֍:भारत के लिए जरुरी ये काम §ֆ:बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को खाद्य सुरक्षा, स्थिरता और श्रम की कमी जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. भारत में एक बड़ा कृषि क्षेत्र है, लेकिन यह एकजुट नहीं है. अभी तक इसका विकास भी नहीं हो पाया है. देश में भी खाद्य भंडारों की कमी है और बुनियादी परिवहन व्यवस्था भी लचर है. इसके चलते खाद्य पदार्थों की बहुत अधिक बर्बाद होती है. खास कर नदगी फसल उत्पादकों को बहुत अधिक नुकसान होता है. वे कभी कभी-कभी लागत भी नहीं निकाल पाते हैं.
§֍:निवेश की है आवश्यकता§ֆ:ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर, चिराग जैन ने कहा है कि इस क्षेत्र के विकास के लिए 3-आई मॉडल (प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश अभिसरण के माध्यम से नवाचार) को अपनाना होगा. इसका अलावा IoT, AI और ब्लॉकचेन के माध्यम से डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना होगा. ताकि, दक्षता और लागत में कमी आ सके. उन्होंने कहा है कि देश में भारी संख्या में फूड प्रोसेसिंग यूनिट और कोल्ड स्टोर का निर्माण करना होगा. साथ ही रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे ग्रेडिंग और पैकिंग केंद्र, भंडारण सुविधाएं, परिवहन और परीक्षण प्रयोगशालाओं में महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता है.
§֍:फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र का कितना होगा योगदान§ֆ:इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का बाजार आकार 2022 में 866 बिलियन डॉलर था और 2022-27 के दौरान 7.3 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान है. ऐसे में 2027 तक 1274 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. पिछले पांच वर्षों में कुल सकल घरेलू उत्पाद में फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र का योगदान 27 प्रतिशत बढ़ गया है.§प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए केंद्र सरकार तेजी से काम कर रही है. लेकिन ग्रांट थॉर्नटन भारत ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए देश के सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) में फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के योगदान को चौगुना करना होगा. यानी इसका जीवीए में कंट्रीब्यूशन 7.2 प्रतिशत होना चाहिए. वर्तमान में, जीवीए में फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र का योगदान 1.8 प्रतिशत ही है.

