकों का ज्ञान केंद्र बनाने के साथ ICT और अन्य मीडिया माध्यमों से किसानों को सलाह देने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

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भारत में कृषि सलाह को डिजिटल माध्यमों से अधिक व्यापक बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। ICAR के KVK संबंधी उपलब्ध विवरण में Kisan Sarathi पोर्टल के माध्यम से किसानों को कृषि सलाह देने की व्यवस्था का उल्लेख है।

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हालांकि, डिजिटल सलाह की प्रभावशीलता केवल संदेश भेजने की संख्या से नहीं मापी जा सकती। किसान ने संदेश पढ़ा या नहीं, उसे समझा या नहीं, सलाह उसके खेत के लिए उपयुक्त थी या नहीं और उसने उस पर कार्रवाई की या नहीं—इन सभी पहलुओं का महत्व है।

डिजिटल सलाह और स्थानीय विशेषज्ञों का तालमेल

Mobile Advisory, WhatsApp Groups, SMS, कृषि ऐप और मौसम आधारित डिजिटल सेवाएं तेजी से जानकारी पहुंचाने में मदद कर सकती हैं। लेकिन सभी किसानों के पास समान स्मार्टफोन सुविधा, इंटरनेट कनेक्टिविटी या डिजिटल साक्षरता नहीं होती।

इसके अलावा, एक ही जिले के दो किसानों की परिस्थितियां भी अलग हो सकती हैं। इसलिए Digital Extension को स्थानीय कृषि विशेषज्ञों और व्यक्तिगत सलाह के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उनके पूरक के रूप में विकसित करना चाहिए।

सबसे प्रभावी मॉडल वह होगा जिसमें किसान डिजिटल माध्यम से शुरुआती जानकारी प्राप्त करे और जरूरत पड़ने पर KVK वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी या अन्य योग्य विशेषज्ञ से अपनी समस्या का समाधान कर सके।

  1. कृषि विस्तार सेवाओं और किसान की आय के बीच संबंध: शोध क्या कहता है?

कृषि विस्तार की वास्तविक उपयोगिता समझने के लिए केवल सरकारी कार्यक्रमों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह समझना भी जरूरी है कि प्रशिक्षण और प्रदर्शन किसानों के व्यवहार को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।

इस विषय पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन दिसंबर 2022 में World Development जर्नल में प्रकाशित हुआ। इसका शीर्षक था Examining the transfer of knowledge and training to smallholders in India: Direct and spillover effects of agricultural advisory services in an emerging economy।

इस शोध में उत्तर प्रदेश के 1,496 गेहूं किसानों के आंकड़ों का उपयोग करते हुए KVK की कृषि सलाह, Frontline Demonstrations और Capacity-building Programmes के प्रभावों का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने HD-2967 गेहूं किस्म को अपनाने के संदर्भ में प्रत्यक्ष लाभार्थियों और सामाजिक नेटवर्क के माध्यम से जानकारी पाने वाले किसानों के परिणामों का विश्लेषण किया।

अध्ययन में Matched Difference-in-Differences Approach का उपयोग किया गया। इसके निष्कर्षों के अनुसार, KVK के प्रदर्शन और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों ने HD-2967 किस्म को अपनाने पर सकारात्मक प्रभाव डाला। प्रत्यक्ष KVK लाभार्थियों पर प्रभाव अधिक था, लेकिन उनके सामाजिक नेटवर्क के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने वाले किसानों में भी महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव देखने को मिले। शोधकर्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए नियमित अंतराल पर हस्तक्षेप आवश्यक हो सकते हैं।

ScienceDirect

यह निष्कर्ष महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसान केवल प्रशिक्षण केंद्र से जानकारी लेकर ही निर्णय नहीं करता। वह अपने पड़ोसी किसानों, रिश्तेदारों, स्थानीय कृषि विशेषज्ञों और सफल किसानों के अनुभवों से भी सीखता है।

जब किसी गांव में कुछ किसान नई किस्म या तकनीक अपनाकर अपने अनुभव साझा करते हैं, तो दूसरे किसानों के लिए उस तकनीक के लाभ और सीमाओं को समझना आसान हो सकता है। इसे Knowledge Spillover या ज्ञान का प्रसार कहा जाता है।

लेकिन इस शोध की सीमा भी समझना जरूरी है। यह अध्ययन विशेष रूप से एक गेहूं की किस्म को अपनाने और उत्तर प्रदेश के नमूने पर केंद्रित था। इसके परिणामों को सभी फसलों, राज्यों या कृषि विस्तार कार्यक्रमों पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता। इसी तरह, तकनीक अपनाने का सकारात्मक प्रभाव अपने आप में किसान की शुद्ध आय में निश्चित प्रतिशत वृद्धि का प्रमाण नहीं है।

