• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

मध्य प्रदेश में पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर सख्ती, बिक्री रोकने और स्टॉक नष्ट करने का आदेश

मध्य प्रदेश सरकार ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड की बिक्री और भंडारण रोकने, पुराना स्टॉक वापस मंगाने और नष्ट करने के निर्देश दिए। जानें मूंग की फसल से जुड़ा पूरा मामला।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
October 21, 2026
in कृषि समाचार
0
मध्य प्रदेश में पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध
0
SHARES
4
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

मध्य प्रदेश सरकार ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड (Paraquat Dichloride) के इस्तेमाल और बिक्री पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सख्त कदम उठाया है। राज्य के कृषि विभाग ने कीटनाशक निर्माताओं को इस रसायन की बिक्री तत्काल बंद करने, बाजार में उपलब्ध पुराने स्टॉक को वापस लेने और निर्धारित नियमों के तहत उसे नष्ट करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई केंद्र सरकार की ओर से इस कीटनाशक के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए जाने के बाद की गई है। राज्य सरकार का यह कदम उन रिपोर्टों के बीच आया है, जिनमें मूंग की फसल को कटाई से पहले जल्दी सुखाने के लिए पैराक्वाट डाइक्लोराइड के इस्तेमाल की बात सामने आई थी।

केंद्र सरकार ने 22 सितंबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से पैराक्वाट डाइक्लोराइड के सभी मौजूदा पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए थे। इसके साथ ही इस रसायन के नए पंजीकरण पर भी रोक लगा दी गई। यह आदेश राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद प्रभावी होने के प्रावधान के साथ जारी किया गया था। अब मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य स्तर पर इस फैसले का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित कंपनियों और कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

राज्य के कृषि कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने अक्टूबर के मध्य में जारी निर्देश में स्पष्ट किया कि पैराक्वाट डाइक्लोराइड के पंजीकरण प्रमाणपत्र रखने वाली कंपनियां उन्हें केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) को वापस करें। इसके साथ ही राज्य में इस रसायन की बिक्री और भंडारण तत्काल रोकने, पहले से उपलब्ध स्टॉक वापस मंगाने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसे नष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

मूंग की फसल जल्दी सुखाने में हो रहा था इस्तेमाल

मध्य प्रदेश में पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर सख्ती बढ़ाने की एक प्रमुख वजह मूंग की फसल को कटाई से पहले जल्दी सुखाने के लिए इसके कथित इस्तेमाल की खबरें हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कुछ किसान मूंग की फसल पर इस रसायन का छिड़काव कर उसे 24 से 72 घंटे के भीतर सुखाने की कोशिश कर रहे थे। इसका उद्देश्य फसल को जल्दी काटना और उसकी गहाई की प्रक्रिया को तेज करना था।

मूंग की खेती करने वाले किसानों के लिए कटाई और गहाई का समय महत्वपूर्ण होता है। फसल को समय पर खेत से निकालने की जरूरत और खेती की लागत जैसे पहलुओं के बीच कुछ किसान जल्दी सुखाने के ऐसे तरीकों का सहारा ले रहे थे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मूंग की फसल को इस तरह सुखाने के लिए पैराक्वाट डाइक्लोराइड का इस्तेमाल स्वीकृत उपयोगों में शामिल नहीं था।

फसल सुखाने के लिए किसी रसायन का इस्तेमाल करना केवल इस आधार पर उचित नहीं माना जा सकता कि उससे कटाई जल्दी हो जाएगी। कीटनाशकों और अन्य कृषि रसायनों का उपयोग उनके स्वीकृत उपयोग, निर्धारित मात्रा और संबंधित सुरक्षा निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। किसी रसायन का अनधिकृत इस्तेमाल किसानों, कृषि श्रमिकों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

