उत्तर प्रदेश में 30 मार्च 2026 से शुरू हुई गेहूं खरीद प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ गई है। खरीद व्यवस्था में कथित अव्यवस्थाओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने नाराजगी जताई है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर खरीद केंद्रों की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई है और तत्काल सुधार की मांग की है।
टिकैत ने अपने पत्र में कहा कि प्रदेश में इस समय गेहूं की कटाई तेजी से चल रही है, लेकिन किसान अपनी उपज बेचने के लिए परेशान हैं। सरकार ने भले ही 30 मार्च से खरीद शुरू करने का ऐलान किया था, लेकिन 15 अप्रैल तक भी कई खरीद केंद्र पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाए हैं। इससे किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और उनकी लागत व मेहनत पर असर पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई जिलों में अभी तक क्रय केंद्र शुरू ही नहीं हुए हैं, जबकि जहां खरीद शुरू हुई भी है, वहां पर्याप्त मजदूरों की कमी है। इसके अलावा बारदाने (खाली बोरे) की उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है, जिससे खरीद प्रक्रिया बाधित हो रही है। टिकैत का कहना है कि इन खामियों के चलते किसान अपनी फसल बेचने के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
टिकैत ने यह भी कहा कि मौजूदा अव्यवस्था का सीधा फायदा बिचौलियों को मिल रहा है। किसान मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज बेच रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इसका असर न केवल सरकारी खरीद लक्ष्य पर पड़ेगा, बल्कि किसानों की हालत और खराब हो सकती है।
इस पूरे मामले पर टिकैत ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी खरीद केंद्रों का जमीनी स्तर पर निरीक्षण कराया जाए और जहां भी कमी है, वहां जरूरी संसाधन तुरंत उपलब्ध कराए जाएं। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो गेहूं खरीद अभियान पटरी से उतर सकता है।
वहीं, दूसरी ओर राज्य सरकार का दावा है कि इस बार गेहूं खरीद को पूरी तरह पारदर्शी और किसान हितैषी बनाया गया है। सरकार ने टोकन सिस्टम लागू किया है, जिससे किसानों को तय समय पर बुलाया जा सके और भीड़ से बचा जा सके। साथ ही हर केंद्र पर तौल, भंडारण और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
सरकार ने इस सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले साल के मुकाबले अधिक है। इसके अलावा किसानों को गेहूं उतारने, छानने और साफ करने के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त देने का भी प्रावधान किया गया है। भुगतान को लेकर सरकार ने कहा है कि किसानों के खाते में डीबीटी के जरिए 48 घंटे के भीतर पैसा भेजा जाएगा।
हालांकि जमीनी हकीकत और सरकारी दावों के बीच का अंतर अब किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई ही तय करेगी कि किसानों को राहत मिलती है या उनकी परेशानियां और बढ़ती हैं।