फिर भी यह शोध दिखाता है कि कृषि विस्तार केवल जानकारी पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों के निर्णय और तकनीकी बदलाव को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

  1. महिला किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि विस्तार का महत्व

भारत में कृषि परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए महिला किसानों और ग्रामीण युवाओं को कृषि विस्तार कार्यक्रमों के केंद्र में रखना आवश्यक है।

महिलाएं फसल उत्पादन, पशुपालन, बीज संरक्षण, कटाई के बाद के कार्यों और खाद्य प्रसंस्करण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। लेकिन यदि प्रशिक्षण केवल परिवार के पुरुष सदस्य तक सीमित रहता है, तो कृषि कार्यों में सीधे शामिल महिलाओं तक उपयोगी जानकारी पहुंचने में बाधा आ सकती है।

इसलिए महिला किसानों के लिए स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण, सुविधाजनक समय, व्यावहारिक प्रदर्शन और महिला समूहों के माध्यम से ज्ञान साझा करने की व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।

इसी प्रकार, ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित रखने के बजाय Agri-Entrepreneurship, Farm Mechanization, Drone Services, Nursery Business, Mushroom Production, Beekeeping और Food Processing जैसे क्षेत्रों से जोड़ना जरूरी है।

PIB की नवंबर 2025 में प्रकाशित कृषि शिक्षा एवं प्रशिक्षण संबंधी Factsheet के अनुसार, Skill Training of Rural Youth (STRY) कार्यक्रम के तहत दिसंबर 2024 तक 2021 से 51,000 से अधिक ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका था। इस कार्यक्रम में बागवानी, डेयरी, मत्स्य पालन और अन्य कृषि-संबद्ध व्यवसायों से जुड़े व्यावसायिक प्रशिक्षण शामिल हैं।

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कौशल प्रशिक्षण से रोजगार और उद्यमिता की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, लेकिन वास्तविक सफलता के लिए वित्त, बाजार संपर्क, उपकरणों की उपलब्धता और व्यवसाय प्रबंधन की जानकारी भी जरूरी है।

  1. कृषि विस्तार से आगे बढ़कर बाजार और मूल्य संवर्धन तक पहुंच

किसान की समृद्धि का अर्थ केवल अधिक उत्पादन प्राप्त करना नहीं है। उत्पादन को लाभकारी कीमत पर बेचना, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और उपज का मूल्य बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

कृषि विस्तार सेवाओं में Market-oriented Extension को प्राथमिकता देने से किसान बाजार की मांग, गुणवत्ता मानकों, भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, सब्जी उत्पादकों को Grading और Packaging का प्रशिक्षण दिया जा सकता है। फल उत्पादकों को उपयुक्त Harvesting Stage, Storage और प्राथमिक प्रसंस्करण के बारे में जानकारी दी जा सकती है। वहीं, दाल, तिलहन और अनाज उत्पादकों को सामूहिक विपणन, भंडारण और Farmer Producer Organizations (FPOs) के माध्यम से बाजार तक पहुंच के विकल्प समझाए जा सकते हैं।

PIB की 2025 की Factsheet में 10,000 से अधिक FPO के पंजीकरण का उल्लेख है। सामूहिक संगठन किसानों को कृषि व्यवसाय प्रबंधन, Value Chains और Marketing संबंधी प्रशिक्षण देने के लिए एक उपयोगी माध्यम बन सकते हैं।

PIB

हालांकि, FPO का पंजीकरण अपने आप बेहतर कीमत की गारंटी नहीं देता। इसके लिए संगठन की व्यावसायिक क्षमता, कार्यशील पूंजी, खरीदारों से संपर्क, गुणवत्ता नियंत्रण और पारदर्शी प्रबंधन भी आवश्यक हैं।

इसलिए कृषि विस्तार को खेत की उत्पादकता से आगे बढ़कर Farm-to-Market Value Chain से जोड़ना चाहिए। इससे किसान को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन-सी फसल उगानी है, किस गुणवत्ता में तैयार करनी है, कब बेचनी है और किस बाजार तक पहुंचना लाभकारी हो सकता है।

  1. जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ खेती में कृषि विस्तार की भूमिका

बदलते मौसम, अनियमित वर्षा, तापमान में उतार-चढ़ाव और नए कीट-रोग कृषि उत्पादन के लिए जोखिम पैदा करते हैं। ऐसे में Climate-smart Agriculture और Sustainable Farming Practices के प्रसार में कृषि विस्तार की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

किसानों को फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, मौसम आधारित कृषि निर्णय, संतुलित पोषण प्रबंधन, फसल अवशेष प्रबंधन और Integrated Farming Systems के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी जा सकती है।

