भारत की प्रमुख कंपनी ITC Limited ने कृषि क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए नया इतिहास रच दिया है। ITC देश की पहली कंपनी बन गई है जिसे गेहूं और धान की खेती के लिए FSA 3.0 सर्टिफिकेट मिला है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणन है, जो यह सुनिश्चित करता है कि खेती टिकाऊ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से की जा रही है। इस उपलब्धि से ITC की वैश्विक बाजार में विश्वसनीयता और मजबूत हुई है, साथ ही भारतीय कृषि को भी एक नई दिशा मिली है।
FSA यानी Sustainable Agriculture Initiative Platform द्वारा तैयार किया गया एक व्यापक फ्रेमवर्क है, जो खेती के हर पहलू का मूल्यांकन करता है। इसका नया संस्करण FSA 3.0 वर्ष 2021 में लागू किया गया था। इस सर्टिफिकेट के तहत यह देखा जाता है कि खेती में पानी का सही उपयोग हो रहा है या नहीं, मिट्टी की गुणवत्ता बनी हुई है या नहीं और किसानों व मजदूरों के हितों का ध्यान रखा जा रहा है या नहीं। ITC द्वारा इन सभी मानकों को पूरा करना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने वाला है। ITC किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती के तरीके सिखा रही है, जिससे उनकी फसल की उत्पादकता बढ़ेगी। इसके साथ ही कंपनी उन्हें बेहतर बाजार से जोड़ रही है, जिससे उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। इससे किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है और उनका जीवन स्तर भी सुधरेगा। खास बात यह है कि इस मॉडल में छोटे किसानों को भी बड़े बाजारों तक पहुंच मिल रही है।
पर्यावरण के लिहाज से भी यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है। टिकाऊ खेती के तहत पानी की बचत, मिट्टी की सेहत में सुधार और रसायनों के सीमित उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल खेती की लागत घटती है, बल्कि लंबे समय तक जमीन की उपजाऊ क्षमता भी बनी रहती है। इस तरह की पहल जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी मददगार साबित हो सकती है।
ITC ने इस योजना को खासतौर पर Uttar Pradesh और Bihar में बड़े स्तर पर लागू किया है। यहां 22,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में इस मॉडल को अपनाया गया है, जिसमें 3,500 से ज्यादा किसान और 70 से अधिक किसान उत्पादक संगठन (FPO) जुड़े हुए हैं। यह पूरा कार्यक्रम ITC के Crop Development Programme के तहत संचालित किया जा रहा है।
किसानों को नई तकनीकों की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इनमें बिना जुताई की खेती, ड्रोन के जरिए कीटनाशक छिड़काव, कम पानी में धान की खेती और माइक्रो सिंचाई जैसी आधुनिक विधियां शामिल हैं। साथ ही मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों के सही उपयोग की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे लागत कम और उत्पादन अधिक हो सके।
डिजिटल तकनीक के उपयोग में भी ITC आगे है। कंपनी ने ITCMAARS प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जिसके जरिए खेत से लेकर बाजार तक की पूरी जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज की जाती है। यह सिस्टम किसानों को मोबाइल के माध्यम से सलाह भी देता है और फसल की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करता है।
कुल मिलाकर ITC की यह पहल भारतीय कृषि को टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह मॉडल दिखाता है कि अगर सही तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार का सहयोग मिले, तो किसान और पर्यावरण दोनों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

