֍:कपास की खेती छोड़ रहे किसान§ֆ:कपास खरीफ सीजन की एक प्रमुख फसल है, जिसकी केती कीट-रोगों और मौसम में बदलाव के कारण कम हो गई है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के 3 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में 112.76 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती की गई है, जो बीते साल के 123.71 लाख हेक्टेयर से 10 लाख हेक्टेयर कम है. बीते साल पंजाब में कीटों के प्रकोप के चलते कपास किसानों को भारी नुकसान हुआ था. इसी तरह अन्य राज्यों में भी किसानों ने कपास की खेती से मुंह मोड़कर दालों और धान की ओर शिफ्ट हो गए. इससे कपास का रकबा घट रहा है. भारतीय कपास संघ के अनुसार 2024-25 में कपास उत्पादन में 7 फीसदी गिरावट का अनुमान जताया है. §֍:केंद्रीय कृषि मंत्री ने दिया निर्देश§ֆ:केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान के शताब्दी समारोह में कहा कपास उत्पादन और क्वालिटी सुधार पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि कपास का बीज बहुत महंगा होता है. निजी कंपनियां किसानों को बीज बहुत महंगा देती हैं. आईसीएआर को कोशिश करनी चाहिए कि गुणवत्तापूर्ण बीज कम दामों पर कैसे किसानों को मिलें. किसान पर भी ध्यान दें ताकि उसे कपास की खेती से लाभ भी मिले, वह खेती से अपनी आजीविका ठीक से चला पाए. §֍:मिलेगी पायलट प्लांट की सुविधा§ֆ:केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान 100 साल पूरे होने पर यहां पायलट प्लांट की सुविधा दी जाएगी. कपास जिनोम का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनने के लिए आवश्यक व्यवस्थायें की जाएंगी. कॉटन में ट्रेसिबिलिटी सिस्टम विकसित करना बहुत जरूरी है. भारतीय कपास के निर्यात के लिए भी ट्रेसिबिलिटी की नई तकनीक विकसित करने के लिए सभी आवश्यक सुविधायें यहां विकसित की जायेंगी. उन्होंने कहा कि यह प्रयास किसान के लिए भी हैं.§भारत में कपास के बीजों की खराब गुणवत्ता को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नए कपास के बीज को तैयार कर रहा है. इन बीजों को बाजार में स्सते दामों में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे किसानों को निजी कंपनियों के महंगे बीजो से निजात मिलेगी. सात ही कपास उत्पादन में सुधार आएगा. नए बीजों को बनाने में कीटरोधी बीजों को तैयार करने पर फोकस किया जा रहा है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते दिन आईसीएआर के वैज्ञानिकों से कहा कि कपास के उत्तम किस्म के कम लागत वाले और हर मौसम के लिए मुफीद बीजों को विकसित करने की जरूरत है. केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान कपास के उत्तम बीजों के विकास पर काम कर रहा है.

