पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां पारंपरिक मछली सुखाने की पद्धति अब आधुनिक तकनीक के साथ नए आयाम छू रही है। इस बदलाव के केंद्र में हैं युवा मत्स्य उद्यमी Navendu Bikash Das, जिन्होंने वैज्ञानिक सहयोग के जरिए अपने व्यवसाय को नई दिशा दी है।
पारंपरिक से आधुनिकता की ओर कदम
पूर्वी मिदनापुर के मेइदे नगर, निजकस्बा के निवासी नवेंदु बिकाश दास बचपन से ही मछली संरक्षण की पारंपरिक “ओपन सन-ड्राइंग” पद्धति को देखते आए थे। हालांकि यह तरीका वर्षों से प्रचलित रहा है, लेकिन इसमें कई चुनौतियाँ भी थीं—मौसम पर निर्भरता, अधिक समय लगना और धूल, कीट व सूक्ष्मजीवों से प्रदूषण का खतरा। इन समस्याओं के कारण उत्पाद की गुणवत्ता में एकरूपता नहीं रहती थी, जिससे बाजार में इसकी प्रतिस्पर्धा सीमित हो जाती थी।
वैज्ञानिक सहयोग से मिला समाधान
इन चुनौतियों से निपटने के लिए दास ने 2023 में ICAR-Central Institute of Fisheries Education से संपर्क किया। यहां उन्हें एग्री-बिजनेस इनक्यूबेशन (ABI) सेंटर के तहत छह माह के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया। इस दौरान उन्हें स्वच्छ मछली प्रसंस्करण, वैज्ञानिक सुखाने की तकनीक, पैकेजिंग और भंडारण से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बॉम्बे डक, एंकोवी, झींगा और क्रोकर जैसी व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री प्रजातियों के प्रोसेसिंग की आधुनिक तकनीकें सीखी, जिससे उन्हें पारंपरिक कार्य को आधुनिक रूप देने में मदद मिली।
आधुनिक इकाई की स्थापना
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद नवेंदु दास ने “Tarm Agrotek Private Limited” की सह-स्थापना की और अपने गांव में एक यांत्रिक मछली सुखाने की इकाई स्थापित की। इस यूनिट की क्षमता प्रति बैच 100 किलोग्राम ताजी मछली सुखाने की है। साथ ही उन्होंने Food Safety and Standards Authority of India से प्रमाणन भी प्राप्त किया, जिससे उनके उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
व्यवसाय में उल्लेखनीय सफलता
आज यह इकाई हर महीने लगभग 2,000 किलोग्राम सूखी मछली का उत्पादन कर रही है। उनके प्रमुख उत्पादों में “रंगी चिंगरी” (छोटे आकार का समुद्री झींगा) शामिल है, जिसे पहले कम मूल्य का माना जाता था। लेकिन आधुनिक तकनीक से इसे उच्च गुणवत्ता और पोषक तत्वों से भरपूर उत्पाद में बदल दिया गया है।
इसके अलावा बॉम्बे डक और नमकीन सूखे क्रोकर “Jhalak” ब्रांड के तहत ₹600–700 प्रति किलोग्राम की दर से बेचे जा रहे हैं। बेहतर गुणवत्ता, स्वच्छता और आकर्षक पैकेजिंग के कारण इन उत्पादों की मांग क्षेत्रीय बाजारों के साथ-साथ गुवाहाटी जैसे पूर्वोत्तर शहरों में भी बढ़ रही है।
नवाचार और गुणवत्ता पर जोर
नवेंदु दास ने अपने उत्पादों की पैकेजिंग में पोषण संबंधी जानकारी को भी शामिल किया है, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है। वर्ष 2025 में उनके उद्यम ने लगभग ₹31 लाख का मुनाफा अर्जित किया, जो इस मॉडल की आर्थिक सफलता को दर्शाता है।
भविष्य की दिशा
व्यवसाय को और मजबूत बनाने के लिए उन्होंने हाल ही में 10 टन क्षमता का कोल्ड स्टोरेज भी स्थापित किया है, जिससे कच्चे माल का बेहतर प्रबंधन संभव हो सके। ICAR-Central Institute of Fisheries Education से लगातार मिल रही तकनीकी सहायता—जैसे ड्राइंग प्रक्रिया का अनुकूलन, पैकेजिंग और पोषण मूल्यांकन—उनके उद्यम को निरंतर आगे बढ़ा रही है।
प्रेरणादायक उदाहरण
नवेंदु बिकाश दास की यह यात्रा दर्शाती है कि वैज्ञानिक सहयोग, प्रशिक्षण और नवाचार के माध्यम से पारंपरिक व्यवसायों को आधुनिक, टिकाऊ और लाभदायक बनाया जा सकता है। उनका मॉडल देश के मत्स्य क्षेत्र में मूल्य संवर्धन और तकनीकी अपनाने का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रहा है।

