भारत में फार्मास्युटिकल और मेडिकल टेक्नोलॉजी यानी मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग ने फार्मा एवं मेडटेक में अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन (PRIP) योजना के तहत आवेदन आमंत्रित करने की दूसरी तिथि की घोषणा की है। ₹5,000 करोड़ के वित्तीय परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य देश में फार्मा और मेडटेक अनुसंधान एवं विकास के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
इस योजना के माध्यम से स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई और बड़ी कंपनियों को नई तकनीकों और उत्पादों को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने में सहायता देने की कोशिश की जा रही है। सरकार का जोर ऐसे अनुसंधान पर है, जिनसे देश में नई दवाओं, जटिल जेनेरिक दवाओं, बायोसिमिलर और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों का विकास हो सके।
औषधि विभाग के अनुसार, पीआरआईपी योजना नवाचार मूल्य श्रृंखला में परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। खास तौर पर शुरुआती स्तर पर मौजूद तकनीकों को उच्च प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर यानी Technology Readiness Level (TRL) तक पहुंचाने और विकसित तकनीकों के व्यावसायीकरण को गति देने पर ध्यान दिया गया है।
दो चरणों में मिलेगा वित्तीय सहयोग
पीआरआईपी योजना के तहत आवेदन को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें प्रारंभिक चरण (Early Stage) और बाद के चरण (Later Stage) की परियोजनाएं शामिल हैं। दोनों श्रेणियों के लिए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और वित्तीय सहायता की सीमा अलग-अलग रखी गई है।
प्रारंभिक चरण की परियोजनाओं के लिए ₹5 करोड़ तक सहायता
प्रारंभिक चरण की श्रेणी में ऐसी परियोजनाओं को शामिल किया गया है, जिनमें उत्पाद या तकनीक वर्तमान में TRL 1, 2 या 3 के स्तर पर है और उसे आगे बढ़ाकर TRL 5 तक या उससे नीचे के उच्च स्तर तक ले जाने की क्षमता है।
इस श्रेणी में मुख्य रूप से स्टार्टअप और एमएसएमई पात्र होंगे। इसका उद्देश्य उन तकनीकों को आगे बढ़ाना है, जो अभी अनुसंधान या शुरुआती विकास के स्तर पर हैं, लेकिन भविष्य में व्यावसायिक उत्पाद बनने की क्षमता रखती हैं।
प्रारंभिक चरण की परियोजनाओं के लिए आवेदन की प्रक्रिया दो चरणों में होगी। सबसे पहले आवेदक को एक संक्षिप्त अवधारणा नोट (Concept Note) प्रस्तुत करना होगा। इस अवधारणा नोट के आधार पर चयनित आवेदकों को आगे विस्तृत आवेदन प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।
खास बात यह है कि अवधारणा नोट केवल पात्र स्टार्टअप और एमएसएमई द्वारा ही नहीं, बल्कि इकोसिस्टम में काम करने वाले समर्थकों द्वारा भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं। ये समर्थक अपने नेटवर्क में मौजूद संभावनाशील परियोजनाओं की ओर से आवेदन कर सकते हैं।
इस श्रेणी में प्रत्येक परियोजना के लिए अधिकतम ₹5 करोड़ तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बाद के चरण की परियोजनाओं को ₹100 करोड़ तक मदद
पीआरआईपी योजना की दूसरी श्रेणी बाद के चरण यानी Later Stage Projects के लिए है। इसमें उद्योग, स्टार्टअप और एमएसएमई की ऐसी परियोजनाएं पात्र होंगी, जिनमें उत्पाद या तकनीक TRL 4, 5 या 6 के स्तर पर मौजूद है और उसे आगे उच्चतर स्तर तक ले जाने की क्षमता है।
इस श्रेणी का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि कई अनुसंधान परियोजनाएं प्रयोगशाला या प्रोटोटाइप स्तर पर सफल होने के बावजूद व्यावसायिक उत्पादन तक नहीं पहुंच पातीं। वित्तीय संसाधनों की कमी, परीक्षण, वैधता, नियामकीय आवश्यकताओं और उत्पादन विस्तार जैसी चुनौतियां अक्सर इनके सामने आती हैं।
पीआरआईपी योजना इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। बाद के चरण की परियोजनाओं के लिए प्रति परियोजना अधिकतम ₹100 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध होगी।
हालांकि यह सहायता परियोजना की कुल स्वीकृत लागत के अधिकतम 35 प्रतिशत तक सीमित होगी। परियोजना की बाकी लागत आवेदक को स्वयं सह-वित्तपोषित करनी होगी। इससे सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी के माध्यम से बड़ी अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार होगा।
सितंबर के मध्य से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया
औषधि विभाग के अनुसार, पीआरआईपी पोर्टल पर आवेदन जमा करने की प्रक्रिया सितंबर 2026 के मध्य तक शुरू हो जाएगी। इच्छुक स्टार्टअप, एमएसएमई और उद्योगों को आवेदन से पहले योजना के दिशानिर्देशों और पात्रता शर्तों को ध्यान से समझने की सलाह दी गई है।
