भारत में प्याज (Onion) की खेती किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन इसकी कटाई के बाद सही तरीके से भंडारण करना हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। विशेष रूप से मानसून के दौरान अधिक नमी, मौसम में बदलाव और पर्याप्त भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण प्याज में सड़न, अंकुरण और वजन में कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है। कई बार किसान बेहतर बाजार भाव मिलने की उम्मीद में प्याज को कुछ समय तक सुरक्षित रखना चाहते हैं, लेकिन उचित Storage Infrastructure उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है।
किसानों की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research – ICAR) के अंतर्गत भोपाल स्थित केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (ICAR-Central Institute of Agricultural Engineering – ICAR-CIAE) ने एक आधुनिक Multi-Module Onion Storage System विकसित किया है। यह तकनीक प्याज के भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर आर्थिक मूल्य दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
इस तकनीक के परिणाम उत्साहजनक बताए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस आधुनिक भंडारण प्रणाली के इस्तेमाल से कुल Storage Losses को 51.76 प्रतिशत से घटाकर 14.07 प्रतिशत तक लाया गया। यानी पारंपरिक भंडारण व्यवस्था की तुलना में कुल नुकसान में 72.81 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस प्रणाली की कुल भंडारण क्षमता 9 टन है, जिसमें एक-एक टन क्षमता वाले अलग-अलग मॉड्यूल बनाए गए हैं। इसमें Forced-Air Ventilation Technology का इस्तेमाल किया गया है, जिससे भंडारण इकाई के भीतर हवा का समान प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलती है।
संस्थान के अनुसार, रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए बाजार मूल्य परिदृश्य (Price Scenario) के तहत इस तकनीक से किसानों को प्रति टन ₹20,320 का शुद्ध आर्थिक लाभ (Net Benefit) मिल सकता है। यह तकनीक विशेष रूप से उन किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जो कटाई के बाद अपनी उपज को सुरक्षित रखकर बाजार में बेहतर कीमत मिलने पर बिक्री करना चाहते हैं।
प्याज की खेती में कटाई के बाद होने वाला नुकसान किसानों के लिए बड़ी चुनौती
भारत में प्याज एक प्रमुख व्यावसायिक सब्जी फसल है। देश के विभिन्न राज्यों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों के किसान प्याज उत्पादन से जुड़े हुए हैं। घरेलू बाजार के साथ-साथ प्याज की मांग खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात क्षेत्र में भी बनी रहती है।
हालांकि, प्याज उत्पादन में किसानों की चुनौती केवल अच्छी फसल तैयार करने तक सीमित नहीं है। कटाई के बाद उपज को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्याज एक ऐसी फसल है, जिसमें भंडारण के दौरान कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं। यदि भंडारण की व्यवस्था सही नहीं है, तो उत्पाद की गुणवत्ता धीरे-धीरे खराब होने लगती है।
Post-Harvest Losses कृषि क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण समस्या हैं। फसल की कटाई से लेकर उसकी सफाई, ग्रेडिंग, पैकिंग, परिवहन और भंडारण तक अलग-अलग चरणों में उपज का नुकसान हो सकता है। प्याज के मामले में Storage Management की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
कई किसान पारंपरिक तरीकों से प्याज का भंडारण करते हैं। इन व्यवस्थाओं में हवा का पर्याप्त प्रवाह नहीं होने या भंडारण की परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहने से प्याज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसका परिणाम वजन में कमी, खराब प्याज की बढ़ती मात्रा और बाजार में बिक्री योग्य उपज कम होने के रूप में सामने आता है।
इस प्रकार किसानों को दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। पहला, भंडारण के दौरान प्याज की मात्रा कम हो जाती है और दूसरा, बची हुई उपज की गुणवत्ता खराब होने पर उसका बाजार मूल्य भी प्रभावित हो सकता है।
मानसून के दौरान प्याज भंडारण की चुनौती और बढ़ जाती है
प्याज की कटाई के बाद भंडारण की समस्या मानसून के समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। बारिश और वातावरण में बढ़ी हुई नमी के कारण भंडारण व्यवस्था को अधिक सावधानी के साथ संचालित करने की आवश्यकता होती है।
यदि भंडारण इकाई में हवा का आवागमन पर्याप्त नहीं हो, तो प्याज के आसपास नमी जमा होने और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है। ऐसी परिस्थितियों में किसानों के लिए अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है।
कई बार किसान बाजार में कीमतें कम होने के कारण प्याज का स्टॉक रोककर रखना चाहते हैं। लेकिन भंडारण की सीमित क्षमता और उचित तकनीक के अभाव में उन्हें जल्दी बिक्री करनी पड़ती है। इससे बाजार में बेहतर भाव मिलने की संभावना का लाभ उठाना कठिन हो जाता है।
ऐसे में आधुनिक Storage Technology किसानों को फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकती है।
ICAR-CIAE द्वारा विकसित Multi-Module Onion Storage System इसी चुनौती के समाधान की दिशा में एक तकनीकी विकल्प प्रस्तुत करता है। इसमें Forced-Air Ventilation की व्यवस्था की गई है, जिससे भंडारण के दौरान हवा के समान प्रवाह को सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अलग-अलग मानसूनी परिस्थितियों में परीक्षण की अवधि और परिणामों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इस तकनीक को मानसून के हर मौसम में नुकसान से पूरी तरह सुरक्षा देने वाली व्यवस्था मानने के बजाय बेहतर वायु प्रवाह और भंडारण प्रबंधन पर आधारित एक उपयोगी तकनीकी समाधान के रूप में देखना उचित होगा।
क्या है ICAR-CIAE का Multi-Module Onion Storage System?