मध्य प्रदेश सरकार की ताजा कार्रवाई का उद्देश्य इसी तरह के इस्तेमाल पर रोक लगाना और केंद्र सरकार के आदेश का राज्य में पालन सुनिश्चित करना है। इस तरह राज्य सरकार ने अलग से कोई नई राष्ट्रीय नीति बनाने के बजाय केंद्र के फैसले को जमीन पर लागू करने की दिशा में कदम उठाया है।

स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर चिंता

पैराक्वाट डाइक्लोराइड के इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं। स्थानीय समाचार रिपोर्टों में इस रसायन के संपर्क में आने से गुर्दे, यकृत और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचने जैसे जोखिमों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, रसायन से दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होने की आशंका भी जताई गई है।

पैराक्वाट एक अत्यधिक विषैला शाकनाशी है। इसके शरीर में प्रवेश करने पर गंभीर विषाक्तता हो सकती है और कई मामलों में इसके प्रभाव जानलेवा साबित हो सकते हैं। इसकी विषाक्तता को देखते हुए इसके सुरक्षित इस्तेमाल, भंडारण और संपर्क से बचाव को लेकर विशेष सावधानी आवश्यक मानी जाती है।

इस रसायन से जुड़े जोखिमों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण चिंता यह भी है कि विषाक्तता होने पर प्रभावी उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं। इसलिए इसके संपर्क में आने की आशंका को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि, किसी विशेष स्वास्थ्य प्रभाव या बीमारी का संबंध रसायन के संपर्क, मात्रा और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। मूंग की फसल में इसके इस्तेमाल से उपभोक्ताओं को होने वाले किसी विशिष्ट नुकसान का आकलन करने के लिए अलग से वैज्ञानिक प्रमाणों की आवश्यकता होती है।

केंद्र सरकार ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड के पंजीकरण रद्द करने के फैसले के संदर्भ में यह भी उल्लेख किया था कि दुनिया के लगभग 70 देशों में इस रसायन पर प्रतिबंध या प्रतिबंधात्मक नियंत्रण लागू हैं। यह तथ्य इसके स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी चिंताओं को दर्शाता है।

केंद्र के आदेश के बाद राज्य में कार्रवाई तेज

केंद्र सरकार की ओर से पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए जाने के बाद राज्य स्तर पर इसका प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण हो गया था। केवल आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि बाजार में उपलब्ध उत्पादों की बिक्री रोकना, स्टॉक की पहचान करना और उसे नियमों के अनुसार हटाना भी जरूरी होता है।

मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश में इन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। संबंधित कंपनियों को बिक्री बंद करने के साथ मौजूदा स्टॉक वापस लेने और उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नष्ट करने को कहा गया है। पंजीकरण प्रमाणपत्रों को केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति को लौटाने का निर्देश भी इसी कार्रवाई का हिस्सा है।

इस कदम से राज्य में पैराक्वाट डाइक्लोराइड की उपलब्धता और वितरण पर नियंत्रण मजबूत करने का प्रयास किया गया है। हालांकि, आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित कंपनियां, वितरक और विक्रेता निर्देशों का पालन करें तथा प्रतिबंधित रसायन की बिक्री या भंडारण जारी न रखें।

मूंग की सरकारी खरीद को लेकर पहले भी हुआ था विवाद

मध्य प्रदेश में पैराक्वाट डाइक्लोराइड का मुद्दा केवल कीटनाशक नियंत्रण तक सीमित नहीं रहा है। इससे पहले ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीद को लेकर राज्य सरकार और किसानों के बीच विवाद सामने आया था।

पिछले ग्रीष्मकालीन सीजन में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का हवाला देते हुए ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद नहीं करने का फैसला लिया था। इसके बाद मूंग उत्पादक किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के अनुसार, किसान नर्मदापुरम से भोपाल तक मार्च करते हुए अपनी मांगों को लेकर सामने आए थे।

इस विवाद ने मूंग उत्पादन, फसल सुखाने के तरीकों और सरकारी खरीद के बीच संबंध को चर्चा में ला दिया था। किसानों के लिए फसल की बिक्री और उचित बाजार उपलब्धता महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जबकि सरकार के सामने खाद्य सुरक्षा और कृषि रसायनों के सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।

