देश में खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा 21 अगस्त 2026 तक पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले कम दर्ज किया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त तक देश में कुल 1056.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1072.77 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कुल बुवाई क्षेत्र में 16.07 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।
हालांकि, सभी फसलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। जहां धान (Rice), श्री अन्न एवं मोटे अनाज (Shree Anna & Coarse Cereals), तिलहन (Oilseeds), गन्ना और कपास के रकबे में कमी दर्ज की गई है, वहीं दलहन (Pulses) तथा जूट एवं मेस्ता (Jute & Mesta) के क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी हुई है।
कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि खरीफ सीजन में फसल क्षेत्र का रुझान मिश्रित बना हुआ है। खासतौर पर धान के रकबे में आई उल्लेखनीय कमी ने कुल खरीफ क्षेत्र में गिरावट को प्रभावित किया है।
कुल खरीफ क्षेत्र 1056.70 लाख हेक्टेयर
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जारी All India Progressive Crop Area Sown Report के अनुसार, 21 अगस्त 2026 तक देश में कुल 1056.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई दर्ज की गई है। पिछले वर्ष 21 अगस्त तक 1072.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई थी।
इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कुल क्षेत्र में 16.07 लाख हेक्टेयर की कमी है।
वहीं, सामान्य क्षेत्र यानी Normal Area 1104.45 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। इस लिहाज से वर्तमान खरीफ बुवाई सामान्य क्षेत्र से भी कम है।
कुल आंकड़ों में धान, दलहन, श्री अन्न एवं मोटे अनाज, तिलहन, गन्ना, जूट एवं मेस्ता और कपास जैसी प्रमुख खरीफ फसलें शामिल हैं।
धान की बुवाई 13.19 लाख हेक्टेयर घटी
खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान के रकबे में इस वर्ष उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। 21 अगस्त तक देश में 405.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह क्षेत्र 418.29 लाख हेक्टेयर था।
इस तरह धान के क्षेत्र में 13.19 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। धान का सामान्य क्षेत्र 412.00 लाख हेक्टेयर है।
धान के क्षेत्र में सबसे बड़ी कमी कर्नाटक में 3.09 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 2.45 लाख हेक्टेयर, झारखंड में 1.88 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 1.75 लाख हेक्टेयर, ओडिशा में 1.63 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 1.50 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है।
इसके अलावा आंध्र प्रदेश में 1.26 लाख हेक्टेयर, तमिलनाडु में 1.18 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 0.70 लाख हेक्टेयर और गुजरात में 0.27 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।
दूसरी ओर, असम में धान का क्षेत्र 2.80 लाख हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि पश्चिम बंगाल में 0.36 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, धान क्षेत्र में कुल गिरावट मुख्य रूप से कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र में आई कमी से प्रभावित हुई है।
दलहन क्षेत्र में बढ़ोतरी
धान के विपरीत दलहन क्षेत्र में इस वर्ष सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। 21 अगस्त तक देश में कुल 113.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में 112.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन बोई गई थी।
इस तरह दलहन क्षेत्र में 1.49 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। दलहन का सामान्य क्षेत्र 123.64 लाख हेक्टेयर है।
राज्यों के स्तर पर दलहन क्षेत्र में सबसे बड़ी बढ़ोतरी उत्तर प्रदेश में 3.97 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है। इसके बाद तेलंगाना में 0.80 लाख हेक्टेयर, झारखंड में 0.75 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 0.57 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 0.52 लाख हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में 0.38 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।
