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Home कृषि समाचार

Panchagavya Farming: फसल में कब और कितना इस्तेमाल करें? जानें बनाने और उपयोग करने का सही तरीका

Panchagavya Farming: When and in what quantities should it be used on crops? Learn the correct method of preparation and application.

Fiza by Fiza
August 31, 2026
in कृषि समाचार
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Panchagavya Farming

Panchagavya Farming

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Panchagavya Farming: आज खेती में किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाए रखने के तरीकों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इसी कारण जैविक और प्राकृतिक खेती से जुड़े तरीकों की चर्चा बढ़ी है। इनमें पंचगव्य (Panchagavya) का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। पंचगव्य गाय से प्राप्त पांच पदार्थों से तैयार किया जाने वाला पारंपरिक मिश्रण है, जिसका इस्तेमाल खेती में जैविक इनपुट के रूप में किया जाता है।

लेकिन केवल पंचगव्य तैयार कर लेना पर्याप्त नहीं है। किसान के लिए यह समझना भी जरूरी है कि पंचगव्य का फसल में इस्तेमाल कब करें, कितनी मात्रा में करें और इसे पौधों पर किस तरीके से दें। गलत मात्रा या बिना सोचे-समझे प्रयोग करने पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकते हैं।

इस लेख में पंचगव्य क्या है, इसे कैसे तैयार किया जाता है, अलग-अलग फसलों में इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है और इस्तेमाल के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसे विस्तार से समझेंगे।

Panchagavya क्या है?

पंचगव्य एक पारंपरिक जैविक मिश्रण है। इसके नाम में ही इसकी मूल संरचना छिपी है। “पंच” का अर्थ पांच और “गव्य” का संबंध गाय से प्राप्त पदार्थों से है। सामान्य रूप से इसमें गाय का गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी मूल घटक माने जाते हैं।

खेती के लिए पंचगव्य तैयार करते समय इन मूल पदार्थों के अलावा कुछ विधियों में गुड़, केला, नारियल पानी या अन्य सामग्री भी मिलाई जाती है। इनका उद्देश्य मिश्रण में होने वाली किण्वन यानी fermentation की प्रक्रिया को बढ़ावा देना होता है।

पंचगव्य को खेत में सीधे रासायनिक उर्वरक के विकल्प के रूप में देखना सही नहीं होगा। इसे जैविक खेती की व्यापक पोषण और फसल प्रबंधन व्यवस्था के एक हिस्से के रूप में समझना बेहतर है।

खेती में पंचगव्य का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

Panchagavya Farming का उद्देश्य केवल पौधों को पोषण देना नहीं है। किसान इसे पौधों की सामान्य वृद्धि और जैविक खेती के प्रबंधन में सहायक इनपुट के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

पंचगव्य में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न पदार्थ fermentation के दौरान एक सक्रिय मिश्रण तैयार करते हैं। इसका उपयोग पत्तियों पर स्प्रे, मिट्टी में प्रयोग और कुछ परिस्थितियों में बीज या रोपाई सामग्री के उपचार के लिए किया जाता है।

इसके इस्तेमाल से मिलने वाले परिणाम फसल, मिट्टी, मौसम, पंचगव्य तैयार करने की विधि और प्रयोग की मात्रा जैसे कई कारकों पर निर्भर कर सकते हैं। इसलिए किसी एक मात्रा को हर फसल और हर खेत के लिए निश्चित मानना उचित नहीं है।

पंचगव्य बनाने की विधि | Panchagavya Preparation Method

पंचगव्य तैयार करने की कई विधियां प्रचलित हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में सामग्री तथा उसकी मात्रा में अंतर हो सकता है। एक सामान्य विधि में पहले ताजा गाय के गोबर और घी को अच्छी तरह मिलाया जाता है।

इस मिश्रण को कुछ दिनों तक रखा जाता है और नियमित रूप से मिलाया जाता है। इसके बाद इसमें गोमूत्र और पानी मिलाया जा सकता है। आगे की fermentation प्रक्रिया में दूध, दही, गुड़, पके केले या नारियल पानी जैसी सामग्री शामिल करने वाली विधियां भी प्रचलित हैं।

मिश्रण को ऐसे पात्र में रखना चाहिए जिसमें रासायनिक प्रतिक्रिया का जोखिम कम हो। आमतौर पर साफ प्लास्टिक या मिट्टी का पात्र इस्तेमाल किया जा सकता है। पात्र को तेज धूप में रखने के बजाय छायादार और हवादार स्थान पर रखना बेहतर माना जाता है। मिश्रण को नियमित रूप से चलाना जरूरी है। इससे fermentation समान रूप से होने में मदद मिलती है।

