भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने कर्नाटक के प्रसिद्ध नीलम (Neelam) और तोतापुरी (Totapuri) आमों की पहली हवाई खेप सफलतापूर्वक मालदीव भेजी है। 30 जुलाई 2026 को रवाना हुई यह खेप केवल एक निर्यात नहीं, बल्कि भारतीय बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहचान को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि निर्यात के लिए आम सीधे किसान उत्पादक कंपनी (FPC) से जुड़े किसानों से खरीदे गए, जिससे किसानों को पारंपरिक मंडियों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक अधिक मूल्य प्राप्त हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के प्रत्यक्ष निर्यात मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है तो भारतीय किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
APEDA ने खोले वैश्विक बाजार के नए द्वार
कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से APEDA लगातार विभिन्न राज्यों के उच्च गुणवत्ता वाले कृषि एवं बागवानी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है। कर्नाटक के देर से पकने वाले नीलम और तोतापुरी आमों की मालदीव में पहली एयर शिपमेंट इसी रणनीति का हिस्सा है।
इस निर्यात के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया है कि वह केवल पारंपरिक आम किस्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रीमियम और देर से पकने वाली किस्मों को भी वैश्विक बाजार में सफलतापूर्वक स्थापित कर सकता है।
किसानों से सीधे खरीदकर भेजी गई खेप
इस ऐतिहासिक निर्यात के लिए एक मीट्रिक टन नीलम और तोतापुरी आम कर्नाटक के कोलार जिले के KGF तालुक स्थित M/s प्राकृतिकमाया फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (FPC) से जुड़े किसानों से सीधे खरीदे गए।
संगठित तरीके से किसानों से आमों का संग्रह, गुणवत्ता परीक्षण, ग्रेडिंग, पैकिंग और निर्यात प्रक्रिया पूरी की गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार कर मालदीव भेजा जा सका।
विशेषज्ञों के अनुसार किसान उत्पादक कंपनियां (FPCs) किसानों और वैश्विक बाजार के बीच एक मजबूत कड़ी बनकर उभर रही हैं।
महिला उद्यमी ने संभाली निर्यात की जिम्मेदारी
इस निर्यात अभियान की एक और विशेष उपलब्धि यह रही कि इस खेप का निर्यात M/s Ahalya Devi Ventures की निदेशक श्रीमती अश्विनी ए ने किया।
वे एक नवपंजीकृत महिला निर्यातक हैं और उनका यह प्रयास भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि आधारित निर्यात में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और कृषि उद्यमिता को भी मजबूती मिलेगी।
APEDA अध्यक्ष ने दी बधाई
APEDA के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव (IAS) ने इस उपलब्धि पर निर्यातक, किसान उत्पादक कंपनी, किसानों और सभी संबंधित हितधारकों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे प्रयास भारतीय फलों के लिए नए वैश्विक बाजार तैयार करते हैं।
उन्होंने कहा कि देर से पकने वाली आम किस्मों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग भारतीय किसानों के लिए नए अवसर पैदा करेगी और भविष्य में उनकी आय में स्थायी वृद्धि का आधार बनेगी।
उनके अनुसार APEDA का उद्देश्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ना भी है।
नीलम आम की वैश्विक पहचान
नीलम आम भारत की लोकप्रिय देर से पकने वाली किस्मों में शामिल है। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं—
- अत्यंत मीठा स्वाद
- रसदार गूदा
- आकर्षक सुगंध
- लंबे समय तक गुणवत्ता बनाए रखने की क्षमता
- डेजर्ट, स्मूदी, जूस और पेय पदार्थों के लिए उपयुक्त
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है क्योंकि यह स्वाद और गुणवत्ता दोनों के लिहाज से प्रीमियम श्रेणी का आम माना जाता है।
तोतापुरी आम की भी बढ़ रही मांग
तोतापुरी आम अपने विशिष्ट आकार और हल्के मीठे-खट्टे स्वाद के कारण भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय है।
इसका उपयोग—
- ताजे फल के रूप में,
- आम पल्प,
- जूस,
- प्यूरी,
- अचार,
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक प्रोसेस्ड फूड उद्योग में तोतापुरी आम की मांग लगातार बढ़ रही है।
