बकरी पालन अब सिर्फ एक परंपरागत तरीका नहीं रहा, बल्कि यह एक फुल-फ्लेज्ड प्रोफेशनल बिजनेस मॉडल बनता जा रहा है। खासकर जब दूध और मीट की मांग देश-विदेश में तेजी से बढ़ रही हो। ऐसे में केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा बकरी पालन में नई क्रांति ला रहा है।
CIRG के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली बताते हैं कि यदि बकरी पालन को वैज्ञानिक तरीके से किया जाए और उचित ट्रेनिंग ली जाए, तो इसमें घाटे की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। यही कारण है कि CIRG साल में कई बार बकरी पालन की ट्रेनिंग कोर्स आयोजित करता है, जो इच्छुक युवाओं, किसानों और उद्यमियों के लिए बेहद लाभकारी है।
क्या सिखाई जाती है इस ट्रेनिंग में?
इस ट्रेनिंग में बकरी पालन के हर पहलू को विस्तार से समझाया जाता है:
किस उम्र में बकरियों को कितना और कैसा चारा देना चाहिए?
बीमारियों से बचाव के लिए कौन-कौन से टीके कब लगवाने चाहिए?
मौसम के अनुसार कैसा शेड तैयार करना चाहिए?
दूध और मीट का उत्पादन कैसे बढ़ाएं?
बाजार में तैयार बकरियों को कैसे बेचें?
किन विषयों पर होती है ट्रेनिंग?
CIRG की ट्रेनिंग चार अहम डिवीजन पर आधारित होती है:
एनिमल जेनेटिक ब्रीडिंग: बकरियों की नस्ल सुधार पर फोकस
न्यूट्रीशन और प्रोडक्ट टेक्नोलॉजी: चारे और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर
एनीमल हैल्थ: बकरियों को बीमारियों से बचाने के तरीके
फिजियोलॉजी एंड रीप्रोडक्शन: बकरी की प्रजनन क्षमता और संख्या बढ़ाने पर काम
कहां होती है ट्रेनिंग?
CIRG का कैंपस मथुरा के फरह ब्लॉक के मखूदम गांव में स्थित है, जो 756 एकड़ में फैला हुआ है। यह संस्थान पिछले 43 सालों से बकरी और भेड़ पर रिसर्च कर रहा है। यहां बरबरी, जमनापारी और जखराना जैसी प्रमुख नस्लों की बकरियों पर काम होता है। प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग बैच बनाए जाते हैं, और सभी जानकारी CIRG की वेबसाइट पर उपलब्ध रहती है।
क्यों जरूरी है ट्रेनिंग?
साइंटिफिक ट्रेनिंग लेने से न सिर्फ प्रोडक्शन बढ़ता है, बल्कि बकरी के बच्चों की मृत्यु दर भी काफी कम हो जाती है। बीमारियों जैसे PPR, FMD आदि को भी कंट्रोल करना आसान होता है। यही नहीं, बाजार में बिक्री के लिए तैयार जानवरों की वैल्यू भी अधिक होती है।
निष्कर्ष:
अगर आप कम लागत में ज्यादा कमाई वाला कोई पशुपालन व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो बकरी पालन आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। लेकिन सफलता की कुंजी है—सही ट्रेनिंग और साइंटिफिक अप्रोच। CIRG मथुरा की ट्रेनिंग से आप इस क्षेत्र में न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि दूसरों को रोजगार भी दे सकते हैं।