हालांकि, महाराष्ट्र में दलहन क्षेत्र में 2.60 लाख हेक्टेयर और कर्नाटक में 2.22 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। ओडिशा में भी 0.77 लाख हेक्टेयर की गिरावट रही।
इसके बावजूद उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड और राजस्थान में हुई बढ़ोतरी ने महाराष्ट्र, कर्नाटक और ओडिशा में आई कमी की भरपाई से अधिक प्रभाव डाला है।
तुअर और उड़द की स्थिति बेहतर
दलहन की प्रमुख फसलों में तुअर (Tur) का क्षेत्र 43.86 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 43.44 लाख हेक्टेयर था। इस तरह तुअर के क्षेत्र में 0.42 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।
उड़द (Urad) का रकबा 24.38 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले वर्ष के 21.72 लाख हेक्टेयर से 2.65 लाख हेक्टेयर अधिक है।
वहीं मूंग (Moong) का क्षेत्र 32.68 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 33.93 लाख हेक्टेयर से 1.25 लाख हेक्टेयर कम है।
मोठ (Moth Bean) का क्षेत्र 9.22 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष 9.17 लाख हेक्टेयर था।
श्री अन्न और मोटे अनाज में 3.45 लाख हेक्टेयर की कमी
श्री अन्न एवं मोटे अनाज (Shree Anna & Coarse Cereals) का क्षेत्र भी पिछले वर्ष के मुकाबले कम रहा है। 21 अगस्त तक इन फसलों की कुल बुवाई 176.36 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 179.81 लाख हेक्टेयर थी।
इस तरह क्षेत्र में 3.45 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। इन फसलों का सामान्य क्षेत्र 182.63 लाख हेक्टेयर है।
राज्यों में सबसे बड़ी गिरावट कर्नाटक में 6.57 लाख हेक्टेयर रही। महाराष्ट्र में 2.53 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 0.59 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 0.34 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 0.39 लाख हेक्टेयर और तमिलनाडु में 0.27 लाख हेक्टेयर की कमी हुई है।
वहीं राजस्थान में 2.75 लाख हेक्टेयर, छत्तीसगढ़ में 1.46 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 0.80 लाख हेक्टेयर, ओडिशा में 0.70 लाख हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 0.63 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बिहार में 0.72 लाख हेक्टेयर और झारखंड में 0.33 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मोटे अनाज और श्री अन्न के क्षेत्र में कुल गिरावट मुख्य रूप से कर्नाटक और महाराष्ट्र में आई बड़ी कमी के कारण रही।
मक्का का रकबा भी घटा
मोटे अनाज की प्रमुख फसल मक्का (Maize) का क्षेत्र 89.51 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 93.30 लाख हेक्टेयर था। यानी मक्का के क्षेत्र में 3.79 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है।
वहीं बाजरा का क्षेत्र 64.68 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 63.33 लाख हेक्टेयर से 1.35 लाख हेक्टेयर अधिक है।
ज्वार का क्षेत्र भी 13.41 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष 12.61 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार ज्वार में 0.81 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई।
तिलहन क्षेत्र लगभग स्थिर
देश में तिलहन का कुल क्षेत्र इस वर्ष लगभग पिछले साल के स्तर पर बना हुआ है। 21 अगस्त तक 188.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन की बुवाई दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष यह 188.69 लाख हेक्टेयर था।
इस तरह तिलहन क्षेत्र में केवल 0.32 लाख हेक्टेयर की मामूली कमी हुई है। सामान्य क्षेत्र 200.08 लाख हेक्टेयर है।
तिलहन में मूंगफली (Groundnut) का क्षेत्र 48.79 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 48.22 लाख हेक्टेयर से 0.57 लाख हेक्टेयर अधिक है।
इसके विपरीत सोयाबीन (Soybean) का क्षेत्र 121.35 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 122.76 लाख हेक्टेयर से 1.41 लाख हेक्टेयर कम है।
तिल का क्षेत्र 10.81 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 9.39 लाख हेक्टेयर से 1.42 लाख हेक्टेयर अधिक है। सूरजमुखी में भी 0.49 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
हालांकि, अरंडी का क्षेत्र 1.54 लाख हेक्टेयर घटा है। राजस्थान और गुजरात में आई कमी ने तिलहन क्षेत्र में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की बढ़ोतरी को काफी हद तक संतुलित कर दिया।