ICAR की 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट में Climate-resilient Agriculture से संबंधित NICRA परियोजना के अंतर्गत 9,458 प्रदर्शनों के माध्यम से 49,278 किसानों तक पहुंचने का उल्लेख है। रिपोर्ट में इन गतिविधियों को जलवायु के प्रति अधिक सक्षम कृषि पद्धतियों के प्रसार से जोड़ा गया है।

Indian Council of Agricultural Research

ऐसे कार्यक्रम किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विकल्प समझने में मदद कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण और सूखा-सहिष्णु किस्मों की जानकारी उपयोगी हो सकती है, जबकि अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल निकासी और रोग प्रबंधन पर जोर दिया जा सकता है।

लेकिन जलवायु जोखिम से निपटने के लिए केवल तकनीकी सलाह पर्याप्त नहीं है। सिंचाई सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण बीज, कृषि बीमा, वित्तीय सहायता और स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन भी आवश्यक हैं। कृषि विस्तार इन उपायों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद कर सकता है।

  1. कृषि विस्तार व्यवस्था की प्रमुख चुनौतियां

भारत में कृषि विस्तार का संस्थागत नेटवर्क व्यापक है, लेकिन इसके प्रभाव को और बढ़ाने के लिए कई चुनौतियों पर ध्यान देना होगा।

पहली चुनौती है, किसानों की तुलना में विशेषज्ञों और क्षेत्रीय संसाधनों की उपलब्धता। यदि कृषि विशेषज्ञ नियमित रूप से किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच पाते, तो व्यक्तिगत समस्याओं का समय पर समाधान कठिन हो सकता है।

दूसरी चुनौती है, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सलाह की कमी। अलग-अलग मिट्टी, जलवायु, फसल प्रणाली और आर्थिक क्षमता वाले किसानों को एक जैसी सलाह देना प्रभावी नहीं होता।

तीसरी चुनौती है, प्रशिक्षण के बाद Follow-up का अभाव। किसान प्रशिक्षण के दौरान तकनीक समझ सकता है, लेकिन उसे लागू करते समय नई समस्या का सामना करना पड़ सकता है। यदि उस समय सहायता नहीं मिलती, तो तकनीक अपनाने की संभावना कम हो सकती है।

चौथी चुनौती है, डिजिटल विभाजन। इंटरनेट और स्मार्टफोन के माध्यम से दी जाने वाली सलाह उन किसानों तक समान रूप से नहीं पहुंचती, जिनके पास डिजिटल संसाधन सीमित हैं।

पांचवीं चुनौती है, कृषि विस्तार और बाजार के बीच कमजोर समन्वय। किसान को अधिक उत्पादन की तकनीक तो मिल सकती है, लेकिन बिक्री, भंडारण और मूल्य संवर्धन की जानकारी न मिलने पर उसका आर्थिक लाभ सीमित रह सकता है।

इन समस्याओं के समाधान के लिए Extension Services को अधिक किसान-केंद्रित, स्थानीय जरूरतों के अनुरूप और परिणाम आधारित बनाना जरूरी है।

  1. कृषि विस्तार को अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

सबसे पहले, प्रत्येक जिले में फसल, मिट्टी, जलवायु और बाजार के आधार पर प्रमुख कृषि समस्याओं की पहचान करनी चाहिए। इसके बाद प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रमों को उन्हीं जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए।

दूसरा, Farmer Field Schools, खेत पर प्रदर्शन और किसान-से-किसान सीखने की व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। स्थानीय स्तर पर सफल तकनीकों के साथ उनकी सीमाओं और लागत की जानकारी भी साझा करनी चाहिए।

तीसरा, प्रशिक्षण के बाद कम से कम एक फसल चक्र तक किसानों के साथ नियमित संपर्क रखा जाना चाहिए। इससे तकनीक अपनाने में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं का समाधान किया जा सकता है।

चौथा, डिजिटल सलाह और व्यक्तिगत कृषि परामर्श को एकीकृत करना चाहिए। मौसम, कीट, रोग और बाजार से संबंधित जानकारी स्थानीय भाषा में उपलब्ध होनी चाहिए और किसानों के प्रश्नों के उत्तर देने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

पांचवां, Extension Impact Assessment के लिए स्पष्ट संकेतक निर्धारित किए जाने चाहिए। इनमें प्रशिक्षित किसानों की संख्या के अलावा तकनीक अपनाने की दर, प्रति हेक्टेयर उत्पादन, प्रति इकाई लागत, शुद्ध कृषि आय, जल उपयोग दक्षता, फसल नुकसान और बाजार तक पहुंच जैसे संकेतक शामिल होने चाहिए।