ऐसे में पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर रोक का प्रभावी क्रियान्वयन इस विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण पहलू को संबोधित करता है। राज्य सरकार अब कंपनियों और विक्रेताओं के स्तर पर कार्रवाई के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रतिबंधित रसायन का इस्तेमाल जारी न रहे।

किसानों को स्वीकृत विकल्प अपनाने की सलाह

मध्य प्रदेश देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां मूंग सहित कई दलहनी फसलों की खेती किसानों की आय और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में फसल सुखाने के लिए अपनाए जाने वाले तरीकों का सुरक्षित होना जरूरी है।

राज्य के कृषि विभाग ने किसानों को पैराक्वाट डाइक्लोराइड के बजाय विभाग से स्वीकृत फसल सुखाने के तरीकों और खरपतवार नियंत्रण के लिए अनुमोदित उत्पादों का उपयोग करने की सलाह दी है। किसानों को किसी भी कृषि रसायन का इस्तेमाल करने से पहले उसके लेबल पर दिए गए निर्देशों और स्वीकृत उपयोग की जानकारी जांचनी चाहिए। केवल फसल जल्दी तैयार करने या कटाई का समय घटाने के उद्देश्य से किसी रसायन का अनधिकृत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

किसानों के लिए यह भी जरूरी है कि वे किसी उत्पाद के बारे में जानकारी अधिकृत कृषि अधिकारियों, कृषि विज्ञान केंद्रों या संबंधित विभाग से प्राप्त करें। यदि फसल सुखाने या खरपतवार नियंत्रण के लिए किसी रसायन के इस्तेमाल को लेकर संदेह हो, तो बिना पुष्टि के उसका छिड़काव करने से बचना चाहिए।

मध्य प्रदेश सरकार की कार्रवाई से स्पष्ट है कि पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर केंद्र की रोक को राज्य में लागू करने के लिए अब बिक्री, भंडारण और पुराने स्टॉक के निस्तारण पर जोर दिया जा रहा है। आगे इस कार्रवाई की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिबंध का पालन किस हद तक सुनिश्चित किया जाता है और किसानों को फसल प्रबंधन के सुरक्षित, स्वीकृत विकल्पों की जानकारी कितनी प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाती है।

 

Tags: CIBRCकिसान समाचारकीटनाशक प्रतिबंधकृषि रसायनकृषि विभागदलहन उत्पादनपैराक्वाट डाइक्लोराइडपैराक्वाट प्रतिबंधमध्य प्रदेश कृषि समाचारमूंग की खेती
Previous Post

ग्लूफोसिनेट आयात पर भारत की सख्ती जारी, न्यूनतम आयात मूल्य की सीमा अप्रैल 2027 तक बढ़ी

Next Post

भारत का फसल सुरक्षा बाजार 2030 तक 5.5% की दर से बढ़ने का अनुमान

Next Post
भारत के फसल सुरक्षा उद्योग में उन्नत फॉर्मूलेशन तकनीक और आधुनिक कृषि रसायनों का इस्तेमाल

भारत का फसल सुरक्षा बाजार 2030 तक 5.5% की दर से बढ़ने का अनुमान

Recent Posts

  • वाराणसी में सब्जी अनुसंधान को मिलेगी नई गति, ICAR ने उन्नत ब्रीडिंग और बायोसेफ्टी सुविधाओं को किया मजबूत
  • सूक्ष्मजीव आधारित तकनीकों से कृषि में आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा: डॉ. एम.एल. जाट
  • खेत बचाओ अभियान 2026: स्वस्थ मृदा, समृद्ध किसान के संकल्प के साथ 22 अक्टूबर से देशभर में चलेगा जागरूकता अभियान
  • लगातार रासायनिक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी में क्या बदलता है?
  • पूरी खाद एक साथ डालें या किस्तों में? जानें सही तरीका

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.

Go to mobile version