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Home सफ़लता की कहानी

Sugarcane Price: महाराष्ट्र में किसानों के आगे झुकीं चीनी मिलें! गन्ना भुगतान पर हुआ बड़ा समझौता

Sugarcane Price: Sugar mills in Maharashtra bow to farmers! Major agreement reached on sugarcane payments

Fiza by Fiza
November 6, 2026
in सफ़लता की कहानी
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Sugarcane Price: महाराष्ट्र के गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पश्चिमी महाराष्ट्र में गन्ने के उचित दाम और भुगतान को लेकर पिछले 61 घंटे से चल रहा किसानों का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। किसान संगठनों और चीनी मिल मालिकों के बीच लंबी बातचीत के बाद नए Sugarcane Payment Formula पर सहमति बन गई है। इसके तहत किसानों को पहली किस्त में 3,900 रुपये प्रति टन मिलेंगे, जबकि शेष भुगतान अलग-अलग शर्तों के अनुसार किया जाएगा। कुल भुगतान 4,200 रुपये प्रति टन तक पहुंच सकता है।

पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी ने 5 नवंबर की देर रात आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। इसके बाद पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगा जाम हटने लगा। इस फैसले से गन्ना किसानों के साथ-साथ चीनी मिलों, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और स्थानीय व्यापारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

61 घंटे तक क्यों चला किसानों का आंदोलन?

महाराष्ट्र Sugarcane Price के कोल्हापुर, सांगली, सतारा और आसपास के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में लंबे समय से गन्ने की कीमत को लेकर असंतोष बना हुआ था। किसानों का कहना था कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन गन्ने का भुगतान उनकी आर्थिक जरूरतों के अनुसार नहीं हो पा रहा है।

खेत तैयार करने से लेकर बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी, कटाई और गन्ने की ढुलाई तक किसानों को भारी खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में यदि चीनी मिलों से उचित कीमत और समय पर भुगतान नहीं मिलता, तो अगली फसल की तैयारी प्रभावित होती है।

इसी समस्या को लेकर राजू शेट्टी के नेतृत्व में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने आंदोलन तेज किया। किसानों ने कोल्हापुर के पास किणी टोल नाके पर पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया।

आंदोलन का असर यातायात पर भी पड़ा। कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गईं और दूध, सब्जियों तथा अन्य जरूरी सामान की आवाजाही प्रभावित हुई। लगातार विरोध और बातचीत के बाद आखिरकार चीनी मिल मालिकों ने संशोधित भुगतान प्रस्ताव रखा।

Sugarcane Payment Formula: किसानों को कैसे मिलेंगे 4,200 रुपये प्रति टन?

नए समझौते में गन्ने की पूरी कीमत एक साथ देने के बजाय चरणबद्ध भुगतान की व्यवस्था की गई है।

भुगतान का चरण प्रति टन राशि
पहली किस्त ₹3,900
पेराई सत्र समाप्त होने पर अतिरिक्त भुगतान ₹100
चीनी की कीमत से जुड़ा सशर्त भुगतान ₹200
संभावित कुल भुगतान ₹4,200

समझौते के अनुसार किसानों को पहली किस्त के रूप में 3,900 रुपये प्रति टन मिलेंगे। पेराई सत्र समाप्त होने के बाद 100 रुपये प्रति टन अतिरिक्त दिए जाएंगे।

अंतिम 200 रुपये का भुगतान चीनी के बाजार भाव से जुड़ी शर्त पर निर्भर करेगा। रिपोर्टों के अनुसार, चीनी की कीमत लगभग 4,500 रुपये प्रति क्विंटल यानी 45 रुपये प्रति किलो के स्तर पर रहने या पहुंचने से यह भुगतान जुड़ा है। इसलिए 4,200 रुपये प्रति टन को सभी किसानों के लिए तत्काल मिलने वाली गारंटीकृत रकम नहीं समझना चाहिए।

राजू शेट्टी ने क्यों स्वीकार किया नया प्रस्ताव?

स्वाभिमानी शेतकरी संगठन की मांग थी कि किसानों को गन्ने की अधिक कीमत का भुगतान शुरुआती किस्त में ही मिले। संगठन ने पहले 4,200 रुपये प्रति टन के भुगतान पर जोर दिया था। बातचीत के दौरान एकमुश्त भुगतान को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

चीनी मिल मालिकों ने वित्तीय परिस्थितियों और बाजार भाव को ध्यान में रखते हुए किस्तों में भुगतान का प्रस्ताव दिया। कई दौर की बातचीत के बाद संगठन ने इसे स्वीकार कर लिया।

राजू शेट्टी के अनुसार, लंबे समय तक आंदोलन जारी रहने से आम नागरिकों और यात्रियों की परेशानियां बढ़ रही थीं। उन्होंने किसानों से चर्चा करने के बाद आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया।

हालांकि, किस्तों में भुगतान की व्यवस्था से कुछ किसानों में असंतोष भी है, क्योंकि उन्हें अपनी पूरी रकम प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

Sugarcane Farmers को नए समझौते से कितना फायदा होगा?