आवेदन पत्र और संबंधित दिशानिर्देश पीआरआईपी के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध हैं। आवेदक योजना दस्तावेज, अवधारणा नोट के लिए मार्गदर्शन, विस्तृत आवेदन पत्र संबंधी दिशानिर्देश, माइलस्टोन डिस्क्रिप्टर कैटलॉग और FAQ जैसे संसाधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके अलावा आवेदन प्रक्रिया को समझने और विभिन्न चरणों में सहायता प्राप्त करने के लिए Application Support Toolkit भी उपलब्ध कराया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन आवेदकों ने पीआरआईपी के पहले चरण में किसी परियोजना को जमा किया था, वे उसी परियोजना को दोबारा जमा न करें। इससे आवेदन प्रक्रिया में दोहराव से बचने और नई परियोजनाओं को अवसर देने में मदद मिलेगी।
नई दवाओं के विकास पर विशेष जोर
पीआरआईपी योजना के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र नई औषधियों का विकास है। इसमें नई रासायनिक औषधियां और पदार्थ शामिल हैं। इसके अंतर्गत नई रासायनिक इकाइयां (NCE), नई जैविक इकाइयां (NBE) और पादप-आधारित औषधीय पदार्थों से संबंधित अनुसंधान को शामिल किया गया है।
नई दवाओं की खोज और विकास एक लंबी और महंगी प्रक्रिया है। अनुसंधान, प्रीक्लिनिकल अध्ययन, क्लिनिकल ट्रायल, सुरक्षा मूल्यांकन और नियामकीय स्वीकृति जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में घरेलू अनुसंधान क्षमताओं को वित्तीय और संस्थागत समर्थन देना भारत के फार्मा उद्योग को नई दिशा दे सकता है।
यह योजना भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप को नई दवा खोज के क्षेत्र में अधिक जोखिम लेने और उच्च तकनीक वाले अनुसंधान में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
जटिल जेनेरिक और बायोसिमिलर भी प्राथमिकता में
पीआरआईपी योजना के तहत जटिल जेनेरिक और बायोसिमिलर को भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा गया है।
भारत पहले से ही जेनेरिक दवाओं के उत्पादन और निर्यात में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लेकिन जटिल जेनेरिक दवाओं और बायोलॉजिकल उत्पादों के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए अत्यधिक तकनीकी क्षमता और निवेश की आवश्यकता होती है।
बायोसिमिलर ऐसे जैविक उत्पाद होते हैं, जो किसी पहले से स्वीकृत जैविक दवा के समान प्रभाव और गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के उद्देश्य से विकसित किए जाते हैं। इस क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा मिलने से भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
मेडटेक क्षेत्र में AI और रोबोटिक्स को बढ़ावा
योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नवीन चिकित्सा उपकरण हैं। इसके अंतर्गत ऐसे चिकित्सा उपकरण शामिल किए गए हैं जिन्हें पहले CDSCO द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है।
मेडटेक के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों को देखते हुए योजना में कई आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित चिकित्सा उपकरण प्रमुख हैं।
इसमें सॉफ्टवेयर विकास, Software as a Medical Device यानी SaMD और Software in Medical Device यानी SiMD से संबंधित तकनीकें भी शामिल हैं।
AI और मशीन लर्निंग आधारित उपकरण भविष्य में बीमारी की पहचान, स्क्रीनिंग, मरीज की निगरानी और उपचार संबंधी निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे उत्पादों के घरेलू विकास से भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की तकनीकी क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
जेनेटिक तकनीक और सटीक चिकित्सा पर फोकस
पीआरआईपी के प्राथमिकता क्षेत्रों में जेनेटिक तकनीक वाले चिकित्सा निदान और स्क्रीनिंग उपकरण भी शामिल हैं। आधुनिक चिकित्सा में जेनेटिक जानकारी का इस्तेमाल बीमारी के जोखिम की पहचान, निदान और व्यक्तिगत उपचार रणनीति विकसित करने में बढ़ रहा है।
इसके साथ ही नए इन-विट्रो डायग्नोस्टिक (IVD) चिकित्सा उपकरणों को भी प्राथमिकता दी गई है। ऐसे उपकरणों में बायोमार्कर का उपयोग करके सटीक चिकित्सा को सक्षम बनाने वाली तकनीकें शामिल हो सकती हैं।
इसका उद्देश्य ऐसी चिकित्सा तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करना है, जो मरीजों की जरूरतों के अनुसार अधिक सटीक और प्रभावी निदान एवं उपचार में मदद कर सकें।
रोबोटिक सर्जरी और टेलीमेडिसिन भी शामिल
योजना में सर्जिकल प्रक्रियाओं के लिए रोबोटिक चिकित्सा उपकरण और टेलीमेडिसिन सुविधाओं वाले चिकित्सा उपकरण भी शामिल किए गए हैं।