ICAR-CIAE द्वारा विकसित Multi-Module Onion Storage System एक आधुनिक भंडारण संरचना है, जिसे प्याज को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
इस प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी मॉड्यूलर डिजाइन (Modular Design) है। इसकी कुल भंडारण क्षमता 9 टन है और इसमें अलग-अलग एक टन क्षमता वाले मॉड्यूल बनाए गए हैं।
इस व्यवस्था के माध्यम से कुल भंडारण क्षमता को छोटे-छोटे स्वतंत्र हिस्सों में विभाजित किया गया है। इससे भंडारण की संरचना को व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करने का विकल्प मिलता है।
पारंपरिक भंडारण प्रणालियों में अक्सर वायु प्रवाह और भंडारण की एकरूपता को लेकर चुनौतियां होती हैं। नई तकनीक में Forced-Air Ventilation System को शामिल किया गया है, जिसका उद्देश्य भंडारण इकाई के भीतर हवा का समान वितरण सुनिश्चित करना है।
इस तकनीक में हवा को नियंत्रित तरीके से भंडारण क्षेत्र में प्रवाहित किया जाता है, जिससे प्याज के विभिन्न हिस्सों तक हवा पहुंचने में सहायता मिलती है।
भंडारण के दौरान हवा का प्रवाह महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे प्याज के आसपास बनने वाली प्रतिकूल परिस्थितियों को कम करने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से बड़े भंडारण ढांचे में केवल प्राकृतिक वायु प्रवाह पर निर्भर रहने के बजाय व्यवस्थित Ventilation System उपयोगी हो सकता है।
इस प्रकार Multi-Module Design और Forced-Air Ventilation का संयोजन इस तकनीक को पारंपरिक भंडारण व्यवस्था से अलग बनाता है।
51.76% से घटकर 14.07% हुआ कुल भंडारण नुकसान
इस तकनीक की सबसे बड़ी उपलब्धि भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान में दर्ज की गई कमी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पारंपरिक भंडारण व्यवस्था में कुल नुकसान 51.76 प्रतिशत था, जबकि ICAR-CIAE की Multi-Module Onion Storage System में यह घटकर 14.07 प्रतिशत रह गया।
इसका अर्थ है कि दोनों व्यवस्थाओं की तुलना में कुल नुकसान में 37.69 Percentage Points की कमी दर्ज की गई। प्रतिशत के आधार पर देखें तो पारंपरिक भंडारण की तुलना में नुकसान लगभग 72.81 प्रतिशत कम रहा।
इन आंकड़ों को समझने के लिए 100 किलोग्राम प्याज का उदाहरण लिया जा सकता है।
यदि किसी पारंपरिक भंडारण व्यवस्था में 100 किलोग्राम प्याज का कुल नुकसान 51.76 प्रतिशत होता है, तो लगभग 48.24 किलोग्राम प्याज ही नुकसान से बचता है।
वहीं, नई Multi-Module Storage System में 14.07 प्रतिशत नुकसान के आधार पर लगभग 85.93 किलोग्राम प्याज नुकसान से बच सकता है।
इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि भंडारण नुकसान में कमी आने से किसानों के पास बिक्री के लिए अधिक मात्रा में प्याज उपलब्ध रह सकता है।
यह अंतर किसानों की आर्थिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण है। जब भंडारण के बाद अधिक मात्रा में उपज बिक्री योग्य रहती है, तो किसान को अपनी कुल उत्पादित फसल से बेहतर आर्थिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, वास्तविक परिणाम प्याज की गुणवत्ता, कटाई के समय की स्थिति, भंडारण प्रबंधन और बाजार परिस्थितियों पर भी निर्भर कर सकते हैं।
9 टन क्षमता और एक टन के अलग-अलग मॉड्यूल की खासियत
नई तकनीक की दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता इसकी 9 टन की कुल भंडारण क्षमता है। इसमें एक-एक टन क्षमता वाले अलग-अलग मॉड्यूल उपलब्ध हैं।
इस तरह की Modular Storage Architecture भंडारण को अधिक व्यवस्थित बनाने का विकल्प देती है। एक बड़ी इकाई के बजाय अलग-अलग मॉड्यूल में उपज रखने से भंडारण व्यवस्था को अलग-अलग हिस्सों में प्रबंधित किया जा सकता है।
किसानों और कृषि उद्यमियों के लिए भंडारण क्षमता का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि प्याज की कटाई एक निश्चित समय पर बड़ी मात्रा में होती है। यदि किसानों के पास पर्याप्त Storage Infrastructure नहीं है, तो उन्हें अपनी उपज को तुरंत बाजार में बेचना पड़ सकता है।
