पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू), लुधियाना के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, गुरदासपुर द्वारा आयोजित किसान मेला उत्साह और व्यापक भागीदारी के साथ संपन्न हुआ। इस मेले में बड़ी संख्या में किसान, महिला किसान, ग्रामीण युवा, कृषि उद्यमी और विशेषज्ञ शामिल हुए। यह आयोजन किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद का प्रभावी मंच बना, जहां आधुनिक कृषि तकनीकों और टिकाऊ खेती के तरीकों पर विशेष ध्यान दिया गया।
मेले का मुख्य विषय “फसल विविधीकरण अपनाएं और प्राकृतिक संसाधनों को बचाएं” रहा। विशेषज्ञों ने किसानों को पारंपरिक गेहूं-धान चक्र से आगे बढ़कर दलहन, तिलहन, फल एवं सब्जियों की खेती अपनाने की सलाह दी। इसके साथ ही मिट्टी की सेहत और भूजल संरक्षण के लिए फसल चक्र, संतुलित उर्वरक उपयोग और कुशल जल प्रबंधन पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत ज्ञान अंजन पब्लिक स्कूल के छात्रों द्वारा शबद कीर्तन से हुई, जिससे माहौल आध्यात्मिक और सकारात्मक बना। इसके बाद पीएयू के विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्र और प्रश्नोत्तर कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार व्यावहारिक समाधान दिए।
मुख्य अतिथि लाल चंद कटारुचक, पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और वन मंत्री ने अपने संबोधन में पीएयू की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने पंजाब को कृषि उत्पादन में अग्रणी बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील की तथा सरकार की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।
मेले में उन्नत फसल किस्मों, आधुनिक कृषि यंत्रों, एकीकृत खेती प्रणालियों और मूल्य संवर्धित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों ने विशेष रूप से नई तकनीकों, बागवानी, मधुमक्खी पालन और फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी जानकारी में रुचि दिखाई।
पीएयू के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. एम.एस. भुल्लर ने बताया कि किसान मेले विश्वविद्यालय की विस्तार रणनीति का अहम हिस्सा हैं, जो किसानों तक सीधे वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने में मदद करते हैं। वहीं, अनुसंधान निदेशक डॉ. ए.एस. ढट्ट ने नई विकसित उच्च उत्पादक और जलवायु सहनशील किस्मों तथा लागत कम करने वाली तकनीकों की जानकारी दी।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डॉ. एस. एस. गोसल ने टिकाऊ और विविधीकृत कृषि की आवश्यकता पर जोर देते हुए किसानों को एकीकृत खेती, मूल्य संवर्धन और कृषि उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ड्राइवरलेस ट्रैक्टर और सेंसर आधारित सिंचाई जैसी नई तकनीकों का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसानों और विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। साथ ही गन्ना आयुक्त डॉ. अमरीक सिंह ने गन्ना फसल की देखभाल और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
अंत में पीएयू के गुरदासपुर केंद्र के निदेशक डॉ. हरपाल सिंह रंधावा ने सभी अतिथियों, किसानों और आयोजकों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम का समापन सामुदायिक लंच के साथ हुआ, जिसने आपसी सहयोग और एकजुटता का संदेश दिया। यह किसान मेला पंजाब में कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