अलग-अलग Panchagavya Preparation विधियों में fermentation का समय अलग हो सकता है। इसलिए किसान को अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र या विश्वसनीय कृषि संस्थान द्वारा सुझाई गई विधि और मात्रा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

पंचगव्य तैयार करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

पंचगव्य की गुणवत्ता उसकी सामग्री और तैयारी के तरीके पर काफी निर्भर करती है। इसके लिए संभव हो तो ताजी और साफ सामग्री इस्तेमाल करें। जिस ड्रम या पात्र में पंचगव्य बनाया जा रहा है, उसमें पहले से किसी हानिकारक रसायन या कीटनाशक का अवशेष नहीं होना चाहिए। मिश्रण को बारिश के पानी से भी बचाना चाहिए क्योंकि अतिरिक्त पानी इसकी सांद्रता बदल सकता है।

पंचगव्य को पूरी तरह एयरटाइट बंद करना भी हर विधि में उचित नहीं होता। जिस fermentation method का पालन किया जा रहा है, उसके अनुसार पात्र को ढकने और हवा के आवागमन की व्यवस्था करनी चाहिए।

अगर तैयार मिश्रण से असामान्य सड़न, फफूंद या ऐसी स्थिति दिखाई दे जो सामान्य fermentation से अलग लगे, तो उसे सीधे फसल पर डालने से पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होगा।

फसल में पंचगव्य का इस्तेमाल कब करें?

यह Panchagavya Uses in Farming से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। पंचगव्य का इस्तेमाल फसल की अवस्था के अनुसार किया जा सकता है।

आमतौर पर पौधों की सक्रिय बढ़वार वाली अवस्था में इसका प्रयोग किया जाता है। रोपाई के बाद जब पौधे खेत में अच्छी तरह स्थापित हो जाएं, तब आवश्यकता और फसल के अनुसार इसका स्प्रे किया जा सकता है।

इसके बाद वनस्पतिक वृद्धि यानी vegetative growth के दौरान इसका प्रयोग किया जा सकता है। कुछ फसलों में फूल आने से पहले या फल बनने की अवस्था के आसपास भी पंचगव्य का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसकी मात्रा और समय फसल के अनुसार तय करना जरूरी है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान बिना फसल-विशिष्ट सलाह के लगातार पंचगव्य का छिड़काव न करें।

पंचगव्य का स्प्रे कितनी मात्रा में करें? | Panchagavya Spray Dosage

पंचगव्य का foliar spray करने के लिए इसे सामान्यतः पानी में घोलकर इस्तेमाल किया जाता है। खेती से जुड़े कई प्रचलित तरीकों में लगभग 3 प्रतिशत घोल का उल्लेख मिलता है। इसका अर्थ है कि लगभग 3 लीटर पंचगव्य को 100 लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार किया जाए। इसी अनुपात को छोटी मात्रा में समझें तो करीब 30 मिलीलीटर पंचगव्य प्रति लीटर पानी होता है।

हालांकि इसे हर परिस्थिति के लिए तय मात्रा नहीं माना जाना चाहिए। Panchagavya spray dosage for crops फसल की किस्म, पौधे की उम्र, मौसम, स्प्रे के तरीके और स्थानीय कृषि सिफारिशों के अनुसार बदल सकती है।

पहली बार प्रयोग करने वाले किसान पूरी फसल पर छिड़काव करने से पहले छोटे क्षेत्र में परीक्षण कर सकते हैं। इससे यह देखा जा सकता है कि पौधों पर किसी तरह का प्रतिकूल असर तो नहीं हो रहा।

पंचगव्य स्प्रे करने का सही समय क्या है?

किसी भी foliar spray की तरह पंचगव्य का छिड़काव भी बहुत तेज धूप और अधिक तापमान के समय करने से बचना चाहिए।सुबह या शाम का समय सामान्यतः बेहतर रहता है। इस समय तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है और घोल पत्तियों पर कुछ समय तक बना रह सकता है। बारिश होने की संभावना हो तो स्प्रे करने से बचें। छिड़काव के तुरंत बाद बारिश होने पर घोल पत्तियों से बह सकता है।तेज हवा में भी स्प्रे करना उचित नहीं है क्योंकि इससे घोल समान रूप से पौधों तक नहीं पहुंचता और आसपास के क्षेत्र में फैल सकता है।

Panchagavya Foliar Spray कैसे करें?