9 टन की क्षमता वाली इस प्रणाली से एक साथ अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में प्याज का भंडारण किया जा सकता है।
इसके अलावा मॉड्यूल आधारित डिजाइन भंडारण की व्यवस्था को अलग-अलग इकाइयों में विभाजित करने का अवसर प्रदान करता है। यह तकनीक विशेष रूप से उन कृषि उत्पादक समूहों, किसान संगठनों और कृषि उद्यमों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो सामूहिक स्तर पर प्याज का भंडारण करना चाहते हैं।
हालांकि, अलग-अलग मॉड्यूल के संचालन, निर्माण लागत और रखरखाव से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध होने पर इसकी व्यावसायिक उपयोगिता का और बेहतर मूल्यांकन किया जा सकेगा।
Forced-Air Ventilation से मिलेगा बेहतर वायु प्रवाह
Multi-Module Onion Storage System में Forced-Air Ventilation को एक महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषता के रूप में शामिल किया गया है।
Ventilation का अर्थ है किसी बंद या सीमित स्थान में हवा का आवागमन बनाए रखना। प्याज के भंडारण में यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उपज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भंडारण के वातावरण का उचित प्रबंधन आवश्यक होता है।
पारंपरिक भंडारण व्यवस्था में कई बार हवा का प्रवाह सभी हिस्सों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाता। इससे कुछ स्थानों पर भंडारण की परिस्थितियां अन्य हिस्सों से अलग हो सकती हैं।
Forced-Air Ventilation System में हवा को नियंत्रित तरीके से प्रवाहित किया जाता है। इसका उद्देश्य भंडारण इकाई के भीतर Uniform Airflow यानी समान वायु प्रवाह बनाए रखना है।
जब हवा का वितरण व्यवस्थित होता है, तो भंडारण क्षेत्र में वायु आवागमन को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकता है। इससे प्याज की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली कुछ प्रतिकूल भंडारण परिस्थितियों को कम करने में सहायता मिल सकती है।
इस तकनीक की उपयोगिता केवल भंडारण क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि आधुनिक कृषि अभियांत्रिकी (Agricultural Engineering) के माध्यम से फसल कटाई के बाद की समस्याओं के समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
किसानों को प्रति टन ₹20,320 का शुद्ध आर्थिक लाभ
किसी भी कृषि तकनीक की वास्तविक उपयोगिता का मूल्यांकन केवल उसके तकनीकी प्रदर्शन से नहीं, बल्कि किसानों को मिलने वाले आर्थिक लाभ से भी किया जाता है।
ICAR-CIAE की इस आधुनिक भंडारण प्रणाली के संबंध में उपलब्ध आंकड़ों में प्रति टन ₹20,320 का शुद्ध आर्थिक लाभ (Net Benefit) बताया गया है।
यह लाभ रिपोर्ट में उपयोग किए गए बाजार मूल्य परिदृश्य (Reported Price Scenario) के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
इसका मुख्य आधार भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान में कमी है। जब किसान अपनी उपज का अधिक हिस्सा सुरक्षित रख पाते हैं, तो उनके पास बाजार में बेचने के लिए अधिक प्याज उपलब्ध रहता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसान की 100 टन प्याज की उपज में भंडारण के दौरान नुकसान कम होता है, तो बिक्री योग्य मात्रा में उल्लेखनीय अंतर आ सकता है। इससे किसान की कुल बिक्री और संभावित आमदनी प्रभावित होती है।
इसी तरह प्रति टन ₹20,320 का शुद्ध लाभ किसानों के लिए इस तकनीक की आर्थिक उपयोगिता को दर्शाता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह लाभ एक रिपोर्टेड Price Scenario पर आधारित है। इसे हर किसान, हर राज्य या हर बाजार में मिलने वाला निश्चित लाभ नहीं माना जाना चाहिए। प्याज की बाजार कीमत, भंडारण अवधि, परिचालन लागत और अन्य आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार वास्तविक लाभ में अंतर हो सकता है।
फिर भी भंडारण नुकसान में 72.81 प्रतिशत की कमी और प्रति टन ₹20,320 के बताए गए शुद्ध लाभ का आंकड़ा इस तकनीक की संभावनाओं को रेखांकित करता है।