देर से पकने वाली किस्मों से बढ़ेगा निर्यात सीजन
भारत में अधिकांश आमों की कटाई मई और जून के दौरान होती है, लेकिन नीलम और तोतापुरी जैसी किस्में जून के अंत से लेकर जुलाई के अंत तक उपलब्ध रहती हैं।
इससे भारत के आम निर्यात सीजन की अवधि बढ़ जाती है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आमों की निरंतर उपलब्धता बनी रहती है।
निर्यात विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत उन बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बनाए रख सकता है जहां पूरे मौसम में आम की मांग बनी रहती है।
किसानों को मिला 50 प्रतिशत से अधिक अधिक मूल्य
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिला।
APEDA के अनुसार किसान उत्पादक कंपनी के माध्यम से सीधे निर्यात किए जाने के कारण किसानों को पारंपरिक बाजारों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक अधिक कीमत प्राप्त हुई।
यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि—
- बिचौलियों की भूमिका कम हुई,
- सीधे निर्यातकों से खरीद हुई,
- गुणवत्ता आधारित मूल्य मिला,
- संगठित विपणन व्यवस्था अपनाई गई,
- अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचा।
यह मॉडल किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
FPC और FPO की बढ़ती भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में किसान उत्पादक संगठन (FPO) और किसान उत्पादक कंपनियां (FPC) कृषि विपणन का नया मॉडल बनकर उभरी हैं।
ये संस्थाएं किसानों को—
- सामूहिक विपणन,
- गुणवत्ता नियंत्रण,
- ग्रेडिंग,
- पैकेजिंग,
- ब्रांडिंग,
- निर्यातकों से संपर्क,
- बेहतर मूल्य
दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अधिक से अधिक किसान इन संगठनों से जुड़ते हैं तो कृषि निर्यात में भारत की हिस्सेदारी और तेजी से बढ़ सकती है।
कर्नाटक के बागवानी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि
कर्नाटक देश के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां अल्फांसो, बादामी, नीलम, तोतापुरी और कई अन्य किस्मों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।
मालदीव को पहली एयर शिपमेंट इस बात का प्रमाण है कि राज्य के बागवानी उत्पाद अब वैश्विक बाजार में नई पहचान बना रहे हैं।
इससे भविष्य में अन्य फलों और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
भारत के कृषि निर्यात को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि निर्यात केवल विदेशी मुद्रा अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी प्रभावी तरीका है।
यदि गुणवत्ता उत्पादन, कोल्ड चेन, आधुनिक पैकेजिंग और एयर कार्गो सुविधाओं का विस्तार किया जाए तो भारत विश्व के प्रीमियम फल बाजार में अपनी हिस्सेदारी और बढ़ा सकता है।
APEDA की रणनीति से मिलेगा किसानों को लाभ
APEDA लगातार राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), किसान उत्पादक कंपनियों (FPC) और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर कृषि निर्यात को बढ़ावा देने पर काम कर रहा है।
संस्था का लक्ष्य—
- निर्यात अवसंरचना मजबूत करना,
- वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान बनाना,
- भारतीय प्रीमियम फलों की ब्रांडिंग,
- किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना,
- कृषि निर्यात में विविधता लाना
है।
कर्नाटक के नीलम और तोतापुरी आमों की पहली हवाई खेप इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे न केवल भारतीय आमों की वैश्विक पहचान मजबूत होगी, बल्कि किसान उत्पादक संगठनों, महिला उद्यमियों और कृषि-निर्यात क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी। किसानों को पारंपरिक बाजारों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त लाभ मिलना इस बात का प्रमाण है कि यदि कृषि को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ा जाए तो भारतीय किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। आने वाले समय में ऐसी पहलें भारत को वैश्विक कृषि निर्यात महाशक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

