प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित आईसीएआर पूसा परिसर में आयोजित एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन और संबोधन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रोफेसर एम.एस. स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें ऐसा दूरदर्शी वैज्ञानिक बताया, जिन्होंने विज्ञान को जनसेवा का माध्यम बनाया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “डॉ. स्वामीनाथन ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का आंदोलन शुरू किया। उनका दृष्टिकोण सिर्फ हरित क्रांति तक सीमित नहीं था, उन्होंने एवरग्रीन रेवोल्यूशन और बायो-हैपीनैस जैसे विचारों से कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा दी।” उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. स्वामीनाथन ने किसानों को एकरस खेती और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग के खतरों से आगाह किया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि डॉ. स्वामीनाथन की सलाह पर गुजरात में उनके कार्यकाल के दौरान सॉयल हेल्थ कार्ड योजना शुरू की गई, जिसे उन्होंने बहुत सराहा और मूल्यवान सुझाव भी दिए। उन्होंने याद किया कि उन्होंने 2017 में डॉ. स्वामीनाथन की किताब ‘द क्वेस्ट फॉर अ वर्ल्ड विदआउट हंगर’ का विमोचन किया था।
प्रधानमंत्री ने बायो-विलेज, कम्युनिटी सीड बैंक, और ओपर्च्युनिटी क्रॉप्स जैसे डॉ. स्वामीनाथन के विचारों की सराहना की। उन्होंने बताया कि डॉ. स्वामीनाथन ने मिलेट्स (श्री अन्न) को लेकर भी वर्षों पहले काम शुरू कर दिया था, जब लोग इसे नजरअंदाज कर रहे थे।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एम.एस. स्वामीनाथन अवॉर्ड फॉर फूड एंड पीस की घोषणा की, जिसे विकासशील देशों के उन व्यक्तियों को दिया जाएगा जिन्होंने खाद्य सुरक्षा और जलवायु न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। पहले पुरस्कार से नाइजीरिया के प्रोफेसर एडेनले को सम्मानित किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत आज विश्व में दुग्ध, दाल और जूट उत्पादन में पहले स्थान पर है, और चावल, गेहूं, कपास, फल व सब्जियों में दूसरे स्थान पर है। हमने हाल ही में खाद्यान्न उत्पादन में ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है।” उन्होंने किसानों की भलाई को राष्ट्र की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और कहा कि भारत कभी भी किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से समझौता नहीं करेगा।
उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, कृषि सिंचाई योजना, ई-नाम, एफपीओ, और किसान संपदा योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इससे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिली है। साथ ही उन्होंने पीएम धन धान्य योजना की जानकारी दी, जो उन 100 जिलों में लागू की जा रही है जहां कृषि विकास पीछे रह गया है।
प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि अब अगला लक्ष्य पोषण सुरक्षा होना चाहिए। उन्होंने प्राकृतिक खेती, क्लाइमेट रेसिलिएंट फसलें, सोलर आधारित माइक्रो इरिगेशन, और AI आधारित कृषि प्रबंधन प्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन देने और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता भी जताई।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा, “डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन ने हमें सिखाया कि कृषि सिर्फ फसल नहीं, बल्कि जीवन है। उनकी प्रेरणा हमें विज्ञान और समाज को जोड़ने के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन देती है।” उन्होंने छोटे किसानों, महिलाओं और आदिवासी समुदायों को सशक्त करने पर विशेष बल दिया।
सम्मेलन के दौरान एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. सौम्या स्वामीनाथन, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, और नीति आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद समेत कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का विषय “एवरग्रीन रेवोल्यूशन – द पाथवे टू बायो हैपीनैस” रखा गया है, जिसमें खाद्य और पोषण सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि, प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन और युवाओं व महिलाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर मंथन किया जाएगा।