Post-Harvest Management मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना भी कृषि विकास की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है।
किसान खेत में मेहनत करके फसल तैयार करते हैं, लेकिन यदि कटाई के बाद उपज सुरक्षित नहीं रह पाती, तो उनकी मेहनत का पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता।
इसीलिए Post-Harvest Management को आधुनिक कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
इसमें वैज्ञानिक तरीके से कटाई, उचित Handling, Sorting, Grading, Packaging, Transportation और Storage जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
प्याज जैसी फसलों के लिए वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बेहतर Storage Infrastructure के माध्यम से किसानों को तुरंत बिक्री की मजबूरी से राहत मिल सकती है और वे बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बिक्री का निर्णय ले सकते हैं।
ICAR-CIAE की Multi-Module तकनीक इस दिशा में एक उपयोगी उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह तकनीक दिखाती है कि कृषि अभियांत्रिकी और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार तक उसकी उपलब्धता को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
छोटे और मध्यम किसानों के लिए क्या हैं संभावनाएं?
भारत में प्याज उत्पादकों का एक बड़ा हिस्सा छोटे और मध्यम किसान हैं। इनके लिए फसल का उचित मूल्य प्राप्त करना और भंडारण लागत को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण होता है।
यदि आधुनिक भंडारण तकनीक किसानों तक किफायती दरों पर पहुंचती है, तो इसका लाभ व्यक्तिगत किसानों के साथ-साथ Farmer Producer Organizations (FPOs), किसान सहकारी समितियों और ग्रामीण कृषि उद्यमों को भी मिल सकता है।
9 टन क्षमता वाली इस प्रणाली को सामूहिक भंडारण मॉडल के रूप में अपनाने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक क्षेत्र के कई किसान मिलकर अपनी प्याज की उपज को एक साझा भंडारण सुविधा में रख सकते हैं।
इससे अलग-अलग किसानों को आधुनिक Storage Infrastructure का लाभ उठाने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, इसके लिए तकनीक की स्थापना लागत, बिजली की उपलब्धता, संचालन खर्च, रखरखाव और किसानों की स्थानीय आवश्यकताओं का मूल्यांकन करना जरूरी होगा।
यदि इन पहलुओं को ध्यान में रखकर इस तकनीक का विस्तार किया जाता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं का नेटवर्क विकसित करने में मदद मिल सकती है।
बेहतर भंडारण से बढ़ सकती है किसानों की आमदनी
ICAR-CIAE, भोपाल द्वारा विकसित Multi-Module Onion Storage System भारतीय कृषि में Post-Harvest Loss Reduction की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल है। 9 टन क्षमता, एक टन के अलग-अलग मॉड्यूल और Forced-Air Ventilation जैसी विशेषताओं से युक्त यह प्रणाली प्याज के वैज्ञानिक भंडारण का विकल्प प्रस्तुत करती है।
इसके उपलब्ध परिणामों में पारंपरिक भंडारण की तुलना में कुल नुकसान 51.76 प्रतिशत से घटकर 14.07 प्रतिशत होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वहीं, 72.81 प्रतिशत कम नुकसान और रिपोर्टेड बाजार मूल्य परिदृश्य के अनुसार प्रति टन ₹20,320 का शुद्ध आर्थिक लाभ इसकी आर्थिक संभावनाओं को सामने लाता है।
आज आवश्यकता केवल अधिक फसल उत्पादन करने की नहीं, बल्कि किसानों की उपज को खेत से बाजार तक सुरक्षित पहुंचाने की भी है। इसके लिए आधुनिक Storage Technology, वैज्ञानिक Post-Harvest Management और ग्रामीण स्तर पर बेहतर बुनियादी ढांचे का विकास जरूरी है।
ICAR-CIAE की यह पहल इस दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है। यदि ऐसी तकनीकों को किसानों, FPOs और ग्रामीण कृषि उद्यमों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाता है, तो प्याज की बर्बादी कम करने, बिक्री योग्य उपज बढ़ाने और किसानों की आय को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।

