भारत में खेती करने वाले किसानों को अक्सर एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। जब फसल की पैदावार ज्यादा होती है तो बाजार में कीमतें गिर जाती हैं और किसानों को अपनी उपज बहुत कम दाम पर बेचनी पड़ती है। खासकर टमाटर, प्याज और आलू जैसी फसलों में यह समस्या हर साल देखने को मिलती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने “ऑपरेशन ग्रीन्स योजना” Operation Greens Scheme की शुरुआत की।यह योजना किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य दिलाने, भंडारण की सुविधा बढ़ाने और फसल खराब होने से बचाने के उद्देश्य से बनाई गई है। आज यह योजना सिर्फ TOP यानी Tomato, Onion और Potato तक सीमित नहीं रही बल्कि कई फल और सब्जियों तक इसका विस्तार किया जा चुका है।
ऑपरेशन ग्रीन्स योजना क्या है?
ऑपरेशन ग्रीन्स योजना (Operation Greens Scheme) केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण कृषि और फूड प्रोसेसिंग योजना है, जिसे वर्ष 2018-19 के बजट में शुरू किया गया था। इस योजना को Ministry of Food Processing Industries यानी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा लागू किया गया।
शुरुआत में इसका मुख्य उद्देश्य टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों को स्थिर रखना था ताकि किसानों को नुकसान न हो और उपभोक्ताओं को भी उचित कीमत पर सब्जियां मिल सकें। बाद में “आत्मनिर्भर भारत अभियान” के दौरान इस योजना का दायरा बढ़ाकर सभी फलों और सब्जियों तक कर दिया गया।
ऑपरेशन ग्रीन्स योजना की शुरुआत क्यों हुई?
भारत में हर साल लाखों टन फल और सब्जियां खराब हो जाती हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है:
- कोल्ड स्टोरेज की कमी
- सही परिवहन व्यवस्था का अभाव
- किसानों को बाजार से सीधा जुड़ाव न होना
- फसल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
जब किसी फसल का उत्पादन बढ़ जाता है तो किसान को लागत से भी कम कीमत मिलती है। दूसरी ओर शहरों में वही उत्पाद महंगे दाम पर बिकते हैं। सरकार ने इस अंतर को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ऑपरेशन ग्रीन्स योजना शुरू की।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के कई बड़े उद्देश्य हैं:
1. किसानों को बेहतर दाम दिलाना
योजना का लक्ष्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है ताकि उन्हें मजबूरी में फसल सस्ते दाम पर न बेचनी पड़े।
2. फसल खराब होने से बचाना
कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और आधुनिक परिवहन की मदद से फलों और सब्जियों की बर्बादी कम करना।
3. फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना
फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए किसानों की उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना और वैल्यू एडिशन करना।
4. किसानों को बाजार से जोड़ना
FPOs और कृषि समूहों को सीधे बाजार और रिटेल चेन से जोड़ना।
5. कीमतों को स्थिर रखना
उत्पादन ज्यादा होने पर कीमतें गिरने से रोकना और उपभोक्ताओं को भी राहत देना।
TOP से TOTAL तक का सफर
शुरुआत में यह योजना केवल तीन फसलों पर लागू थी:
- Tomato (टमाटर)
- Onion (प्याज)
- Potato (आलू)
लेकिन कोरोना काल में सप्लाई चेन प्रभावित होने के बाद सरकार ने इसे सभी फल और सब्जियों तक बढ़ा दिया। इस बदलाव को “TOP to TOTAL” नाम दिया गया।
किसानों को इस योजना से क्या फायदा मिलता है?
1. परिवहन पर सब्सिडी
सरकार किसानों और FPOs को फसल को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए 50% तक की सब्सिडी देती है।
2. स्टोरेज सुविधा पर सहायता
फसल को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज या वेयरहाउस किराए पर लेने पर भी सहायता मिलती है।
3. फसल खराब होने का नुकसान कम
सही स्टोरेज और प्रोसेसिंग से किसानों की उपज लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
4. बाजार तक पहुंच
किसानों को सीधे मंडी, प्रोसेसिंग कंपनियों और रिटेल चैन से जोड़ा जाता है।
5. FPOs को मजबूती
सरकार Farmer Producer Organizations यानी FPOs को मजबूत बनाने पर भी जोर देती है।
कौन-कौन किसान योजना का लाभ ले सकते हैं?
इस योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत किसान ही नहीं बल्कि कई अन्य संस्थाएं भी ले सकती हैं:
- किसान
- किसान समूह
- FPO/FPC
- सहकारी समितियां
- फूड प्रोसेसिंग कंपनियां
- निर्यातक
- खुदरा विक्रेता
- राज्य कृषि विपणन संघ
किन राज्यों में किसान इसका लाभ उठा सकते हैं?
ऑपरेशन ग्रीन्स योजना पूरे भारत में लागू है। जिन राज्यों में फल और सब्जियों का उत्पादन अधिक होता है, वहां इसका प्रभाव ज्यादा देखने को मिलता है। इनमें प्रमुख राज्य हैं:
- उत्तर प्रदेश
- महाराष्ट्र
- मध्य प्रदेश
- बिहार
- कर्नाटक
- गुजरात
- पंजाब
- हरियाणा
- पश्चिम बंगाल
- आंध्र प्रदेश
- तमिलनाडु
- राजस्थान
- हिमाचल प्रदेश
- ओडिशा
इन राज्यों के किसान टमाटर, प्याज, आलू, आम, केला, सब्जियां और अन्य बागवानी फसलों के लिए योजना का लाभ उठा रहे हैं।
योजना के तहत कितनी सब्सिडी मिलती है?