गन्ने का क्षेत्र भी थोड़ा घटा
गन्ने का कुल क्षेत्र 58.44 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष समान अवधि में यह 58.87 लाख हेक्टेयर था। इस तरह गन्ने के क्षेत्र में 0.43 लाख हेक्टेयर की कमी हुई है।
बिहार में गन्ने के क्षेत्र में 0.30 लाख हेक्टेयर और उत्तराखंड में 0.20 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। महाराष्ट्र में भी 0.14 लाख हेक्टेयर की गिरावट रही।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में गन्ने का क्षेत्र 0.36 लाख हेक्टेयर और हरियाणा में 0.21 लाख हेक्टेयर बढ़ा है।
जूट और मेस्ता के रकबे में मामूली बढ़ोतरी
Jute & Mesta के क्षेत्र में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 21 अगस्त तक इन फसलों का क्षेत्र 6.34 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष 6.23 लाख हेक्टेयर था।
इस तरह कुल क्षेत्र में 0.10 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।
बिहार में 0.11 लाख हेक्टेयर और पश्चिम बंगाल में 0.06 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसके विपरीत असम में 0.07 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 0.01 लाख हेक्टेयर की कमी रही।
कपास का क्षेत्र 0.28 लाख हेक्टेयर कम
खरीफ की प्रमुख नकदी फसल कपास (Cotton) का क्षेत्र भी पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ा कम है। 21 अगस्त तक देश में 108.45 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 108.73 लाख हेक्टेयर थी।
इस प्रकार कपास क्षेत्र में 0.28 लाख हेक्टेयर की कमी हुई है।
राजस्थान में कपास क्षेत्र 1.06 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 0.90 लाख हेक्टेयर और पंजाब में 0.43 लाख हेक्टेयर घटा है।
वहीं तेलंगाना में कपास का क्षेत्र 1.32 लाख हेक्टेयर और गुजरात में 0.67 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। कर्नाटक में भी 0.14 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कुल मिलाकर राजस्थान और हरियाणा में आई कमी ने तेलंगाना और गुजरात में हुई बढ़ोतरी को लगभग संतुलित कर दिया है।
खरीफ बुवाई में राज्यों के रुझान अहम
21 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग फसलों और राज्यों में बुवाई का रुझान काफी अलग रहा है। धान के क्षेत्र में कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जबकि असम और पश्चिम बंगाल में वृद्धि हुई है।
दलहन में उत्तर प्रदेश की बढ़ोतरी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वहीं मोटे अनाज में कर्नाटक की कमी और राजस्थान की बढ़ोतरी महत्वपूर्ण रही। तिलहन में राजस्थान और गुजरात की गिरावट को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की बढ़ोतरी ने काफी हद तक संतुलित किया।
इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि कुल खरीफ क्षेत्र में कमी के बावजूद कुछ फसलों और राज्यों में किसानों ने पिछले वर्ष की तुलना में अधिक क्षेत्र में बुवाई की है।
21 अगस्त 2026 तक देश की खरीफ बुवाई की तस्वीर मिश्रित बनी हुई है। कुल क्षेत्र पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 16.07 लाख हेक्टेयर कम है। इस गिरावट में सबसे बड़ा योगदान धान क्षेत्र में आई 13.19 लाख हेक्टेयर की कमी का है।
इसके अलावा श्री अन्न एवं मोटे अनाज में 3.45 लाख हेक्टेयर और तिलहन में 0.32 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है। गन्ना और कपास के क्षेत्र में भी मामूली गिरावट रही।
दूसरी ओर दलहन क्षेत्र में 1.49 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है, जबकि जूट एवं मेस्ता में 0.10 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है। दलहन में उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड और राजस्थान की बढ़ोतरी विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही।
इस प्रकार 21 अगस्त तक के आंकड़े बताते हैं कि देश में खरीफ फसल क्षेत्र का स्वरूप पिछले वर्ष की तुलना में कुछ बदला है। Rice, Pulses, Millets, Oilseeds, Cotton और Sugarcane जैसी प्रमुख फसलों के क्षेत्र में अलग-अलग राज्यों के प्रदर्शन ने राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों को प्रभावित किया है। आगामी रिपोर्टों में बुवाई की प्रगति से यह स्पष्ट होगा कि शेष अवधि में कुल खरीफ क्षेत्र में कितनी और वृद्धि होती है।

