Mahashakti Drone Tai: महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले में कृषि क्षेत्र में एक नई शुरुआत देखने को मिली है। आधुनिक तकनीक को गांवों तक पहुंचाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘महाशक्ति ड्रोन ताई योजना’ के तहत जिले का पहला कृषि ड्रोन वितरित किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर कुमारी सोनम गजानन भर्रे को ड्रोन सौंपा गया, जिसके साथ ही वे गडचिरोली की पहली ‘महाशक्ति ड्रोन ताई’ बन गई हैं।
यह पहल मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिती कार्यक्रम (CMEGP) के अंतर्गत सलाम किसान संस्था के सहयोग से शुरू की गई है। योजना का उद्देश्य महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर उन्हें कृषि सेवा क्षेत्र में उद्यमी बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देना है।
समारोह के दौरान उत्साह का माहौल देखने को मिला। सलाम किसान संस्था के मार्केटिंग मैनेजर सुमित मुंगले ने कार्यक्रम के सफल संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी निभाई, जबकि ड्रोन पायलट मुकेश नागदेवते ने किसानों को ड्रोन तकनीक और उसके उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इनमें तालुका कृषि अधिकारी सुप्रिया कलंबरकर, गुण नियंत्रण अधिकारी संजय मेश्राम, मंडल कृषि अधिकारी निशांत सोनटक्के, कृषि अधिकारी येरमे और सुनील बुद्धे सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने इस पहल को जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि आने वाले समय में कृषि ड्रोन खेती का अभिन्न हिस्सा बन सकते हैं।इस योजना को सफल बनाने में बैंकिंग क्षेत्र का भी अहम योगदान रहा। महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक, गडचिरोली शाखा ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया। बैंक प्रबंधक कमलेश मंगर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है और बैंक भविष्य में भी ऐसे प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा ड्रोन का लाइव प्रदर्शन रहा। कृषि विभाग और किसानों की मौजूदगी में ड्रोन ने मात्र 6 से 7 मिनट में एक एकड़ क्षेत्र में छिड़काव कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन ने किसानों को यह समझाने में मदद की कि कैसे ड्रोन तकनीक खेती में श्रम, समय और लागत को कम कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि ड्रोन के इस्तेमाल से कीटनाशक और उर्वरकों का सटीक एवं समान वितरण संभव हो सकेगा, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार आएगा। साथ ही, खेतों में मजदूरों की कमी जैसी समस्याओं से भी काफी हद तक राहत मिलेगी।
लाभार्थी सोनम गजानन भर्रे ने इस अवसर पर राज्य सरकार, महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक और सलाम किसान संस्था का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे जिले की महिलाओं के लिए प्रेरणा का क्षण है। उन्होंने कहा कि महिलाएं यदि आधुनिक तकनीकों को अपनाएं तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकती हैं।गडचिरोली, जिसे लंबे समय तक पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता रहा है, अब तकनीक और नवाचार की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। ‘महाशक्ति ड्रोन ताई योजना’ इस बात का प्रमाण है कि सही नीतियों और सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली जा सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में देश में महिला संचालित कृषि सेवाओं का एक नया नेटवर्क विकसित हो सकता है। इससे खेती अधिक आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
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