Employees’ Provident Fund Organisation (ईपीएफओ) के प्रत्यक्ष भर्ती प्रवर्तन अधिकारी/लेखा अधिकारी (EO/AO) बैच 2025 के लिए इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम का राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) चरण 6 अप्रैल 2026 से Gujarat National Law University, गांधीनगर में शुरू हो गया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों को कानूनी, प्रशासनिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं में दक्ष बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS) के निदेशक कुमार रोहित ने किया। इस अवसर पर प्रथम आरपीएफसी मनोरंजन कुमार, प्रो. (डॉ.) गिरीश आर., डॉ. हार्दिक एच. पारिख और दिनेश कुमार मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे।
प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कुमार रोहित ने मजबूत कानूनी समझ और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे “जीवन सुगमता” और “व्यापार सुगमता” के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करते हुए सकारात्मक बदलाव के वाहक बनें।
प्रो. (डॉ.) गिरीश आर. ने अपने संबोधन में भारत के संवैधानिक ढांचे में विधि के शासन की अहमियत पर प्रकाश डाला और कहा कि सार्वजनिक अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में संवैधानिक मूल्यों को सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि जीएनएलयू में दिया जा रहा प्रशिक्षण अधिकारियों को उनके भविष्य के प्रशासनिक और नियामक दायित्वों के लिए तैयार करेगा।
डॉ. हार्दिक एच. पारिख ने प्रशिक्षण की कठोरता और निरंतर तैयारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मजबूत वैचारिक स्पष्टता ही प्रभावी प्रशासन की आधारशिला है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को गहन और व्यावहारिक कानूनी ज्ञान प्रदान किया जाएगा।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में Employees’ Provident Funds and Miscellaneous Provisions Act, 1952, सामाजिक सुरक्षा कानून, अनुपालन, न्यायनिर्णय और प्रवर्तन से जुड़े समकालीन विषयों को शामिल किया गया है।
मनोरंजन कुमार ने कहा कि बदलते शासन ढांचे में प्रवर्तन अधिकारियों की भूमिका अब केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सुविधा, विश्वास और साझेदारी पर आधारित हो गई है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे कानून और जनता के बीच सेतु बनकर कार्य करें।
देशभर से आए 262 प्रशिक्षु अधिकारी इस पांच-चरणीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं, जिसे संघ लोक सेवा आयोग Union Public Service Commission के माध्यम से चुना गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों को कानूनी, वित्तीय, तकनीकी और फील्ड अनुभव से सशक्त बनाना है।
कार्यक्रम के दौरान संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों ने अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। यह पहल एक सहभागी और शिक्षार्थी-केंद्रित प्रशिक्षण प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य के लोक सेवकों को अधिक सक्षम, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करेगा।