सरकार योजना के तहत कई प्रकार की आर्थिक सहायता देती है:
| सहायता का प्रकार | सब्सिडी |
|---|---|
| परिवहन | 50% तक |
| स्टोरेज किराया | 50% तक |
| वैल्यू चेन प्रोजेक्ट | परियोजना लागत का बड़ा हिस्सा |
| FPO समर्थन | विशेष अनुदान |
योजना के लिए जरूरी दस्तावेज
ऑपरेशन ग्रीन्स योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं:
- आधार कार्ड
- मोबाइल नंबर
- बैंक खाता विवरण
- भूमि संबंधित दस्तावेज
- फसल विवरण
- पासपोर्ट साइज फोटो
- पैन कार्ड (यदि लागू हो)
- FPO पंजीकरण प्रमाणपत्र
- परिवहन और स्टोरेज बिल
योजना में आवेदन कैसे करें?
किसान और FPOs ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया काफी आसान है।
आवेदन प्रक्रिया
- सबसे पहले खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- योजना के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें।
- जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
- फसल और परिवहन/स्टोरेज से जुड़ी जानकारी भरें।
- आवेदन सबमिट करें।
- सत्यापन के बाद सब्सिडी जारी की जाती है।
योजना में न्यूनतम मात्रा कितनी जरूरी है?
योजना के तहत लाभ लेने के लिए न्यूनतम मात्रा निर्धारित की गई है:
| श्रेणी | न्यूनतम मात्रा |
|---|---|
| व्यक्तिगत किसान | 50 MT |
| FPO/किसान समूह | 100 MT |
| प्रोसेसर/निर्यातक | 500 MT |
| रिटेलर | 1000 MT |
पिछले 5 सालों में किसानों को कितना फायदा मिला?
पिछले कुछ वर्षों में ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के जरिए हजारों किसानों और FPOs को लाभ मिला है। सरकार ने फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए हैं।
कोरोना महामारी के दौरान इस योजना ने किसानों को बड़ी राहत दी क्योंकि उस समय परिवहन और बाजार व्यवस्था प्रभावित थी। “TOP to TOTAL” विस्तार के बाद फल और सब्जी उत्पादक किसानों को विशेष सहायता मिली।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
आज के समय में केवल फसल उगाना ही काफी नहीं है। किसानों को सही बाजार, भंडारण और प्रोसेसिंग की भी जरूरत है। ऑपरेशन ग्रीन्स योजना इन सभी समस्याओं का समाधान देने की कोशिश करती है।
इस योजना के जरिए:
- किसानों की आय बढ़ सकती है
- फसल बर्बादी कम हो सकती है
- गांवों में रोजगार बढ़ सकता है
- कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक आ सकती है
- छोटे किसान भी बाजार से जुड़ सकते हैं
FPOs की भूमिका क्यों बढ़ रही है?
सरकार अब व्यक्तिगत किसानों की बजाय FPO मॉडल को ज्यादा बढ़ावा दे रही है। FPO के जरिए किसान समूह बनाकर:
- बड़ी मात्रा में उत्पाद बेच सकते हैं
- बेहतर कीमत पा सकते हैं
- सीधे कंपनियों से जुड़ सकते हैं
- सरकारी योजनाओं का ज्यादा लाभ ले सकते हैं
ऑपरेशन ग्रीन्स योजना में भी FPOs को विशेष महत्व दिया गया है।
योजना से जुड़ी चुनौतियां
हालांकि योजना किसानों के लिए फायदेमंद है लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं:
- कई किसानों को योजना की जानकारी नहीं
- ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की समस्या
- छोटे किसानों के लिए न्यूनतम मात्रा जुटाना कठिन
- कई जगह कोल्ड स्टोरेज की कमी
- आवेदन प्रक्रिया को लेकर जागरूकता कम
सरकार आगे क्या कर रही है?
सरकार अब फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को तेजी से बढ़ावा दे रही है। इसके तहत:
- नए कोल्ड स्टोरेज बनाए जा रहे हैं
- ग्रामीण लॉजिस्टिक्स सुधारी जा रही है
- डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए जा रहे हैं
- किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत किया जा रहा है
निष्कर्ष
ऑपरेशन ग्रीन्स योजना Operation Greens Scheme भारत के किसानों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। यह योजना केवल सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है बल्कि किसानों को आधुनिक कृषि बाजार से जोड़ने का काम भी कर रही है।
टमाटर, प्याज और आलू से शुरू हुई यह योजना अब देशभर के फल और सब्जी उत्पादक किसानों के लिए मददगार साबित हो रही है। अगर किसान सही जानकारी के साथ योजना का लाभ लें, तो वे अपनी फसल का बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं और नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
आज के समय में जब खेती में लागत बढ़ रही है, ऐसे में ऑपरेशन ग्रीन्स जैसी योजनाएं किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

