कृषि क्षेत्र में फसल सुरक्षा को मजबूत करने और फफूंदजनित रोगों से किसानों को बेहतर सुरक्षा देने की दिशा में धानुका एग्रीटेक ने भारतीय बाजार में नया फफूंदनाशी POLIN लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार, यह नई पीढ़ी का फफूंदनाशी है, जिसे खास तौर पर धान की फसल में होने वाले लीफ ब्लास्ट और नेक ब्लास्ट जैसे महत्वपूर्ण रोगों से बचाव के लिए विकसित किया गया है। POLIN को जापान की कंपनी निप्पॉन सोडा के साथ तकनीकी सहयोग के तहत भारतीय बाजार के लिए पेश किया गया है।
कंपनी का कहना है कि POLIN में फफूंद रोगों के नियंत्रण के लिए एक नया और अलग क्रियाविधि तंत्र यानी Mode of Action उपलब्ध है। यह इसे पारंपरिक फफूंदनाशियों से अलग बनाता है। नई क्रियाविधि का उद्देश्य फसलों को रोगों से प्रभावी सुरक्षा देने के साथ-साथ फफूंद में विकसित हो रहे प्रतिरोध की समस्या से निपटने में भी मदद करना है।
POLIN में नई क्रियाविधि का इस्तेमाल
धानुका एग्रीटेक द्वारा लॉन्च किया गया POLIN 20 प्रतिशत SC फॉर्मूलेशन में उपलब्ध है। इसमें DHODHI की नई क्रियाविधि का इस्तेमाल किया गया है, जिसे FRAC 52 के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। कंपनी के अनुसार, इस प्रकार की नई क्रियाविधि फफूंद रोगों के प्रबंधन में एक अलग विकल्प उपलब्ध कराती है।
फफूंदनाशियों के लगातार इस्तेमाल के कारण कई रोगजनकों में मौजूदा रसायनों के प्रति प्रतिरोध विकसित होना कृषि क्षेत्र की बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग क्रियाविधि वाले फफूंदनाशियों का उपयोग रोग प्रबंधन की रणनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। POLIN इसी दिशा में एक नया विकल्प उपलब्ध कराता है।
कंपनी के अनुसार, POLIN में ट्रांसलैमिनार और सिस्टमिक दोनों तरह की कार्रवाई की क्षमता है। ट्रांसलैमिनार कार्रवाई के कारण दवा पत्ती की सतह से उसके दूसरे हिस्से तक पहुंच सकती है, जबकि सिस्टमिक कार्रवाई पौधे के अंदर इसके प्रभाव को बनाए रखने में मदद करती है। इससे फसल को अपेक्षाकृत लंबे समय तक रोग से सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
लीफ ब्लास्ट और नेक ब्लास्ट से सुरक्षा
धान भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसलों में शामिल है और देश के लाखों किसान इसकी खेती करते हैं। धान की खेती में लीफ ब्लास्ट और नेक ब्लास्ट ऐसे रोग हैं, जो फसल की वृद्धि और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। विशेष रूप से अनुकूल मौसम परिस्थितियों में इन रोगों का प्रकोप किसानों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है।
लीफ ब्लास्ट में धान की पत्तियों पर विशिष्ट प्रकार के धब्बे दिखाई देते हैं। रोग का प्रकोप बढ़ने पर पौधे की पत्तियां प्रभावित होती हैं और प्रकाश संश्लेषण की क्षमता पर असर पड़ सकता है। वहीं, नेक ब्लास्ट में पौधे की बालियों के नीचे का हिस्सा प्रभावित होता है। गंभीर संक्रमण की स्थिति में दानों का विकास प्रभावित हो सकता है और उत्पादन में कमी आने का खतरा रहता है।
ऐसे में रोग की रोकथाम के लिए सही समय पर प्रभावी फफूंदनाशी का इस्तेमाल महत्वपूर्ण होता है। POLIN को कंपनी ने इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है। यह मुख्य रूप से निवारक यानी प्रिवेंटिव सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।
जापान की निप्पॉन सोडा के साथ तकनीकी सहयोग
POLIN का लॉन्च धानुका एग्रीटेक और जापान की निप्पॉन सोडा के बीच तकनीकी सहयोग का परिणाम है। निप्पॉन सोडा कृषि रसायन क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए जानी जाती है। इस सहयोग के माध्यम से धानुका एग्रीटेक ने एक नई रासायनिक श्रेणी और नई क्रियाविधि वाले उत्पाद को भारतीय कृषि बाजार में पेश किया है।
इस साझेदारी को भारतीय फसल सुरक्षा बाजार में नई तकनीक लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। धानुका एग्रीटेक का उद्देश्य किसानों को ऐसे उत्पाद उपलब्ध कराना है, जो बदलती फसल सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप हों।