रोबोटिक चिकित्सा तकनीक दुनिया भर में सर्जरी के क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही है। इसी तरह टेलीमेडिसिन ने दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की संभावनाओं को बढ़ाया है।
भारत जैसे बड़े और विविध भौगोलिक क्षेत्र वाले देश में इन तकनीकों का विकास विशेष महत्व रखता है। घरेलू स्तर पर ऐसी तकनीकों के निर्माण से आयात पर निर्भरता कम करने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने में मदद मिल सकती है।
AI और मशीन लर्निंग से फार्मा रिसर्च को नई दिशा
पीआरआईपी योजना केवल पारंपरिक फार्मास्युटिकल अनुसंधान तक सीमित नहीं है। इसमें AI और मशीन लर्निंग जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
दवा खोज, डेटा विश्लेषण, रोग की पहचान, क्लिनिकल रिसर्च और चिकित्सा उपकरणों के विकास में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में फार्मा और डिजिटल तकनीक के बीच तालमेल भारत के अनुसंधान एवं नवाचार क्षेत्र को नई दिशा दे सकता है।
सरकार का लक्ष्य केवल उत्पाद विकसित करना नहीं, बल्कि देश में विश्व स्तरीय अनुसंधान अवसंरचना तैयार करना और योग्य एवं प्रशिक्षित छात्रों की प्रतिभा को विकसित करना भी है।
स्टार्टअप और उद्योग के बीच बढ़ेगा सहयोग
फार्मा और मेडटेक के क्षेत्र में स्टार्टअप महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन शुरुआती अनुसंधान से व्यावसायिक उत्पाद तक पहुंचने में उन्हें वित्त, विशेषज्ञता, परीक्षण सुविधाओं और नियामकीय मार्गदर्शन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
पीआरआईपी योजना के माध्यम से इन चुनौतियों को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के तहत उद्योग और स्टार्टअप को मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।
मेडटेक मित्र और पेटेंट मित्र जैसी पहल हितधारकों को तकनीकी, बौद्धिक संपदा और नवाचार से संबंधित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न संस्थानों, उद्योगों, स्टार्टअप और शोधकर्ताओं के बीच सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी।
भारत के फार्मा क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है योजना?
भारत को दुनिया के प्रमुख फार्मास्युटिकल विनिर्माण केंद्रों में गिना जाता है। भारतीय कंपनियां बड़ी मात्रा में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन और निर्यात करती हैं। हालांकि नई दवा खोज, अत्याधुनिक बायोलॉजिक्स, जटिल जेनेरिक और उच्च तकनीक वाले चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में अनुसंधान को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
ऐसे समय में ₹5,000 करोड़ का पीआरआईपी कार्यक्रम देश के अनुसंधान एवं विकास ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। इसका लाभ केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहकर स्टार्टअप और एमएसएमई तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
अगर परियोजनाएं सफलतापूर्वक प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचती हैं, तो इससे नए उत्पादों के साथ-साथ रोजगार, निवेश, तकनीकी क्षमता और निर्यात के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
आवेदन करने वाले संस्थानों के लिए बड़ा अवसर
पीआरआईपी योजना फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप, एमएसएमई और उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है। शुरुआती स्तर पर मौजूद तकनीकों को विकसित करने के लिए ₹5 करोड़ तक की सहायता और उन्नत परियोजनाओं के लिए ₹100 करोड़ तक की सहायता का प्रावधान अनुसंधान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
विशेष रूप से AI आधारित चिकित्सा उपकरण, रोबोटिक सर्जरी, टेलीमेडिसिन, जेनेटिक डायग्नोस्टिक्स, नए IVD, नई दवाएं, जटिल जेनेरिक और बायोसिमिलर जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली परियोजनाओं के लिए यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
कुल मिलाकर, ₹5,000 करोड़ की पीआरआईपी योजना भारत को फार्मा और मेडटेक अनुसंधान में आत्मनिर्भर बनाने, घरेलू नवाचार को बढ़ावा देने और उच्च तकनीक वाले स्वास्थ्य उत्पादों के विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सितंबर के मध्य से आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के साथ स्टार्टअप, एमएसएमई और उद्योगों के पास अपने अनुसंधान एवं नवाचार आधारित प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का एक बड़ा अवसर उपलब्ध होगा।