पंचगव्य को पत्तियों पर देने से पहले घोल को अच्छी तरह छानना महत्वपूर्ण है। बिना छाना हुआ मिश्रण स्प्रे मशीन की नोजल को बंद कर सकता है। छानने के लिए साफ कपड़े या उपयुक्त फिल्टर का उपयोग किया जा सकता है। इसके बाद निर्धारित मात्रा में पंचगव्य को साफ पानी में मिलाएं।

घोल को अच्छी तरह मिलाने के बाद पौधों की पत्तियों पर समान रूप से स्प्रे करें। अत्यधिक मात्रा में इतना घोल न डालें कि वह पत्तियों से लगातार टपकने लगे। अगर किसी दूसरी जैविक या रासायनिक सामग्री के साथ tank mixing करनी हो तो पहले compatibility की जानकारी लेना जरूरी है। बिना जानकारी कई पदार्थों को एक ही टैंक में मिलाना उचित नहीं है।

मिट्टी में पंचगव्य का इस्तेमाल कैसे करें?

पंचगव्य का प्रयोग केवल foliar spray के रूप में ही नहीं किया जाता। कुछ कृषि प्रणालियों में इसे सिंचाई के पानी या मिट्टी में भी दिया जाता है। हालांकि soil application की मात्रा खेत, फसल और सिंचाई व्यवस्था के अनुसार काफी बदल सकती है। इसलिए Panchagavya application method in agriculture चुनते समय स्थानीय कृषि सिफारिशों का पालन करना अधिक सुरक्षित रहता है।

ड्रिप सिंचाई में किसी भी जैविक fermentation product को इस्तेमाल करने से पहले उसे बहुत अच्छी तरह फिल्टर करना जरूरी है। अन्यथा ड्रिप लाइन या emitter में blockage हो सकता है।

सब्जियों में पंचगव्य का उपयोग | Panchagavya for Vegetable Crops

टमाटर, बैंगन, मिर्च, भिंडी, लौकी और अन्य सब्जियों की खेती में किसान पंचगव्य जैसे जैविक इनपुट का इस्तेमाल कर सकते हैं। सब्जी की फसल में पौधे की अवस्था का ध्यान रखना विशेष रूप से जरूरी है। शुरुआती अवस्था में बहुत अधिक सांद्र घोल देने से बचना चाहिए।

पहली बार Panchagavya for vegetable crops का प्रयोग करते समय छोटे हिस्से में परीक्षण करना समझदारी है। पौधों की प्रतिक्रिया सामान्य रहने पर कृषि विशेषज्ञ द्वारा सुझाए गए अंतराल के अनुसार आगे उपयोग किया जा सकता है।

पंचगव्य को सब्जियों की संपूर्ण पोषण आवश्यकता का अकेला स्रोत न मानें। अच्छी उपज के लिए मिट्टी की जांच, जैविक खाद, आवश्यक पोषक तत्व, सिंचाई और कीट-रोग प्रबंधन सभी महत्वपूर्ण हैं।

धान और गेहूं में पंचगव्य का उपयोग

धान और गेहूं जैसी अनाज फसलों में भी पंचगव्य का उपयोग जैविक खेती के अंतर्गत किया जाता है। धान में पौध स्थापना और आगे की बढ़वार की अवस्था के अनुसार इसके इस्तेमाल पर विचार किया जा सकता है। गेहूं में भी vegetative growth के दौरान foliar application एक विकल्प हो सकता है।

लेकिन अनाज की फसलों में बड़े क्षेत्र पर स्प्रे करने से पहले लागत, उपलब्ध श्रम, पानी की मात्रा और वास्तविक कृषि लाभ का आकलन करना जरूरी है।

यदि किसान पहली बार प्रयोग कर रहा है तो पूरे खेत की बजाय छोटे plot में comparative trial करना उपयोगी हो सकता है। इससे पंचगव्य वाले और बिना पंचगव्य वाले हिस्से की वृद्धि तथा उपज की तुलना की जा सकती है।

फलों की फसल में Panchagavya का उपयोग

फलदार पौधों में पंचगव्य का प्रयोग करते समय पौधे की उम्र और growth stage का ध्यान रखना चाहिए। आम, अमरूद, पपीता, केला और अन्य फल फसलों में अलग-अलग पोषण प्रबंधन की जरूरत होती है। इसलिए सभी फलदार पौधों के लिए एक ही मात्रा और एक ही schedule अपनाना सही नहीं है।

फूल आने और फल बनने की अवस्था संवेदनशील हो सकती है। ऐसी अवस्था में किसी भी नए घोल को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने से पहले फसल-विशिष्ट सिफारिश जरूर देखें।