कंपनी के अनुसार, निप्पॉन सोडा की अनुसंधान क्षमता और धानुका एग्रीटेक के भारतीय कृषि बाजार में अनुभव को एक साथ लाकर POLIN को भारतीय किसानों के लिए विकसित किया गया है।
फफूंदनाशियों में प्रतिरोध की चुनौती
कृषि में फफूंदजनित रोगों के प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रसायनों के प्रति रोगजनकों का प्रतिरोध विकसित होना है। जब एक ही क्रियाविधि वाले फफूंदनाशियों का बार-बार और लगातार इस्तेमाल किया जाता है, तो कुछ रोगजनकों में उस रसायन के प्रति सहनशीलता विकसित हो सकती है। इसके कारण समय के साथ उत्पाद की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
इसी वजह से फसल सुरक्षा विशेषज्ञ अलग-अलग Mode of Action वाले फफूंदनाशियों के इस्तेमाल और उचित रोटेशन पर जोर देते हैं। नई क्रियाविधि वाले उत्पाद इस रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
POLIN में इस्तेमाल की गई DHODHI क्रियाविधि इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। FRAC 52 के अंतर्गत आने वाली यह नई क्रियाविधि किसानों को फफूंद रोग प्रबंधन के लिए एक अलग विकल्प उपलब्ध कराती है। हालांकि किसी भी फफूंदनाशी के प्रभावी और टिकाऊ उपयोग के लिए लेबल पर दिए गए निर्देशों तथा अनुशंसित उपयोग पद्धति का पालन जरूरी है।
भारतीय बाजार पर धानुका का फोकस
धानुका एग्रीटेक ने POLIN को फिलहाल भारतीय घरेलू बाजार के लिए लॉन्च किया है। यह कंपनी की घरेलू फसल सुरक्षा उत्पाद श्रृंखला को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। कृषि क्षेत्र में नई तकनीक आधारित फसल सुरक्षा उत्पादों की मांग बढ़ रही है और कंपनियां किसानों के लिए अधिक प्रभावी समाधान विकसित करने पर ध्यान दे रही हैं।
भारत में धान की खेती का बड़ा क्षेत्र होने के कारण इस फसल में रोग प्रबंधन के लिए नए विकल्पों की जरूरत बनी रहती है। खासकर ऐसे उत्पाद, जो अलग क्रियाविधि के साथ उपलब्ध हों और प्रतिरोध प्रबंधन की रणनीति में शामिल किए जा सकें, किसानों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
किसानों के लिए क्या मायने रखता है नया उत्पाद
POLIN का लॉन्च किसानों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह धान में लीफ और नेक ब्लास्ट के प्रबंधन के लिए एक नई क्रियाविधि उपलब्ध कराता है। ट्रांसलैमिनार और सिस्टमिक कार्रवाई के कारण यह पौधे को व्यापक सुरक्षा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
हालांकि किसानों को किसी भी फफूंदनाशी का इस्तेमाल केवल रोग की पहचान, फसल की अवस्था और स्थानीय कृषि सलाह के आधार पर करना चाहिए। अनुशंसित मात्रा से अधिक या कम मात्रा में दवा का इस्तेमाल करने के बजाय उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन करना जरूरी है।
फफूंद रोगों के टिकाऊ प्रबंधन के लिए रासायनिक नियंत्रण के साथ खेत की निगरानी, उचित कृषि पद्धतियां और अलग-अलग क्रियाविधि वाले उत्पादों का वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल महत्वपूर्ण है।
फसल सुरक्षा क्षेत्र में नई दिशा
धानुका एग्रीटेक और निप्पॉन सोडा के सहयोग से POLIN का लॉन्च भारतीय कृषि रसायन क्षेत्र में नई तकनीक आधारित फसल सुरक्षा समाधानों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। नई क्रियाविधि वाले फफूंदनाशियों का विकास किसानों के सामने मौजूद रोग प्रबंधन और प्रतिरोध जैसी चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कंपनी का दावा है कि POLIN अपनी नई DHODHI क्रियाविधि, FRAC 52 वर्गीकरण तथा ट्रांसलैमिनार और सिस्टमिक कार्रवाई के माध्यम से धान की फसल में लीफ और नेक ब्लास्ट के खिलाफ प्रभावी निवारक सुरक्षा प्रदान करेगा। भारतीय बाजार में इसके लॉन्च के साथ किसानों को फसल सुरक्षा के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध हुआ है। आने वाले समय में इसका वास्तविक प्रभाव इसके व्यापक कृषि उपयोग, रोग प्रबंधन रणनीतियों और किसानों द्वारा वैज्ञानिक तरीके से किए जाने वाले इस्तेमाल पर निर्भर करेगा।