छठा, महिला किसानों, छोटे और सीमांत किसानों, जनजातीय समुदायों तथा ग्रामीण युवाओं की जरूरतों को कार्यक्रमों में विशेष स्थान देना चाहिए।

अंत में, कृषि विश्वविद्यालयों, KVK, सरकारी कृषि विभागों, FPO, सहकारी संस्थाओं और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय बढ़ाना चाहिए। इससे वैज्ञानिक शोध, व्यावहारिक प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधनों और बाजार संबंधी जानकारी को एक ही व्यवस्था में जोड़ना संभव होगा।

कृषि विस्तार केवल जानकारी नहीं, किसान की निर्णय क्षमता में निवेश है

Agricultural Extension Services भारत में कृषि उत्पादकता, तकनीक अपनाने और ग्रामीण आजीविका सुधारने की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। किसान प्रशिक्षण से ज्ञान और कौशल बढ़ता है, Demonstrations से तकनीक के वास्तविक प्रदर्शन को समझने में मदद मिलती है और Farm Advisory Services खेती के विभिन्न चरणों में बेहतर निर्णय लेने का अवसर प्रदान करती हैं।

ICAR और PIB के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि भारत में KVK और ATMA जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों किसानों तक प्रशिक्षण और कृषि संबंधी जानकारी पहुंचाई जा रही है। वहीं, World Development में प्रकाशित शोध यह प्रमाण प्रस्तुत करता है कि KVK की सलाह और खेतों पर प्रदर्शन नई गेहूं किस्म को अपनाने में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं।

फिर भी, किसान समृद्धि का आकलन केवल प्रशिक्षण कार्यक्रमों या तकनीक अपनाने की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए। असली सफलता तब होगी, जब वैज्ञानिक जानकारी किसान के व्यवहार में बदलाव लाए, उत्पादन संसाधनों का बेहतर उपयोग हो, जोखिम कम करने की क्षमता बढ़े और किसान की Net Farm Income में टिकाऊ सुधार आए।

भारत की कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी और जलवायु-सक्षम बनाने के लिए जरूरी है कि कृषि विस्तार व्यवस्था सूचना प्रसार से आगे बढ़कर निरंतर मार्गदर्शन, बाजार संपर्क और मापने योग्य परिणामों पर केंद्रित हो। किसान को केवल नई तकनीक बताना पर्याप्त नहीं; उसे यह समझने, अपनाने और उससे लाभ उठाने में भी सहायता देना जरूरी है।

कृषि विस्तार की सबसे बड़ी उपलब्धि तभी होगी, जब वैज्ञानिक ज्ञान खेत तक पहुंचे, किसान के अनुभव से और बेहतर बने और उसका अंतिम लाभ किसान परिवार की आर्थिक सुरक्षा तथा समृद्धि के रूप में दिखाई दे।

शोध में उपयोग किए गए प्रमुख स्रोत और डेटाबेस

  1. ICAR — Krishi Vigyan Kendras (KVKs): KVK की भूमिका, उद्देश्य और राष्ट्रीय नेटवर्क।

ICAR+1

  1. ICAR Annual Report 2024–25: किसान प्रशिक्षण, Frontline Demonstrations, जलवायु-सक्षम कृषि और तकनीक प्रसार के आंकड़े।

Indian Council of Agricultural Research+1

  1. Press Information Bureau (PIB), 4 नवंबर 2025 — Agricultural Education & Training in India: KVK, ATMA, STRY और कृषि कौशल प्रशिक्षण संबंधी सरकारी आंकड़े।

PIB

  1. World Development, दिसंबर 2022: उत्तर प्रदेश में 1,496 गेहूं किसानों पर KVK सलाह, तकनीक अपनाने और ज्ञान के सामाजिक प्रसार का अध्ययन।

ScienceDirect

  1. ICAR — Achievements of Agricultural Extension Division: On-Farm Trials, Frontline Demonstrations और क्षमता निर्माण संबंधी उपलब्धियां।

ICAR

शोध संबंधी नोट: इस लेख में सरकारी संस्थानों और प्रकाशित शोध से उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग किया गया है। विभिन्न कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग अवधि और मूल्यांकन पद्धति अलग-अलग हैं। इसलिए प्रशिक्षण की संख्या, प्रदर्शन से जुड़ी उपज वृद्धि और किसान की शुद्ध आय को अलग-अलग परिणामों के रूप में समझना चाहिए। उपलब्ध साक्ष्य कृषि विस्तार की उपयोगिता का समर्थन करते हैं, लेकिन हर क्षेत्र और हर किसान के लिए समान आय-वृद्धि का दावा नहीं करते।

 

Tags: AgricultureFarmingICARResearch Article
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