बीज उपचार में पंचगव्य का इस्तेमाल

कुछ प्राकृतिक और जैविक खेती प्रणालियों में पंचगव्य के पतले घोल का इस्तेमाल seed treatment या planting material treatment में भी किया जाता है। लेकिन बीज उपचार की अवधि और घोल की सांद्रता फसल के प्रकार के अनुसार बदल सकती है। धान, गेहूं, दलहन और सब्जियों के बीज आकार, संरचना और अंकुरण व्यवहार में अलग होते हैं।

इसलिए सभी बीजों को एक ही समय तक पंचगव्य में भिगोना उचित नहीं है। प्रमाणित बीजों पर पहले से किसी fungicide या अन्य treatment की coating हो तो अतिरिक्त उपचार करने से पहले बीज के निर्देशों को देखना चाहिए।

Panchagavya Benefits in Organic Farming

Panchagavya benefits in organic farming को समझते समय इसे किसी चमत्कारी उत्पाद के रूप में नहीं देखना चाहिए। खेती में इसका महत्व एक जैविक farm input के रूप में है।

पंचगव्य का उपयोग पौधों की वृद्धि के प्रबंधन में सहायक हो सकता है। जैविक खेती करने वाले किसान इसे अपने nutrient management program के एक हिस्से के रूप में शामिल कर सकते हैं।

इसका एक व्यावहारिक फायदा यह भी है कि इसे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कुछ सामग्रियों से तैयार किया जा सकता है। इससे किसान बाजार से खरीदे जाने वाले कुछ बाहरी inputs पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर सकते हैं।

लेकिन परिणाम खेत और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी निश्चित प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ने जैसे दावों को स्थानीय परीक्षण या विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण के बिना स्वीकार नहीं करना चाहिए।

पंचगव्य और जैविक खाद में क्या अंतर है?

कई किसान Panchagavya को organic manure समझ लेते हैं, जबकि दोनों का इस्तेमाल अलग तरीके से किया जाता है। गोबर की सड़ी खाद, कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट जैसी जैविक खादें सामान्यतः बड़ी मात्रा में मिट्टी में मिलाई जाती हैं। इनसे मिट्टी में organic matter और पोषक तत्व जोड़ने में मदद मिलती है। इसके विपरीत पंचगव्य एक fermented liquid preparation है, जिसे अपेक्षाकृत कम मात्रा में पानी के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए Panchagavya Fertilizer शब्द ऑनलाइन काफी इस्तेमाल होता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसे एक fermented bio-input के रूप में समझना अधिक उपयोगी है।

क्या पंचगव्य रासायनिक खाद को पूरी तरह बंद कर सकता है?

यह निर्णय केवल पंचगव्य के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए। किसी खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर या सूक्ष्म पोषक तत्वों की कितनी जरूरत है, यह मिट्टी और फसल के आधार पर बदलता है। पंचगव्य की थोड़ी मात्रा हर स्थिति में फसल की पूरी पोषण आवश्यकता को पूरा करेगी, ऐसा मानना उचित नहीं है। यदि किसान chemical farming से organic या natural farming की तरफ जाना चाहता है तो परिवर्तन योजनाबद्ध तरीके से करना बेहतर है। मिट्टी की जांच, जैविक कार्बन, उपलब्ध पोषक तत्व, फसल चक्र और स्थानीय कृषि सलाह को ध्यान में रखना चाहिए।

पंचगव्य कितने दिन के अंतराल पर इस्तेमाल करें?

पंचगव्य के प्रयोग का अंतराल फसल के प्रकार और उसकी growth stage पर निर्भर करता है। अलग-अलग कृषि पद्धतियों में लगभग 10 से 15 दिन के अंतराल जैसी सिफारिशें देखने को मिल सकती हैं, लेकिन इसे हर फसल के लिए निश्चित नियम नहीं माना जाना चाहिए। किसान को पौधों की स्थिति देखकर निर्णय लेना चाहिए। जरूरत से ज्यादा बार स्प्रे करने से अतिरिक्त खर्च और श्रम बढ़ सकता है, जबकि आवश्यक नहीं कि उससे अतिरिक्त लाभ भी मिले। इसलिए खेती में पंचगव्य का उपयोग कब करें का सही जवाब फसल-विशिष्ट schedule और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ा है।