नए Sugarcane Price Agreement को एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी किसान ने चीनी मिल को 100 टन गन्ना बेचा है। प्रस्तावित दर के अनुसार उसकी कमाई इस प्रकार होगी:

  • पहली किस्त में 3,90,000 रुपये।

  • पेराई सत्र समाप्त होने पर 10,000 रुपये अतिरिक्त।

  • निर्धारित बाजार शर्त पूरी होने पर 20,000 रुपये और।

  • कुल संभावित भुगतान 4,20,000 रुपये।

इस प्रकार किसान को प्रति टन 4,200 रुपये तक मिलने की संभावना है। हालांकि, अंतिम भुगतान की रकम बाजार की निर्धारित शर्तों और मिल द्वारा समझौते के पालन पर निर्भर करेगी। यह उदाहरण केवल भुगतान की गणना समझाने के लिए है। इसमें कटाई, ढुलाई या अन्य संभावित खर्चों का समायोजन नहीं किया गया है।

चीनी के भाव बढ़ने पर किसानों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ

इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू चीनी की बाजार कीमत से जुड़ा है। उद्योग से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, यदि चीनी की कीमत 4,500 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर जाती है, तो बढ़े हुए मूल्य से प्राप्त अतिरिक्त राशि में किसानों की 70 प्रतिशत और चीनी मिल मालिकों की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने की बात भी सामने आई है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को चीनी उद्योग में कीमतों की तेजी का कुछ लाभ देना है। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा भुगतान की शर्तें लागू होने और बाजार भाव बढ़ने पर ही सामने आएगा।

FRP और गन्ने की नई कीमत में क्या अंतर है?

गन्ना किसानों के लिए Fair and Remunerative Price (FRP) समझना जरूरी है।FRP केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य है। यह निर्धारित आधार चीनी रिकवरी के अनुसार समायोजित किया जाता है।2026-27 के पेराई सत्र के लिए केंद्र सरकार ने 10.25 प्रतिशत मूल चीनी रिकवरी पर 3,650 रुपये प्रति टन FRP निर्धारित की है।

इसके मुकाबले महाराष्ट्र में हुआ नया समझौता स्थानीय स्तर पर चीनी मिलों और किसान संगठन के बीच भुगतान की व्यवस्था है।इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे महाराष्ट्र में सभी चीनी मिलों के लिए 4,200 रुपये प्रति टन की एक समान सरकारी दर लागू हो गई है। किसानों को अपनी संबंधित चीनी मिल से वास्तविक दर और भुगतान की समयसीमा की पुष्टि करनी चाहिए।

कोल्हापुर, सांगली और सतारा के किसानों पर क्या पड़ेगा असर?

महाराष्ट्र के पश्चिमी क्षेत्र में गन्ना एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है। हजारों किसान परिवारों की आमदनी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीनी उद्योग से जुड़ी हुई है।आंदोलन के कारण गन्ने की ढुलाई और पेराई सत्र प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी। अब समझौते के बाद चीनी मिलों में कामकाज और गन्ने की आपूर्ति को गति मिलने की उम्मीद है।हालांकि, यह भी जरूरी है कि संबंधित जिलों की चीनी मिलें भुगतान की शर्तों को स्पष्ट करें।रिपोर्टों के मुताबिक, राजू शेट्टी ने सांगली और सतारा में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू कराने की आवश्यकता जताई है।

सरकार के सामने अभी भी कई चुनौतियां

गन्ना भुगतान विवाद केवल फसल के दाम तक सीमित नहीं है। किसानों की शिकायतों में गन्ने की तौल, चीनी रिकवरी की गणना, परिवहन खर्च और भुगतान में देरी जैसी समस्याएं भी शामिल हैं।

12 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों की समस्याओं पर एक उच्चस्तरीय संयुक्त समिति बनाने की घोषणा की थी। इस समिति में केंद्र और राज्य सरकार, किसान संगठन, चीनी मिल प्रतिनिधियों तथा वैज्ञानिक विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई थी। समिति का उद्देश्य गन्ने की रिकवरी जांच, तौल प्रणाली और भुगतान संबंधी विवादों के स्थायी समाधान के लिए सुझाव देना है।

किसानों को अब किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

नए समझौते के बाद गन्ना बेचने वाले किसानों को अपनी मिल से तीनों किस्तों के भुगतान की समयसीमा और शर्तें लिखित रूप में जाननी चाहिए। गन्ना आपूर्ति की रसीद, तौल पर्ची और बैंक भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना भी जरूरी है। यदि भुगतान में अंतर दिखाई देता है, तो किसान संबंधित चीनी मिल के गन्ना विभाग या जिला प्रशासन से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। खासकर अंतिम 200 रुपये प्रति टन के भुगतान के लिए चीनी की बाजार कीमत से जुड़ी शर्त को अच्छी तरह समझना जरूरी है।

आंदोलन खत्म, अब समय पर भुगतान की परीक्षा

महाराष्ट्र में 61 घंटे तक चले गन्ना किसानों के आंदोलन का समाप्त होना किसान संगठनों और चीनी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। नए Sugarcane Payment Formula के तहत किसानों को 3,900 रुपये प्रति टन की शुरुआती किस्त और बाद में अतिरिक्त राशि मिलने का रास्ता खुला है।

लेकिन इस समझौते की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब चीनी मिलें तय समय पर किसानों को पूरा देय भुगतान करेंगी। किसानों के लिए केवल ऊंची कीमत घोषित होना पर्याप्त नहीं है। समय पर पैसा मिलना भी उतना ही जरूरी है, ताकि वे बिना आर्थिक दबाव के अगली फसल की तैयारी कर सकें।

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