पंचगव्य इस्तेमाल करते समय होने वाली आम गलतियां

पंचगव्य का प्रयोग करते समय सबसे सामान्य गलती बिना मापे अधिक मात्रा डालना है। किसान कभी-कभी यह सोच सकते हैं कि जैविक उत्पाद ज्यादा डालने से नुकसान नहीं करेंगे, लेकिन किसी भी concentrated preparation का जरूरत से अधिक उपयोग पौधों के लिए उचित नहीं है। दूसरी गलती तेज धूप में छिड़काव करना है। तीसरी गलती पंचगव्य को बिना छाने spray pump या drip system में डालना है। इसके अलावा बिना जानकारी के pesticide, fungicide, micronutrient या दूसरे घोल के साथ पंचगव्य मिलाना भी समस्या पैदा कर सकता है। तैयार घोल को लंबे समय तक स्प्रे टैंक में छोड़ना भी ठीक नहीं है। जितना संभव हो, जरूरत के अनुसार घोल तैयार करके इस्तेमाल करें।

पहली बार पंचगव्य इस्तेमाल करने वाले किसान क्या करें?

यदि आप पहली बार Panchagavya Farming शुरू कर रहे हैं तो सीधे पूरे खेत में प्रयोग करने की बजाय छोटा परीक्षण करना बेहतर तरीका है। खेत के एक सीमित हिस्से में स्थानीय सिफारिश के अनुसार पंचगव्य इस्तेमाल करें और दूसरे समान हिस्से को comparison के लिए रखें। पौधों की ऊंचाई, पत्तियों की स्थिति, फूल और फल की संख्या, कीट-रोग की स्थिति तथा अंतिम उपज जैसी चीजों का रिकॉर्ड रखें। इससे किसान केवल अनुमान लगाने के बजाय अपने खेत के वास्तविक परिणाम के आधार पर तय कर सकता है कि पंचगव्य उसके लिए कितना उपयोगी है।

पंचगव्य से बेहतर परिणाम के लिए मिट्टी की जांच भी जरूरी

किसी भी जैविक input से अच्छे परिणाम पाने के लिए खेत की वास्तविक स्थिति समझना जरूरी है। इसके लिए Soil Testing काफी उपयोगी है। मिट्टी की जांच से pH, organic carbon और प्रमुख पोषक तत्वों की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। यदि मिट्टी में किसी विशेष पोषक तत्व की गंभीर कमी है तो उसका अलग प्रबंधन करना पड़ सकता है। पंचगव्य को संतुलित फसल प्रबंधन, जैविक खाद, crop rotation, उचित सिंचाई और जरूरत के अनुसार अन्य inputs के साथ जोड़कर देखना बेहतर है।

पंचगव्य से खेती में इन बातों का रखें ध्यान

पंचगव्य बनाते और इस्तेमाल करते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें। कच्चे गोबर और गोमूत्र में ऐसे सूक्ष्मजीव हो सकते हैं जो इंसानों के लिए नुकसानदेह हों, इसलिए मिश्रण तैयार करते समय हाथों की सुरक्षा रखें और काम के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं। पंचगव्य को पीने के पानी, भोजन और बच्चों या पशुओं की आसान पहुंच से दूर रखें।

खाने योग्य फसल पर किसी भी जैविक घोल के प्रयोग में food safety और harvest interval से जुड़ी स्थानीय कृषि सलाह का पालन करें। ताजा खाने वाली सब्जियों और फलों के मामले में साफ पानी से धुलाई और सुरक्षित handling भी महत्वपूर्ण है।

पंचगव्य से खेती (Panchagavya Farming) जैविक और प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक पद्धतियों में से एक है। गाय के गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी जैसे मूल घटकों से तैयार इस fermented mixture का इस्तेमाल foliar spray, soil application और कुछ प्रणालियों में planting material treatment के रूप में किया जाता है।

पत्तियों पर स्प्रे के लिए लगभग 3 प्रतिशत पंचगव्य घोल का प्रयोग कई प्रचलित सिफारिशों में मिलता है, लेकिन वास्तविक Panchagavya Spray Dosage फसल और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तय करना चाहिए। इसी तरह स्प्रे का अंतराल और फसल की अवस्था भी महत्वपूर्ण है।

सबसे अच्छा तरीका यह है कि किसान पहले छोटे क्षेत्र में परीक्षण करे, परिणामों का रिकॉर्ड रखे और उसके बाद उपयोग बढ़ाए। साथ ही मिट्टी की जांच, संतुलित पोषण, सिंचाई और कीट-रोग प्रबंधन को नजरअंदाज न करें।

इस तरह पंचगव्य को किसी एकमात्र समाधान की बजाय एक व्यापक Organic Farming और Natural Farming Management System के हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

Tags: Natural FarmingOrganic FarmingPanchagavya FertilizerPanchagavya for AgriculturePanchagavya for CropsPanchagavya PreparationPanchagavya SprayPanchagavya Uses in Farming
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